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बिहार ने रचा इतिहास: पांडुलिपि संरक्षण में देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य बना, 7.5 लाख पांडुलिपियों का हुआ सत्यापन

​मिशन मोड में 'ज्ञान भारतम्': देश के कुल सर्वेक्षित दस्तावेजों में बिहार की 22% हिस्सेदारी, अब नंबर-1 बनने की तैयारी।

Patna News: बिहार की गौरवशाली ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में राज्य सरकार को बड़ी सफलता मिली है। “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत बिहार अब पांडुलिपियों (Manuscripts) के सत्यापन के मामले में देश में तीसरे स्थान (Rank-3) पर पहुँच गया है।

​आज मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इन आंकड़ों को साझा किया गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि बिहार का लक्ष्य अब राजस्थान और मध्य प्रदेश को पीछे छोड़ते हुए देश में शीर्ष स्थान हासिल करना है।

राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का बढ़ा कद

​समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि भारत की कुल सर्वेक्षित पांडुलिपियों (61,82,827) में अकेले बिहार की हिस्सेदारी 22% है।

  • टॉप-3 राज्य: राजस्थान (14.49 लाख) और मध्य प्रदेश (10.12 लाख) के बाद बिहार 7,49,923 पांडुलिपियों के साथ तीसरे स्थान पर है।
  • अभूतपूर्व प्रगति: महज 18 दिनों (09 अप्रैल से 27 अप्रैल) के भीतर सत्यापित पांडुलिपियों की संख्या 3.69 लाख से बढ़कर लगभग 7.50 लाख हो गई है।

मधुबनी बना पांडुलिपियों का गढ़, गया और सीतामढ़ी भी आगे

​राज्य के भीतर जिलों के प्रदर्शन पर गौर करें तो मिथिलांचल और मगध का क्षेत्र ज्ञान के संरक्षण में अग्रणी रहा है:

      ​मधुबनी: 3,96,487 पांडुलिपियों के साथ राज्य में         नंबर वन

गया: 1,11,398 पांडुलिपियों के साथ दूसरे स्थान           पर।

सीतामढ़ी: 85,441 पांडुलिपियों के साथ तीसरे             स्थान पर।

पटना और दरभंगा: क्रमशः 52,548 और         24,139 पांडुलिपियों के साथ टॉप-5 में शामिल

जहाँ मधुबनी में रिकॉर्ड संख्या मिली है, वहीं जमुई जिले में सबसे कम (मात्र 10) पांडुलिपियाँ दर्ज की गई हैं।

 

मुख्य सचिव के निर्देश: “खोज अभियान को बनाएं और सघन”

​मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कड़े निर्देश दिए:

      • सघन खोज अभियान: जिलों में छिपी हुई दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान के लिए ‘सर्च ऑपरेशन’ को और तेज किया जाए।
      • विशेषज्ञों का ‘अनौपचारिक समूह’: हर जिले में नोडल अधिकारी के नेतृत्व में एक ग्रुप बनाया जाए, जिसमें स्थानीय इतिहासकार, विशेषज्ञ और प्रबुद्ध नागरिक शामिल हों।
      • अस्वीकृति (Rejection) पर मंथन: कुल 5.59 लाख सर्वेक्षणों के अस्वीकृत होने पर चिंता जताते हुए मुख्य सचिव ने इसके कारणों के विश्लेषण और कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया।
      • स्वयं मॉनिटरिंग: सभी जिलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से इस मिशन का पर्यवेक्षण करेंगे ताकि बिहार को देश का शीर्ष पांडुलिपि संरक्षक राज्य बनाया जा सके।

क्या है ‘ज्ञान भारतम् मिशन’?

​यह मिशन बिहार की प्राचीन ज्ञान परंपरा, दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का एक महा-अभियान है। इसके तहत राज्य के सभी 38 जिलों में सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रहे।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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