Bhagalpur News: जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अस्पताल के इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर (OT) के पास डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के नाम पर मरीजों के लाचार परिजनों से अवैध वसूली करने वाले एक शातिर ठग को रंगे हाथ दबोच लिया गया। पकड़े जाने के बाद गुस्साए लोगों और कर्मचारियों ने उसकी जमकर धुनाई कर दी। आरोपी की पहचान मो. जफर के रूप में हुई है, जिसे सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची बरारी थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
‘दवा और स्टील प्लेट’ के नाम पर रोज की थी हजारों की कमाई
बताया जा रहा है कि आरोपी मो. जफर लंबे समय से मायागंज अस्पताल परिसर में सक्रिय था। वह बेहद शातिराना अंदाज में खुद को अस्पताल का कोई बड़ा रसूखदार या डॉक्टरों का करीबी बताकर दूर-दराज से आए गरीब मरीजों के परिजनों को अपने झांसे में लेता था।
वह मुख्य रूप से इन चीजों का झांसा देकर अवैध वसूली करता था:
- ऑपरेशन के लिए जरूरी महंगी दवाइयां और इंजेक्शन।
- हड्डी के ऑपरेशन (ऑर्थोपेडिक सर्जरी) में इस्तेमाल होने वाली महंगी स्टील प्लेट और रॉड।
- डॉक्टरों से जल्दी काम कराने और जल्द ऑपरेशन की तारीख दिलाने का झांसा।
परिजनों को डराकर और डॉक्टरों का डर दिखाकर वह प्रतिदिन कई लोगों से मोटी रकम वसूलता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने अलग-अलग मरीजों के तीमारदारों से 700 रुपये, 1,500 रुपये और 4,000 रुपये जैसी कई रकमें अवैध रूप से ऐंठी थीं।
अस्पताल कर्मी से विवाद के बाद खुली पोल, बिछाया गया जाल
मो. जफर की इस करतूत का भंडाफोड़ तब हुआ जब अस्पताल के ही एक कर्मचारी से किसी बात को लेकर उसका विवाद हो गया। इस विवाद के बाद अस्पताल प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों को उस पर शक हुआ और उसकी गतिविधियों पर गुप्त रूप से नजर रखी जाने लगी।
बुधवार को जब वह इमरजेंसी वार्ड के पास फिर से एक बेबस मरीज के परिजन से रुपये ऐंठ रहा था, तभी पहले से मुस्तैद लोगों और अस्पताल कर्मियों ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया।
डॉक्टर की पूछताछ में छूटे पसीने, फिर गिड़गिड़ाने लगा ठग
रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद आरोपी मो. जफर तुरंत पैंतरा बदलने लगा और हाथ जोड़कर रोने-गिड़गिड़ाने लगा। उसने माफी मांगते हुए कहा कि भविष्य में वह कभी अस्पताल में नहीं दिखेगा।
जब अस्पताल में तैनात एक हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic Doctor) ने उससे तकनीकी और कड़े सवाल पूछे, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। उसने सफाई देने की कोशिश की कि, “मरीज के परिजनों ने ही मुझे दवा लाने के लिए पैसे दिए थे और मैंने सिर्फ दवा लाकर दी थी।” हालांकि, मौके पर मौजूद पीड़ित परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने उसकी इस झूठी दलील को सरेआम खारिज कर दिया।
बरारी थाना पुलिस खंगाल रही है ‘अस्पताल सिंडिकेट’ का कनेक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत बरारी थाना पुलिस को सूचित किया गया। मौके पर पहुंचे ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारी ने बताया कि युवक को हिरासत में ले लिया गया है और उसे थाने ले जाकर कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि:
- आरोपी मो. जफर कब से अस्पताल में इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहा था?
- क्या इस ठगी के खेल में अस्पताल का कोई अंदरूनी कर्मचारी या गार्ड भी शामिल है?
- उसने अब तक कितने गरीब मरीजों को अपना शिकार बनाया है?


