मां मुंडेश्वरी धाम और गुप्ताधाम को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर, युवाओं को बिहार में ही रोजगार देने और इको टूरिज्म बढ़ाने की घोषणा
Patna News: बिहार के कैमूर जिले में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को भभुआ प्रखंड के परसिया गांव में आयोजित श्री भाष्यकार श्रीरामानुजाचार्य सहस्राब्दी महामहोत्सव एवं अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन का शुभारंभ किया। दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करने के बाद मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे साधु-संतों, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया। उन्होंने मां मुंडेश्वरी की पावन धरती को नमन करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति, संतों के आशीर्वाद और जनसहभागिता से विकसित भारत तथा समृद्ध बिहार का संकल्प साकार होगा।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बिहार की धार्मिक विरासत के संरक्षण, प्राचीन मंदिरों के विकास, धार्मिक पर्यटन के विस्तार और युवाओं के लिए राज्य में ही रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संत समाज भारतीय संस्कृति, दर्शन और परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मां मुंडेश्वरी धाम और गुप्ताधाम के विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैमूर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। मां मुंडेश्वरी मंदिर और गुप्ताधाम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को विकसित करने से श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ सकती है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और कारोबार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कैमूर की पहाड़ियों और प्राकृतिक सुंदरता का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की बात कही। प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन के अनुकूल विकसित करने से होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है।
मुख्यमंत्री की ओर से जारी जानकारी में पटना से हेलीकॉप्टर के माध्यम से मां मुंडेश्वरी धाम और गुप्ताधाम के दर्शन की सुविधा का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, इस सेवा की वर्तमान उपलब्धता, संचालन की तारीख, समय-सारणी और बुकिंग संबंधी विवरण अलग से आधिकारिक रूप से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
विष्णुपद और बाबा हरिहरनाथ मंदिर के विकास का भी उल्लेख
मुख्यमंत्री ने बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास और जीर्णोद्धार की योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने गया जी स्थित विष्णुपद मंदिर, सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर और कैमूर के मां मुंडेश्वरी मंदिर के विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गया जी स्थित विष्णुपद मंदिर के विकास एवं जीर्णोद्धार के लिए लगभग 3,500 करोड़ रुपये और सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर के विकास के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये की योजना का उल्लेख किया गया है। इन बड़ी धनराशियों की स्वीकृति, परियोजना की वास्तविक लागत और वित्तीय प्रावधानों की संबंधित विभागीय दस्तावेजों से पुष्टि आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना तथा प्रमुख तीर्थस्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक स्थलों के विकास का उद्देश्य केवल मंदिरों और तीर्थस्थलों का सौंदर्यीकरण नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर होटल, भोजनालय, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ सकती है।
कैमूर क्षेत्र में मां मुंडेश्वरी धाम और गुप्ताधाम के साथ प्राकृतिक स्थलों को भी पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं हैं। इको टूरिज्म के विकास से क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को पहचान मिल सकती है। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण, बुनियादी सुविधाओं, सड़क संपर्क और पर्यटकों की सुरक्षा पर ध्यान देना भी जरूरी होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सासाराम और कैमूर की प्राकृतिक खूबसूरती फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों को भी आकर्षित कर रही है। इससे पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय के अवसर बढ़ाने की संभावना है।
बिहार के युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रोजगार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में बिहार में पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि लोगों को मजबूरी में मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़े।
इसके लिए उद्योगों की स्थापना, निवेश को प्रोत्साहन और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बिहार से बाहर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले लोगों से भी अपील की कि वे अपनी जन्मभूमि के विकास में योगदान दें।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार विकास की प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण रहा है। आगे भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर बिहार को अधिक समृद्ध बनाने का लक्ष्य है।
सनातन संस्कृति और संत समाज की भूमिका पर दिया जोर
धर्म सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति हजारों वर्षों से दुनिया का मार्गदर्शन करती रही है। सनातन धर्म की परंपराओं, दर्शन और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने में संतों और धर्माचार्यों की अहम भूमिका है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के प्रयासों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के साथ बिहार को भी विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में निर्धारित विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की बात भी कही और संतों से राज्य के विकास के लिए आशीर्वाद मांगा।
जीयर स्वामी महाराज से मिले मुख्यमंत्री, मनोज तिवारी ने प्रस्तुत किए भक्ति गीत
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रख्यात संत पूज्य श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर सांसद एवं प्रसिद्ध गायक मनोज तिवारी ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे कार्यक्रम का माहौल भक्तिमय हो गया।
समारोह में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान, सांसद मनोज तिवारी, विधायक भरत बिंद, विधायक संगीता कुमारी, विधान पार्षद संतोष कुमार सिंह, पूर्व विधायक अशोक कुमार सिंह, भाजपा के जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश पांडे सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके अलावा मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, शाहाबाद क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक सत्य प्रकाश, कैमूर के जिलाधिकारी कुमार अनुराग, पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी, विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संत, धर्माचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए।
धार्मिक विरासत के साथ विकास और रोजगार पर नजर
कैमूर के परसिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन के दौरान धार्मिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन के विस्तार और स्थानीय रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं सामने आईं। मां मुंडेश्वरी धाम और गुप्ताधाम जैसे स्थलों का विकास क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाने का अवसर बन सकता है।


