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रिचार्ज के बाद भी अंधेरे में डूबे घर, मुजाहिदपुर बिजली दफ्तर में उपभोक्ताओं का जोरदार हंगामा; अधिकारी मौन

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Bhagalpur News: बिहार में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर आम जनता की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला सिल्क सिटी भागलपुर के मुजाहिदपुर बिजली कार्यालय से सामने आया है, जहां बड़ी संख्या में पहुंचे उपभोक्ताओं ने विभाग की लापरवाही के खिलाफ जमकर हंगामा और नारेबाजी की। उपभोक्ताओं का सीधा आरोप है कि उनके प्रीपेड मीटर में पर्याप्त बैलेंस होने और रिचार्ज कराने के बाद भी उनके घरों की बिजली नहीं आई, जिससे इस भीषण गर्मी में लोग बेहाल रहे।

​रिचार्ज के घंटे बाद भी नहीं आई बिजली, बढ़ा आक्रोश

​जानकारी के अनुसार, मुजाहिदपुर सब-डिवीजन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न इलाकों के उपभोक्ता सुबह से ही परेशान थे। कई लोगों के मीटर का बैलेंस खत्म होने के बाद बिजली कट गई थी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत ऑनलाइन या काउंटर के माध्यम से रिचार्ज कराया। नियमानुसार रिचार्ज के कुछ ही मिनटों के भीतर बिजली बहाल हो जानी चाहिए, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी घरों की बत्ती गुल रही।

​जब उमस और गर्मी से लोगों का जीना मुहाल हो गया, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष उपभोक्ता एकजुट होकर सीधे मुजाहिदपुर बिजली कार्यालय पहुंच गए।

​बिजली कार्यालय में हुआ भारी हंगामा, व्यवस्था पर सवाल

​कार्यालय पहुंचते ही नाराज उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। दफ्तर के अंदर और बाहर उपभोक्ताओं ने जमकर हंगामा किया। लोगों का कहना था कि जब सरकार और विभाग डिजिटल मीटर के नाम पर एडवांस में पैसे वसूल रहे हैं, तो तकनीकी खामियों को तुरंत ठीक क्यों नहीं किया जाता?

​एक उपभोक्ता ने आक्रोश जताते हुए कहा, “स्मार्ट मीटर के नाम पर सिर्फ जनता को प्रताड़ित किया जा रहा है। जेब से पैसे भी कट गए और परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर है। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है और पानी के लिए लोग तरस रहे हैं।”

​सवालों से बचते रहे अधिकारी, नहीं आया कोई बयान

​इस पूरे हंगामे और उपभोक्ताओं के आक्रोश के बीच बिजली विभाग की संवेदनहीनता भी साफ देखने को मिली। जब मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों और उपभोक्ताओं ने इस तकनीकी गड़बड़ी और लापरवाही पर विभाग के सहायक अभियंता (AE) या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से बात करने की कोशिश की, तो वे कुछ भी बोलने से साफ बचते नजर आए।

​दफ्तर के कर्मचारी कैमरे के सामने आने से कतराते रहे। फिलहाल, इस तकनीकी गड़बड़ी या सर्वर डाउन होने की समस्या को लेकर बिजली विभाग की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं में नाराजगी और ज्यादा बढ़ गई है।

​जल्द समाधान न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी

​हंगामा कर रहे स्थानीय लोगों और उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस तकनीकी समस्या का स्थायी समाधान जल्द से जल्द नहीं किया गया और रिचार्ज के बाद बिजली तुरंत चालू करने की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हुई, तो वे मुजाहिदपुर बिजली कार्यालय का घेराव कर बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

10 लाख की रंगदारी न देने पर घर में घुसकर बमबारी और फायरिंग, बदमाशों ने लूटे लाखों के जेवरात; SSP दफ्तर पहुंची बेबस महिला

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले में बेखौफ अपराधियों का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला जगदीशपुर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां रंगदारी की मोटी रकम न मिलने पर अपराधियों ने एक घर को निशाना बनाते हुए जमकर बमबारी, फायरिंग और मारपीट की। इस खौफनाक वारदात के बाद स्थानीय पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने से परेशान पीड़िता ने अब भागलपुर एसएसपी (SSP) के दफ्तर पहुंचकर न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।

​10 लाख रुपये की मांगी गई थी रंगदारी

​जानकारी के अनुसार, जगदीशपुर थाना क्षेत्र के मकबरा (पुरैनी) की रहने वाली पीड़िता बीबी रही (पति- मोहम्मद शमशाद) ने एसएसपी को दिए अपने लिखित आवेदन में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता के मुताबिक, घटना से करीब चार दिन पहले इलाके के मुख्य आरोपी मोहम्मद हिरु, मोहम्मद मिंटू और मोहम्मद खालिद ने उनके परिवार से 10 लाख रुपये की भारी-भरकम रंगदारी मांगी थी।

​इस धमकी के बाद पीड़ित परिवार डरा हुआ था और आपस में चर्चा कर पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने की तैयारी ही कर रहा था कि अपराधियों ने इस खौफनाक साजिश को अंजाम दे डाला।

​हथियारों से लैस होकर पहुंचे 20-25 उपद्रवी, मचाया कोहराम

​पीड़िता ने आवेदन में आरोप लगाया है कि मोहम्मद हिरु, मोहम्मद मिंटू अंसारी, मोहम्मद खालिद अंसारी, मोहम्मद आलम, मोहम्मद अलतमस, मोहम्मद अरशद उर्फ छोटू, जकाउल्ला, मोहम्मद फैयाज, सज्जाद, दानिश, मोहम्मद मजहर, मोहम्मद सरफराज समेत करीब 20 से 25 अज्ञात लोग अचानक उनके घर पर आ धमके।

​ये सभी लोग हाथों में हॉकी स्टिक, लोहे की रॉड, पिस्तौल और जिंदा बम लिए हुए थे। घर पर पहुंचते ही आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी और दहशत फैलाने के लिए ताबड़तोड़ बमबारी और फायरिंग की।

​महिलाओं से बदसलूकी और लाखों की लूट

​दहशत का माहौल बनाने के बाद सभी हमलावर जबरन घर के अंदर घुस गए और परिवार के सदस्यों के साथ बेरहमी से मारपीट करने लगे। बीच-बचाव करने आई घर की महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार और बदसलूकी की गई।

​पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान हमलावरों ने घर के चप्पे-चप्पे को खंगाला और वहां रखे लगभग 7 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात, 90 हजार रुपये नकद और कई कीमती सामान लूटकर फरार हो गए। जाते-जाते अपराधियों ने विरोध करने पर गोली मारने और केस दर्ज कराने पर पूरे परिवार को जान से मारने की खुली धमकी भी दी।

​स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर खड़े हुए गंभीर सवाल

​इस पूरी घटना में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी वारदात होने के तुरंत बाद पीड़िता द्वारा जगदीशपुर थाना में लिखित आवेदन दिया गया था। लेकिन, पीड़िता का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया और अब तक अपराधियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस की इसी सुस्ती के कारण आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार को लगातार डरा-धमका रहे हैं, जिससे पूरा परिवार खौफ के माहौल में जीने को मजबूर है।

​एसएसपी से लगाई गुहार, सुरक्षा की मांग

स्थानीय पुलिस से निराश होकर अब पीड़िता ने एसएसपी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि सभी नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाए और दहशत में जी रहे पीड़ित परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

भागलपुर में थाने के सामने बिल्डर की बेरहमी से हत्या, दफ्तर में खून से लथपथ मिली लाश

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Bhagalpur News: भागलपुर से एक बेहद सनसनीखेज और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली खबर सामने आई है। शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके तिलकामांझी थाना के ठीक सामने एक बिल्डर की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। मृतक की पहचान नामचीन रियल एस्टेट कारोबारी बजरंगी कुमार के रूप में हुई है। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे इलाके के व्यापारियों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

​दफ्तर का ताला टूटा तो सामने आया खौफनाक मंजर

​जानकारी के अनुसार, बिल्डर बजरंगी कुमार रोज की तरह कल दिन में अपने कार्यालय गए थे। जब वे देर रात तक घर नहीं लौटे, तो परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने अपने स्तर पर काफी खोजबीन की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। आज सुबह भी जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो थक-हारकर परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।

​सूचना मिलते ही जब पुलिस की टीम तिलकामांझी थाना के ठीक सामने स्थित उनके कार्यालय पहुंची, तो बाहर से ताला लटका हुआ था। पुलिस ने जब संदेह के आधार पर ताला तोड़ा और अंदर प्रवेश किया, तो सबके होश उड़ गए। दफ्तर के अंदर बजरंगी कुमार का शव खून से लथपथ हालत में पड़ा हुआ था।

​फोन पर बहस और रंजिश का शक

​बजरंगी कुमार लंबे समय से भागलपुर और आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट का बड़ा कारोबार कर रहे थे। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने पुलिस को एक अहम सुराग देते हुए बताया कि पिछले कुछ दिनों से बजरंगी कुमार काफी तनाव में दिख रहे थे। वे फोन पर किसी से बहुत तीखी बहस करते हुए भी देखे गए थे। परिजनों को अंदेशा है कि इसी कारोबारी विवाद या किसी पुरानी रंजिश के चलते इस खौफनाक हत्याकांड को अंजाम दिया गया है।

​डॉग स्क्वायड और FSL टीम मौके पर, छानबीन तेज

​थाने के ठीक सामने हुई इस बड़ी वारदात की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सिटी एसपी अतुलेश झा समेत पुलिस के कई वरीय अधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए डॉग स्क्वायड (Dog Squad) और FSL (Forensic Science Laboratory) की टीम को बुला लिया है। घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

​क्या बोले सिटी एसपी?

“मृतक के शरीर पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं, जिससे साफ है कि उनकी बेरहमी से हत्या की गई है। पुलिस हर एंगल (कारोबारी रंजिश, आपसी विवाद और कॉल डिटेल्स) पर गहराई से जांच कर रही है। अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम बनाकर छापेमारी शुरू कर दी गई है। जल्द ही इस पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।”

— अतुलेश झा, सिटी एसपी, भागलपुर

 

​व्यापारियों में भारी आक्रोश, सुरक्षा पर उठे सवाल

​थाने से चंद कदमों की दूरी पर, ठीक सामने स्थित बिल्डिंग में इतनी बड़ी वारदात हो जाना पुलिस की गश्त और सुरक्षा दावों पर बड़े सवाल खड़े करता है। इस घटना के बाद स्थानीय व्यवसायियों और लोगों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों की मांग है कि शहर के बीचों-बीच कानून को ठेंगा दिखाने वाले हत्यारों को अविलंब गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाए।

सौर एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनेगा बिहार, उद्योगों को मिलेगी नई रफ्तार: ऊर्जा सचिव

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Patna News: बिहार को स्वच्छ, हरित और सतत ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति देने और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऊर्जा विभाग (बिहार सरकार), ब्रेडा (BREDA) और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय “सोलर एंड सस्टेनेबल एनर्जी समिट एवं प्रदर्शनी” का भव्य आयोजन किया गया।

​समिट के पहले दिन आयोजित तकनीकी सत्र में देश भर के विशेषज्ञों ने उद्योगों को हरित ऊर्जा से सशक्त बनाने और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया।

​एक दशक में 1,800 MW से 9,000 MW तक पहुंची बिजली की मांग

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, ऊर्जा सचिव एवं अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (BSPHCL) अजय यादव (IAS) ने राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में हुए क्रांतिकारी बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि:

    • ​रिकॉर्ड तोड़ मांग: पिछले कुछ वर्षों में बिहार में बिजली की पीक डिमांड में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। एक दशक पहले जो मांग महज 1,800 मेगावाट थी, वह आज बढ़कर लगभग 9,000 मेगावाट तक पहुंच गई है।
    • ​उपभोक्ताओं में नंबर 2: आज देश में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या के मामले में बिहार दूसरे स्थान पर काबिज हो चुका है।
    • ​इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण: भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। ग्रिड सबस्टेशन, पावर सबस्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है।

​“बिहार में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हम जल्द ही ‘ग्रीन ओपन एक्सेस पॉलिसी’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे उद्योगों को और अधिक बल मिलेगा।”

— अजय यादव, ऊर्जा सचिव

 

​  ग्रीन हाइड्रोजन और पंप स्टोरेज पर तेजी से काम

​राज्य सरकार बिहार को पूरी तरह ‘ग्रीन’ बनाने के लिए नई नीतियों को लागू कर रही है:

      1. ​रिन्यूएबल एनर्जी व पंप स्टोरेज पॉलिसी: पिछले वर्ष लागू की गई इन नीतियों के शानदार परिणाम मिल रहे हैं।
      2. ​ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी: वर्तमान में इस महत्वाकांक्षी पॉलिसी पर तेजी से कार्य चल रहा है।
      3. ​केंद्रीय योजनाओं का लाभ: ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना’ और ‘प्रधानमंत्री-कुसुम योजना’ के तहत विभिन्न परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है। इसके अलावा न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट पर भी काम जारी है।

 15 वर्षों में 13 गुना बढ़ी मांग, बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हुआ बिहार

​ब्रेडा एवं नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) के प्रबंध निदेशक  राहुल कुमार (IAS) ने समिट को संबोधित करते हुए बिहार की इस ऐतिहासिक सफलता के आंकड़े साझा किए:

      • ​सप्लाई का नया रिकॉर्ड: NFMS के आंकड़ों के मुताबिक, आज ग्रामीण बिहार में प्रतिदिन 22 घंटे से अधिक और शहरी क्षेत्रों में 23 घंटे से अधिक बिजली की निर्बाध आपूर्ति की जा रही है।
      • ​आत्मनिर्भर बिहार: बिहार अब बिजली उपलब्धता के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुका है और देश के चुनिंदा राज्यों में शामिल है।
      • ​उपभोक्ता आधार: ऊर्जा विभाग के कुल उपभोक्ता आधार में 89 से 90 प्रतिशत हिस्सेदारी घरेलू उपभोक्ताओं की है।
      • ​NBPDCL की बड़ी कामयाबी: भारत सरकार द्वारा जारी डिस्कॉम उपभोक्ता सेवा रेटिंग में NBPDCL ने पिछले वर्ष देश के शीर्ष पांच डिस्कॉम में स्थान प्राप्त कर बिहार का मान बढ़ाया है।

​ “Sustainable Data Centre Policy” रिपोर्ट का विमोचन

​समिट के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण रिपोर्ट “Sustainable Data Centre Policy for Bihar” का भी विमोचन किया गया। इस विशेष रिपोर्ट में बिहार में डेटा सेंटर क्षेत्र के सतत, आधुनिक और हरित विकास की संभावनाओं के साथ-साथ उससे जुड़े नीतिगत और तकनीकी पहलुओं का विस्तृत खाका पेश किया गया है। कजरा सोलर परियोजना और नई स्टोरेज तकनीकों के सहारे बिहार आने वाले समय में ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) के क्षेत्र में भी बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करने जा रहा है।

भागलपुर सदर अस्पताल में स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी छलांग: शुरू हुआ 4 बेड का हाईटेक ICU वार्ड, अब गंभीर मरीजों को मिलेगा 24 घंटे जीवनदान!

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Bhagalpur News: भागलपुर के मॉडल सदर अस्पताल को स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में एक बड़ी और ऐतिहासिक सौगात मिली है। अस्पताल में आने वाले गंभीर रूप से बीमार मरीजों के बेहतर इलाज के लिए 4 बेड का अत्याधुनिक आईसीयू (ICU) वार्ड पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है और अब इसकी सेवा भी विधिवत शुरू कर दी गई है।

​इस नए आईसीयू वार्ड का भव्य उद्घाटन भागलपुर के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार, सदर अस्पताल प्रभारी डॉ. राजू सहित कई वरिष्ठ चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की गरिमामयी मौजूदगी में फीता काटकर किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नया बल मिला है।

​ अब नहीं काटना पड़ेगा मायागंज का चक्कर: सिविल सर्जन

​उद्घाटन के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने इस पहल को सदर अस्पताल के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि:

  • ​इससे पहले सदर अस्पताल में जब भी कोई क्रिटिकल (गंभीर) मरीज आता था, तो यहाँ पर्याप्त जीवन रक्षक उपकरण और आईसीयू न होने के कारण उसे मजबूरी में जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल) रेफर करना पड़ता था।
  • ​रेफर होने की इस प्रक्रिया में कई बार मरीजों का कीमती समय बर्बाद हो जाता था और उनकी जान पर बन आती थी।
  • ​लेकिन अब, इस 4 बेड के आईसीयू वार्ड के चालू हो जाने से गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को तत्काल सदर अस्पताल परिसर में ही विश्वस्तरीय आपातकालीन इलाज की सुविधा मिल सकेगी।

​ 24 घंटे डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की रहेगी तैनाती

​मरीजों की सुरक्षा और समय पर इलाज को सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। सदर अस्पताल प्रभारी डॉ. राजू ने बताया कि नए आईसीयू वार्ड की मॉनिटरिंग के लिए 24 घंटे डॉक्टरों और विशेष रूप से प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों (नर्सिंग स्टाफ) की रोस्टर के अनुसार तैनाती कर दी गई है। आपातकालीन स्थिति या आधी रात को भी मरीज के आने पर उसे तुरंत लाइफ-सपोर्ट और क्रिटिकल केयर मिल सकेगा।

​ आम जनता और गरीब मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

​मॉडल सदर अस्पताल में इस सुविधा के शुरू होने से भागलपुर और इसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें निजी अस्पतालों की महंगी आईसीयू फीस देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे सदर अस्पताल पर आम जनता का भरोसा और ज्यादा मजबूत होगा।

मायागंज अस्पताल में ‘डॉक्टर का खास’ बनकर ठगी करने वाला जालसाज रंगे हाथ गिरफ्तार, पब्लिक ने सिखाया सबक!

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Bhagalpur News: जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अस्पताल के इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर (OT) के पास डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के नाम पर मरीजों के लाचार परिजनों से अवैध वसूली करने वाले एक शातिर ठग को रंगे हाथ दबोच लिया गया। पकड़े जाने के बाद गुस्साए लोगों और कर्मचारियों ने उसकी जमकर धुनाई कर दी। आरोपी की पहचान मो. जफर के रूप में हुई है, जिसे सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची बरारी थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

​ ‘दवा और स्टील प्लेट’ के नाम पर रोज की थी हजारों की कमाई

​बताया जा रहा है कि आरोपी मो. जफर लंबे समय से मायागंज अस्पताल परिसर में सक्रिय था। वह बेहद शातिराना अंदाज में खुद को अस्पताल का कोई बड़ा रसूखदार या डॉक्टरों का करीबी बताकर दूर-दराज से आए गरीब मरीजों के परिजनों को अपने झांसे में लेता था।

​वह मुख्य रूप से इन चीजों का झांसा देकर अवैध वसूली करता था:

  • ​ऑपरेशन के लिए जरूरी महंगी दवाइयां और इंजेक्शन।
  • ​हड्डी के ऑपरेशन (ऑर्थोपेडिक सर्जरी) में इस्तेमाल होने वाली महंगी स्टील प्लेट और रॉड।
  • ​डॉक्टरों से जल्दी काम कराने और जल्द ऑपरेशन की तारीख दिलाने का झांसा।

​परिजनों को डराकर और डॉक्टरों का डर दिखाकर वह प्रतिदिन कई लोगों से मोटी रकम वसूलता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने अलग-अलग मरीजों के तीमारदारों से 700 रुपये, 1,500 रुपये और 4,000 रुपये जैसी कई रकमें अवैध रूप से ऐंठी थीं।

​ अस्पताल कर्मी से विवाद के बाद खुली पोल, बिछाया गया जाल

​मो. जफर की इस करतूत का भंडाफोड़ तब हुआ जब अस्पताल के ही एक कर्मचारी से किसी बात को लेकर उसका विवाद हो गया। इस विवाद के बाद अस्पताल प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों को उस पर शक हुआ और उसकी गतिविधियों पर गुप्त रूप से नजर रखी जाने लगी।

​बुधवार को जब वह इमरजेंसी वार्ड के पास फिर से एक बेबस मरीज के परिजन से रुपये ऐंठ रहा था, तभी पहले से मुस्तैद लोगों और अस्पताल कर्मियों ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया।

​ डॉक्टर की पूछताछ में छूटे पसीने, फिर गिड़गिड़ाने लगा ठग

​रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद आरोपी मो. जफर तुरंत पैंतरा बदलने लगा और हाथ जोड़कर रोने-गिड़गिड़ाने लगा। उसने माफी मांगते हुए कहा कि भविष्य में वह कभी अस्पताल में नहीं दिखेगा।

​जब अस्पताल में तैनात एक हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic Doctor) ने उससे तकनीकी और कड़े सवाल पूछे, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। उसने सफाई देने की कोशिश की कि, “मरीज के परिजनों ने ही मुझे दवा लाने के लिए पैसे दिए थे और मैंने सिर्फ दवा लाकर दी थी।” हालांकि, मौके पर मौजूद पीड़ित परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने उसकी इस झूठी दलील को सरेआम खारिज कर दिया।

​ बरारी थाना पुलिस खंगाल रही है ‘अस्पताल सिंडिकेट’ का कनेक्शन

​मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत बरारी थाना पुलिस को सूचित किया गया। मौके पर पहुंचे ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारी ने बताया कि युवक को हिरासत में ले लिया गया है और उसे थाने ले जाकर कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि:

  1. ​आरोपी मो. जफर कब से अस्पताल में इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहा था?
  2. ​क्या इस ठगी के खेल में अस्पताल का कोई अंदरूनी कर्मचारी या गार्ड भी शामिल है?
  3. ​उसने अब तक कितने गरीब मरीजों को अपना शिकार बनाया है?

श्रावणी मेले में लापरवाही पर डीएम सख्त, हाईमास्ट लाइट को लेकर बिजली विभाग को दी कड़ी चेतावनी!

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Bhagalpur News: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की तैयारियों को लेकर भागलपुर की जिलाधिकारी (DM) अलंकृता पांडेय पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही हैं। सुल्तानगंज में मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचीं जिलाधिकारी ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़े मामले में बेहद संवेदनशील और सख्त रुख अख्तियार किया। अजगैबीनाथ मंदिर के पास निरीक्षण के दौरान जब उन्हें बिजली विभाग की एक बड़ी लापरवाही दिखी, तो उन्होंने मौके पर मौजूद बिजली विभाग के कार्यपालक पदाधिकारी की जमकर क्लास लगा दी।

​ रेलिंग से सटी हाईमास्ट लाइट, हादसे को दे रही थी न्योता

​दरअसल, जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय प्रशासनिक अधिकारियों की पूरी टीम के साथ सुल्तानगंज के विभिन्न घाटों और मंदिर परिसरों का निरीक्षण कर रही थीं। इसी दौरान उनकी नजर अजगैबीनाथ मंदिर के पास लगी एक विशाल हाईमास्ट लाइट पर पड़ी।

  • ​लापरवाही क्या थी? यह हाईमास्ट लाइट कांवरियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बनाई गई लोहे की रेलिंग से बिल्कुल सटकर खड़ी थी।
  • ​खतरा क्या था? सावन के महीने में लगातार बारिश और नमी के कारण लोहे की रेलिंग में करंट उतरने का भारी खतरा बना रहता है। इससे लाखों श्रद्धालुओं और कांवरियों की जान दांव पर लग सकती थी।

​ “इधर-उधर घूमने से काम नहीं चलेगा…” — बिजली अधिकारी को लगी फटकार

​सुरक्षा के इस गंभीर खतरे को देखते ही जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया। उन्होंने बिजली विभाग के कार्यपालक पदाधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि भले ही यह हाईमास्ट लाइट नगर परिषद द्वारा लगाई गई हो, लेकिन इसकी विद्युत सुरक्षा और तकनीकी जांच सुनिश्चित करना पूरी तरह बिजली विभाग की जिम्मेदारी है।

​“इधर-उधर घूमने से काम नहीं चलेगा। विद्युत आपूर्ति और बिजली से जुड़े तकनीकी मामलों की सबसे ज्यादा जानकारी आपके विभाग के पास होती है। श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी या खतरा नहीं होना चाहिए!”

— अलंकृता पांडेय, जिलाधिकारी (भागलपुर)

 

​ डीएम का ऑन-द-स्पॉट कड़ा निर्देश

​जिलाधिकारी ने लापरवाही को तुरंत दुरुस्त करने के लिए ऑन-द-स्पॉट कड़े निर्देश जारी किए:

  1. ​निचले हिस्से को तुरंत करें कवर: हाईमास्ट लाइट के निचले हिस्से (जंक्शन बॉक्स और तारों वाले भाग) को जल्द से जल्द पूरी तरह से सुरक्षित कवर किया जाए ताकि कोई भी श्रद्धालु गलती से भी इसकी चपेट में न आए।
  2. ​कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपें: इस काम को तुरंत पूरा कर प्रशासन को इसकी लिखित एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपी जाए।

​ लाखों कांवरियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट

​श्रावण मास में सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा घाट का महत्व बेहद खास हो जाता है। यहाँ से हर दिन लाखों की संख्या में देश-विदेश के कांवरिया पवित्र गंगा जल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) के लिए पैदल रवाना होते हैं। ऐसे में भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन सुरक्षा को लेकर कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहता। डीएम के इस कड़े तेवर से साफ है कि मेले की तैयारियों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है।

बैजलपुर पंचायत में अतिक्रमण पर चलेगा बुलडोजर! प्रशासन ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम, क्षेत्र में मची खलबली

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Bhagalpur News: सबौर प्रखंड के बैजलपुर पंचायत में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को तेज कर दिया है। अंचल अधिकारी (CO) सौरभ कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमित भूमि का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखे गए, जिससे अतिक्रमणकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।

​ 48 घंटे की मोहलत, वरना होगी सख्त कार्रवाई

​निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए अतिक्रमणकारियों को 48 घंटे के भीतर स्वेच्छा से अवैध निर्माण हटाने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है।

​अधिकारियों ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि:

  • ​निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रशासन खुद बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर देगा।
  • ​सरकारी आदेश की अवहेलना करने वालों और काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई (FIR) की जाएगी।

​ भारी पुलिस बल और 40 बटालियन के जवान तैनात

​कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। सबौर थाना अध्यक्ष बिट्टू कुमार कमल के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस और 40 बटालियन के जवानों ने पूरे इलाके में मार्च किया। प्रशासन की इस मुस्तैदी के कारण अतिक्रमणकारियों को विरोध करने का कोई मौका नहीं मिला और पूरा निरीक्षण शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

​“सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लोग स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाकर प्रशासन का सहयोग करें, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।”

— सौरभ कुमार, अंचल अधिकारी (सबौर)

 

​ क्षेत्र में बढ़ी हलचल, खुद ही निर्माण तोड़ने में जुटे लोग

​प्रशासन के इस सख्त और कड़े रुख को देखते हुए बैजलपुर पंचायत में हलचल तेज हो गई है। अल्टीमेटम मिलते ही कई अतिक्रमणकारी भारी नुकसान और कानूनी पचड़े से बचने के लिए अपने स्तर से ही अवैध निर्माण और पक्के ढांचे को हटाने की तैयारी में जुट गए हैं।

​ स्थानीय जनता ने फैसले का किया स्वागत

​प्रशासन के इस कदम से आम जनता में खुशी की लहर है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि:

  • ​सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे की वजह से आए दिन रास्ते जाम होते थे और विवाद की स्थिति बनी रहती थी।
  • ​भूमि अतिक्रमण मुक्त होने से आम जनता को काफी सुविधा मिलेगी।
  • ​भविष्य में पंचायत के भीतर होने वाले सरकारी और विकास कार्यों को गति मिल सकेगी।

 

आगे क्या?

​प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जैसे ही 48 घंटे की समय-सीमा पूरी होगी, उसके तुरंत बाद अगले दो दिनों के भीतर सघन अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया जाएगा। यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक कि बैजलपुर पंचायत की पूरी सरकारी भूमि पूरी तरह से मुक्त नहीं हो जाती।

पारिवारिक विवाद का सुखद अंत: शरण्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ईशान सिन्हा की पहल पर दोनों पक्षों में हुआ समझौता

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Bhagalpur News: समाज में शांति, सौहार्द और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर शरण्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित की है। आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ईशान सिन्हा की सूझबूझ और सकारात्मक पहल के कारण एक लंबे समय से चल रहा पारिवारिक विवाद न सिर्फ हमेशा के लिए खत्म हो गया, बल्कि कोर्ट में लंबित मामले का भी सम्मानजनक निष्पादन हुआ। इस फैसले के बाद दोनों पीड़ित परिवारों में खुशी का माहौल है।

​क्या था पूरा मामला?

​यह पूरा विवाद भागलपुर जिले के बबरगंज थाना क्षेत्र का था। यहाँ की निवासी चांदनी देवी और अनीता देवी के बीच किसी पारिवारिक बात को लेकर गहरा विवाद चल रहा था। मामला थाने से होते हुए कोर्ट की चौखट तक जा पहुँचा था, जहाँ लंबे समय से इस केस की सुनवाई चल रही थी। कानूनी प्रक्रिया के कारण दोनों ही परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान थे।

​मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने संभाली कमान

​जब इस मामले की जानकारी शरण्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ईशान सिन्हा को मिली, तो उन्होंने समाज हित में कदम उठाने का फैसला किया।

    • ​काउंसलिंग की शुरुआत: ईशान सिन्हा ने दोनों पक्षों को एक मेज पर बिठाया।
    • ​भ्रांतियों को किया दूर: उन्होंने दोनों परिवारों को आपसी लड़ाई के नुकसान और मिलजुलकर रहने के फायदों के बारे में समझाया।
    • ​सुलह पर बनी सहमति: आयोग की इस निष्पक्ष और संवेदनशील पहल का असर यह हुआ कि दोनों पक्ष कानूनी लड़ाई छोड़कर आपस में समझौता करने के लिए राजी हो गए।

​”हमारा मुख्य उद्देश्य समाज में कड़वाहट को खत्म कर अपनों को अपनों से जोड़ना है। कानूनी प्रक्रियाएं अपनी जगह हैं, लेकिन अगर आपसी बातचीत से मसले हल हो जाएं, तो उससे न सिर्फ वक्त बचता है बल्कि परिवारों की खुशियां भी बच जाती हैं।”

— ईशान सिन्हा, राष्ट्रीय अध्यक्ष (शरण्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग)

 

​अदालत में मुकदमों की हुई ससम्मान वापसी

​आयोग के दफ्तर में हुए समझौते के बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। बीते मंगलवार को दोनों पक्ष न्यायालय में जज के समक्ष उपस्थित हुए। चांदनी देवी और अनीता देवी ने जज के सामने बेहद सकारात्मक रूप से अपनी बात रखी और कोर्ट को बताया कि उन्होंने आपसी सहमति से विवाद सुलझा लिया है और वे केस वापस लेना चाहती हैं।

​दोनों पक्षों के सकारात्मक रुख और समझौते के बिंदुओं को देखते हुए माननीय जज ने मामले को समाप्त करते हुए दोनों पक्षों को बरी कर दिया। इसके साथ ही सालों पुराने इस विवाद का बेहद सुखद अंत हो गया।

​समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश

​इस ऐतिहासिक सुलह के बाद मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ईशान सिन्हा ने कहा कि यह घटना पूरे समाज के लिए एक बेहतरीन और सकारात्मक संदेश है। कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ने के बजाय अगर लोग आपस में मिलजुल कर रहें और छोटे-मोटे विवादों को बातचीत से सुलझाएं, तो समाज में अपराध और तनाव दोनों कम होंगे। स्थानीय लोगों ने भी आयोग और ईशान सिन्हा के इस प्रयास की जमकर सराहना की है।

बिहार STF की बड़ी कामयाबी: पटना स्टेशन से दबोचा गया पाण्डव सेना का सरगना संजय सिंह; नरसंहार और AK-47 कांड का मुख्य आरोपी गिरफ्तार

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Patna News: बिहार पुलिस की विशेष कार्य बल (STF) की टीम को आज एक ऐसी बड़ी कामयाबी हाथ लगी है, जिसने सूबे के आपराधिक गलियारे को हिलाकर रख दिया है। बिहार एसटीएफ की विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पटना जिला के सबसे कुख्यात और सूबे के टॉप वांटेड अपराधियों की सूची में शामिल ‘पाण्डव सेना’ के सरगना संजय सिंह को पटना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया है।

​संजय सिंह (पिता- स्व. रमेश सिंह, ग्राम- निमा, थाना- मसौढ़ी, जिला- पटना) लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी को बिहार पुलिस के लिए एक ऐतिहासिक सफलता माना जा रहा है।

​ AK-47 बरामदगी कांड सहित दर्जनों जघन्य मामलों में था वांछित

​गिरफ्तार अभियुक्त संजय सिंह का खौफ सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि बिहार के कई जिलों और पड़ोसी राज्यों में भी था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजय सिंह ने बिहार और अन्य राज्यों में दर्जनों जघन्य अपराधों को अंजाम दिया है।

​वह मुख्य रूप से नरसंहार, सुपारी किलिंग (रंगदारी के लिए हत्या), अवैध बालू/पत्थर खनन और बड़े पैमाने पर भू-माफिया सिंडिकेट चलाने का आरोपी है। इसके अलावा, बिहटा थाना कांड संख्या 672/25 में पुलिस द्वारा की गई भारी-भरकम AK-47 राइफल की बरामदगी के मामले में भी वह मुख्य रूप से वांछित (Wanted) चल रहा था।

​ पड़ोसी राज्यों तक फैला था खौफ: भागलपुर और सुल्तानगंज से भी है कनेक्शन

​संजय सिंह का आपराधिक साम्राज्य कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पटना के अलावा झारखंड के रांची, हजारीबाग और भागलपुर जिले में भी उसके खिलाफ हत्या और अपहरण के गंभीर मामले दर्ज हैं। भागलपुर टाउन थाना में साल 2000 में उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ था, वहीं सुल्तानगंज थाने में साल 2006 में फिरौती के लिए अपहरण (364A) का एक बड़ा मुकदमा दर्ज है।

​ संजय सिंह का खौफनाक आपराधिक इतिहास (Crime History)

​बिहार पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, संजय सिंह पर साल 1996 से लेकर अब तक कुल 26 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हैं। नीचे उसके मुख्य आपराधिक मुकदमों का ब्योरा दिया गया है:

क्रम संख्या

थाना और कांड संख्या

मुख्य धाराएं / अपराध का प्रकार

1

मसौढ़ी (पटना) – 113/96

धारा 302 (हत्या) और 27 आर्म्स एक्ट

2

बिहटा (पटना) – 113/96

धारा 396 (डकैती के दौरान हत्या)

3

धनरूआ (पटना) – 172/02

धारा 452, 386 (रंगदारी वसूलना) और आर्म्स एक्ट

4

हजारीबाग सदर (झारखंड) – 434/04

धारा 302, 120B (हत्या की साजिश)

5

सुल्तानगंज (भागलपुर) – 487/06

धारा 364(A) (फिरौती के लिए अपहरण)

6

भागलपुर टाउन – 573/2000

धारा 302, 307 (हत्या और जानलेवा हमला)

7

पत्रकार नगर (पटना) – 294/22

धारा 302, 120B (मर्डर और साजिश)

8

रांची सदर (झारखंड) – 546/23

आर्म्स एक्ट का गंभीर मामला

9

बिहटा (पटना) – 672/25

AK-47 बरामदगी, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट

एसटीएफ और जिला पुलिस की टीमें अब इस बात का पता लगा रही हैं कि फरारी के दौरान वह किन-किन राज्यों में छुपा हुआ था और उसे किन सफेदपोशों का संरक्षण मिल रहा था। इसके अन्य आपराधिक इतिहास को भी खंगाला जा रहा है।

अपराध मुक्त बिहार की दिशा में बड़ा कदम

​पाण्डव सेना के इस खूंखार सरगना की गिरफ्तारी के बाद पटना समेत पूरे बिहार के व्यवसायियों, ठेकेदारों और आम जनता ने राहत की सांस ली है। एसटीएफ अब संजय सिंह को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है, जिससे बिहार में सक्रिय कई अन्य बड़े गैंग और उनके हथियारों के नेटवर्क का खुलासा होने की पूरी उम्मीद है।