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भागलपुर में ‘महिला आयोग आपके द्वार’: 600 लंबित मामलों के निपटारे की कवायद, दहेज उत्पीड़न के केस सबसे अधिक

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Bhagalpur News: महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए बिहार राज्य महिला आयोग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सिल्क सिटी भागलपुर के परिसदन (सर्किट हाउस) में दो दिवसीय विशेष कार्यक्रम ‘महिला आयोग आपके द्वार’ का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व आयोग की अध्यक्ष अश्वमेध देवी (अप्सा) कर रही हैं।

​दहेज उत्पीड़न के मामलों ने बढ़ाई चिंता

​कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि भागलपुर जिले में महिलाओं से जुड़े लगभग 600 मामले फिलहाल लंबित हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन शिकायतों में सबसे बड़ी संख्या दहेज उत्पीड़न से संबंधित मामलों की है। इसके अलावा घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवादों के मामले भी बड़ी तादाद में सामने आए हैं।

​त्वरित न्याय और जागरूकता पर जोर

​अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस दो दिवसीय शिविर का मुख्य उद्देश्य फाइलों में दबे मामलों को बाहर निकालना और पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाना है।

​”आयोग की प्राथमिकता है कि महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए। इस विशेष शिविर के माध्यम से पीड़ित महिलाएं सीधे आयोग के समक्ष अपनी बात रख पा रही हैं, जिससे मामलों का ऑन-स्पॉट समाधान करने में मदद मिल रही है।”

— श्रीमती अश्वमेध देवी, अध्यक्ष, बिहार राज्य महिला आयोग

 

​प्रशासनिक अमला और पीड़ितों की भीड़

​परिसदन में आयोजित इस सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में पीड़ित महिलाएं अपनी फरियाद लेकर पहुंचीं। आयोग की टीम के साथ जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे, ताकि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मौके पर ही पूरा कर पीड़ितों को राहत दी जा सके। टीम द्वारा गंभीर मामलों में पुलिस प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।

बिहार का ‘सफेद सोना’ बना ग्लोबल ब्रांड: BAU के प्रयास से अब खेतों में लहलहाएगी मखाने की फसल

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Bhagalpur News: बिहार का मखाना अब सिर्फ एक क्षेत्रीय उत्पाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित हो चुका है। केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों ने इसे वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाई है। इसी कड़ी में सिल्क नगरी भागलपुर के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है—बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर की पहल से अब भागलपुर की धरती पर भी मखाने की व्यावसायिक खेती संभव हो पाई है।

​तालाब की जरूरत खत्म, अब खेतों में होगा मखाना

​अब तक मखाने की खेती मुख्य रूप से सीमांचल के इलाकों तक ही सीमित थी और इसके लिए गहरे तालाबों को अनिवार्य माना जाता था। लेकिन BAU के कुलपति के विशेष मार्गदर्शन में वैज्ञानिकों ने इस धारणा को बदल दिया है। विश्वविद्यालय के नए प्रयोग के अनुसार, अब मखाने के लिए किसी बड़े तालाब की आवश्यकता नहीं है। किसान अपनी खेतीहर जमीन पर, जहाँ केवल 3 से 4 फीट पानी की उपलब्धता हो, वहां आसानी से मखाने की पैदावार कर सकते हैं।

​वैज्ञानिकों को मिला भारत सरकार से पेटेंट

​किसानों के मुनाफे को दोगुना करने और खेती को सरल बनाने के लिए BAU के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी खोज की है। वैज्ञानिकों ने मखाने की उन्नत किस्म के बीजों में मौजूद ‘जीन’ (Gene) की संरचना को डिकोड किया है, जिससे बेहतर और रोगमुक्त बीज तैयार किए जा सकें। इस महत्वपूर्ण शोध के लिए भारत सरकार की ओर से वैज्ञानिकों को पेटेंट भी प्रदान किया गया है।

​”वैज्ञानिकों ने यह खोज निकाला है कि मखाने की खेती के लिए अच्छे किस्म के बीज में कौन से गुणकारी जीन उपलब्ध हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों बढ़ेगी।”

— डॉ. पंकज कुमार, वैज्ञानिक, BAU

 

​भागलपुर के किसानों को मिल रहा वैज्ञानिक सहयोग

​वर्तमान में बिहार कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित तालाबों और प्रयोगात्मक खेतों में वैज्ञानिकों की सीधी देखरेख में मखाने पर विभिन्न शोध किए जा रहे हैं। कृषि अनुसंधान केंद्र की वरीय वैज्ञानिक अनीता कुमारी ने बताया कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य इस तकनीक को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना है। भागलपुर और आसपास के जिलों के किसान अब इस नई तकनीक को अपना रहे हैं और वैज्ञानिक उन्हें बीज चयन से लेकर कटाई तक का तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

​ मुनाफे की नई राह

​BAU की इस तकनीक से न केवल पानी की बचत होगी, बल्कि उन किसानों के लिए भी आय के नए रास्ते खुलेंगे जिनके पास पारंपरिक तालाब नहीं हैं। सरकार और विश्वविद्यालय का यह संयुक्त प्रयास आने वाले समय में भागलपुर को मखाना उत्पादन का नया केंद्र बना सकता है।

पूर्णिया GMCH में शराबी पिता का हाई वोल्टेज ड्रामा: बच्चा वार्ड में डॉक्टरों से बदसलूकी, पुलिस ने दबोचा

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Bihar News: राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) पूर्णिया एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई चिकित्सा व्यवस्था नहीं, बल्कि एक शराबी पिता की गुंडागर्दी है। मंगलवार को अस्पताल के बच्चा वार्ड में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अपने बीमार बच्चे का इलाज कराने आए एक युवक ने नशे की हालत में जमकर हंगामा काटा।

​इलाज में लापरवाही का बहाना, गाली-गलौज पर उतरा आरोपी

​मिली जानकारी के अनुसार, कटिहार जिले के कोढ़ा थाना अंतर्गत डुम्मर गांव निवासी मिथुन कुमार अपने बीमार बच्चे को लेकर GMCH पहुंचा था। आरोप है कि मिथुन अत्यधिक शराब के नशे में था। उसने अचानक इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों और नर्सों के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। देखते ही देखते वह गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू हो गया, जिससे वार्ड में भर्ती अन्य मरीज और उनके परिजन सहम गए।

​नर्सों ने बयां किया आंखों देखा हाल

​अस्पताल में तैनात जीएनएम (GNM) मधु ने बताया कि युवक पूरी तरह होश खो बैठा था। वह बिना किसी ठोस वजह के स्टाफ पर चिल्ला रहा था और काम में बाधा डाल रहा था। सुरक्षा गार्डों और वहां मौजूद लोगों ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह किसी की सुनने को तैयार नहीं था। वार्ड का माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि अस्पताल प्रशासन को तुरंत पुलिस को फोन करना पड़ा।

​पुलिस की कार्रवाई: फणीश्वर नाथ रेणु TOP ने आरोपी को किया गिरफ्तार

​सूचना मिलते ही फणीश्वर नाथ रेणु TOP प्रभारी राजनंदनी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए हंगामा कर रहे मिथुन कुमार को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी युवक ने खुद स्वीकार किया कि उसने शराब पी रखी थी। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद इस तरह सार्वजनिक स्थल और अस्पताल जैसे संवेदनशील जगह पर शराब पीकर हंगामा करने पर पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है।

​थानाध्यक्ष राज नंदनी का बयान:

“युवक को नशे की हालत में हंगामा करते हुए पकड़ा गया है। उसने शराब पीने की बात कबूल की है। मेडिकल जांच और कागजी कार्रवाई के बाद आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जा रहा है।”

भागलपुर: नशे की पहली खुराक को कहें ‘ना’! अलीगंज के स्कूल में “क्विट करो” पहल के जरिए बच्चों ने लिया नशामुक्त जीवन का संकल्प

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Bhagalpur News: युवाओं और बच्चों को नशे की अंधेरी दुनिया से बचाने के लिए भागलपुर के अलीगंज में एक सशक्त मुहिम की शुरुआत हुई है। कन्या मध्य विद्यालय, अलीगंज में ‘क्विट करो’ (Quit KRO) पहल के तहत “से नो टू एडिक्शन” कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) के नशा उन्मूलन कार्यक्रम ‘बोध’ और ‘नारी शक्ति’ के संयुक्त तत्वावधान में शुरू किए गए ‘संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को “पहली बार मना करने” (Say No to First Use) का मूलमंत्र दिया गया।

​यह कार्यशाला पूज्य गुरुदेव आशुतोष महाराज जी के पावन मार्गदर्शन में संपन्न हुई, जिसका उद्देश्य भावी पीढ़ी को नशे के जाल में फंसने से पहले ही जागरूक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना है।

​“पहली बार मना करना ही असली जीत”: विशेषज्ञों की राय

​कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बच्चों को मनोवैज्ञानिक पहलुओं से अवगत कराते हुए बताया कि नशे की लत कभी भी जानबूझकर नहीं, बल्कि ‘सिर्फ एक बार चखने’ की जिज्ञासा से शुरू होती है।

  • ​पीयर प्रेशर से बचें: अक्सर बच्चे दोस्तों के दबाव में आकर नशे का पहला कदम उठाते हैं। कार्यशाला में उन्हें सिखाया गया कि कैसे साहस के साथ दोस्तों को ‘ना’ कहें।
  • ​दुष्प्रभावों पर चर्चा: छात्रों को नशे से होने वाली शारीरिक क्षति, मानसिक तनाव और शैक्षणिक गिरावट के बारे में विस्तार से समझाया गया।

​संकल्प अभियान: 5 वर्षों की बड़ी योजना

​यह कार्यशाला किसी एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक पंचवर्षीय मुहीम का हिस्सा है। डीजेजेएस बोध और वाईपीएसएस के पदाधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यदि बच्चा पहली बार नशे को मना करना सीख जाए, तो वह जीवन भर सुरक्षित रह सकता है।

​वरिष्ठ आयोजक का संदेश:

“गुरुदेव आशुतोष महाराज जी का विजन एक नशामुक्त समाज का है। हम बच्चों को नशे की पहली बूंद से दूर रखने का प्रयास कर रहे हैं। अगर हमारा युवा ‘पहली बार ना’ कहना सीख जाए, तो नशामुक्त भारत का सपना दूर नहीं।”

 

​कार्यशाला की मुख्य विशेषताएं: आंकड़ों की जुबानी

  • ​भारी भागीदारी: अलीगंज के इस विद्यालय से 200 से अधिक छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने इस मुहिम में हिस्सा लिया।
  • ​इंटरएक्टिव सत्र: कार्यक्रम को बोझिल बनाने के बजाय संवादात्मक रखा गया, जहाँ बच्चों ने खुलकर अपनी जिज्ञासाएं शांत कीं।
  • ​शपथ पत्र: सभी प्रतिभागियों को “नशा मुक्ति शपथ पत्र” दिए गए, जिस पर उन्होंने आजीवन नशा न करने का लिखित संकल्प लिया।

​स्वामी संसदानंद जी का आभार और भविष्य का लक्ष्य

​कार्यक्रम के सफल समापन पर शाखा समन्वयक स्वामी संसदानंद जी ने कहा कि ‘क्विट करो’ पहल के तहत आने वाले समय में भागलपुर के अन्य स्कूलों में भी इसी तरह की कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने स्कूल प्रशासन और शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एक स्वस्थ और सशक्त युवा पीढ़ी ही देश का भविष्य बदल सकती है।

​अंत में, पूरे स्कूल परिसर ने एक स्वर में “से नो टू एडिक्शन” का नारा लगाया, जिससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

बिहार में मानसून को लेकर बड़ी चेतावनी: जून-जुलाई में सामान्य से कम बारिश के आसार, मुख्य सचिव ने बिजली-पानी और स्वास्थ्य विभाग को किया अलर्ट

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Patna News: बिहार में इस साल मानसून की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने वाली है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में ‘बिहार मौसम सेवा केंद्र’ (BMSK) ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। पूर्वानुमान के अनुसार, इस साल जून और जुलाई के महीनों में ‘सामान्य से कम’ (Below Normal) वर्षा होने की संभावना है, जो कृषि और जल स्तर के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

​मुख्य सचिव ने इस स्थिति को देखते हुए राज्य के सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को अगले एक हफ्ते तक विशेष सतर्कता बरतने और संसाधनों को दुरुस्त रखने का कड़ा निर्देश दिया है।

​तापमान का टॉर्चर: 5 मई तक और बढ़ेगा पारा

​मौसम सेवा केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, 1 मार्च से अब तक राज्य के तापमान में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है:

  • ​सबसे गर्म इलाके: दक्षिण-पश्चिमी (SW) और दक्षिण-मध्य (SC) बिहार के जिले सबसे अधिक तप रहे हैं।
  • ​पूर्वानुमान: 27 अप्रैल से 05 मई 2026 के बीच राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में और भी बढ़ोतरी होने की आशंका है।
  • ​चौबीसों घंटे निगरानी: सभी 6 अंचलों (NW, NC, NE, SW, SC, SE) में दिन और रात के तापमान की सघन मॉनिटरिंग की जा रही है।

​मानसून 2026: शुरुआती महीनों में सूखे जैसी चुनौती!

​बैठक में साझा किए गए मानसून के आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है:

  • ​कम बारिश: जून-जुलाई में कम बारिश के कारण धान की रोपनी और भू-जल स्तर पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • ​अगस्त में राहत: मानसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) में स्थिति सुधरने की उम्मीद है।
  • ​प्रभावित क्षेत्र: मध्य और पश्चिमी बिहार में बारिश की कमी सबसे अधिक देखी जा सकती है, जबकि उत्तर-पूर्वी बिहार में स्थिति थोड़ी बेहतर रहेगी।

​मुख्य सचिव के कड़े निर्देश: बिजली, पानी और पशुधन पर विशेष नजर

​मुख्य सचिव ने आपदा प्रबंधन की तर्ज पर सभी विभागों को सक्रिय रहने को कहा है:

​ निर्बाध बिजली और QRT की तैनाती

​गर्मी में बढ़ते लोड को देखते हुए बिजली विभाग को निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। हर प्रमंडल में ‘क्विक रिस्पांस टीम’ (QRT) तैनात होगी, जो ट्रांसफार्मर जलने या तार टूटने जैसी शिकायतों को न्यूनतम समय में ठीक करेगी।

​ अस्पतालों में ‘हीट स्ट्रोक’ वार्ड

​स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि सभी अस्पतालों में लू से पीड़ित मरीजों के लिए विशेष वार्ड और जीवन रक्षक दवाएं तैयार रखें। जिलाधिकारियों को सिविल सर्जनों के साथ नियमित बैठक करने के निर्देश दिए गए हैं।

​ पशुधन की सुरक्षा

​पहली बार पशुओं की सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए मुख्य सचिव ने पशु चिकित्सालयों में ORS और दवाओं का स्टॉक रखने को कहा है। सार्वजनिक हौदों और तालाबों में टैंकरों के जरिए पानी भरने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बेजुबान जानवरों को लू से बचाया जा सके।

​ पेयजल और कृषि जागरूकता

​PHED को चापाकलों और नल-जल योजनाओं को चालू रखने का जिम्मा सौंपा गया है। किसानों को ‘BMSK’ ऐप के माध्यम से मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

​निष्कर्ष: अगले 7 दिन बेहद महत्वपूर्ण

​मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि 27 अप्रैल से 05 मई तक की अवधि अत्यंत संवेदनशील है। आपदा प्रबंधन विभाग को किसी भी आपात स्थिति के लिए ‘स्टैंडबाय’ पर रखा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि मौसम की मार का असर आम जनजीवन और मवेशियों पर कम से कम पड़े।

बिहार में भीषण गर्मी को लेकर मुख्य सचिव अलर्ट: ‘नल का जल’ में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस, 24 घंटे में ठीक होंगे खराब चापाकल

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Patna News: बिहार में बढ़ते पारे और ‘हीट वेव’ (लू) की आहट के बीच राज्य सरकार ने पेयजल आपूर्ति को लेकर अपनी कमर कस ली है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर स्पष्ट कर दिया है कि गर्मी के इस मौसम में राज्य के किसी भी कोने में पानी की किल्लत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​मुख्य सचिव ने अधिकारियों को ‘अलर्ट मोड’ पर रहने का निर्देश देते हुए कहा कि आम जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

​राज्य में 92% परिवारों तक पहुँचा ‘नल का जल’

​समीक्षा बैठक में राज्य की जलापूर्ति योजनाओं की वर्तमान स्थिति के आंकड़े पेश किए गए:

  • ​विशाल नेटवर्क: बिहार में वर्तमान में कुल 1,29,095 जलापूर्ति योजनाएं संचालित हैं।
  • ​उपलब्धि: राज्य के लगभग 92% परिवार (करीब 186.20 लाख घर) अब नल से जल प्राप्त कर रहे हैं।
  • ​क्वालिटी चेक: पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य भर में 114 प्रयोगशालाएं (1 राज्य स्तरीय, 38 जिला और 75 अनुमंडल स्तरीय) चौबीसों घंटे काम कर रही हैं।

​लू से निपटने के लिए ‘वॉर रूम’ तैयार

​भीषण गर्मी में पानी की निर्बाध आपूर्ति के लिए PHED ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है:

  • ​चापाकल मरम्मत अभियान: राज्य के 8.76 लाख चापाकलों में से अब तक 1.15 लाख की मरम्मत पूरी की जा चुकी है।
  • ​मोबाइल रिपेयरिंग यूनिट: किसी भी खराबी को तुरंत ठीक करने के लिए 525 चलंत मरम्मती दल तैनात किए गए हैं।
  • ​टोल-फ्री हेल्पलाइन: जनता की शिकायतों के लिए 1800-123-1121 टोल-फ्री नंबर जारी किया गया है, जो 24×7 कार्यरत रहेगा।

​मुख्य सचिव के कड़े निर्देश: “24 घंटे में दूर हो खराबी”

​बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने बिजली, मानदेय और तकनीकी कारणों से बंद पड़ी योजनाओं पर नाराजगी जताई और निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. ​24 घंटे की डेडलाइन: मुख्य सचिव ने कहा कि जहाँ भी पाइपलाइन लीक है या चापाकल खराब है, उसे 24 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से ठीक किया जाए।
  2. ​वॉटर स्ट्रेस्ड एरिया में टैंकर: जिन क्षेत्रों में जलस्तर नीचे चला गया है, वहां तुरंत पानी के टैंकरों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है।
  3. ​बिजली विभाग से तालमेल: बिजली की वजह से बंद पड़ी योजनाओं को शुरू करने के लिए विद्युत विभाग के साथ तत्काल समन्वय बनाने का निर्देश दिया।
  4. ​पंप चालकों का मानदेय: योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए पंप ऑपरेटरों के लंबित मानदेय का भुगतान तुरंत करने का आदेश दिया गया है।
  5. ​ग्राउंड रिपोर्ट और फीडबैक: अधिकारी केवल दफ्तर में न बैठें, बल्कि क्षेत्रों का दौरा कर जनप्रतिनिधियों और जनता से सीधा फीडबैक लें।

​शिकायतों पर होगी त्वरित कार्रवाई

​मुख्य सचिव ने जोर दिया कि कंट्रोल रूम में प्राप्त होने वाली हर शिकायत का निष्पादन समय सीमा के भीतर होना चाहिए। सरकार का लक्ष्य है कि ‘हीट वेव’ के दौरान बिहार के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।

​इस बैठक में पीएचईडी के वरीय अधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

बिहार: जनगणना-2027 की तैयारी में बिहार ने गाड़ा झंडा, मात्र एक हफ्ते में 99% सीमांकन और जियो-टैगिंग का कार्य पूर्ण

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Patna News: भारत की आगामी ‘जनगणना-2027’ को लेकर बिहार सरकार ने अपनी तैयारियों से पूरे देश को चौंका दिया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि बिहार ने मात्र सात दिनों के भीतर जनगणना के प्रारंभिक चरण (HLBC) में रिकॉर्ड तोड़ प्रगति हासिल की है।

​राज्य में एच.एल.बी. (HLB) सीमांकन और जियो-टैगिंग का काम लगभग शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है, जो राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

​एक सप्ताह की ‘सुपरफास्ट’ प्रगति: 20% से सीधे 99% के पार

​मुख्य सचिव ने बैठक के दौरान आंकड़ों के जरिए राज्य की शानदार उपलब्धि को साझा किया:

  • ​रिकॉर्ड सीमांकन: 20 अप्रैल तक जो सीमांकन कार्य मात्र 20.39% पर था, वह 27 अप्रैल तक 99.64% पहुँच गया।
  • ​जियो-टैगिंग की सफलता: जियो-टैगिंग में भी बिहार ने लंबी छलांग लगाई है, जो 23.92% से बढ़कर अब 99.67% हो गई है।
  • ​जिलों का शानदार प्रदर्शन: राज्य के 33 जिलों ने सीमांकन और जियो-टैगिंग दोनों में 100% लक्ष्य हासिल कर लिया है। कुल 2,04,474 HLB में से 2,03,745 का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

​‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) में वैशाली और मधुबनी सबसे आगे

​डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए बिहार के लोग अब ‘स्व-गणना’ ऐप का भी बढ़-चढ़कर उपयोग कर रहे हैं:

  • ​पिछले 7 दिनों में 24 लाख से अधिक नए परिवारों ने अपनी गणना पूरी की है।
  • ​वैशाली (4,46,307) जिला स्व-गणना के मामले में पूरे राज्य में नंबर वन पर है।
  • ​मधुबनी (4,30,974) दूसरे और गोपालगंज (1,73,678) तीसरे स्थान पर काबिज है।
  • ​राजधानी पटना और भोजपुर ने भी इस लिस्ट में शीर्ष पाँच में अपनी जगह बनाई है।

​मुख्य सचिव के सख्त निर्देश: “डेटा की शुद्धता से कोई समझौता नहीं”

​काम की रफ्तार की सराहना करते हुए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने जिलाधिकारियों को आगामी चरण के लिए मिशन मोड में रहने का निर्देश दिया है:

  1. ​24 घंटे की डेडलाइन: जिन 5 जिलों में कार्य थोड़ा भी शेष है, उन्हें अगले 24 घंटे के भीतर 100% लक्ष्य पूरा करने को कहा गया है।
  2. ​फील्ड वेरिफिकेशन: केवल डिजिटल डेटा पर निर्भर न रहकर 100% जियो-टैगिंग का जमीन पर जाकर (On-field) पुनः सत्यापन किया जाए ताकि डेटा पूरी तरह शुद्ध हो।
  3. ​वार्ड स्तर पर अभियान: शेष परिवारों को स्व-गणना के लिए प्रेरित करने हेतु वार्ड स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
  4. ​डिजिटल ट्रेनिंग: जनगणना कर्मियों को अंतिम दौर का प्रशिक्षण देने और उन्हें आवश्यक डिजिटल उपकरणों व लॉगिन आईडी के साथ तैयार रहने को कहा गया है।

​राष्ट्रीय कार्य में अग्रणी रहने का संकल्प

​मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी स्वयं प्रतिदिन डैशबोर्ड के माध्यम से प्रगति की निगरानी करें। बिहार का लक्ष्य जनगणना-2027 के हर चरण में देश का अग्रणी राज्य बने रहना है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में सभी प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट पेश की।

बिहार ने रचा इतिहास: पांडुलिपि संरक्षण में देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य बना, 7.5 लाख पांडुलिपियों का हुआ सत्यापन

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Patna News: बिहार की गौरवशाली ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में राज्य सरकार को बड़ी सफलता मिली है। “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत बिहार अब पांडुलिपियों (Manuscripts) के सत्यापन के मामले में देश में तीसरे स्थान (Rank-3) पर पहुँच गया है।

​आज मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इन आंकड़ों को साझा किया गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि बिहार का लक्ष्य अब राजस्थान और मध्य प्रदेश को पीछे छोड़ते हुए देश में शीर्ष स्थान हासिल करना है।

​राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का बढ़ा कद

​समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि भारत की कुल सर्वेक्षित पांडुलिपियों (61,82,827) में अकेले बिहार की हिस्सेदारी 22% है।

  • ​टॉप-3 राज्य: राजस्थान (14.49 लाख) और मध्य प्रदेश (10.12 लाख) के बाद बिहार 7,49,923 पांडुलिपियों के साथ तीसरे स्थान पर है।
  • ​अभूतपूर्व प्रगति: महज 18 दिनों (09 अप्रैल से 27 अप्रैल) के भीतर सत्यापित पांडुलिपियों की संख्या 3.69 लाख से बढ़कर लगभग 7.50 लाख हो गई है।

​मधुबनी बना पांडुलिपियों का गढ़, गया और सीतामढ़ी भी आगे

​राज्य के भीतर जिलों के प्रदर्शन पर गौर करें तो मिथिलांचल और मगध का क्षेत्र ज्ञान के संरक्षण में अग्रणी रहा है:

      ​मधुबनी: 3,96,487 पांडुलिपियों के साथ राज्य में         नंबर वन।

​गया: 1,11,398 पांडुलिपियों के साथ दूसरे स्थान           पर।

​सीतामढ़ी: 85,441 पांडुलिपियों के साथ तीसरे             स्थान पर।

​पटना और दरभंगा: क्रमशः 52,548 और         24,139 पांडुलिपियों के साथ टॉप-5 में शामिल

जहाँ मधुबनी में रिकॉर्ड संख्या मिली है, वहीं जमुई जिले में सबसे कम (मात्र 10) पांडुलिपियाँ दर्ज की गई हैं।

 

​मुख्य सचिव के निर्देश: “खोज अभियान को बनाएं और सघन”

​मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कड़े निर्देश दिए:

      • ​सघन खोज अभियान: जिलों में छिपी हुई दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान के लिए ‘सर्च ऑपरेशन’ को और तेज किया जाए।
      • ​विशेषज्ञों का ‘अनौपचारिक समूह’: हर जिले में नोडल अधिकारी के नेतृत्व में एक ग्रुप बनाया जाए, जिसमें स्थानीय इतिहासकार, विशेषज्ञ और प्रबुद्ध नागरिक शामिल हों।
      • ​अस्वीकृति (Rejection) पर मंथन: कुल 5.59 लाख सर्वेक्षणों के अस्वीकृत होने पर चिंता जताते हुए मुख्य सचिव ने इसके कारणों के विश्लेषण और कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया।
      • ​स्वयं मॉनिटरिंग: सभी जिलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से इस मिशन का पर्यवेक्षण करेंगे ताकि बिहार को देश का शीर्ष पांडुलिपि संरक्षक राज्य बनाया जा सके।

​क्या है ‘ज्ञान भारतम् मिशन’?

​यह मिशन बिहार की प्राचीन ज्ञान परंपरा, दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का एक महा-अभियान है। इसके तहत राज्य के सभी 38 जिलों में सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रहे।

बिहार में रसोई गैस क्रांति: 1 लाख से अधिक घरों में पहुँची PNG, मुख्य सचिव ने कहा— “अब हर महीने लगेंगे 12,000 नए कनेक्शन”

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Patna News: बिहार के रसोई घरों में अब एलपीजी सिलेंडरों का दौर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और पाइप वाली सुरक्षित गैस (PNG) अपनी जगह बना रही है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित ‘क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप’ (CMG) की उच्चस्तरीय बैठक में राज्य की ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए। समीक्षा में यह निकलकर आया कि बिहार ने पीएनजी कनेक्शन के मामले में 1.07 लाख का आंकड़ा पार कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

​आधी से ज्यादा आबादी तक पहुँची पाइप वाली गैस

​बैठक में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, बिहार के बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व बदलाव आया है:

  • ​नेटवर्क का विस्तार: बिहार के सभी 38 जिलों को 14 भौगोलिक क्षेत्रों में बांटकर 6 गैस कंपनियों को काम सौंपा गया है।
  • ​गैसीफाइड जिले: सहरसा में 21 अप्रैल से गैस आपूर्ति शुरू होने के साथ ही राज्य के 50% जिले (19 जिले) अब पूरी तरह गैसीफाइड हो चुके हैं।
  • ​बढ़ती रफ्तार: पिछले साल तक जहाँ हर महीने केवल 3,000 कनेक्शन दिए जा रहे थे, वहीं अप्रैल 2026 में यह रफ्तार बढ़कर 9,132 कनेक्शन प्रति माह हो गई है। मुख्य सचिव ने इसे जल्द ही 12,000 तक पहुँचाने का लक्ष्य दिया है।

​मुजफ्फरपुर का ‘धरफरी एन्क्लेव’ बना मिसाल

​समीक्षा बैठक में मुजफ्फरपुर जिले की बड़ी उपलब्धि की चर्चा हुई। मुजफ्फरपुर का ‘धरफरी एन्क्लेव’ बिहार की पहली ऐसी सोसाइटी बन गई है जो पूरी तरह ‘LPG मुक्त’ है। यहाँ के हर घर में अब पाइप से गैस की आपूर्ति हो रही है, जो आधुनिक और सुरक्षित बिहार की नई तस्वीर पेश करता है।

​जिलावार प्रदर्शन की झलक:

जिला

कंपनी

लाइव कनेक्शन

स्थिति

पटना

GAIL

33,539

लक्ष्य का 59% पूर्ण

मुजफ्फरपुर

IOCL

16,970

सबसे अग्रणी

भोजपुर

–

10,226

संतोषजनक

पूर्णिया

–

7,897

कार्य जारी

मुख्य सचिव के कड़े निर्देश: इन 10 जिलों में काम होगा ‘युद्धस्तर’ पर

​मुख्य सचिव ने उन 10 जिलों (बांका, बक्सर, दरभंगा, मधुबनी आदि) में पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाने को कहा है जहाँ अभी गैस नहीं पहुँची है। उनके प्रमुख निर्देश निम्नलिखित हैं:

  1. ​कन्वर्जन रेट दोगुना करें: ठेकेदारों और प्लंबरों की संख्या बढ़ाकर प्रतिदिन लगने वाले कनेक्शनों की संख्या को डबल किया जाए।
  2. ​बांका और सहरसा के लिए डेडलाइन: बांका में 30 अप्रैल और सहरसा में 02 मई 2026 तक डी-पीएनजी (D-PNG) का पूर्ण परिचालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।
  3. ​वार्ड स्तर पर कैंप: पीएनजी के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए वार्डों में रजिस्ट्रेशन कैंप लगाने और ऑटो के माध्यम से जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं।
  4. ​दरभंगा-मधुबनी का लक्ष्य: इन जिलों में जुलाई-अगस्त 2026 तक हर हाल में गैस पहुँचाने का लक्ष्य तय किया गया है।

​सुरक्षित और सस्ता विकल्प है PNG

​बैठक के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि पीएनजी न केवल एलपीजी की तुलना में सस्ती है, बल्कि यह निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करती है और सिलेंडर खत्म होने के झंझट से मुक्ति दिलाती है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ इसकी निगरानी और भी आसान हो गई है।

​इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न गैस कंपनियों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के वरीय अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने बिहार को पूरी तरह गैस-ग्रिड से जोड़ने का संकल्प दोहराया।

बिहार: खरीफ सीजन से पहले किसानों को मिलेगी बड़ी सौगात! मुख्य सचिव ने दिए उत्तर कोयल और मंडई परियोजना को समय पर पूरा करने के सख्त निर्देश

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Patna News: बिहार सरकार कृषि और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसी कड़ी में आज बिहार के मुख्य सचिव  प्रत्यय अमृत ने जल संसाधन विभाग की दो सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं—‘उत्तर कोयल जलाशय परियोजना’ और ‘मंडई वीयर एवं नहर प्रणाली’—की उच्चस्तरीय समीक्षा की।

​मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की कोताही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका लक्ष्य आगामी खरीफ मौसम से पहले इन परियोजनाओं का लाभ सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है।

​करोड़ों की परियोजनाएं: सिंचाई का नया अध्याय

​बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने दोनों परियोजनाओं की वित्तीय और भौतिक प्रगति का बारीकी से विश्लेषण किया:

  • ​उत्तर कोयल जलाशय परियोजना: लगभग 1367.61 करोड़ रुपये की इस विशाल परियोजना से औरंगाबाद और गया जिलों की कृषि तस्वीर बदल जाएगी। इसकी समग्र प्रगति वर्तमान में 57.09% तक पहुँच चुकी है।
  • ​मंडई वीयर एवं नहर प्रणाली: 232.83 करोड़ रुपये की इस योजना का कार्य भी तेज़ी से चल रहा है, जिसके तहत नहर प्रणालियों का 60% से अधिक कार्य पूरा कर लिया गया है।

​ग्राउंड रिपोर्ट: कहाँ तक पहुँचा काम?

​मुख्य सचिव ने समीक्षा के दौरान प्रगति के आंकड़ों पर संतोष तो जताया, लेकिन गति बढ़ाने पर विशेष जोर दिया:

  • ​उत्तर कोयल: राइट मेन कैनाल (RMC) के अधिकांश हिस्सों में कार्य जारी है।
  • ​मंडई वीयर: बायां मुख्य नहर प्रणाली में 63.50% और कररूआ डिस्ट्रीब्यूटरी में 66.05% कार्य पूर्ण हो चुका है। पिछले एक सप्ताह में ही 2.40% की अतिरिक्त प्रगति दर्ज की गई है।

​मुख्य सचिव के 4 कड़े निर्देश: ‘काम में लाएं रफ्तार’

​ खरीफ सीजन है ‘डेडलाइन’

​मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि मानसून और खरीफ की बुआई से पहले नहरों का ढांचा तैयार होना चाहिए। लक्ष्य यह है कि किसानों को इस सीजन में सिंचाई के लिए पानी की कमी न हो।

​ मैनपावर और मशीनों की संख्या बढ़ाएं

​काम की गति को दोगुना करने के लिए कार्यस्थलों पर Excavators, Tippers और Rollers जैसी मशीनों के साथ-साथ मजदूरों की संख्या तुरंत बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

​ भूमि अधिग्रहण और भुगतान में तेजी

​औरंगाबाद के शेष 42 रैयतों की भूमि रजिस्ट्री इसी सप्ताह पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है। साथ ही, परियावाँ और बंधुगंज जैसे क्षेत्रों में किसानों के मुआवजे का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा गया है ताकि किसी भी विवाद के कारण काम न रुके।

​ गुणवत्ता से समझौता नहीं

​मुख्य सचिव ने अधिकारियों को ‘ऑन-द-स्पॉट’ तकनीकी समाधान निकालने और साप्ताहिक मॉनिटरिंग करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि रफ्तार के चक्कर में निर्माण की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।

​कौन-कौन रहे बैठक में शामिल?

​इस महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव, गया के जिलाधिकारी, संबंधित जिलों के अभियंता प्रमुख, WAPCOS के प्रतिनिधि और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

​ मुख्य सचिव की इस सक्रियता से यह साफ है कि बिहार सरकार औरंगाबाद और गया के किसानों को सूखे की मार से बचाने और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब देखना यह है कि विभाग खरीफ मौसम की इस चुनौती को कितनी जल्दी धरातल पर उतार पाता है।