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बिहार: मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने संभाला लघु जल संसाधन विभाग का पदभार, बोले- ‘किसानों की खुशहाली ही प्राथमिकता’

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Patna News: बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने शनिवार को पटना स्थित विकास भवन में लघु जल संसाधन विभाग के मंत्री के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया और नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएँ दीं।

​सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और जल प्रबंधन पर जोर

​पदभार संभालते ही डॉ. संतोष कुमार सुमन ने विभाग की प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दीं। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं में विस्तार करना और जल संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। मंत्री ने जोर देकर कहा कि जब किसानों को समय पर और पर्याप्त पानी मिलेगा, तभी उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार आएगा।

​अधिकारियों के साथ भविष्य की योजनाओं पर मंथन

​पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद विभाग के सचिव बी. कार्तिकेय धनजी ने मंत्री महोदय को वर्तमान में चल रही विभिन्न योजनाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में आगामी कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा की गई। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि:

  • ​योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें की जाएंगी।
  • ​किसानों की जरूरतों को केंद्र में रखकर नई सिंचाई योजनाएं शुरू की जाएंगी।
  • ​भू-जल स्तर (Water Level) में सुधार के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

​किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाना मुख्य लक्ष्य

​मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. सुमन ने कहा, “किसानों की आर्थिक उन्नति ही राज्य की उन्नति है। जल स्तर में वृद्धि और सिंचाई के आधुनिक साधनों के माध्यम से किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाना हमारा मुख्य लक्ष्य है।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए विभाग तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनेगा।

​इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपर सचिव संगीता सिंह, अपर सचिव सुशांत कुमार और अभियंता प्रमुख सुनील कुमार सहित विभाग के कई अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बिहार स्टेट कराटे चैंपियनशिप: भागलपुर के 14 जांबाज पटना में दिखाएंगे दमखम, गोल्ड मेडल पर टिकी निगाहें

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Bhagalpur News: बिहार की राजधानी पटना में आयोजित होने वाली बिहार स्टेट कराटे चैंपियनशिप 2026 में भागलपुर के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए तैयार हैं। 9 और 10 मई को पटना के दीघा नासरीगंज स्थित St. Dominic Savio’s High School में होने वाली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भागलपुर जिले के 14 होनहार बालक और बालिकाएं हिस्सा लेंगे।

​नेशनल चैंपियनशिप के लिए खुलेगा रास्ता

​जिला कराटे एसोसिएशन ऑफ भागलपुर के अध्यक्ष मो. मसीउल ओला ने बताया कि यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जो भी खिलाड़ी गोल्ड मेडल जीतेंगे, उनका चयन सीधे नेशनल कराटे चैंपियनशिप के लिए किया जाएगा। भागलपुर के खिलाड़ियों ने पिछले कुछ समय में अपने प्रदर्शन से जिले का मान बढ़ाया है, जिससे इस बार भी पदकों की उम्मीद काफी ज्यादा है।

​मैदान में उतरेंगे भागलपुर के ये सितारे

​इस प्रतियोगिता में भागलपुर की टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • ​बालिका वर्ग: रुद्राणी रानी, इकुरा कमर, सबा खातून, अफरीन जमील, महिरा खान, समामा परवीन, पिरयल कुमारी और वाश्नवी।
  • ​बालक वर्ग: शेख सानी, अर्शिल खान, शिवम राज, सुदीप कुमार और दिव्यांशु।

​अनुभवी कोच के मार्गदर्शन में तैयारी

​खिलाड़ियों की इस सफलता के पीछे उनके प्रशिक्षकों की कड़ी मेहनत है। टीम को रेनशी मो. मसीउल ओला और सेंसेई बाल्मीकि कुमार द्वारा विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। खेल प्रेमियों और एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी सेंसेई मनीष कुमार शर्मा व ट्रेजर सेंसेई बाल्मीकि कुमार ने सभी खिलाड़ियों को जीत के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

भागलपुर को जाम से मिलेगी मुक्ति: BRO बनाएगा शहर में शानदार ‘बेली ब्रिज’, DM ने दी हरी झंडी

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Bhagalpur News: सिल्क सिटी की चरमराई यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिला प्रशासन ने एक मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। शहर के पुराने पुलों पर बढ़ते दबाव और आए दिन लगने वाले भीषण जाम से निजात दिलाने के लिए अब बीआरओ (Border Roads Organization) भागलपुर में ‘बेली ब्रिज’ का निर्माण करेगा। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की पुष्टि करते हुए बताया कि निर्माण कार्य को लेकर सभी तकनीकी अड़चनें दूर कर ली गई हैं।

​BRO मुख्यालय से मिली फाइनल मंजूरी

​जिलाधिकारी के अनुसार, सीमा सड़क संगठन (BRO) की मुख्यालय स्तर की टीम ने प्रस्तावित स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है। टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भौगोलिक और तकनीकी दृष्टिकोण से यहाँ बेली ब्रिज का निर्माण सबसे सटीक समाधान है। BRO की एक्सपर्ट टीम आज या कल तक भागलपुर पहुँच जाएगी, जिसके तुरंत बाद युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया जाएगा।

​पुल की खासियतें और क्षमता

​प्रस्तावित बेली ब्रिज को खास तौर पर शहर के आंतरिक यातायात को सुगम बनाने के लिए डिजाइन किया गया है:

  • ​चौड़ाई: इस पुल की कुल चौड़ाई 3.5 मीटर होगी।
  • ​लक्षित वाहन: यह पुल मुख्य रूप से हल्के वाहनों (कार), ई-रिक्शा, बाइक और पैदल यात्रियों के लिए होगा।
  • ​सुरक्षा: बीआरओ की सीधी निगरानी में बनने के कारण यह पुल पूरी तरह सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला होगा।

​एक महीने के भीतर दौड़ने लगेंगे वाहन

​प्रशासन इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी गंभीर है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा:

​”हमारा प्रयास है कि निर्माण कार्य शुरू होने के एक महीने के भीतर या उससे पहले ही पुल को आम जनता के लिए खोल दिया जाए। इससे मुख्य पुलों पर वाहनों का लोड कम होगा और लोगों को जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।”

 

​क्यों पड़ी बेली ब्रिज की जरूरत?

​भागलपुर के पुराने पुल वर्तमान में अपनी क्षमता से अधिक बोझ झेल रहे हैं। जर्जर स्थिति और संकीर्ण रास्तों के कारण घंटों जाम लगा रहता है, जिससे एम्बुलेंस से लेकर स्कूली बसों तक को परेशानी होती है। बेली ब्रिज एक ‘क्विक रिस्पांस’ समाधान के रूप में देखा जा रहा है, जो कम समय में तैयार होकर शहर की लाइफलाइन को मजबूती देगा।

सबौर में ‘नल-जल योजना’ के उड़े परखच्चे, 6 साल से बूंद-बूंद को तरस रहे 200 परिवार

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Bhagalpur News: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सात निश्चय योजना’ के तहत ‘हर घर नल का जल’ पहुँचाने का दावा भागलपुर के सबौर प्रखंड में खोखला साबित हो रहा है। राजंदीपुर पंचायत के वार्ड नंबर 2 में पिछले छह वर्षों से ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौन साधे बैठे हैं।

​दशकों पुरानी समस्या: 15 दिन पानी, फिर सालों का सूखा

​वार्ड नंबर 2 के ग्रामीणों का दर्द तब छलक उठा जब भीषण गर्मी में चापाकल भी साथ छोड़ने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जब से यहाँ पानी की टंकी स्थापित की गई है, मात्र 15 दिनों तक ही नलों में पानी आया। उसके बाद से पाइपलाइन फटने और टोटियाँ टूटने के कारण योजना पूरी तरह ठप हो गई। आज स्थिति यह है कि:

  • ​200 घरों में सप्लाई बंद: करीब दो सौ परिवारों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हो रहा।
  • ​बिखरी पड़ी है योजना: पाइपलाइन जगह-जगह से फट चुकी है और सड़कों की हालत भी जर्जर हो गई है।
  • ​रखरखाव का अभाव: घरों में लगी टोटियाँ टूटकर कचरे में तब्दील हो चुकी हैं।

​गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

​नल का जल नहीं मिलने के कारण ग्रामीण पुराने चापाकलों पर निर्भर हैं। स्थानीय निवासी सुलेखा देवी ने बताया कि चापाकल से निकलने वाला पानी बेहद गंदा और दुर्गंधयुक्त है। मजबूरी में इसी पानी से खाना बनाना और नहाना पड़ता है।

  • ​बीमारी का खतरा: गंदा पानी पीने से बच्चे और बुजुर्ग बार-बार बीमार पड़ रहे हैं।
  • ​शादी-ब्याह में मुसीबत: घरों में होने वाले मांगलिक कार्यों या मेहमानों के आने पर पानी का इंतजाम करना किसी जंग जीतने से कम नहीं होता।

​वार्ड सदस्य की बेबसी या लापरवाही?

​मामले को लेकर जब ग्रामीणों ने वार्ड सदस्य और मुखिया से गुहार लगाई, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। वार्ड 2 के पंच सुमित कुमार और अन्य ग्रामीणों के अनुसार, वार्ड सदस्य का कहना है कि “जब फंड आएगा तब ठीक होगा, अभी हम कुछ नहीं कर सकते।” ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले उनसे पानी के नाम पर 30-30 रुपये की मांग भी की गई थी, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

​जांच और कार्रवाई का इंतजार

​6 साल बीत जाने के बाद भी अब तक किसी भी पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इस वार्ड की सुध नहीं ली है। भीषण गर्मी के इस मौसम में ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की गई और जर्जर पाइपलाइन की मरम्मत नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

​“6 साल से हम लोग एक-दूसरे के घरों से पानी ढोकर ला रहे हैं। चापाकल का पानी महकता है, लेकिन प्यास बुझाने के लिए वही जहर पीना हमारी मजबूरी है।”

— सुलेखा देवी, स्थानीय ग्रामीण

भागलपुर: बरारी घाट पर ‘जीविका दीदियों’ का कमाल, मात्र ₹50 में मिल रहा घर जैसा भरपेट भोजन

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Bhagalpur News: गंगा के पावन तट बरारी घाट पर इन दिनों श्रद्धा और भक्ति के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की एक नई खुशबू महक रही है। यह खुशबू है ‘जीविका’ की दीदियों द्वारा संचालित उस रसोई की, जिसने न केवल श्रद्धालुओं की राह आसान कर दी है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण की एक नई मिसाल भी पेश की है।

​सेवा और स्वावलंबन का संगम

​बिहार की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने वाला ‘जीविका’ मिशन अब धरातल पर बड़े बदलाव ला रहा है। बरारी घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं और राहगीरों को अक्सर उचित दर पर शुद्ध भोजन के लिए परेशान होना पड़ता था। इसी समस्या को दूर करने के लिए ‘गंगा जीविका स्वयं सहायता समूह’ ने यहाँ एक सार्वजनिक रसोई की शुरुआत की है।

​महंगाई के दौर में ₹50 में ‘शुद्ध थाली’

​जहाँ आज के समय में बाहर खाना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ता है, वहीं जीविका दीदियों की इस रसोई ने सबको हैरान कर दिया है।

  • ​भरपेट भोजन: मात्र ₹50 में शुद्ध शाकाहारी थाली (चावल, दाल, सब्जी, पापड़ और सलाद)।
  • ​स्वाद: पूरी तरह से घरेलू और शुद्धता के मानकों पर आधारित।
  • ​रोजगार: समूह की लक्ष्मी देवी और उनकी साथी महिलाएँ खुद इस रसोई का प्रबंधन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

​मेनू कार्ड: लिट्टी-चोखा से लेकर सत्तू के शरबत तक

​भोजन के अलावा यहाँ बिहार के पारंपरिक व्यंजनों की भी भरमार है। घाट पर आने वाले लोग इन किफायती दरों का आनंद ले रहे हैं:

  • ​लिट्टी-चोखा: ₹20 में 2 पीस (चटनी के साथ)।
  • ​चूड़ा फ्राई और घुघनी: मात्र ₹30 प्रति प्लेट।
  • ​शाम का नाश्ता: ₹25 में 5 पीस गरमा-गरम प्याज पकौड़े।
  • ​ड्रिंक्स: ₹10 की चाय और ₹20 में बिहार का ‘पावर ड्रिंक’ सत्तू शरबत।
  • ​अन्य चीजें (बिस्किट, पानी बोतल) एमआरपी (MRP) दर पर ही उपलब्ध हैं।

​पारदर्शिता और स्वच्छता पर विशेष जोर

​समूह की सदस्य लक्ष्मी देवी ने बताया कि रसोई के पहले ही दिन से लोगों का रिस्पॉन्स जबरदस्त रहा है। घाट पर अक्सर खाने-पीने की चीजों के दाम वसूलने में मनमानी होती थी, लेकिन यहाँ हर चीज की रेट लिस्ट पारदर्शी तरीके से बोर्ड पर लगा दी गई है, ताकि किसी के साथ धोखाधड़ी न हो। दीदियाँ सुबह से ही साफ-सफाई के साथ तैयारियों में जुट जाती हैं।

​चारदीवारी से निकलकर प्रबंधन तक का सफर

​यह पहल केवल भोजन परोसने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है जो कभी घर तक सीमित थीं। आज वे एक प्रोफेशनल यूनिट की तरह शहर के महत्वपूर्ण स्थल पर सार्वजनिक सेवा प्रदान कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन और जनता इस पारदर्शी व्यवस्था की जमकर सराहना कर रही है।

​“हमारा उद्देश्य लोगों को सस्ते में शुद्ध भोजन देना और अपनी दीदियों को रोजगार से जोड़ना है। पहले दिन से ही लोग हमारे हाथ के स्वाद को पसंद कर रहे हैं।”

— लक्ष्मी देवी, सदस्य, गंगा जीविका स्वयं सहायता समूह

भागलपुर: राष्ट्रीय लोक अदालत में उमड़ी भीड़, त्वरित न्याय के लिए बनाए गए 31 विशेष बेंच

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Bhagalpur News: आम जनमानस को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से शनिवार को भागलपुर जिले में इस वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य आपसी सुलह के आधार पर सालों से लंबित मामलों का ऑन-द-स्पॉट निपटारा करना रहा।

​न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों ने किया उद्घाटन

​लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश राज कुमार राजपूत, प्रिंसिपल जज दीपंकर पांडे, जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर कई अन्य वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ता भी मौजूद रहे।

​ पहली बार ट्रैफिक चालान के लिए अलग बेंच

​इस बार की लोक अदालत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। प्रिंसिपल जज दीपंकर पांडे ने जानकारी दी कि:

  • ​विशेष ट्रैफिक बेंच: आम लोगों की सुविधा के लिए पहली बार जिला स्कूल में ट्रैफिक चालान से संबंधित मामलों के निष्पादन हेतु विशेष बेंच लगाया गया है।
  • ​उद्देश्य: ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लंबित मामलों को जल्द सुलझाना ताकि लोगों को कोर्ट के चक्कर न लगाने पड़ें।

​बेंचों का विवरण: जिले भर में व्यापक तैयारी

​लोक अदालत को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरे जिले में कुल 31 बेंच गठित किए गए हैं:

  1. ​भागलपुर व्यवहार न्यायालय: 22 बेंच
  2. ​नवगछिया: 07 बेंच
  3. ​कहलगांव: 02 बेंच

​इन मामलों का हुआ ऑन-द-स्पॉट निपटारा

​राष्ट्रीय लोक अदालत में वैसे मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है जो आपसी सहमति से सुलझाए जा सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • ​बैंकिंग: बैंक ऋण और लोन रिकवरी से जुड़े मामले।
  • ​उपभोक्ता सेवाएं: बिजली बिल और पानी बिल संबंधी विवाद।
  • ​पारिवारिक विवाद: वैवाहिक और आपसी मतभेद के मामले।
  • ​दावा एवं चालान: मोटर दुर्घटना दावा (MACT) और भारी संख्या में ट्रैफिक चालान।

​अधिकारियों का संदेश: “सुलह से न्याय की ओर”

​जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य मुकदमेबाजी के बोझ को कम करना और पक्षकारों के बीच कटुता को समाप्त कर प्रेम-भाव स्थापित करना है। इसमें किए गए फैसले की कोई अपील नहीं होती, जिससे मामला हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।

सुल्तानगंज के ‘सरकार’ ने तोड़ा दम: पटना के मेदांता में सभापति राजकुमार गुड्डू का निधन,

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Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर जिला अंतर्गत सुल्तानगंज से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। नगर परिषद कार्यालय में हुए भीषण गोलीकांड में गंभीर रूप से घायल सभापति राजकुमार गुड्डू ने शनिवार को पटना के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। 28 अप्रैल को अपराधियों की गोलियों का शिकार हुए गुड्डू पिछले 12 दिनों से वेंटिलेटर पर थे और मौत से जंग लड़ रहे थे, लेकिन अंततः उन्हें बचाया नहीं जा सका।

​ पटना के निजी अस्पताल में ली अंतिम सांस

​28 अप्रैल को सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में हुए हमले के बाद राजकुमार गुड्डू को पहले भागलपुर के मायागंज अस्पताल ले जाया गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तुरंत पटना रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गोलियां लगी थीं। लंबे इलाज और विशेषज्ञों की टीम की निगरानी के बावजूद शनिवार को उनकी स्थिति बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया।

28 अप्रैल का वो ‘काला दिन’: जब दहल उठा था सुल्तानगंज

​मालूम हो कि 28 अप्रैल को दिनदहाड़े अपराधियों ने सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस कायराना हमले में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्ण भूषण कुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि सभापति राजकुमार गुड्डू लहूलुहान होकर गिर पड़े थे। यह हमला बिहार की कानून व्यवस्था और सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान था।

​ सुल्तानगंज में शोक की लहर, बाजार बंद

​राजकुमार गुड्डू के निधन की खबर जैसे ही सुल्तानगंज पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उनके आवास की ओर उमड़ पड़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई। घटना के विरोध में और शोक स्वरूप सुल्तानगंज के कई बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

​ पुलिसिया कार्रवाई और न्याय की मांग

​इस दोहरे हत्याकांड (अब सभापति के निधन के बाद) को लेकर पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव है। हालांकि, घटना के मुख्य आरोपी को पुलिस मुठभेड़ में ढेर किया जा चुका है, लेकिन साजिश के पीछे शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब करने की मांग अब तेज हो गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है।

बिहार: मंत्री नीतीश मिश्रा ने संभाला नगर विकास विभाग का पदभार; बोले- 50 वर्षों की जरूरतों को देखकर बनेंगे शहरों के मास्टर प्लान

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Patna News: बिहार सरकार के वरिष्ठ नेता नीतीश मिश्रा ने आज विकास भवन स्थित कार्यालय में नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। पदभार संभालते ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बिहार के शहरों में “ईज़ ऑफ़ लिविंग” (Ease of Living) को बेहतर बनाना और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

​विभागीय अधिकारियों ने किया स्वागत

​मंत्री के आगमन पर विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने उनका भव्य स्वागत किया और विभागीय योजनाओं की वर्तमान स्थिति से उन्हें अवगत कराया। इस अवसर पर सचिव संदीप आर. पुडकलकट्टी और पटना प्रमंडल के आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

​शहरीकरण की चुनौतियों पर विजन

​नीतीश मिश्रा ने कहा कि बिहार में शहरीकरण की रफ्तार तेज हुई है और अब यह 17 प्रतिशत के करीब पहुंच चुका है। उन्होंने कहा:

​”शहर किसी भी राज्य के सुशासन का आईना होते हैं। जब कोई बिहार आता है, तो पटना और अन्य शहरों की स्थिति देखकर ही राज्य की छवि बनाता है। हमारी कोशिश होगी कि राज्य के सभी 264 नगर निकायों को आत्मनिर्भर और बेहतर बनाया जाए।”

 

  ​मुख्य बातें:

  • ​11 सैटेलाइट टाउनशिप: मुख्यमंत्री के विजन को आगे बढ़ाते हुए 11 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करना प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही रोहतास के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।
  • ​50 साल का मास्टर प्लान: राज्य के शहरों का विकास अगले 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
  • ​आधुनिक सुविधाएं: वेस्ट मैनेजमेंट (कचरा प्रबंधन), बेहतर बिजली व्यवस्था, सिटी सर्विलांस (CCTV) और स्वच्छता पर विशेष जोर रहेगा।
  • ​हैंड-होल्डिंग सपोर्ट: नगर निकायों को स्थानीय स्तर पर बेहतर कार्य करने के लिए विभाग की ओर से तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग दिया जाएगा।

​जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का संकल्प

​मंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि उन्हें इतनी शक्ति मिले कि वे बिहार के विकास के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य कर सकें।

बिहार: 1 करोड़ युवाओं को रोजगार से जोड़ने का मिशन शुरू, मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने संभाला कार्यभार

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Patna News: बिहार सरकार के नवनिर्मित युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के माननीय मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने आज विधिवत अपना कार्यभार संभाल लिया है। राजधानी के नियोजन भवन स्थित कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के दौरान विभाग के सचिव डॉ. कौशल किशोर ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। कार्यभार संभालते ही मंत्री महोदया ने स्पष्ट कर दिया कि विभाग का एकमात्र लक्ष्य बिहार के 1 करोड़ युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।

​अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक: योजनाओं की ली बिंदुवार जानकारी

​पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में निम्नलिखित प्रमुख प्रभागों की कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई:

  • ​बिहार कौशल विकास मिशन (BSDM) की वर्तमान प्रगति।
  • ​बिहार राज्य समुद्र पार नियोजन ब्यूरो के माध्यम से विदेशी रोजगार के अवसर।
  • ​आईटीआई (ITI) संस्थानों में सीटों और प्रशिक्षुओं की स्थिति।
  • ​युवा आयोग के आगामी कार्यक्रम और प्राथमिकताएं।

​“चुनौतियों को अवसर में बदलेंगे” – माननीय मंत्री

​बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि चूंकि यह विभाग मात्र 5 महीने पहले ही अस्तित्व में आया है, इसलिए प्रारंभिक चुनौतियां स्वाभाविक हैं। उन्होंने अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा:

​“सात निश्चय पार्ट-3 के तहत 2025 से 2030 के बीच एक करोड़ युवाओं को रोजगार देना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। विभाग की योजनाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाया जाएगा।”

 

​इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर विशेष जोर

​मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने निजी प्रशिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचना की कमी के बावजूद मान्यता पाने वाले संस्थानों पर नजर रखी जाएगी। प्रशिक्षण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। सरकारी संस्थानों में मौजूद समस्याओं को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान किया जाएगा।

​विकसित भारत 2047 का विजन

​मंत्री ने माननीय प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि बिहार इस मिशन में अपनी महत्ती भूमिका निभाएगा। विभाग युवाओं को स्किल्ड (कौशल युक्त) बनाकर उन्हें न केवल राज्य, बल्कि वैश्विक स्तर पर रोजगार के काबिल बनाएगा।

​इन अधिकारियों की रही मौजूदगी

​इस महत्वपूर्ण बैठक और पदभार ग्रहण समारोह के दौरान बिहार युवा आयोग के सचिव विकास कुमार, बिहार कौशल विकास मिशन के अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हेमंत कुमार सिंह सहित विभाग के तमाम वरीय अधिकारी मौजूद रहे। विभागीय सचिव डॉ. कौशल किशोर ने मंत्री जी को आश्वस्त किया कि पूरी टीम समर्पित होकर तय समय सीमा के भीतर लक्ष्यों को प्राप्त करेगी।

बिहार में औद्योगिक क्रांति को मिलेगी नई रफ़्तार: श्रेयसी सिंह ने संभाला उद्योग मंत्री का कार्यभार

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Patna News: बिहार सरकार की नवनियुक्त उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने आज औपचारिक रूप से उद्योग विभाग का पदभार ग्रहण कर लिया। विभाग आगमन पर सचिव कुंदन कुमार ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। पदभार संभालने के साथ ही मंत्री महोदया ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी प्राथमिकता राज्य में निवेश लाना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।

​प्रेजेंटेशन के जरिए जानी विभाग की बारीकियां

​पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद, उद्योग सचिव कुंदन कुमार ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण (PPT) के माध्यम से माननीय मंत्री को विभाग की वर्तमान योजनाओं और प्रगति की जानकारी दी। इस दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर चर्चा हुई:

  • ​औद्योगिक विकास: राज्य में नए उद्योगों की स्थापना की स्थिति।
  • ​निवेश प्रोत्साहन: निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बनाई गई नीतियां।
  • ​इंफ्रास्ट्रक्चर: औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार।
  • ​सिंगल विंडो सिस्टम: निवेशकों को दी जाने वाली त्वरित सुविधाओं का विश्लेषण।

​“बिहार को इंडस्ट्रियल हब बनाना गौरव की बात” – श्रेयसी सिंह

​कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से बात करते हुए श्रेयसी सिंह ने कहा, “बिहार में उद्योग मंत्री के रूप में जिम्मेदारी मिलना मेरे लिए गर्व का विषय है। राज्य सरकार औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने आगे कहा कि उनका लक्ष्य निवेशकों के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जो अनुकूल, पारदर्शी और उद्योग समर्थ हो। विभाग का पूरा ध्यान इस बात पर रहेगा कि सरकारी प्रक्रियाओं में कोई देरी न हो और निवेशकों को सुगम सेवाएं प्राप्त हों।

​रोजगार और पारदर्शिता पर मुख्य फोकस

​मंत्री ने अपनी प्राथमिकताएं साझा करते हुए बताया कि:

  1. ​रोजगार सृजन: उद्योगों के जरिए स्थानीय युवाओं को अधिक से अधिक काम दिलाना।
  2. ​त्वरित कार्य: विभागीय कार्यप्रणाली को प्रभावी और डिजिटल बनाकर फाइलों का निपटारा जल्द करना।
  3. ​निवेश आकर्षण: देश-विदेश के बड़े निवेशकों को बिहार की ओर आकर्षित करना।