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बिहार में मानसून को लेकर बड़ी चेतावनी: जून-जुलाई में सामान्य से कम बारिश के आसार, मुख्य सचिव ने बिजली-पानी और स्वास्थ्य विभाग को किया अलर्ट

​हीट वेव का हाई अलर्ट: 5 मई तक और तपेगा बिहार, अस्पतालों में विशेष वार्ड और मवेशियों के लिए पानी के टैंकर तैनात करने के निर्देश।

Patna News: बिहार में इस साल मानसून की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने वाली है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में ‘बिहार मौसम सेवा केंद्र’ (BMSK) ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। पूर्वानुमान के अनुसार, इस साल जून और जुलाई के महीनों में ‘सामान्य से कम’ (Below Normal) वर्षा होने की संभावना है, जो कृषि और जल स्तर के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

​मुख्य सचिव ने इस स्थिति को देखते हुए राज्य के सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को अगले एक हफ्ते तक विशेष सतर्कता बरतने और संसाधनों को दुरुस्त रखने का कड़ा निर्देश दिया है।

तापमान का टॉर्चर: 5 मई तक और बढ़ेगा पारा

​मौसम सेवा केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, 1 मार्च से अब तक राज्य के तापमान में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है:

  • सबसे गर्म इलाके: दक्षिण-पश्चिमी (SW) और दक्षिण-मध्य (SC) बिहार के जिले सबसे अधिक तप रहे हैं।
  • पूर्वानुमान: 27 अप्रैल से 05 मई 2026 के बीच राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में और भी बढ़ोतरी होने की आशंका है।
  • चौबीसों घंटे निगरानी: सभी 6 अंचलों (NW, NC, NE, SW, SC, SE) में दिन और रात के तापमान की सघन मॉनिटरिंग की जा रही है।

मानसून 2026: शुरुआती महीनों में सूखे जैसी चुनौती!

​बैठक में साझा किए गए मानसून के आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है:

  • कम बारिश: जून-जुलाई में कम बारिश के कारण धान की रोपनी और भू-जल स्तर पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • अगस्त में राहत: मानसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) में स्थिति सुधरने की उम्मीद है।
  • प्रभावित क्षेत्र: मध्य और पश्चिमी बिहार में बारिश की कमी सबसे अधिक देखी जा सकती है, जबकि उत्तर-पूर्वी बिहार में स्थिति थोड़ी बेहतर रहेगी।

मुख्य सचिव के कड़े निर्देश: बिजली, पानी और पशुधन पर विशेष नजर

​मुख्य सचिव ने आपदा प्रबंधन की तर्ज पर सभी विभागों को सक्रिय रहने को कहा है:

 निर्बाध बिजली और QRT की तैनाती

​गर्मी में बढ़ते लोड को देखते हुए बिजली विभाग को निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। हर प्रमंडल में ‘क्विक रिस्पांस टीम’ (QRT) तैनात होगी, जो ट्रांसफार्मर जलने या तार टूटने जैसी शिकायतों को न्यूनतम समय में ठीक करेगी।

 अस्पतालों में ‘हीट स्ट्रोक’ वार्ड

​स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि सभी अस्पतालों में लू से पीड़ित मरीजों के लिए विशेष वार्ड और जीवन रक्षक दवाएं तैयार रखें। जिलाधिकारियों को सिविल सर्जनों के साथ नियमित बैठक करने के निर्देश दिए गए हैं।

 पशुधन की सुरक्षा

​पहली बार पशुओं की सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए मुख्य सचिव ने पशु चिकित्सालयों में ORS और दवाओं का स्टॉक रखने को कहा है। सार्वजनिक हौदों और तालाबों में टैंकरों के जरिए पानी भरने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बेजुबान जानवरों को लू से बचाया जा सके।

 पेयजल और कृषि जागरूकता

​PHED को चापाकलों और नल-जल योजनाओं को चालू रखने का जिम्मा सौंपा गया है। किसानों को ‘BMSK’ ऐप के माध्यम से मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

निष्कर्ष: अगले 7 दिन बेहद महत्वपूर्ण

​मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि 27 अप्रैल से 05 मई तक की अवधि अत्यंत संवेदनशील है। आपदा प्रबंधन विभाग को किसी भी आपात स्थिति के लिए ‘स्टैंडबाय’ पर रखा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि मौसम की मार का असर आम जनजीवन और मवेशियों पर कम से कम पड़े।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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