शहरी विकास को लेकर पटना में बड़ी कार्यशाला, मंत्री नीतीश मिश्रा बोले- आज की प्लानिंग तय करेगी आने वाली पीढ़ियों के शहरों का स्वरूप
Patna News: बिहार में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और शहरों के सुव्यवस्थित एवं सतत विकास को लेकर पटना में महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। अधिवेशन भवन, पटना के सभागार में HUDCO के सहयोग से “सस्टेनेबल प्लानिंग फॉर टाउन्स इन बिहार : अंडरस्टैंडिंग द प्रोसेस एंड एड्रेसिंग द चैलेंजेज” विषय पर आयोजित कार्यशाला में राज्य के शहरी विकास की दिशा और भविष्य की योजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला की अध्यक्षता नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने की। इस दौरान बिहार के शहरों को समावेशी, आधुनिक, सुव्यवस्थित और सतत बनाने के लिए प्रभावी शहरी नियोजन, मास्टर प्लान, तकनीक, GIS आधारित प्लानिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन किया गया।
‘विकसित शहर बनेंगे आर्थिक गतिविधियों के ग्रोथ सेंटर’
मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि शहरों का विकास सिर्फ बेहतर आवास और नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। विकसित और सुव्यवस्थित शहर राज्य की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण ग्रोथ सेंटर बन सकते हैं। ऐसे शहर निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का स्पष्ट विजन है कि बिहार के सभी शहरों को चरणबद्ध तरीके से विकास और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए तत्काल जरूरतों के साथ-साथ दीर्घकालिक दृष्टिकोण और दूरदर्शी शहरी नियोजन को प्राथमिकता देना जरूरी है।
‘कार्यशाला को सिर्फ अकादमिक अभ्यास न समझें’
मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस कार्यशाला को केवल अकादमिक अभ्यास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे बेहतर नियोजन, प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य के बेहतर शहरों के निर्माण की दिशा में नई प्रतिबद्धता के अवसर के तौर पर लिया जाए।
उन्होंने HUDCO के अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुभव का अधिकतम लाभ उठाने की बात कही। साथ ही अधिकारियों से विशेषज्ञों के साथ संवाद करने, सवाल पूछने और दूसरे शहरों की बेस्ट प्रैक्टिस से सीखने का आह्वान किया।
नीतीश मिश्रा ने कहा कि बिहार के नगर विकास की जिम्मेदारी संभाल रही युवा टीम पर उन्हें पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि आज लिए जा रहे फैसले आने वाली पीढ़ियों के शहरों का स्वरूप तय करेंगे। हमारा लक्ष्य ऐसे शहर बनाना होना चाहिए, जो दूरदर्शी नियोजन के साथ विकसित हों और बिहार के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करें।
43 शहरों के मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया जारी
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने कहा कि बिहार में शहरी विकास को नियोजित और टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों तथा GIS आधारित प्लानिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अधिकारियों को साक्ष्य आधारित योजनाएं तैयार करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य में 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इसके लिए HUDCO के साथ एक लाख करोड़ रुपये के लाइन ऑफ क्रेडिट का समझौता किया गया है। वहीं राज्य के 43 शहरों के मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।
2040 तक शहरी आबादी बढ़ने की चुनौती
HUDCO के अध्यक्ष संजय कुलश्रेष्ठ ने कहा कि देश में शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2040 तक शहरी क्षेत्रों की आबादी लगभग दोगुनी होकर 80 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि भविष्य के शहरों को केवल विस्तार देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें जलवायु परिवर्तन और संभावित आपदाओं के लिहाज से भी मजबूत बनाना होगा।
उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन, अमृत, प्रधानमंत्री आवास योजना-2 और अर्बन चैलेंज फंड जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके जरिए स्वच्छता, जलापूर्ति, सीवेज और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं के विकास को गति दी जा सकती है।
अनियोजित विकास के बाद रेट्रोफिटिंग महंगी
दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. एन. श्रवण कुमार ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार देश के सबसे कम शहरीकृत राज्यों में शामिल है। हालांकि आर्थिक विकास और रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए शहरीकरण को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने दिल्ली और जमशेदपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि शहरों में एक बार अनियोजित विकास हो जाने के बाद रेट्रोफिटिंग करना काफी महंगा और मुश्किल हो जाता है। इसलिए शुरुआत से ही नियोजित विकास पर जोर देना आवश्यक है।
उन्होंने स्थानीय हितधारकों के साथ चर्चा कर शहरों को अधिक ‘लिवेबल’ बनाने पर जोर दिया, ताकि बेहतर अवसरों की तलाश में लोगों को पलायन के लिए मजबूर न होना पड़े।
मास्टर प्लान, लैंड यूज और टाउन प्लानिंग पर मंथन
कार्यशाला में मास्टर प्लान की आवश्यकता, उसके कानूनी प्रावधान और प्रभावी शहरी नियोजन की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।
अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा कि प्रत्येक शहर की अपनी भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक और स्थानीय विशेषताएं होती हैं। इसलिए शहरों की विशिष्ट परिस्थितियों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।
कार्यशाला में वर्तमान स्थिति के आकलन, भविष्य की संभावनाओं और नियोजन प्रस्तावों के लिए आवश्यक जनसांख्यिकीय, आर्थिक एवं स्थानिक आंकड़ों के संकलन, विश्लेषण और उपयोग पर भी जानकारी दी गई।
इसके अलावा प्रस्तावित भू-उपयोग मानचित्र (Land Use Map) और टाउन प्लानिंग स्कीम तैयार करने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
शहरी नियोजन में AI और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
कार्यशाला में शहरी नियोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी विशेष जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप समावेशी एवं संवेदनशील शहरी नियोजन विकसित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही मास्टर प्लान के प्रस्तावों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने और उनके अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदमों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद
कार्यशाला में विभाग के सचिव संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी, सचिव-सह-बुडको एमडी अनिमेष कुमार पराशर, बिहार हाउसिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक-सह-विशेष सचिव निलेश रामचंद्र देवरे, अपर सचिव मनोज कुमार, HUDCO की कार्यकारी निदेशक वर्षा पुन्हानी सहित विभिन्न नगर निगमों और नगर निकायों के नगर आयुक्त, नगर कार्यपालक पदाधिकारी, अर्बन प्लानर्स, आर्किटेक्ट्स और विभाग के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
बिहार के शहरों के भविष्य की नई तस्वीर तैयार करने की कवायद
कुल मिलाकर, पटना में आयोजित यह कार्यशाला बिहार के शहरी विकास की दिशा तय करने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई। 43 शहरों के मास्टर प्लान, 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप, GIS आधारित प्लानिंग और AI जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के जरिए राज्य के शहरों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में सरकार की तैयारी दिखाई दी।
सरकार का जोर ऐसे शहर विकसित करने पर है, जहां बेहतर बुनियादी सुविधाओं के साथ रोजगार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार हो सके।


