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₹140.95 करोड़ से बना मेगा लेदर क्लस्टर, CM सम्राट चौधरी ने किया उद्घाटन; बिहार में रोजगार और उद्योगों को मिलेगी नई रफ्तार

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मुजफ्फरपुर के महवल में लेदर, फुटवियर और एक्सेसरीज़ उद्योग को मिलेगा आधुनिक औद्योगिक आधार; मुख्यमंत्री बोले- 2030 से पहले बिहार में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का लक्ष्य, 1,000 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने की भी तैयारी

Bihar News:  बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने, निवेश के नए अवसर पैदा करने और युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को मुजफ्फरपुर जिले के महवल स्थित बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) के औद्योगिक क्षेत्र में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर का उद्घाटन किया। इस परियोजना के तहत ₹140.95 करोड़ की लागत से विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना और कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) का भी लोकार्पण किया गया।
इस औद्योगिक परियोजना से लेदर, जूते-चप्पल और उनसे संबंधित उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, स्थानीय कारीगरों के हुनर को आधुनिक औद्योगिक सुविधाओं से जोड़ने, उद्यमियों को निवेश के अवसर उपलब्ध कराने और बिहार में विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार करने में मदद मिल सकती है।

उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उद्योगों के विस्तार, निवेश को प्रोत्साहन, बिजली की बेहतर उपलब्धता और आधुनिक आधारभूत संरचना के विकास पर जोर दिया। उन्होंने उद्योगपतियों से बिहार में निवेश करने और राज्य के विकास में भागीदार बनने की अपील भी की।

बिहार में ही रोजगार देने की तैयारी, 2030 से पहले बड़े लक्ष्य हासिल करने पर जोर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए उद्योगों का विस्तार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य के पास युवा शक्ति और प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी क्षमता है। इनका समुचित उपयोग करके बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 से पहले बिहार से बाहर जाकर मजदूरी करने वाले लोगों को राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, निवेश को बढ़ावा देने और युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में बिहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि बिहार में वास्तविक औद्योगिक इकाइयों की स्थापना सुनिश्चित करना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को अपने राज्य में ही काम करने का अवसर मिल सकेगा।

1,000 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने बिहार में आधुनिक तकनीकी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने वर्ष 2030 से पहले राज्य में 1,000 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने के लक्ष्य को दोहराया।

उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगों और आधुनिक तकनीकी परियोजनाओं के विकास के लिए पर्याप्त बिजली, बेहतर सड़क संपर्क और मजबूत औद्योगिक आधारभूत संरचना आवश्यक है। सरकार इन क्षेत्रों में सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उनका कहना था कि बिहार में उद्योगों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
डेटा सेंटर जैसी परियोजनाओं के विकास से तकनीकी क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना, निवेश और क्रियान्वयन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

मुजफ्फरपुर में ड्राई पोर्ट और नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरपुर में ड्राई पोर्ट विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य राज्य में तैयार होने वाले उत्पादों को देश के विभिन्न हिस्सों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना है।

उन्होंने कहा कि बेहतर परिवहन और निर्यात सुविधाएं उपलब्ध होने से उद्योगों को अपने उत्पादों की आपूर्ति करने में सहूलियत मिल सकती है। इससे बिहार में विनिर्माण गतिविधियों को विस्तार देने और निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने गया में विकसित किए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर और दरभंगा में भी इस तरह के औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, मुजफ्फरपुर, पटना और गया के बीच आवागमन को सुगम बनाने के लिए रैपिड रेल की योजना पर काम करने की बात कही गई। इसके तहत मुजफ्फरपुर से पटना और पटना से गया तक तेज रेल संपर्क विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

इन योजनाओं का उद्देश्य बिहार में औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ परिवहन और व्यापारिक संपर्क को मजबूत बनाना है।

निवेश प्रस्तावों पर 30 दिनों के भीतर नीति बनाने की दिशा में पहल

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उद्योगपतियों से बिहार में निवेश के लिए प्रस्ताव देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार निवेश प्रस्तावों का परीक्षण करेगी और जरूरत के अनुसार संबंधित क्षेत्र के लिए 30 दिनों के भीतर नीति बनाने की दिशा में काम करेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), भारी उद्योगों और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार की कोशिश है कि निवेशकों को उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों और औद्योगिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सके।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध कराने और निवेश प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह बोलीं- रोजगार लेने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बने बिहार का युवा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बिहार की उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि औद्योगीकरण का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना है। बिहार में उद्योगों का विस्तार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार तलाशने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा कि राज्य में निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उद्योग मंत्री ने बिहार की नई MSME नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नीति 10 स्तंभों पर आधारित है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहित करना और उनके विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना है।

उन्होंने टेक्सटाइल, इथेनॉल और लेदर उद्योगों को बिहार की उभरती औद्योगिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से स्थानीय रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिल सकता है।
उन्होंने उद्यमियों से बिहार में उपलब्ध निवेश अवसरों का लाभ उठाने की अपील की।

बिहार के हुनर को मिलेगा स्थानीय स्तर पर मंच
उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि बिहार के कारीगरों और उनकी प्रतिभा ने राज्य को विशिष्ट पहचान दिलाई है। अब इस हुनर को बिहार में ही बेहतर मंच, आधुनिक सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जब स्थानीय हुनर को सही मंच मिलता है, तो उद्यमों का विकास होता है और लोगों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
सचिव ने बताया कि मुजफ्फरपुर में औद्योगिक गतिविधियां केवल लेदर उद्योग तक सीमित नहीं हैं। टेक्सटाइल, इथेनॉल और बैग निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी औद्योगिक संभावनाएं विकसित हो रही हैं।
उन्होंने मेगा फूड पार्क का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां उद्यमियों द्वारा ₹600 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है और लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिला है।

कुंदन कुमार ने मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर को केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से विकसित महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए देशभर के उद्यमियों से बिहार में निवेश करने का आह्वान किया।
₹140.95 करोड़ की परियोजना में क्या है खास?
महवल में विकसित मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर का उद्देश्य संबंधित उद्योगों को एक संगठित औद्योगिक परिसर में आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
परियोजना के अंतर्गत विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना और कॉमन फैसिलिटी सेंटर उद्योगों को साझा सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस तरह की साझा सुविधाओं से उद्यमियों को अपनी विनिर्माण गतिविधियों को संचालित करने और उनका विस्तार करने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से छोटे उद्यमियों और स्थानीय कारीगरों के लिए आधुनिक औद्योगिक वातावरण से जुड़ने के अवसर महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने क्लस्टर का भ्रमण किया तथा वहां विकसित सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान विभिन्न स्टॉलों पर लेदर, फुटवियर और एक्सेसरीज़ से संबंधित उत्पादों एवं औद्योगिक गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया।

इसके बाद कॉमन फैसिलिटी सेंटर का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों के लिए शेड और भूमि आवंटन पत्र भी वितरित किए गए।

FDDI के साथ समझौता, कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

कार्यक्रम के दौरान फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (FDDI) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान भी किया गया।

इस अवसर पर FDDI के निदेशक विवेक शर्मा और उद्योग विभाग के निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता ने समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया।
इस सहयोग का उद्देश्य लेदर और फुटवियर उद्योग की जरूरतों के अनुरूप डिजाइन, कौशल विकास तथा तकनीकी विशेषज्ञता को बढ़ावा देने की संभावनाओं को मजबूत करना है।

फुटवियर उद्योग में डिजाइन और तकनीकी प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग से युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल हासिल करने के अवसर मिल सकते हैं।

इससे स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल कर्मियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

BIADA की भूमिका से निवेश और औद्योगिक विस्तार को मिलेगा आधार

बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) के प्रबंध निदेशक नवीन कुमार ने क्लस्टर के विकास, औद्योगिक आधारभूत संरचना के विस्तार और उद्यमियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की औद्योगिक परियोजनाएं राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करने, विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने में सहायक हो सकती हैं।
महवल में विकसित क्लस्टर के माध्यम से लेदर, फुटवियर और एक्सेसरीज़ क्षेत्र से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों को संगठित औद्योगिक वातावरण और साझा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया गया है।
BIADA का उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना, आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाना और बिहार में औद्योगिक निवेश के विस्तार को प्रोत्साहित करना है।

समारोह में कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

उद्घाटन समारोह में बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद, पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता और सांसद वीणा देवी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इसके अलावा मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, BIADA के प्रबंध निदेशक नवीन कुमार, उद्योग विभाग के निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता और जिलाधिकारी कुमार गौरव समेत अन्य अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं।

बिहार के औद्योगिक भविष्य के लिए कितना अहम है यह क्लस्टर?

महवल में ₹140.95 करोड़ की लागत से विकसित मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर बिहार में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यहां कितनी औद्योगिक इकाइयां स्थापित होती हैं, कितना निवेश जमीन पर उतरता है और स्थानीय युवाओं को कितने रोजगार मिलते हैं।

यदि परियोजना के तहत उद्योगों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं और निवेशकों की भागीदारी बढ़ती है, तो मुजफ्फरपुर लेदर एवं फुटवियर उद्योग के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने रोजगार सृजन, डेटा सेंटर, बेहतर बिजली आपूर्ति, ड्राई पोर्ट और नए औद्योगिक क्लस्टरों से जुड़े जो लक्ष्य सामने रखे हैं, वे बिहार के औद्योगिक विकास की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।

भागलपुर: ललमटिया थाना क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई; 107 लीटर से अधिक कोरेक्स सिरप, गांजा और नशीली दवाओं के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और मादक पदार्थों के अवैध व्यापार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए “स्वस्थ युवा स्वस्थ भागलपुर” नामक विशेष महाअभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत हॉट स्पॉट पर लगातार छापेमारी की जा रही है। इसी क्रम में भागलपुर पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है।

गुप्त सूचना पर हुई छापेमारी:

ललमटिया थाना अंतर्गत मोहनपुर नरगा स्थित कन्हैया लाल मंडल एवं बालेश्वर मंडल (दोनों पिता-स्व० सीता राम मंडल) के द्वारा अपने घर पर अवैध मादक पदार्थ का संग्रह कर खरीद-बिक्री की जा रही थी। इसकी गुप्त सूचना मिलने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन पर एक विशेष टीम का गठन किया गया।

भारी मात्रा में सामान बरामद:

गठित टीम द्वारा जब आरोपियों के घर पर विधिवत तलाशी और छापेमारी की गई, तब वहां से भारी मात्रा में नशे का सामान बरामद हुआ:

  • कोरेक्स सिरप: 107.06 लीटर (1076 बोतल)
  • नशीली दवाएं: 310 पीस
  • गांजा: 230 ग्राम

आरोपी गिरफ्तार और अगली कार्रवाई:

पुलिस ने मौके से दोनों आरोपियों—कन्हैया लाल मंडल एवं बालेश्वर मंडल—को विधिवत गिरफ्तार कर लिया है। इस संबंध में आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। इस कारोबार में संलिप्त अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

छापेमारी दल में शामिल अधिकारी:

इस छापेमारी अभियान में थानाध्यक्ष विपिन कुमार सहित भुषण प्रसाद सिंह, प्रेमचंन्द्र कुमार, राजेन्द्र कुमार, मुस्ताक आलम और सोनी कुमारी शामिल थे।

बिहार के कारीगरों और उद्यमियों के लिए बड़ा अवसर! इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर 2026 में प्रदर्शित होंगे राज्य के उत्पाद, 30 अक्टूबर तक करें आवेदन

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बिहार सरकार के उद्योग विभाग ने आमंत्रित किए आवेदन; पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और एमएसएमई को मिलेगा राष्ट्रीय मंच, ऑनलाइन आवेदन के बाद उत्पादों के मूल्यांकन के आधार पर होगा अंतिम चयन।

Patna News:  बिहार के कारीगरों, शिल्पकारों, उद्यमियों और छोटे-बड़े उत्पादकों के लिए अपने उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। बिहार सरकार के उद्योग विभाग ने 45वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2026 में बिहार के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए पात्र आवेदकों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस पहल के माध्यम से राज्य की समृद्ध कला-संस्कृति, पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय उद्यमिता से जुड़े विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

उद्योग विभाग की ओर से 14 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इच्छुक कारीगर, उद्यमी, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) तथा उत्पादक 14 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) के माध्यम से आयोजित इस प्रक्रिया के तहत निर्धारित पोर्टल पर स्वीकार किए जाएंगे।

क्या है इस पहल का उद्देश्य? बिहार के उत्पादों को मिलेगी नई पहचान

बिहार अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले विशिष्ट उत्पादों के लिए जाना जाता है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कारीगर और छोटे उद्यमी अपने हुनर के दम पर उत्पाद तैयार करते हैं, लेकिन कई बार उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचने और अपने उत्पादों की व्यापक पहचान बनाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता है।

इसी दिशा में उद्योग विभाग की यह पहल स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने और बिहार की पारंपरिक कला एवं शिल्पकला को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में भागीदारी के माध्यम से चयनित आवेदकों को अपने उत्पादों को बड़े मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय उद्यमिता, कारीगरों के कौशल और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने में मदद मिल सकती है।

किन लोगों को मिलेगा आवेदन का अवसर?

उद्योग विभाग की ओर से जारी सूचना के अनुसार, इस पहल में निम्नलिखित श्रेणियों के पात्र आवेदक भाग ले सकते हैं।

  • कारीगर एवं शिल्पकार: पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े लोग।
  • उद्यमी: बिहार में स्थानीय उत्पादों का निर्माण या उत्पादन करने वाले पात्र उद्यमी।
  • एमएसएमई: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़े पात्र आवेदक।
  • उत्पादक: बिहार के विशिष्ट उत्पादों के उत्पादन से जुड़े पात्र व्यक्ति या संस्थान।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिहार के उत्पादों, पारंपरिक हुनर और स्थानीय उद्यमिता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए उपयुक्त प्रतिभागियों को अवसर उपलब्ध कराना है।

30 अक्टूबर तक ही कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन

इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर 2026 में बिहार के उत्पादों को प्रदर्शित करने के इच्छुक पात्र आवेदकों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

आवेदकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के लिए बिहार सरकार के सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल पर अलग से निर्धारित लिंक उपलब्ध कराया गया है।

आवेदन करने के लिए आधिकारिक पोर्टल पर जाएं:

 

आवेदन करने से पहले आवेदकों को पोर्टल पर उपलब्ध दिशा-निर्देशों और पात्रता संबंधी शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ लेना चाहिए, ताकि आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में किसी तरह की परेशानी न हो।

कैसे होगा चयन? जानिए पूरी प्रक्रिया

उद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर 2026 में भागीदारी के लिए आवेदकों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। इसके लिए आवेदन प्राप्त होने के बाद कई चरणों में मूल्यांकन होगा।

पहला चरण—आवेदनों की प्रारंभिक छंटनी:
सबसे पहले प्राप्त आवेदनों की प्रारंभिक जांच की जाएगी। इस दौरान निर्धारित मानदंडों के अनुसार आवेदनों की छंटनी होगी।

दूसरा चरण—उत्पादों की भौतिक प्रस्तुति:
प्रारंभिक छंटनी में चयनित आवेदकों को अपने उत्पादों की भौतिक प्रस्तुति उद्योग विभाग के समक्ष करनी होगी। इस चरण में आवेदकों को अपने उत्पाद प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

तीसरा चरण—अंतिम चयन:
उत्पादों की प्रस्तुति और निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।

चौथा चरण—परिणाम की घोषणा:
अंतिम चयन से संबंधित परिणाम पोर्टल पर प्रकाशित किए जाएंगे। आवेदक पोर्टल के माध्यम से चयन संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल आवेदन कर देने से ट्रेड फेयर में भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी। अंतिम चयन निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।

स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने की पहल

बिहार के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने की यह पहल कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों के लिए अपने काम को व्यापक पहचान दिलाने का माध्यम बन सकती है। राष्ट्रीय मंच पर उत्पादों की प्रस्तुति से उन्हें नए बाजारों से जुड़ने और अपने व्यवसाय के विस्तार की संभावनाओं को तलाशने का अवसर मिल सकता है।

इसके साथ ही बिहार की पारंपरिक कला, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय स्तर पर विकसित उद्यमिता को भी व्यापक रूप से सामने लाने में मदद मिलेगी।

उद्योग विभाग ने पात्र कारीगरों, उद्यमियों, एमएसएमई और उत्पादकों से इस अवसर का लाभ उठाने तथा बिहार के विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है।

आवेदन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एक नजर में

विवरणजानकारी
आयोजन45वां इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर 2026
संबंधित विभागउद्योग विभाग, बिहार सरकार
कार्यान्वयन एजेंसीबिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा)
आवेदन शुरू होने की तिथि14 अक्टूबर 2026
आवेदन की अंतिम तिथि30 अक्टूबर 2026
आवेदन का माध्यमऑनलाइन
चयन प्रक्रियाप्रारंभिक छंटनी, उत्पादों की भौतिक प्रस्तुति और मूल्यांकन
चयन परिणामआधिकारिक पोर्टल पर
आवेदन लिंक

 

नीला ड्रम हत्याकांड में बड़ा फैसला: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, सौरभ राजपूत हत्याकांड में कोर्ट का सख्त रुख

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देश को झकझोर देने वाले मेरठ हत्याकांड में अदालत का बड़ा निर्णय, 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद सुनाई गई मौत की सजा; जानिए कैसे एक नीले ड्रम से खुला खौफनाक हत्याकांड का राज

मेरठ | 14 अक्टूबर 2026 | SILK TV NEWS

देशभर में सुर्खियां बटोरने वाले उत्तर प्रदेश के मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अपनी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला के खिलाफ चल रहे सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने दोनों दोषियों को मौत की सजा यानी फांसी सुनाई है। इस मामले ने न केवल मेरठ, बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया था। एक ऐसा मामला, जिसमें रिश्तों पर भरोसे, एक परिवार की जिंदगी और अपराध की भयावहता को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई थी।

इस मामले में अदालत का फैसला करीब 13 महीने तक चली न्यायिक प्रक्रिया, 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने के बाद आया है। 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल को हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई और 14 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।

अदालत के फैसले में क्या रहा खास?

मेरठ की जिला अदालत में सजा पर सुनवाई के दौरान दोनों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। अदालत ने सजा सुनाने से पहले दोनों से उनका पक्ष जानना चाहा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों ने इस दौरान कुछ नहीं कहना चाहा।

इसके बाद अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई। इस फैसले के साथ ही देशभर में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव पूरा हुआ है। हालांकि, मृत्युदंड के खिलाफ उपलब्ध कानूनी उपायों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया का महत्व भी बना रहेगा।

आखिर कौन थे सौरभ राजपूत, जिनकी हत्या ने देश को हिला दिया?

सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे थे और लंदन में काम करते थे। उन्होंने वर्ष 2016 में मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। दोनों की एक बेटी भी है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सौरभ 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे। इसके कुछ ही दिनों बाद उनकी हत्या कर दी गई। इस घटना ने तब और सनसनी फैला दी, जब पुलिस को उनके शव के अवशेष एक नीले प्लास्टिक ड्रम में मिले।

इस मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की जांच और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा।

नीले ड्रम में कैसे छिपाया गया था हत्या का राज?

इस हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली बात शव को ठिकाने लगाने का तरीका था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ की हत्या के बाद उनके शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट से ढक दिया गया। आरोपियों पर वारदात के बाद सबूत मिटाने की कोशिश करने का भी मामला था।

पुलिस की जांच में ड्रम, सीमेंट, रेत और अन्य सामान की खरीद से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई। अभियोजन पक्ष ने इन परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ गवाहों के बयान अदालत के सामने रखे।

इसी वजह से यह मामला केवल एक हत्या की वारदात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर में अपराध, रिश्तों में विश्वासघात और न्याय व्यवस्था को लेकर चर्चा का विषय बन गया।

शिमला जाने से लेकर गिरफ्तारी तक, जानिए मामले की पूरी टाइमलाइन

24 फरवरी 2025: सौरभ राजपूत लंदन से मेरठ लौटे।

मार्च 2025 की शुरुआत: अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इसी दौरान सौरभ की हत्या की गई और उनके शव को नीले ड्रम में छिपाया गया।

मार्च 2025: वारदात के बाद मुस्कान और साहिल के शिमला जाने की बात जांच में सामने आई।

मार्च 2025: पुलिस ने मामले की जांच के दौरान दोनों को गिरफ्तार किया और नीले ड्रम से शव के अवशेष बरामद किए।

30 सितंबर 2026: मेरठ की जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया।

14 अक्टूबर 2026: अदालत ने दोनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई।

22 गवाह और 126 सुनवाइयां: अदालत तक कैसे पहुंचा मामला?

इस हत्याकांड की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इनमें सौरभ के परिजनों, परिचितों और मामले से जुड़े अन्य लोगों के बयान शामिल थे।

जांच से जुड़े पहलुओं में ड्रम, दवाइयों, चाकू, सीमेंट और रेत की खरीद से संबंधित जानकारी भी महत्वपूर्ण रही। अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत में अपना पक्ष रखा।

बचाव पक्ष ने भी अपनी दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी करार दिया और सजा पर अंतिम निर्णय के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की।

सौरभ के परिवार को मिला न्याय? फैसले से जुड़ी उम्मीदें और आगे की कानूनी प्रक्रिया

सौरभ के परिवार ने इस मामले में आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की थी। परिवार की ओर से मृत्युदंड की मांग किए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।

अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक अहम चरण पूरा हुआ है। हालांकि, मृत्युदंड के मामलों में आगे की अपील और अन्य निर्धारित कानूनी प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए इस फैसले के बाद भी मामले के कानूनी घटनाक्रम पर नजर बनी रहेगी।

क्यों देशभर में चर्चा का विषय बना नीला ड्रम हत्याकांड?

इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े किए। एक पति की हत्या, शव को छिपाने की कोशिश और मामले का खुलासा होने के बाद सामने आए घटनाक्रम ने लोगों को झकझोर दिया।

इस घटना में सबसे अहम बात यह रही कि पुलिस की जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा और दोषियों को सजा सुनाई गई।

नीला ड्रम हत्याकांड का फैसला केवल एक चर्चित आपराधिक मामले का घटनाक्रम नहीं है, बल्कि यह याद दिलाता है कि गंभीर अपराधों की जांच, साक्ष्यों की अहमियत और न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।

भागलपुर के कंझिया मोड़ पर ग्रामीणों का सत्याग्रह, सर्विस रोड की मांग पर मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन जाम

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सड़क, नाला और सर्विस रोड की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे सैकड़ों ग्रामीण, मुंह पर लाल कपड़ा बांधकर की नारेबाजी; फोरलेन पर वाहनों की लंबी कतार

Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर में सड़क, नाला और सर्विस रोड की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। नाथनगर के कंझिया मोड़ पर मंगलवार सुबह करीब 8 बजे सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने मुंह पर लाल कपड़ा बांधकर अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। इसके बाद मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन पर बांस-बल्ला लगाकर सड़क जाम कर दिया। आंदोलन के कारण फोरलेन के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन प्रभावित हुआ।

सर्विस रोड और नाले की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में सड़क, नाला और सर्विस रोड की व्यवस्था उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। इन्हीं समस्याओं को लेकर उन्होंने सत्याग्रह का रास्ता अपनाया है। मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण कंझिया मोड़ पर जुटे और एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने मुंह पर लाल कपड़ा बांधकर नारेबाजी की। इसके बाद फोरलेन पर बांस-बल्ला लगाकर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। सड़क जाम होने से दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

वरीय अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग

आंदोलन की सूचना मिलने पर मधुसूदनपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने और जाम हटाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

ग्रामीणों की मांग है कि वरीय अधिकारी मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनें। उनका कहना है कि जब तक संबंधित अधिकारी मौके पर आकर उनकी बात नहीं सुनते, तब तक आंदोलन को लेकर आगे का निर्णय नहीं लिया जाएगा।

मांगें पूरी होने तक आंदोलन पर फैसला अधिकारियों से बातचीत के बाद

ग्रामीणों के रुख से स्पष्ट है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। उनका जोर इस बात पर है कि सड़क, नाला और सर्विस रोड से जुड़ी मांगों पर जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर बातचीत करें।

फिलहाल ग्रामीणों का आंदोलन और फोरलेन जाम के कारण यातायात प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और सड़क पर आवागमन कब सामान्य होता है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

महज 3 सेंटीमीटर के पीपल के पत्ते पर मां दुर्गा की तस्वीर, मधुरेन्द्र ने दिया नारी सम्मान का संदेश

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नवरात्र में कलाकार की अनोखी कलाकारी ने खींचा ध्यान, तीन घंटे की मेहनत से हरे पत्ते पर उकेरी मां दुर्गा की सूक्ष्म तस्वीर; छेड़छाड़ रोकने और महिलाओं की सुरक्षा का दिया संदेश

Bhagalpur News: नवरात्र के पावन अवसर पर बिहार के प्रसिद्ध रेत कलाकार मधुरेन्द्र कुमार ने अपनी अनोखी कलाकारी के जरिए महिला सुरक्षा और सम्मान का संदेश दिया है। उन्होंने महज तीन सेंटीमीटर के हरे पीपल के पत्ते पर मां दुर्गा की बेहद सूक्ष्म तस्वीर उकेरकर अपनी कलात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। इस छोटी-सी कलाकृति को तैयार करने में उन्हें करीब तीन घंटे का समय लगा। मां दुर्गा की इस तस्वीर के माध्यम से कलाकार ने समाज से लड़कियों के साथ छेड़छाड़ रोकने और महिलाओं को सम्मान देने की अपील की है।

तीन सेंटीमीटर के पत्ते पर मां दुर्गा की मनमोहक तस्वीर

नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना के बीच मधुरेन्द्र कुमार की यह कलाकृति कला और सामाजिक संदेश का अनूठा उदाहरण है। हरे पीपल के पत्ते जैसे छोटे आधार पर मां दुर्गा की तस्वीर उकेरना उनकी बारीक कलाकारी, एकाग्रता और धैर्य को दर्शाता है। महज तीन सेंटीमीटर के पत्ते पर तस्वीर तैयार करने के लिए उन्हें करीब तीन घंटे तक लगातार मेहनत करनी पड़ी।

कलाकार ने अपनी इस कलाकृति को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसके जरिए समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देने की कोशिश की है। उनका उद्देश्य लोगों को यह याद दिलाना है कि मां दुर्गा की पूजा के साथ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

 मां दुर्गा की पूजा के साथ महिलाओं का सम्मान भी जरूरी

मधुरेन्द्र कुमार ने अपनी कलाकृति के माध्यम से लड़कियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को रोकने और महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अपनाने की अपील की है। उनका संदेश है कि नारी को शक्ति का स्वरूप मानने वाले समाज को अपने व्यवहार में भी महिलाओं के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसे में कलाकार की यह पहल धार्मिक आस्था को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ती है। महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी भी है।

कला के जरिए सामाजिक बदलाव की पहल

कला केवल सुंदर आकृतियां बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके जरिए समाज तक प्रभावशाली संदेश भी पहुंचाया जा सकता है। मधुरेन्द्र कुमार की यह सूक्ष्म कलाकृति इसी सोच को सामने लाती है। छोटे से पीपल के पत्ते पर मां दुर्गा की तस्वीर बनाकर उन्होंने महिला सम्मान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है।

नवरात्र के इस अवसर पर उनकी कलाकृति का संदेश स्पष्ट है—मां दुर्गा की आराधना तभी सार्थक होगी, जब समाज में बेटियों और महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और समान अधिकार मिलेंगे।

भागलपुर में खगड़िया गिरोह का भंडाफोड़, जीआरपी-आरपीएफ ने 6 सदस्यों को दबोचा

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बुजुर्ग महिला यात्री की सोने की चेन काटने के मामले में कार्रवाई, सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद छह आरोपी गिरफ्तार; ब्लेड और मोबाइल बरामद

Bhagalpur News: भागलपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने के दौरान बुजुर्ग महिला यात्री की सोने की चेन काटने के मामले में जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। रेल पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोग खगड़िया गिरोह के सदस्य बताए जा रहे हैं। आरोपियों के पास से धारदार ब्लेड और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस मामले में आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई जा सके।

ट्रेन में चढ़ते समय बुजुर्ग महिला की चेन काटने की शिकायत

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले भागलपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने के दौरान एक बुजुर्ग महिला यात्री की सोने की चेन काटे जाने की शिकायत सामने आई थी। घटना के बाद रेल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा और चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने मामले की पड़ताल की।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई कार्रवाई

मामले की जांच के दौरान घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। फुटेज की जांच और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर पुलिस ने छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार लोगों के पास से धारदार ब्लेड और मोबाइल फोन बरामद होने की बात सामने आई है। पुलिस अब बरामद सामान और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले की आगे जांच कर रही है।

रेल डीएसपी ने दी कार्रवाई की जानकारी

रेल डीएसपी आलोक कुमार ने बताया कि बुजुर्ग महिला यात्री की सोने की चेन काटे जाने की शिकायत मिलने के बाद जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज की मदद ली गई, जिसके आधार पर छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में यात्रियों के सामान की चोरी तथा चेन काटने जैसी घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर हैं। ऐसे में पुलिस की इस कार्रवाई को मामले की जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और मामले की आगे की जांच जारी है।

बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए ₹1 करोड़, पर्यटन मंत्री ने CM को सौंपा बैंक ड्राफ्ट

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आपदा राहत और जनकल्याणकारी कार्यों को मिलेगा संबल, पटना में आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन विभाग के सचिव समेत कई वरिष्ठ IAS और IFS अधिकारी रहे मौजूद

Patna News: बिहार में जनकल्याणकारी कार्यों और आपदा राहत प्रयासों को मजबूती देने के उद्देश्य से बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड ने मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ रुपये का योगदान दिया है। सोमवार को पटना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पर्यटन विभाग के मंत्री ने एक करोड़ रुपये का बैंक ड्राफ्ट बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंपा। इस योगदान को राज्य में जरूरतमंदों की सहायता और विभिन्न राहत कार्यों के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 मुख्यमंत्री को सौंपा गया एक करोड़ रुपये का बैंक ड्राफ्ट

बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के अंतर्गत कार्यरत बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, पटना की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में यह राशि अंशदान के रूप में दी गई। कार्यक्रम के दौरान पर्यटन विभाग के मंत्री ने मुख्यमंत्री को बैंक ड्राफ्ट सौंपकर निगम की ओर से सहयोग प्रदान किया।

मुख्यमंत्री राहत कोष का उपयोग जरूरतमंद लोगों की सहायता और विभिन्न राहत संबंधी कार्यों में किया जाता है। ऐसे में निगम की ओर से दिया गया यह आर्थिक सहयोग राज्य में जनहित से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर पर्यटन विभाग और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पर्यटन विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह (IAS), बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक  नन्द किशोर (IFS) तथा निगम के अपर प्रबंध निदेशक प्रदीप सिंह (IAS) की मौजूदगी रही।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ रुपये के अंशदान की यह पहल संपन्न हुई। पर्यटन विभाग और निगम की इस भागीदारी को सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राज्य के जनकल्याणकारी प्रयासों के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

जनकल्याण और राहत कार्यों में सहयोग की पहल

बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम का यह योगदान राज्य में राहत एवं कल्याणकारी गतिविधियों को सहयोग देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से उपलब्ध संसाधन जरूरतमंदों की सहायता और आपदा की परिस्थितियों में राहत पहुंचाने जैसे कार्यों में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

पर्यटन क्षेत्र के विकास के साथ-साथ जनहित से जुड़े कार्यों में संस्थागत सहयोग की ऐसी पहल सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को भी रेखांकित करती है। निगम की ओर से दिया गया एक करोड़ रुपये का यह अंशदान राज्य के कल्याणकारी प्रयासों में सहयोग की भावना को दर्शाता है।`

दुर्गा पूजा को लेकर भागलपुर में अग्निशमन विभाग अलर्ट, 24 घंटे कंट्रोल रूम तैयार

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Bhagalpur News: पूजा पंडालों का निरीक्षण कर रहे जिला अग्निशमन पदाधिकारी रमन राज, हर पंडाल में अग्निशमन यंत्र, पानी से भरे ड्रम और बालू रखने के निर्देश; बिजली के खुले तारों पर भी विशेष नजर।

Bhagalpur News: दुर्गा पूजा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए भागलपुर में तैयारियां तेज हो गई हैं। एक ओर पूजा समितियां पंडालों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर अगलगी की संभावित घटनाओं को रोकने के लिए अग्निशमन विभाग भी अलर्ट मोड में आ गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग की ओर से 24 घंटे संचालित होने वाला कंट्रोल रूम तैयार किया गया है। इसके साथ ही जिला अग्निशमन पदाधिकारी रमन राज विभिन्न पूजा पंडालों का निरीक्षण कर रहे हैं और आयोजकों को आग से बचाव के जरूरी उपायों की जानकारी दे रहे हैं।

पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था की जांच

दुर्गा पूजा के दौरान विभिन्न पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। पंडालों में सजावट, बिजली की रोशनी और अस्थायी संरचनाओं के कारण अगलगी का खतरा भी बना रहता है। इसे देखते हुए अग्निशमन विभाग पूजा समितियों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए जागरूक कर रहा है।

जिला अग्निशमन पदाधिकारी रमन राज पंडालों का निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान आयोजकों को आग से बचाव के उपकरणों की व्यवस्था करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

 हर पंडाल में अग्निशमन यंत्र, पानी और बालू रखने का निर्देश

जिला अग्निशमन पदाधिकारी रमन राज ने बताया कि सभी पूजा समितियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक पूजा पंडाल में अग्निशमन यंत्र के साथ पानी से भरे ड्रम और बालू रखने को कहा गया है, ताकि आग लगने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर तुरंत बचाव कार्य किया जा सके।

उन्होंने आयोजकों को यह भी निर्देश दिया है कि पंडालों में आग से सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम पहले से सुनिश्चित किए जाएं। केवल सजावट और रोशनी पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनके इस्तेमाल की जानकारी भी जरूरी है।

बिजली के खुले तारों पर विशेष ध्यान

पूजा पंडालों में बिजली की सजावट और रोशनी के लिए अस्थायी वायरिंग की जाती है। ऐसे में बिजली के तारों में खराबी या खुले जोड़ होने से दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। इसे देखते हुए अग्निशमन विभाग ने पूजा समितियों को बिजली के तारों की जांच कराने और कहीं भी जोड़ खुला नहीं रहने देने की हिदायत दी है।

आयोजकों को सलाह दी जा रही है कि पंडालों में बिजली की व्यवस्था सुरक्षित तरीके से कराई जाए और किसी भी तरह की लापरवाही से बचा जाए। सुरक्षा मानकों का पालन करने से संभावित हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है।

 24 घंटे कंट्रोल रूम, आपात स्थिति में मिलेगी सहायता

दुर्गा पूजा के दौरान अगलगी की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अग्निशमन विभाग ने 24 घंटे कंट्रोल रूम तैयार किया है। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में सूचना प्राप्त कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाए रखना है।

विभाग की ओर से पूजा समितियों को सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में समय रहते कदम उठाए जा सकें।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विभाग का जोर

भागलपुर में दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा पंडालों में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अग्निशमन विभाग की तैयारियां महत्वपूर्ण हैं। पंडालों का निरीक्षण, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और बिजली की वायरिंग की जांच जैसे उपाय दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

अग्निशमन विभाग ने पूजा समितियों से अपील की है कि वे सभी सुरक्षा निर्देशों का गंभीरता से पालन करें और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दें, ताकि दुर्गा पूजा उत्सव सुरक्षित माहौल में संपन्न हो सके।

दुर्गा पूजा से पहले जगदीशपुर बाजार में प्रशासन का एक्शन, सड़क किनारे की दुकानें और झुग्गी-झोपड़ियां हटाईं

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कोकरा पुल से अस्पताल चौक तक चला अतिक्रमण हटाओ अभियान, अंचलाधिकारी सतीश कुमार के नेतृत्व में हुई कार्रवाई; दोबारा सरकारी जमीन पर कब्जा करने पर दी गई चेतावनी।

रिपोर्ट: बीरेंद्र कुमार राय

जगदीशपुर (भागलपुर)। दुर्गा पूजा के दौरान बाजार में भीड़ और आवागमन की संभावित परेशानी को देखते हुए प्रशासन ने जगदीशपुर बाजार में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। अंचलाधिकारी सतीश कुमार के नेतृत्व में अधिकारियों और पुलिस बल की टीम ने कोकरा पुल से अस्पताल चौक तक मुख्य सड़क के दोनों किनारों पर किए गए अतिक्रमण को हटाया। इस दौरान सड़क किनारे अवैध रूप से लगाई गई दुकानों और झुग्गी-झोपड़ियों को हटाया गया। प्रशासन ने अतिक्रमण करने वालों को दोबारा सरकारी जमीन पर दुकान नहीं लगाने की चेतावनी भी दी।

दुर्गा पूजा में जाम की समस्या रोकने के लिए कार्रवाई

दुर्गा पूजा के दौरान जगदीशपुर बाजार में श्रद्धालुओं और खरीदारों की भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में मुख्य सड़क के किनारे अतिक्रमण होने से आवागमन बाधित होने और जाम की समस्या उत्पन्न होने की आशंका थी। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।

अभियान के दौरान सड़क के किनारे सरकारी जमीन पर लगाई गई दुकानों और बनाई गई झुग्गी-झोपड़ियों को हटाया गया, ताकि सड़क पर आवागमन के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो सके और पूजा के दौरान लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

आवेदन मिलने के बाद प्रशासन ने लिया संज्ञान

बताया जाता है कि जगदीशपुर बाजार में अतिक्रमण की समस्या को लेकर दुर्गा पूजा समिति के सचिव भारती भूषण झा और प्रमुख पति अजय मंडल ने अंचलाधिकारी को आवेदन दिया था।

आवेदन में उल्लेख किया गया था कि मुख्य सड़क के दोनों ओर कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों को सड़क की तरफ आगे तक बढ़ा लिया है। इससे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण होने के साथ-साथ आम लोगों के आवागमन में भी परेशानी होती है। आवेदन में यह आशंका भी जताई गई थी कि दुर्गा पूजा के दौरान बाजार में भीड़ बढ़ने पर स्थिति और मुश्किल हो सकती है।

आवेदन पर संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया।

दोबारा अतिक्रमण करने पर कार्रवाई की चेतावनी

अभियान के दौरान अधिकारियों ने दुकानदारों और अतिक्रमण करने वालों को सरकारी जमीन पर दोबारा दुकान नहीं लगाने की चेतावनी दी। प्रशासन का उद्देश्य मुख्य सड़क को अतिक्रमण से मुक्त कराना और बाजार में आवागमन को सुचारु बनाए रखना है।

दुर्गा पूजा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहती है। ऐसे में सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाने की इस कार्रवाई को पूजा की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

अभियान में पुलिस बल भी रहा मौजूद

अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान जगदीशपुर थानाध्यक्ष रामचंद्र सिंह सहित अमरजीत कुमार सिंह, अजीत कुमार, धनंजय कुमार और पुलिस बल के अन्य जवान मौजूद रहे। अधिकारियों की मौजूदगी में सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाया गया।

अब देखना होगा कि अभियान के बाद बाजार की मुख्य सड़क पर आवागमन कितना सुगम होता है और सरकारी जमीन पर दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।