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सबौर में ‘नल-जल योजना’ के उड़े परखच्चे, 6 साल से बूंद-बूंद को तरस रहे 200 परिवार

प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ी मुख्यमंत्री की योजना, सबौर के राजंदीपुर में नल-जल योजना केवल कागजों तक सीमित।"

Bhagalpur News: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सात निश्चय योजना’ के तहत ‘हर घर नल का जल’ पहुँचाने का दावा भागलपुर के सबौर प्रखंड में खोखला साबित हो रहा है। राजंदीपुर पंचायत के वार्ड नंबर 2 में पिछले छह वर्षों से ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौन साधे बैठे हैं।

​दशकों पुरानी समस्या: 15 दिन पानी, फिर सालों का सूखा

​वार्ड नंबर 2 के ग्रामीणों का दर्द तब छलक उठा जब भीषण गर्मी में चापाकल भी साथ छोड़ने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जब से यहाँ पानी की टंकी स्थापित की गई है, मात्र 15 दिनों तक ही नलों में पानी आया। उसके बाद से पाइपलाइन फटने और टोटियाँ टूटने के कारण योजना पूरी तरह ठप हो गई। आज स्थिति यह है कि:

  • ​200 घरों में सप्लाई बंद: करीब दो सौ परिवारों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हो रहा।
  • ​बिखरी पड़ी है योजना: पाइपलाइन जगह-जगह से फट चुकी है और सड़कों की हालत भी जर्जर हो गई है।
  • ​रखरखाव का अभाव: घरों में लगी टोटियाँ टूटकर कचरे में तब्दील हो चुकी हैं।

​गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

​नल का जल नहीं मिलने के कारण ग्रामीण पुराने चापाकलों पर निर्भर हैं। स्थानीय निवासी सुलेखा देवी ने बताया कि चापाकल से निकलने वाला पानी बेहद गंदा और दुर्गंधयुक्त है। मजबूरी में इसी पानी से खाना बनाना और नहाना पड़ता है।

  • ​बीमारी का खतरा: गंदा पानी पीने से बच्चे और बुजुर्ग बार-बार बीमार पड़ रहे हैं।
  • ​शादी-ब्याह में मुसीबत: घरों में होने वाले मांगलिक कार्यों या मेहमानों के आने पर पानी का इंतजाम करना किसी जंग जीतने से कम नहीं होता।

​वार्ड सदस्य की बेबसी या लापरवाही?

​मामले को लेकर जब ग्रामीणों ने वार्ड सदस्य और मुखिया से गुहार लगाई, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। वार्ड 2 के पंच सुमित कुमार और अन्य ग्रामीणों के अनुसार, वार्ड सदस्य का कहना है कि “जब फंड आएगा तब ठीक होगा, अभी हम कुछ नहीं कर सकते।” ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले उनसे पानी के नाम पर 30-30 रुपये की मांग भी की गई थी, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

​जांच और कार्रवाई का इंतजार

​6 साल बीत जाने के बाद भी अब तक किसी भी पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इस वार्ड की सुध नहीं ली है। भीषण गर्मी के इस मौसम में ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की गई और जर्जर पाइपलाइन की मरम्मत नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

​“6 साल से हम लोग एक-दूसरे के घरों से पानी ढोकर ला रहे हैं। चापाकल का पानी महकता है, लेकिन प्यास बुझाने के लिए वही जहर पीना हमारी मजबूरी है।”

— सुलेखा देवी, स्थानीय ग्रामीण

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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