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शिक्षक दिवस पर भागलपुर में गुरुओं का सम्मान: शिक्षा में नवाचार और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं हुए सम्मानित

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Bhagalpur News: भागलपुर में शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर जिला शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन, बेहतर कार्यशैली और नए नवाचार (इनोवेशन) करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। शनिवार को जिला शिक्षा विभाग भवन के सभागार में भव्य ‘शिक्षक सम्मान समारोह’ का आयोजन हुआ, जहां चयनित गुरुजनों को उनके सराहनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र और सम्मान प्रदान किया गया।

उसमानपुर की शिक्षिका श्वेता रानी को मिला जिला स्तरीय सम्मान

सम्मानित होने वाले उत्कृष्ट शिक्षकों की सूची में खरीक प्रखंड के उसमानपुर स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय की अंग्रेजी शिक्षिका श्वेता रानी भी प्रमुखता से शामिल रहीं। विद्यालय में पठन-पाठन की आधुनिक शैली अपनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए जिला स्तर पर इस पुरस्कार के लिए उनका चयन किया गया था।

शिक्षिका श्वेता रानी ने जताया आभार, कहा— “सम्मान से मिलती है नया करने की प्रेरणा”

सम्मान प्राप्त करने के बाद शिक्षिका श्वेता रानी ने शिक्षा विभाग के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “शिक्षक दिवस के मौके पर जिला स्तर पर अपने कार्यों की पहचान मिलना अत्यंत गौरवपूर्ण और प्रेरणादायी क्षण है। यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि भविष्य में विद्यार्थियों के लिए और अधिक समर्पण के साथ काम करने की एक बड़ी जिम्मेदारी है।”

“किताबी ज्ञान के साथ संस्कार और सर्वांगीण विकास ही सच्ची शिक्षा”

शिक्षा के वास्तविक अर्थ को रेखांकित करते हुए श्वेता रानी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि बच्चों को एक बेहतर और जिम्मेदार इंसान बनाना है। उनका सदैव यह प्रयास रहता है कि पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों में अनुशासन, शिष्टाचार, नैतिक संस्कार और सकारात्मक सोच का विकास हो। उन्होंने संकल्प दोहराया कि वे आगे भी शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करती रहेंगी।

अन्य शिक्षकों को भी मिलेगी प्रेरणा

इस अवसर पर जिले भर के कई अन्य प्रतिभावान शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए मंच से सम्मानित किया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सम्मानित शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से जिले के अन्य शिक्षकों को भी अपने-अपने विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और नए-नए प्रयोग करने की प्रेरणा मिलती है।

नाथनगर में मवेशियों के चारे में लगी भीषण आग, धू-धू कर जला किसान का आशियाना, मशक्कत के बाद पाया गया काबू

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के नाथनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरानी सराय मोड़ के समीप शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब किसान मननदेव पंडित द्वारा एकत्रित किए गए मवेशियों के चारे के ढेर में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि पूरे इलाके में धुएं का गुबार और तेज लपटें उठने लगीं।

आग की लपटें देख दौड़े ग्रामीण, मची भगदड़

चारे के ढेर से अचानक उठती ऊंची-ऊंची लपटों को देखकर आसपास के किसानों और स्थानीय लोगों के होश उड़ गए। ग्रामीणों ने तुरंत घटना की जानकारी पीड़ित किसान मननदेव पंडित को दी। सूचना मिलते ही भारी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए और अपने स्तर से बाल्टी व पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश करने लगे, लेकिन आग की भयावहता के आगे वे बेबस नजर आए।

1 घंटे की मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी तुरंत पुलिस और अग्निशमन विभाग को दी। सूचना मिलते ही नाथनगर थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम दमकल की गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने स्थानीय निवासियों के सहयोग से करीब 1 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। हालांकि, जब तक आग बुझाई जाती, तब तक चारे का एक बड़ा हिस्सा जलकर पूरी तरह राख हो चुका था।

आग लगने के कारणों का अब तक पता नहीं

आग किन कारणों से लगी, इसका स्पष्ट पता फिलहाल नहीं चल सका है। पीड़ित किसान मननदेव पंडित ने बताया कि इस अगलगी में उनके मवेशियों का चारा पूरी तरह नष्ट हो गया है, जिससे उनके सामने पशुओं के पोषण की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में 10 फीट तक भरा पानी, हॉस्टल खाली कर घर लौटने को मजबूर छात्र

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Bhagalpur News: गंगा नदी के विकराल रूप और तेजी से बढ़ते जलस्तर ने भागलपुर शहर के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में बाढ़ के पानी ने भारी तबाही मचाई है, जिससे पूरे कॉलेज क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल है।

मुख्य द्वार पर 2 फीट, तो हॉस्टल में 10 फीट तक जलजमाव

बाढ़ के पानी का प्रभाव कॉलेज के हर हिस्से में दिख रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेज के मुख्य द्वार पर जहां लगभग 2 फीट पानी बह रहा है, वहीं छात्रों के छात्रावास (हॉस्टल) की स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है। हॉस्टल परिसर में पानी का स्तर 7 से लेकर 10 फीट तक पहुंच गया है। कमरे, ग्राउंड और रास्ते पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं, जिससे वहां रह पाना असंभव हो गया है।

सामान समेट कर घर लौटने को मजबूर हुए छात्र

स्थिति बिगड़ते देख कॉलेज प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी छात्रावासों को तुरंत खाली करने का निर्देश जारी किया। सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए छात्रों को हॉस्टल छोड़ने को कहा गया है। पानी के बीच से गुजरते हुए छात्र-छात्राएं किसी तरह अपना जरूरी सामान, किताबें और बैग लेकर सुरक्षित स्थानों और अपने घरों की ओर रवाना हो रहे हैं।

सुरक्षा प्राथमिकता, अब घर बैठे होगी ऑनलाइन पढ़ाई

छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई के संतुलन को बनाए रखने के लिए कॉलेज प्रशासन ने तुरंत वैकल्पिक कदम उठाए हैं। प्रोफेसर डॉक्टर रमन के अनुसार, छात्रों की सुरक्षा प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। बाढ़ के कारण प्रत्यक्ष कक्षाएं चलाना संभव नहीं है, लेकिन छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए तत्काल प्रभाव से सभी विषयों की ऑनलाइन कक्षाएं (Online Classes) शुरू कर दी गई हैं। अब सभी छात्र अपने घरों से ही डिजिटल माध्यम से पढ़ाई जारी रखेंगे।

कॉलेज परिसर में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है और स्थानीय प्रशासन जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है।

सारण में पेपरलेस रजिस्ट्री को मिली रफ्तार, एक दिन में 40 अपॉइंटमेंट; प्रशासन ने बढ़ाई सुविधाएं

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दस्तावेज नवीसों और स्टाम्प विक्रेताओं को प्रशिक्षण से लेकर हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस तक, ‘May I Help You’ हेल्प डेस्क और मीडिया भ्रमण से बढ़ाई जा रही जागरूकता

सारण/छपरा, 02 सितंबर 2026। बिहार में निबंधन प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और नागरिकों के लिए आसान बनाने की दिशा में लागू पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को सारण जिले में प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर जिला अवर निबंधन कार्यालय, सारण में नई व्यवस्था को लेकर प्रशिक्षण, जागरूकता और तकनीकी सहायता से जुड़ी कई गतिविधियां लगातार संचालित की जा रही हैं।

जिला प्रशासन का उद्देश्य पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को आम नागरिकों के लिए सरल, सुगम, सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। इसी कड़ी में दस्तावेज नवीसों एवं स्टाम्प विक्रेताओं के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं, आशंकाओं और भ्रांतियों को दूर किया गया। उन्हें नई डिजिटल व्यवस्था की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

दस्तावेज नवीसों और स्टाम्प विक्रेताओं को मिला हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण

नई डिजिटल व्यवस्था को समझने और उसे व्यवहार में सही तरीके से लागू करने के लिए संबंधित दस्तावेज नवीसों एवं स्टाम्प विक्रेताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान मोबाइल और डिजिटल माध्यम से पूरी प्रक्रिया का हैंड्स-ऑन अभ्यास कराया गया।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवा से जुड़े लोग खुद डिजिटल प्रक्रिया को अच्छी तरह समझें और रजिस्ट्री कराने वाले नागरिकों को भी आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन उपलब्ध करा सकें।

इसके अलावा संबंधित व्यक्तियों की सुविधा और कार्य को व्यवस्थित करने के लिए विशेष कैंप आयोजित कर आवश्यक लाइसेंस निर्गत करने की कार्रवाई भी की गई।

अपॉइंटमेंट बढ़ने से दिखा जागरूकता अभियान का असर

जिला प्रशासन द्वारा लगातार किए जा रहे जागरूकता, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और नियमित अनुश्रवण का सकारात्मक असर अब दिखाई देने लगा है।

बुधवार को जिला स्तरीय अवर निबंधन कार्यालय, सारण में कुल 28 अपॉइंटमेंट दर्ज किए गए। वहीं एकमा प्रखंड के अवर निबंधन कार्यालय में 6 और परसा प्रखंड के अवर निबंधन कार्यालय में भी 6 अपॉइंटमेंट दर्ज किए गए।

इस तरह जिले के इन तीन निबंधन कार्यालयों में एक दिन में कुल 40 अपॉइंटमेंट दर्ज हुए।

प्रारंभिक चरण में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के तहत अपॉइंटमेंट की संख्या कई बार दो, तीन या चार तक सीमित रहती थी। अब संख्या में हुई वृद्धि यह संकेत देती है कि दस्तावेज नवीसों, स्टाम्प विक्रेताओं और आम नागरिकों के बीच नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर विश्वास और स्वीकार्यता बढ़ रही है।

रजिस्ट्री कार्यालय में ‘May I Help You’ हेल्प डेस्क

पेपरलेस रजिस्ट्री के साथ-साथ जिला अवर निबंधन कार्यालय में नागरिक सुविधाओं को भी बेहतर किया गया है। पहली बार रजिस्ट्री कराने पहुंचने वाले लोगों की सहायता के लिए कार्यालय में ‘May I Help You’ हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है।

इस हेल्प डेस्क के माध्यम से नागरिकों को निबंधन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, शुल्क और अन्य जरूरी जानकारी के संबंध में मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।

कार्यालय में फ्लो चार्ट भी प्रदर्शित किया गया है, जिससे नागरिक रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया को सरल और क्रमबद्ध तरीके से समझ सकते हैं। इसके साथ ही विभिन्न काउंटर्स की कार्यप्रणाली को भी व्यवस्थित किया गया है, ताकि लोगों को अलग-अलग सेवाओं के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

कम कागजी कार्रवाई, ज्यादा पारदर्शिता और समय की बचत

पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के जरिए निबंधन प्रक्रिया को कम कागजी, अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाया जा रहा है।

डिजिटल प्रक्रिया के कारण कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम हो रही है। साथ ही निबंधन प्रक्रिया में लगने वाले समय में भी कमी लाने का प्रयास किया गया है। इससे नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा और बार-बार निबंधन कार्यालय आने की आवश्यकता कम हो सकती है।

डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया संचालित होने से निबंधन कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ दस्तावेजों एवं संबंधित अभिलेखों की सुरक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है।

मीडिया प्रतिनिधियों ने देखा पेपरलेस रजिस्ट्री का पूरा सिस्टम

नई व्यवस्था की वास्तविक कार्यप्रणाली को आम लोगों तक पहुंचाने और व्यापक जन-जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों को जिला अवर निबंधन कार्यालय का भ्रमण कराया गया।

मीडिया प्रतिनिधियों ने कार्यालय में संचालित विभिन्न काउंटर्स, हेल्प डेस्क और नागरिक सुविधाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। अधिकारियों और कर्मियों ने प्रत्येक काउंटर पर होने वाले कार्य, पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, शुल्क और डिजिटल प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

मीडिया प्रतिनिधियों को यह भी बताया गया कि नई व्यवस्था के तहत किस प्रकार रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक सरल, सहज, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा रहा है।

जागरूकता बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को जोड़ने की तैयारी

जिला प्रशासन पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को केवल निबंधन कार्यालय तक सीमित रखने के बजाय इसके बारे में व्यापक जन-जागरूकता और प्रचार-प्रसार पर भी जोर दे रहा है।

दस्तावेज नवीसों और स्टाम्प विक्रेताओं को प्रशिक्षण देने, उनकी भ्रांतियां दूर करने, हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस कराने, लाइसेंस निर्गत करने और मीडिया प्रतिनिधियों को कार्यालय की व्यवस्था का प्रत्यक्ष भ्रमण कराने का उद्देश्य नई प्रणाली की सही और स्पष्ट जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

जिला प्रशासन ने मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की कि पेपरलेस रजिस्ट्री की सरलता, पारदर्शिता, सुरक्षा, समय की बचत और ‘May I Help You’ हेल्प डेस्क जैसी नागरिक सुविधाओं की जानकारी व्यापक रूप से आम लोगों तक पहुंचाई जाए।

जन-सुलभ डिजिटल सेवा बनाने पर प्रशासन का जोर

सारण जिला प्रशासन के लगातार प्रयास और नियमित अनुश्रवण से पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को अधिक जन-सुलभ, पारदर्शी और तकनीक आधारित सेवा के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

प्रशासन का फोकस अब इस व्यवस्था को और अधिक सरल बनाने, सेवा से जुड़े सभी हितधारकों को प्रशिक्षित करने और आम नागरिकों के बीच डिजिटल निबंधन को लेकर भरोसा बढ़ाने पर है। आने वाले समय में इस व्यवस्था के और मजबूत होने से रजिस्ट्री प्रक्रिया में नागरिकों को अधिक सुविधा और समय की बचत मिलने की उम्मीद है।

बिहार के शहरों का बदलेगा स्वरूप, 43 शहरों के मास्टर प्लान पर काम तेज; 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप की तैयारी

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शहरी विकास को लेकर पटना में बड़ी कार्यशाला, मंत्री नीतीश मिश्रा बोले- आज की प्लानिंग तय करेगी आने वाली पीढ़ियों के शहरों का स्वरूप

Patna News:  बिहार में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और शहरों के सुव्यवस्थित एवं सतत विकास को लेकर पटना में महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। अधिवेशन भवन, पटना के सभागार में HUDCO के सहयोग से “सस्टेनेबल प्लानिंग फॉर टाउन्स इन बिहार : अंडरस्टैंडिंग द प्रोसेस एंड एड्रेसिंग द चैलेंजेज” विषय पर आयोजित कार्यशाला में राज्य के शहरी विकास की दिशा और भविष्य की योजना पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यशाला की अध्यक्षता नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने की। इस दौरान बिहार के शहरों को समावेशी, आधुनिक, सुव्यवस्थित और सतत बनाने के लिए प्रभावी शहरी नियोजन, मास्टर प्लान, तकनीक, GIS आधारित प्लानिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन किया गया।

‘विकसित शहर बनेंगे आर्थिक गतिविधियों के ग्रोथ सेंटर’

मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि शहरों का विकास सिर्फ बेहतर आवास और नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। विकसित और सुव्यवस्थित शहर राज्य की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण ग्रोथ सेंटर बन सकते हैं। ऐसे शहर निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का स्पष्ट विजन है कि बिहार के सभी शहरों को चरणबद्ध तरीके से विकास और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए तत्काल जरूरतों के साथ-साथ दीर्घकालिक दृष्टिकोण और दूरदर्शी शहरी नियोजन को प्राथमिकता देना जरूरी है।

‘कार्यशाला को सिर्फ अकादमिक अभ्यास न समझें’

मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस कार्यशाला को केवल अकादमिक अभ्यास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे बेहतर नियोजन, प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य के बेहतर शहरों के निर्माण की दिशा में नई प्रतिबद्धता के अवसर के तौर पर लिया जाए।

उन्होंने HUDCO के अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुभव का अधिकतम लाभ उठाने की बात कही। साथ ही अधिकारियों से विशेषज्ञों के साथ संवाद करने, सवाल पूछने और दूसरे शहरों की बेस्ट प्रैक्टिस से सीखने का आह्वान किया।

नीतीश मिश्रा ने कहा कि बिहार के नगर विकास की जिम्मेदारी संभाल रही युवा टीम पर उन्हें पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि आज लिए जा रहे फैसले आने वाली पीढ़ियों के शहरों का स्वरूप तय करेंगे। हमारा लक्ष्य ऐसे शहर बनाना होना चाहिए, जो दूरदर्शी नियोजन के साथ विकसित हों और बिहार के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करें।

43 शहरों के मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया जारी

नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने कहा कि बिहार में शहरी विकास को नियोजित और टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों तथा GIS आधारित प्लानिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

अधिकारियों को साक्ष्य आधारित योजनाएं तैयार करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य में 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इसके लिए HUDCO के साथ एक लाख करोड़ रुपये के लाइन ऑफ क्रेडिट का समझौता किया गया है। वहीं राज्य के 43 शहरों के मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।

2040 तक शहरी आबादी बढ़ने की चुनौती

HUDCO के अध्यक्ष संजय कुलश्रेष्ठ ने कहा कि देश में शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2040 तक शहरी क्षेत्रों की आबादी लगभग दोगुनी होकर 80 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि भविष्य के शहरों को केवल विस्तार देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें जलवायु परिवर्तन और संभावित आपदाओं के लिहाज से भी मजबूत बनाना होगा।

उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन, अमृत, प्रधानमंत्री आवास योजना-2 और अर्बन चैलेंज फंड जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके जरिए स्वच्छता, जलापूर्ति, सीवेज और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं के विकास को गति दी जा सकती है।

अनियोजित विकास के बाद रेट्रोफिटिंग महंगी

दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. एन. श्रवण कुमार ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार देश के सबसे कम शहरीकृत राज्यों में शामिल है। हालांकि आर्थिक विकास और रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए शहरीकरण को बढ़ावा देना जरूरी है।

उन्होंने दिल्ली और जमशेदपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि शहरों में एक बार अनियोजित विकास हो जाने के बाद रेट्रोफिटिंग करना काफी महंगा और मुश्किल हो जाता है। इसलिए शुरुआत से ही नियोजित विकास पर जोर देना आवश्यक है।

उन्होंने स्थानीय हितधारकों के साथ चर्चा कर शहरों को अधिक ‘लिवेबल’ बनाने पर जोर दिया, ताकि बेहतर अवसरों की तलाश में लोगों को पलायन के लिए मजबूर न होना पड़े।

मास्टर प्लान, लैंड यूज और टाउन प्लानिंग पर मंथन

कार्यशाला में मास्टर प्लान की आवश्यकता, उसके कानूनी प्रावधान और प्रभावी शहरी नियोजन की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।

अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा कि प्रत्येक शहर की अपनी भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक और स्थानीय विशेषताएं होती हैं। इसलिए शहरों की विशिष्ट परिस्थितियों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।

कार्यशाला में वर्तमान स्थिति के आकलन, भविष्य की संभावनाओं और नियोजन प्रस्तावों के लिए आवश्यक जनसांख्यिकीय, आर्थिक एवं स्थानिक आंकड़ों के संकलन, विश्लेषण और उपयोग पर भी जानकारी दी गई।

इसके अलावा प्रस्तावित भू-उपयोग मानचित्र (Land Use Map) और टाउन प्लानिंग स्कीम तैयार करने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई।

शहरी नियोजन में AI और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर

कार्यशाला में शहरी नियोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी विशेष जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप समावेशी एवं संवेदनशील शहरी नियोजन विकसित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही मास्टर प्लान के प्रस्तावों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने और उनके अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदमों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद

कार्यशाला में विभाग के सचिव संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी, सचिव-सह-बुडको एमडी अनिमेष कुमार पराशर, बिहार हाउसिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक-सह-विशेष सचिव निलेश रामचंद्र देवरे, अपर सचिव मनोज कुमार, HUDCO की कार्यकारी निदेशक वर्षा पुन्हानी सहित विभिन्न नगर निगमों और नगर निकायों के नगर आयुक्त, नगर कार्यपालक पदाधिकारी, अर्बन प्लानर्स, आर्किटेक्ट्स और विभाग के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

बिहार के शहरों के भविष्य की नई तस्वीर तैयार करने की कवायद

कुल मिलाकर, पटना में आयोजित यह कार्यशाला बिहार के शहरी विकास की दिशा तय करने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई। 43 शहरों के मास्टर प्लान, 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप, GIS आधारित प्लानिंग और AI जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के जरिए राज्य के शहरों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में सरकार की तैयारी दिखाई दी।

सरकार का जोर ऐसे शहर विकसित करने पर है, जहां बेहतर बुनियादी सुविधाओं के साथ रोजगार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार हो सके।

राघोपुर में गंगा का रौद्र रूप, मंदिरों के बाद रेलवे लाइन पर संकट; कटाव का मंत्री ने लिया जायजा

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के नवगछिया के राघोपुर में गंगा नदी का रौद्र रूप लगातार देखने को मिल रहा है। भीषण कटाव के कारण इलाके में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। कटाव की चपेट में आने से जहां तटबंध को भारी नुकसान पहुंचा है, वहीं दुर्गा मंदिर और हनुमान मंदिर भी गंगा में समा चुके हैं। अब कटाव का खतरा रेलवे लाइन के आसपास भी मंडराने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

बिगड़ते हालात के बीच बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक ई० कुमार शैलेंद्र बुधवार को राघोपुर पहुंचे और कटाव प्रभावित इलाके का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अभियंताओं से गंगा के कटाव की मौजूदा स्थिति और अब तक किए गए बचाव कार्यों की जानकारी ली।

मंत्री ने अभियंताओं को दिए आवश्यक निर्देश

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने अधिकारियों और अभियंताओं को कटाव की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंगा नदी लगातार अपना रास्ता बना रही है और ऐसी स्थिति में सभी को मिलकर संघर्ष करना होगा।

मंत्री के मुताबिक, कटाव को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और संवेदनशील स्थानों पर आवश्यक बचाव कार्य कराया जा रहा है।

कटाव प्रभावित लोगों के लिए बनेगा जर्मन हैंगर टेंट

गंगा के कटाव के कारण प्रभावित परिवारों के पलायन को देखते हुए उनके रहने और भोजन की व्यवस्था को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर तैयारी की जा रही है। मंत्री ने बताया कि प्रभावित लोगों के लिए जर्मन हैंगर टेंट लगाने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए कई एजेंसियों से बातचीत की गई है, ताकि विस्थापित और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही उनके भोजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

रेलवे लाइन की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

राघोपुर में लगातार हो रहे कटाव के बीच रेलवे लाइन की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन गई है। गंगा की धारा जिस तेजी से जमीन को काट रही है, उससे रेलवे लाइन को लेकर भी खतरे की आशंका जताई जा रही है।

रेलवे लाइन को कटाव से बचाने के सवाल पर मंत्री कुमार शैलेंद्र ने कहा कि मां दुर्गा और बजरंगबली ने आहुति दे दी है, अब हम लोग सर्वाइव करेंगे और इसे स्टेबल भी करेंगे। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि संवेदनशील क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

लगातार बढ़ते कटाव से ग्रामीणों में दहशत

राघोपुर में गंगा के कटाव ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तटबंध और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचने के बाद अब रेलवे लाइन की सुरक्षा को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।

लगातार कटाव के बीच प्रशासन और संबंधित विभागों की चुनौती अब प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ महत्वपूर्ण संरचनाओं को गंगा की तेज धारा से बचाने की है। आने वाले दिनों में गंगा के जलस्तर और कटाव की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।

राघोपुर कटाव पर सांसद अजय मंडल का बड़ा हमला, बोले- कटावरोधी काम में हुआ पैसों का खेल, जांच हुई तो फंसेंगे अधिकारी

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Bhagalpur News: नवगछिया के राघोपुर में गंगा नदी के भीषण कटाव से बने गंभीर हालात का जायजा लेने भागलपुर सांसद अजय मंडल मौके पर पहुंचे। सांसद ने कटाव प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद अभियंताओं से अब तक किए गए कटावरोधी कार्यों की जानकारी ली। निरीक्षण के बाद सांसद ने मीडिया से बातचीत में जल संसाधन विभाग और मौके पर काम कर रहे अभियंताओं पर गंभीर सवाल उठाए।

कटावरोधी कार्यों पर सांसद ने उठाए सवाल

सांसद अजय मंडल ने आरोप लगाया कि राघोपुर में कटाव से बचाव के लिए पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने कहा कि कटावरोधी कार्यों में सिर्फ पैसों का खेल हुआ है। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार को बचाने के लिए भी पैसों का खेल किया गया।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से राघोपुर में गंगा का कटाव लगातार बढ़ रहा है, उससे साफ है कि कटावरोधी कार्यों की गुणवत्ता और व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

जांच हुई तो कई अधिकारी फंस सकते हैं

अजय मंडल ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर कटावरोधी कार्यों की सही तरीके से जांच कराई जाती है तो विभाग के कई अधिकारी इसकी जद में आ सकते हैं।

सांसद ने सरकार से मांग की कि राघोपुर में हुए कटावरोधी कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

जनता की शिकायत सरकार तक पहुंचाने की बात

सांसद ने कहा कि क्षेत्र की जनता लगातार अधिकारियों के कामकाज को लेकर शिकायत कर रही है। लोगों का आरोप है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण कटाव की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।

अजय मंडल ने कहा कि वे इस पूरे मामले को सरकार के सामने मजबूती से उठाएंगे और जनता की समस्याओं से सरकार को अवगत कराएंगे।

कटाव के बीच सांसद ने गंगा मां से लगाई गुहार

राघोपुर में गंगा के लगातार बढ़ते कटाव और उससे पैदा हुए संकट को देखकर सांसद अजय मंडल भावुक भी नजर आए। उन्होंने गंगा मां से अपील करते हुए कहा— “गंगा मां, अब बस करिए। हम आपके शरण में हैं, हमें उबार दीजिए। गलत-सही जो हुआ, उसे माफ कर दीजिए।”

राघोपुर में लगातार हो रहे कटाव ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में सांसद के निरीक्षण और उनके द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अब कटावरोधी कार्यों की गुणवत्ता और खर्च की जांच को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं।

खेत से घर लौट रहे मजदूर को तेज रफ्तार बाइक ने मारी टक्कर, मौके पर मौत; पत्नी और पांच बच्चों को छोड़ गए दाऊद

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के ईसीपुर बाराहाट थाना क्षेत्र के रिफतपुर वासा गांव में तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में 35 वर्षीय मोहम्मद दाऊद गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। परिजनों के अनुसार, दाऊद की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। हालांकि, उन्हें इलाज की उम्मीद में पैंती अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

खेत से काम कर घर लौट रहे थे दाऊद

मृतक की पहचान मोहम्मद दाऊद, पिता मोहम्मद जलील अंसारी, निवासी रिफतपुर वासा, थाना ईसीपुर बाराहाट के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, दाऊद अपने खेत में काम करने के बाद घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में तेज रफ्तार बाइक सवार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दाऊद सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने मौके पर पहुंचकर उन्हें संभाला और इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मौत की खबर मिलते ही परिवार में मचा कोहराम

दाऊद की मौत की खबर जैसे ही परिवार के लोगों को मिली, घर में चीख-पुकार मच गई। अचानक हुई इस मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोगों के मुताबिक, दाऊद बेहद गरीब परिवार से थे और खेती-मजदूरी कर पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करते थे।

उनकी मौत के बाद परिवार के सामने अब रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। दाऊद अपने पीछे पत्नी और पांच बच्चों को छोड़ गए हैं। परिवार के लिए कमाने वाले सदस्य की अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों में भी आक्रोश और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में तेज रफ्तार वाहनों की वजह से लगातार हादसे का खतरा बना रहता है। लोगों ने प्रशासन से सड़क पर वाहनों की गति नियंत्रित कराने और लापरवाही से वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

परिजनों ने हादसे की जांच और दोषी बाइक चालक के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।

डायल-112 को लेकर भागलपुर पुलिस सख्त, चालकों को दिए त्वरित रिस्पॉन्स के निर्देश

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Bhagalpur News: भागलपुर में आपातकालीन पुलिस सहायता को और अधिक प्रभावी एवं त्वरित बनाने को लेकर पुलिस विभाग ने डायल-112 के चालकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। स्मार्ट सिटी, भागलपुर के सभागार में आयोजित बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव एवं नगर पुलिस अधीक्षक अतुलेश झा ने डायल-112 के चालकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में विशेष रूप से डायल-112 के माध्यम से मिलने वाली आपातकालीन सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई और कम से कम समय में घटनास्थल तक पहुंचने पर जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आपात स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सूचना प्राप्त होने के बाद डायल-112 वाहन को बिना अनावश्यक देरी के घटनास्थल के लिए रवाना होकर जरूरतमंद लोगों तक तत्काल पुलिस सहायता पहुंचानी होगी।

समय पर रिस्पॉन्स सबसे महत्वपूर्ण

वरीय पुलिस अधिकारियों ने चालकों को निर्देशित किया कि डायल-112 की सेवा के दौरान पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करें। किसी भी आपातकालीन सूचना को गंभीरता से लेते हुए त्वरित रिस्पॉन्स सुनिश्चित किया जाए, ताकि पीड़ित या सहायता की आवश्यकता वाले लोगों को समय पर पुलिस मदद मिल सके।

आम लोगों के साथ बेहतर व्यवहार पर जोर

बैठक में केवल तेजी से घटनास्थल पहुंचने पर ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के साथ संवेदनशील और बेहतर व्यवहार करने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि आपात स्थिति में नागरिक पहले से ही परेशान या भयभीत हो सकते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों और डायल-112 टीम का व्यवहार सहयोगात्मक और संवेदनशील होना चाहिए।

सतर्कता और जिम्मेदारी से काम करने का निर्देश

पुलिस पदाधिकारियों ने सभी डायल-112 चालकों को ड्यूटी के दौरान पूर्ण सतर्कता बरतने, यातायात नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित तरीके से घटनास्थल तक पहुंचने और अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाने का निर्देश दिया। साथ ही, आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए टीम के रूप में बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

भागलपुर पुलिस का यह कदम आपातकालीन पुलिस सेवा को अधिक तेज, संवेदनशील और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। डायल-112 के माध्यम से आने वाली सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई होने से आपात स्थिति में आम नागरिकों को समय पर पुलिस सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

30 साल की आस्था पर टूटा गंगा के कटाव का कहर, देखते ही देखते मां गंगा की गोद में समा गए राघोपुर के दो मंदिर

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Bhagalpur News: राघोपुर में गंगा का रौद्र रूप एक बार फिर सामने आया है। भीषण कटाव ने करीब 30 वर्षों की आस्था और लोगों की धार्मिक स्मृतियों को पलभर में मिटा दिया। मंगलवार की सुबह करीब 9:16 बजे देखते ही देखते रेलवे की जमीन पर जनसहयोग से बने चैती दुर्गा मंदिर और बजरंगबली मंदिर गंगा की तेज धार में समा गए।

कुछ पल पहले तक जहां पूजा की घंटियां गूंजती थीं, श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती थी और जयकारों से पूरा इलाका भक्तिमय रहता था, वहां अब सिर्फ गंगा की तेज लहरें दिखाई दे रही हैं। मंदिरों के गंगा में विलीन होने का दृश्य देखकर मौके पर मौजूद ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।

करीब 250 मीटर लंबा जमींदारी बांध भी गंगा में समाया

राघोपुर-खैरपुर क्षेत्र में गंगा के भीषण कटाव से करीब 250 मीटर लंबा जमींदारी बांध नदी में समा चुका है। कटाव वाले स्थान पर नदी की गहराई करीब 5 से 16 मीटर तक बताई जा रही है। कटाव की रफ्तार लगातार बढ़ने से आसपास के इलाकों में खतरा गहराता जा रहा है।

सबसे बड़ी चिंता अब थाना बिहपुर-महादेवपुर रेलवे लाइन को लेकर है, क्योंकि कटाव रेलवे की जमीन की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

तीन दशक पहले जनसहयोग से बने थे दोनों मंदिर

ग्रामीणों के मुताबिक, रेलवे की जमीन पर करीब 30 वर्ष पहले जनसहयोग से चैती दुर्गा और बजरंगबली मंदिर का निर्माण कराया गया था। समय के साथ दोनों मंदिर राघोपुर की धार्मिक पहचान का हिस्सा बन गए।

चैती दुर्गा पूजा के दौरान यहां विशेष आयोजन होते थे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते थे। वहीं बजरंगबली मंदिर में भी स्थानीय लोगों की गहरी आस्था थी।

इन मंदिरों से सिर्फ धार्मिक भावनाएं ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों की तीन पीढ़ियों की यादें और भावनाएं जुड़ी थीं। यही वजह है कि मंदिरों के गंगा में समाने के बाद पूरे इलाके में मायूसी छा गई।

सुबह से ही रेलवे की जमीन पर शुरू था कटाव

ग्रामीण के अनुसार, राघोपुर पंचायत में कटाव की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशन की जमीन भी सुबह करीब सात बजे से ही कटाव की चपेट में आने लगी थी।

राघोपुर बांध में आई दरार के बाद अब कटाव का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जमींदारी बांध का हिस्सा पूर्व दिशा की ओर कट चुका है और गंगा की धारा रेलवे की जमीन की ओर बढ़ रही है।

कटाव की मौजूदा स्थिति को देखते हुए करीब दो से ढाई हजार की आबादी पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर कटाव पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

जिस अनहोनी का डर था, आखिर वही हुआ

राघोपुर के लोगों को लंबे समय से इस बात का डर सता रहा था कि गंगा का कटाव उनके आस्था के केंद्रों को अपने साथ बहा ले जाएगा। आखिरकार मंगलवार की सुबह वही हुआ जिसका डर ग्रामीणों को था।

जहां कभी आरती की आवाज सुनाई देती थी, घंटियां बजती थीं और मां दुर्गा व बजरंगबली के जयकारे गूंजते थे, वहां अब गंगा की धार बह रही है।

राघोपुर के लिए यह सिर्फ दो मंदिरों के ढहने की घटना नहीं है। यह तीन दशकों की आस्था, परंपरा और अनगिनत यादों के गंगा में समा जाने की दर्दनाक तस्वीर है। गंगा की लहरों के साथ मंदिरों का अस्तित्व भले मिट गया हो, लेकिन इन मंदिरों से जुड़ी लोगों की भावनाएं और यादें शायद ही कभी मिट पाएंगी।