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पारिवारिक विवाद का सुखद अंत: शरण्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ईशान सिन्हा की पहल पर दोनों पक्षों में हुआ समझौता

कोर्ट में चल रहा मुकदमा हुआ समाप्त; पीड़ित परिवारों में लौटी खुशियां, समाज को मिला आपसी भाईचारे का बड़ा संदेश।

Bhagalpur News: समाज में शांति, सौहार्द और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर शरण्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित की है। आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ईशान सिन्हा की सूझबूझ और सकारात्मक पहल के कारण एक लंबे समय से चल रहा पारिवारिक विवाद न सिर्फ हमेशा के लिए खत्म हो गया, बल्कि कोर्ट में लंबित मामले का भी सम्मानजनक निष्पादन हुआ। इस फैसले के बाद दोनों पीड़ित परिवारों में खुशी का माहौल है।

​क्या था पूरा मामला?

​यह पूरा विवाद भागलपुर जिले के बबरगंज थाना क्षेत्र का था। यहाँ की निवासी चांदनी देवी और अनीता देवी के बीच किसी पारिवारिक बात को लेकर गहरा विवाद चल रहा था। मामला थाने से होते हुए कोर्ट की चौखट तक जा पहुँचा था, जहाँ लंबे समय से इस केस की सुनवाई चल रही थी। कानूनी प्रक्रिया के कारण दोनों ही परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान थे।

​मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने संभाली कमान

​जब इस मामले की जानकारी शरण्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ईशान सिन्हा को मिली, तो उन्होंने समाज हित में कदम उठाने का फैसला किया।

    • ​काउंसलिंग की शुरुआत: ईशान सिन्हा ने दोनों पक्षों को एक मेज पर बिठाया।
    • ​भ्रांतियों को किया दूर: उन्होंने दोनों परिवारों को आपसी लड़ाई के नुकसान और मिलजुलकर रहने के फायदों के बारे में समझाया।
    • ​सुलह पर बनी सहमति: आयोग की इस निष्पक्ष और संवेदनशील पहल का असर यह हुआ कि दोनों पक्ष कानूनी लड़ाई छोड़कर आपस में समझौता करने के लिए राजी हो गए।

​”हमारा मुख्य उद्देश्य समाज में कड़वाहट को खत्म कर अपनों को अपनों से जोड़ना है। कानूनी प्रक्रियाएं अपनी जगह हैं, लेकिन अगर आपसी बातचीत से मसले हल हो जाएं, तो उससे न सिर्फ वक्त बचता है बल्कि परिवारों की खुशियां भी बच जाती हैं।”

— ईशान सिन्हा, राष्ट्रीय अध्यक्ष (शरण्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग)

 

​अदालत में मुकदमों की हुई ससम्मान वापसी

​आयोग के दफ्तर में हुए समझौते के बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। बीते मंगलवार को दोनों पक्ष न्यायालय में जज के समक्ष उपस्थित हुए। चांदनी देवी और अनीता देवी ने जज के सामने बेहद सकारात्मक रूप से अपनी बात रखी और कोर्ट को बताया कि उन्होंने आपसी सहमति से विवाद सुलझा लिया है और वे केस वापस लेना चाहती हैं।

​दोनों पक्षों के सकारात्मक रुख और समझौते के बिंदुओं को देखते हुए माननीय जज ने मामले को समाप्त करते हुए दोनों पक्षों को बरी कर दिया। इसके साथ ही सालों पुराने इस विवाद का बेहद सुखद अंत हो गया।

​समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश

​इस ऐतिहासिक सुलह के बाद मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ईशान सिन्हा ने कहा कि यह घटना पूरे समाज के लिए एक बेहतरीन और सकारात्मक संदेश है। कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ने के बजाय अगर लोग आपस में मिलजुल कर रहें और छोटे-मोटे विवादों को बातचीत से सुलझाएं, तो समाज में अपराध और तनाव दोनों कम होंगे। स्थानीय लोगों ने भी आयोग और ईशान सिन्हा के इस प्रयास की जमकर सराहना की है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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