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पटना: बापू टावर देख मंत्रमुग्ध हुए जावेद अख्तर, बोले— “दुनिया घूम ली, पर गांधी जी का ऐसा सजीव चित्रण कहीं नहीं देखा”

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Patna News: देश के मशहूर गीतकार, कवि और पटकथा लेखक जावेद अख्तर मंगलवार को पटना के गर्दनीबाग स्थित नवनिर्मित ‘बापू टावर’ पहुंचे। संग्रहालय की भव्यता और महात्मा गांधी के विचारों के आधुनिक प्रदर्शन को देखकर वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे दुनिया का सबसे प्रभावशाली गांधी म्यूजियम करार दे दिया।

​ भव्य स्वागत और निदेशक से चर्चा

​बापू टावर पहुंचने पर संस्थान के निदेशक विनय कुमार ने जावेद अख्तर का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्हें पुष्पगुच्छ, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान निदेशक ने उन्हें बापू टावर के निर्माण के पीछे की सोच, इसकी वास्तुकला और यहाँ संजोए गए ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

​ “दुनिया में ऐसा प्रभावशाली म्यूजियम नहीं देखा”: जावेद अख्तर

​पूरे परिसर का भ्रमण करने के बाद जावेद अख्तर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने दुनिया भर के कई बड़े संग्रहालय देखे हैं, लेकिन बापू टावर की बात अलग है।

​”मैंने पूरी दुनिया की खाक छानी है, कई नामी म्यूजियम देखे हैं, लेकिन गांधी जी की स्मृतियों और उनके सिद्धांतों को इतने जीवंत और आधुनिक तरीके से कहीं नहीं दर्शाया गया। बापू टावर वाकई खास है, यहाँ आकर मुझे बापू के बारे में बहुत कुछ नया सीखने को मिला।”

 

​ तकनीक और इतिहास का बेजोड़ संगम

​भवन निर्माण विभाग द्वारा निर्मित इस संग्रहालय में गांधी जी की विरासत को सिर्फ तस्वीरों तक सीमित नहीं रखा गया है। जावेद अख्तर ने यहाँ मौजूद:

  • ​म्यूरल्स और मूर्तियाँ: जो इतिहास की कहानियों को बयां करती हैं।
  • ​ऑडियो-विजुअल और लघु फिल्में: जिनसे स्वतंत्रता संग्राम के दृश्य सजीव हो उठते हैं।
  • ​आधुनिक रैम्प और गैलरी: जो पर्यटकों को गांधी जी की जीवन यात्रा के करीब ले जाती है।

​ युवाओं के लिए शिक्षा का नया केंद्र

​जावेद अख्तर ने माना कि यह टावर न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेगा, बल्कि नई पीढ़ी और छात्रों के लिए बापू के आदर्शों को समझने का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा। चंपारण सत्याग्रह से लेकर बिहार के साथ गांधी जी के अटूट जुड़ाव को यहाँ जिस तकनीक से दिखाया गया है, वह अद्भुत है।

सोनपुर: बाबा हरिहरनाथ की शरण में CM नीतीश के बेटे निशांत, मत्था टेक बोले- ‘पिता की तरह मुझ पर भी रहे कृपा’

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Patna News: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार मंगलवार को विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बाबा हरिहरनाथ मंदिर पहुंचे। लंबे समय के बाद सार्वजनिक जीवन में निशांत कुमार की इस सक्रियता ने न केवल श्रद्धालुओं और समर्थकों में जोश भर दिया, बल्कि सियासी गलियारों में भी नई चर्चाएं छेड़ दी हैं।

​ समर्थकों का भारी हुजूम और जोरदार स्वागत

​दोपहर के समय जैसे ही निशांत कुमार का काफिला सोनपुर के मंदिर परिसर में पहुंचा, वहां पहले से मौजूद समर्थकों ने उन्हें घेर लिया। ‘जय श्री हरिहरनाथ’ के जयघोष के साथ फूलों और मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया गया। निशांत ने बेहद शालीनता के साथ लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और मंदिर के गर्भगृह में जाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

​ 20 साल बाद बाबा के दरबार में, छलका दर्द और सम्मान

​पूजा के उपरांत मीडिया से बात करते हुए निशांत कुमार भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि वह लगभग दो दशकों (20 साल) के लंबे अंतराल के बाद बाबा हरिहरनाथ के दर्शन करने आए हैं। उन्होंने कहा:

​”जिस तरह पिछले 20 सालों से बिहार की महान जनता ने मेरे पिताजी (नीतीश कुमार) को मान-सम्मान और स्नेह दिया है, वह अतुलनीय है। बाबा भोलेनाथ की कृपा पिताजी की तरह ही प्रदेश की जनता और मेरे ऊपर भी बनी रहे, यही कामना है।”

 

​ पिता के कार्यों का जिक्र और जनता से अपील

​निशांत कुमार ने अपने पिता के शासनकाल और बिहार के विकास कार्यों को याद करते हुए कहा कि राज्य की जनता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के योगदान को कभी नहीं भूलेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता का समर्थन आने वाले समय में भी उनके पिता और उनकी पार्टी (JDU) के साथ मजबूती से बना रहेगा।

​ सियासी गलियारों में सुगबुगाहट: क्या यह नई शुरुआत है?

​निशांत कुमार आमतौर पर प्रचार और राजनीति से दूर रहते हैं, लेकिन हाल के दिनों में उनकी बढ़ती सक्रियता और सोनपुर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर उनके सार्वजनिक दौरे को राजनीतिक पंडित बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं। चुनाव और संगठन की मजबूती के बीच उनका यह दौरा जेडीयू समर्थकों में नई ऊर्जा भरने का काम कर रहा है।

मिडिल ईस्ट संकट का असर: भागलपुर की रसोई से LPG गायब, फिर लौटा मिट्टी के चूल्हों और कोयले का दौर

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Bhagalpur News: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध के तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अब आम आदमी की थाली पर भी वार करना शुरू कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में आई बाधा का सीधा असर बिहार के भागलपुर में देखने को मिल रहा है। जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर की भारी किल्लत के बीच अब लोगों ने आधुनिकता को छोड़ अपनी जड़ों की ओर लौटना शुरू कर दिया है।

​ गैस सिलेंडरों की किल्लत, मिट्टी के चूल्हों की बढ़ी मांग

​शहर के चौक-चौराहों से लेकर ग्रामीण गलियारों तक अब रसोई की तस्वीर बदल गई है। गैस चूल्हों की नीली लौ की जगह अब मिट्टी के चूल्हों का धुआं नजर आने लगा है। बाजार में मिट्टी के चूल्हों की मांग में रातों-रात जबरदस्त उछाल आया है। आलम यह है कि जो लोग सालों पहले गैस कनेक्शन मिलने पर चूल्हा फेंक चुके थे, वे आज फिर से उसे खरीदने या बनाने में जुट गए हैं।

​ 300 से लेकर 5000 रुपये तक बिक रहे हैं चूल्हे

​भागलपुर के बाजारों में इन दिनों लाल मिट्टी से बने चूल्हों की दुकान पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है।

  • ​साधारण चूल्हा: 300 रुपये से शुरू।
  • ​बड़ी भट्टियां: बनावट और मजबूती के आधार पर 5,000 रुपये तक बिक रही हैं। सिर्फ घरों में ही नहीं, बल्कि बड़े होटलों और रेस्टोरेंट में भी अब कोयले की भट्टी का इस्तेमाल अनिवार्य होता जा रहा है ताकि ग्राहकों को समय पर भोजन दिया जा सके।

​ शादियों के सीजन में कैटरिंग व्यवसाय पर ‘संकट के बादल’

​वर्तमान में लग्न और शादी-विवाह का सीजन चरम पर है। ऐसे में कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सैकड़ों लोगों का खाना बनाने के लिए बड़ी मात्रा में कमर्शियल सिलेंडर की जरूरत होती है, जिसकी सप्लाई फिलहाल ठप है।

​व्यवसायी बताते हैं कि: “बिना गैस के बुकिंग पूरी करना मुश्किल हो रहा है। मजबूरी में हमें कोयले और लकड़ी के बड़े चूल्हे खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे न केवल खर्च बढ़ रहा है बल्कि खाना बनाने में समय भी अधिक लग रहा है।”

 

​ क्या कहते हैं दुकानदार और खरीदार?

​दुकानदार संतोष कुमार का कहना है: > “पिछले कई सालों से चूल्हों की बिक्री न के बराबर थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में अचानक मांग इतनी बढ़ गई है कि स्टॉक कम पड़ रहा है। लोग गैस की अनिश्चितता से डरे हुए हैं और बैकअप के तौर पर कोयले वाली भट्टी ले जा रहे हैं।”

​खरीदार प्रमोद साह का दर्द: > “गैस एजेंसी के चक्कर काटकर थक गए हैं। बुकिंग के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहा। घर में चूल्हा जलना बंद न हो जाए, इसलिए आज मिट्टी का चूल्हा खरीदने आए हैं। महंगाई के इस दौर में अब पुराने तरीके ही सहारा हैं।”

​आधुनिकता पर भारी पड़ा संकट

​भागलपुर की यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि जब वैश्विक संकट दस्तक देता है, तो तकनीक और आधुनिक सुविधाएं धरी की धरी रह जाती हैं। एक बार फिर ‘पुराना ही सोना है’ (Old is Gold) वाली कहावत चरितार्थ हो रही है, जहां लोग धुएं और राख के बीच अपनी रसोई बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

भागलपुर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: परबत्ती इलाके से ब्राउन शुगर के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, नशे के नेटवर्क का भंडाफोड़

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में भागलपुर पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के कड़े निर्देश पर अवैध शराब, हथियार और मादक पदार्थों के खिलाफ जारी कार्रवाई के तहत पुलिस ने विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र से दो शातिर नशीले पदार्थों के तस्करों को गिरफ्तार किया है।

​गुप्त सूचना पर बिछाया गया जाल

​जानकारी के अनुसार, 6 अप्रैल को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि परबत्ती इलाके में ब्राउन शुगर की बड़ी खेप की खरीद-बिक्री होने वाली है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने इलाके में घेराबंदी शुरू की।

​खदेड़कर पकड़ा गया आरोपी, तलाशी में खुला राज

​पुलिस टीम जब परबत्ती पहुँची, तो एक युवक संदिग्ध हालत में घूमता दिखा। पुलिस को देखते ही वह भागने लगा, लेकिन मुस्तैद सशस्त्र बल के जवानों ने उसे खदेड़कर दबोच लिया। तलाशी लेने पर उसके पास से 8 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद हुई। गिरफ्तार युवक की पहचान विशाल कुमार के रूप में हुई है।

​निशानदेही पर सप्लाई चेन का हुआ खुलासा

​विशाल से जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो उसने अपने पूरे नेटवर्क का राज उगल दिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने राजा गोस्वामी नाम के एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि:

  • ​राजा गोस्वामी: मुख्य सप्लायर था जो ब्राउन शुगर उपलब्ध कराता था।
  • ​विशाल कुमार: राजा से माल लेकर उसे स्थानीय स्तर पर ग्राहकों तक पहुँचाने (रिटेलिंग) का काम करता था।

​सिटी एसपी ने दी जानकारी

​इस सफल कार्रवाई की विस्तृत जानकारी भागलपुर के सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह ने साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही, इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य सफेदपोशों और छोटे तस्करों की पहचान के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

बिहार: डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में कक्षा 11 के लिए नामांकन शुरू, छात्रों को मिलेंगी ये खास सुविधाएं

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Patna News: बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने राज्य के 46 डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए कक्षा 11 में नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जो छात्र बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना देख रहे हैं, उनके लिए यह एक सुनहरा अवसर है।

​आवेदन और नामांकन की महत्वपूर्ण तिथियां

​विभाग द्वारा जारी कैलेंडर के अनुसार, नामांकन की प्रक्रिया निम्नलिखित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएगी:

  • ​आवेदन की शुरुआत: 8 अप्रैल 2026
  • ​आवेदन की अंतिम तिथि: 27 अप्रैल 2026
  • ​नामांकन प्रक्रिया: 15 मई से 25 मई 2026 तक

​चयन प्रक्रिया और संकाय (Streams)

​इन विद्यालयों में नामांकन कक्षा 10 (मैट्रिक) में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। मेधा सूची के अनुसार छात्रों को उनकी पसंद के संकाय आवंटित किए जाएंगे। यहाँ तीनों मुख्य संकाय उपलब्ध हैं:

  1. ​विज्ञान (Science)
  2. ​वाणिज्य (Commerce)
  3. ​कला (Arts)

​मिलने वाली सुविधाएं: सब कुछ बिल्कुल मुफ्त

​डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय अपनी उच्च स्तरीय सुविधाओं के लिए जाने जाते हैं। चयनित छात्र-छात्राओं को निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान की जाएंगी:

  • ​पूर्ण आवासीय सुविधा: रहने और खाने का कोई शुल्क नहीं।
  • ​निःशुल्क सामग्री: स्कूल यूनिफॉर्म, जूते और पठन-पाठन की सामग्री।
  • ​प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी: बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ JEE (इंजीनियरिंग) और NEET (मेडिकल) जैसी कठिन परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग की व्यवस्था।

​कैसे करें आवेदन?

​इच्छुक अभ्यर्थी दो माध्यमों से अपना फॉर्म भर सकते हैं:

  1. ​ऑफलाइन: अपने जिले के ‘जिला कल्याण कार्यालय’ में जाकर निर्धारित प्रपत्र जमा करें।
  2. ​ऑनलाइन: विभागीय वेबसाइट state.bihar.gov.in/scstwelfare पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करें।

​जरूरी दस्तावेज (Checklist):

  • ​कक्षा 10 का अंक पत्र (Marksheet)
  • ​जाति प्रमाण-पत्र
  • ​आधार कार्ड की छायाप्रति
  • ​पासपोर्ट साइज फोटो

​सावधान: समय पर कराएं नामांकन

​विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई चयनित छात्र निर्धारित अवधि (15-25 मई) के भीतर नामांकन नहीं कराता है, तो उसकी सीट प्रतीक्षा सूची (Waiting List) के अगले अभ्यर्थी को दे दी जाएगी। अधिक जानकारी के लिए छात्र विभागीय वेबसाइट पर लॉग इन कर सकते हैं।

बिहार के गांवों की बदलती तकदीर: अब संकरी गलियों से नहीं, सीधे हाईवे से जुड़ेंगे प्रदेश के टोले; ‘सुलभ संपर्कता योजना’ ने पकड़ी रफ्तार

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Patna News: बिहार के ग्रामीण इलाकों में आवागमन की सूरत बदलने के लिए राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘सुलभ संपर्कता योजना’ के माध्यम से अब गांवों को केवल पक्की सड़कों से ही नहीं जोड़ा जा रहा, बल्कि उन्हें सीधे नेशनल हाईवे (NH) और स्टेट हाईवे (SH) जैसे बड़े मार्गों से कनेक्ट किया जा रहा है। इस पहल से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का जिला मुख्यालयों और बड़े शहरों से संपर्क बेहद आसान हो जाएगा।

​मिशन 1.29 लाख: लक्ष्य के करीब पहुँचा बिहार

​राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना और ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के तहत कुल 1,29,990 संपर्क विहीन बसावटों की पहचान की थी।

  • ​अब तक की उपलब्धि: 1,21,151 बसावटों को 1,20,178 किलोमीटर लंबी पक्की सड़कों से जोड़ा जा चुका है।
  • ​अगला कदम: शेष बचे टोलों और गांवों में भी युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य जारी है ताकि शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा सके।

​क्या है ‘सुलभ संपर्कता योजना’ और इसके फायदे?

​अब तक कई गांवों में पक्की सड़कें तो थीं, लेकिन वे संकरी या घुमावदार थीं, जिससे बड़े वाहनों या एंबुलेंस को हाईवे तक पहुँचने में समय लगता था। सुलभ संपर्कता योजना इस समस्या का स्थायी समाधान है:

  1. ​सीधा जुड़ाव: गांवों को सीधे एनएच (NH), एसएच (SH) और वृहद जिला पथों से जोड़ा जा रहा है।
  2. ​वैकल्पिक मार्ग: जाम से बचने के लिए ‘थ्रू रूट’ और ‘बाईपास’ का निर्माण किया जा रहा है।
  3. ​जर्जर सड़कों का कायाकल्प: पुरानी और टूटी सड़कों का पुनर्निर्माण कर उन्हें उच्च श्रेणी का बनाया जा रहा है।
  4. ​प्रशासनिक तेजी: अब तक 74 नई योजनाओं का चयन हुआ है, जिनमें 65 को मंजूरी मिल चुकी है और 16 पर काम शुरू भी हो गया है।

​ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी ‘सुपरफास्ट’ रफ्तार

​सड़कों के इस जाल का सबसे बड़ा लाभ बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होगा।

  • ​व्यापार में सुगमता: किसानों की फसलें और स्थानीय उत्पाद अब बिना देरी के बड़े बाजारों तक पहुँच सकेंगे।
  • ​आपातकालीन सेवाएं: संकरे रास्तों के जाम में फंसे बिना एंबुलेंस सीधे हाईवे का रास्ता ले सकेंगी, जिससे कीमती जान बचाई जा सकेगी।
  • ​शिक्षा और रोजगार: छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए अनुमंडल या जिला मुख्यालय जाना अब घंटों का नहीं, बल्कि मिनटों का काम होगा।

बिहार में जल क्रांति: 14.5 हजार से अधिक सरकारी भवनों पर ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ सिस्टम तैयार, भूजल स्तर सुधारने में मिली बड़ी कामयाबी

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Patna News: भविष्य के जल संकट से निपटने और गिरते भूगर्भ जल स्तर को थामने के लिए बिहार सरकार का ‘जल-जीवन-हरियाली’ मिशन अब धरातल पर रंग लाने लगा है। राज्य भर में सरकारी भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) की संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिससे न केवल पानी की बर्बादी रुकी है बल्कि धरती की प्यास बुझाने में भी मदद मिल रही है।

​सात वर्षों का सफर: 14 हजार से अधिक संरचनाएं स्थापित

​ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में राज्य भर में कुल 14,665 रेन वाटर हार्वेस्टिंग (RWH) सिस्टम लगाए गए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों की छतों पर गिरने वाले बारिश के पानी को सीधे जमीन के अंदर (Recharge) भेजना है।

​वर्ष-वार प्रगति: कब कितनी बनीं संरचनाएं?

​योजना के क्रियान्वयन में साल दर साल आई तेजी को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:

  • ​2019-20 (सबसे सफल वर्ष): 6,753 सिस्टम लगे।
  • ​2020-21: 5,752 संरचनाएं।
  • ​2024-25: 595 संरचनाएं।
  • ​2025-26: 403 संरचनाएं। (नोट: निर्माण कार्य अभी भी कई जिलों में निरंतर जारी है।)

​इन भवनों को बनाया गया केंद्र

​योजना के तहत किसी भी सार्वजनिक भवन को नहीं छोड़ा गया है। ग्रामीण विकास विभाग ने विशेष रूप से निम्नलिखित श्रेणियों पर ध्यान केंद्रित किया है:

  1. ​शिक्षा संस्थान: प्राथमिक विद्यालयों से लेकर बड़े महाविद्यालयों तक।
  2. ​स्वास्थ्य केंद्र: जिला अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)।
  3. ​प्रशासनिक भवन: समाहरणालय, ब्लॉक ऑफिस और थाना परिसर।

​“पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम” — ग्रामीण विकास मंत्री

​बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा:

​“जल-जीवन-हरियाली अभियान का उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि जल का संचयन भी है। सरकारी और गैर-सरकारी भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन संरचनाएं भूगर्भ जल पुनर्भरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। यह अभियान जल संकट को दूर करने और पर्यावरण को बचाने का सबसे सशक्त माध्यम है।”

 आम जनता के लिए संदेश

​सरकार के इन प्रयासों से यह स्पष्ट है कि जल संरक्षण अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जिम्मेदारी बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निजी भवनों के मालिक भी इस तकनीक को अपनाएं, तो बिहार आने वाले वर्षों में जल संकट से पूरी तरह मुक्त हो सकता है।

सन्हौला: बिजली विभाग की मनमानी से उपभोक्ता परेशान, बिना मीटर रीडिंग के थमाया जा रहा भारी-भरकम बिल

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड में बिजली विभाग की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। यहाँ एक उपभोक्ता ने विभाग पर बिना सही मीटर रीडिंग के मनमाना बिल भेजने का गंभीर आरोप लगाया है। बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान न होने से परेशान उपभोक्ता ने अब विभागीय अधिकारियों को अल्टीमेटम दे दिया है।

​खपत कम, बिल ज्यादा: क्या है पूरा मामला?

​सन्हौला प्रखंड के एक पीड़ित उपभोक्ता (उपभोक्ता संख्या: 52247740584) ने सहायक विद्युत अभियंता को आवेदन देकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उपभोक्ता का कहना है कि उनके घर में बिजली की वास्तविक खपत काफी कम है, लेकिन विभाग द्वारा भेजा जा रहा बिल उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर होता जा रहा है।

​“पूर्व की शिकायतों पर नहीं हुआ कोई गौर”

​आवेदन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह पहली बार नहीं है जब बिजली बिल में गड़बड़ी हुई है। इससे पहले भी मौखिक और लिखित रूप से विभाग को अवगत कराया गया था, लेकिन “सुस्त” विभागीय कार्यप्रणाली के कारण अब तक बिल में कोई सुधार नहीं किया गया। उपभोक्ता का आरोप है कि मीटर रीडर बिना घर आए या बिना मीटर देखे ही ‘अंदाजे’ से रीडिंग दर्ज कर रहे हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

​आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव

​पीडित ने बताया कि गलत बिल के कारण उन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने विभाग से मांग की है कि:

  • ​वर्तमान और पिछले बिलों की गहनता से जांच की जाए।
  • ​गलत तरीके से जोड़ी गई राशि को हटाकर बिल में सुधार किया जाए।
  • ​भविष्य में सही मीटर रीडिंग सुनिश्चित की जाए।

​विभाग का पक्ष और चेतावनी

​इस पूरे मामले पर विभागीय अधिकारियों ने आवेदन प्राप्त होने की पुष्टि की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच के लिए संबंधित टीम को निर्देशित किया गया है और जल्द ही तकनीकी गड़बड़ी को ठीक कर लिया जाएगा। वहीं, उपभोक्ता ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी उनकी समस्या अनसुनी रही, तो वे मामले को लेकर उच्चाधिकारियों और उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाएंगे।

भागलपुर: आस्था के केंद्र पर चोरों का धावा; बैजानी गांव के दो मंदिरों में चोरी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के बाईपास थाना क्षेत्र अंतर्गत बैजानी गांव में बीती रात अज्ञात चोरों ने दो प्रसिद्ध मंदिरों—हनुमान मंदिर और मां काली मंदिर—को निशाना बनाकर पुलिस की गश्ती को चुनौती दी है। चोरों ने न केवल कीमती बर्तनों और नकदी पर हाथ साफ किया, बल्कि मंदिर की संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया है।

​क्रमवार वारदात: एक रात, दो मंदिर

​जानकारी के अनुसार, चोरों ने सबसे पहले हनुमान मंदिर में प्रवेश किया। वहां उन्होंने पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाले कांसा और पीतल के कीमती बर्तनों को चुरा लिया। इसके बाद चोरों ने मंदिर की दानपेटी का ताला तोड़कर उसमें जमा नकदी निकाल ली।

​वारदात यहीं नहीं रुकी; चोरों ने पास ही स्थित मां काली मंदिर के भंडार कक्ष का गेट तोड़ दिया। हालांकि वहां से बड़ी चोरी की खबर नहीं है, लेकिन चोरों ने वहां लगी पानी की मोटर को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।

​सुबह पूजा के समय खुला राज

​हर रोज की तरह जब ग्रामीण सुबह मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। मंदिर का सामान बिखरा हुआ था और दानपेटी टूटी पड़ी थी। देखते ही देखते मंदिर परिसर में ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी देखने को मिली।

​नशेड़ियों के सिंडिकेट पर गहराया शक

​ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि यह किसी पेशेवर गिरोह से ज्यादा इलाके में सक्रिय नशेड़ियों (खासकर ब्राउन शुगर के आदी युवकों) का काम लग रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे की लत को पूरा करने के लिए ये युवक छोटी-मोटी चोरियों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे अब गांव के मंदिर भी सुरक्षित नहीं रहे।

​पुलिस की कार्रवाई और आश्वासन

​घटना की सूचना मिलते ही बाईपास थाना अध्यक्ष सुमन कुमार राय और एएसआई उमेष शुक्ला पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

​थाना अध्यक्ष का संदेश:

“हम सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं और संदिग्धों की पहचान की जा रही है। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। ग्रामीणों से अपील है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या नशा करने वालों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, उनका नाम गुप्त रखा जाएगा।”

​इस घटना के बाद ग्रामीणों ने पुलिस से रात के समय गश्ती बढ़ाने और नशे के अवैध कारोबार पर नकेल कसने की पुरजोर मांग की है।

भागलपुर: वार्ड 27 में सड़क निर्माण के दौरान भारी हंगामा, अतिक्रमण हटाने पहुँचे दस्ते का ग्रामीणों ने किया विरोध

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Bhagalpur News: स्मार्ट सिटी भागलपुर के वार्ड नंबर 27 में सड़क निर्माण को लेकर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब स्थानीय निवासियों और नगर निगम प्रशासन के बीच चौड़ाई को लेकर ठन गई। विवाद इतना बढ़ा कि मौके पर अतिक्रमण निरोधी दस्ते को बुलाना पड़ा, जिससे इलाके में घंटों तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

​क्या है पूरा विवाद?

​नगर निगम द्वारा वार्ड 27 में सड़क निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। विभागीय योजना के अनुसार, इस सड़क की कुल चौड़ाई 15 फीट निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य शुरू होते ही कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। लोगों का आरोप था कि उनकी निजी जमीन को सड़क के दायरे में जबरन शामिल किया जा रहा है, जबकि निगम इसे अतिक्रमण मानकर हटाने पर अड़ा था।

​मौके पर पहुँची ‘पीला पंजा’ और टीम

​हंगामे की सूचना मिलते ही नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता दलबल के साथ मौके पर पहुँच गया। जैसे ही दस्ते ने सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की, लोग उग्र हो गए। स्थानीय निवासियों का कहना था:

​“हमने अपनी निजी जमीन पर सालों पहले घर बनाया है। बिना उचित मापदंड के हमारी दीवारों या निर्माण को अवैध बताना सरासर गलत है।”

 

​नगर प्रबंधक की सूझबूझ से थमा बवाल

​बिगड़ते हालात और लोगों की नाराजगी को देखते हुए नगर प्रबंधक असगर अली खुद मोर्चा संभालने पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया और विवाद को पारदर्शी तरीके से सुलझाने के लिए मौके पर ही जमीन की अमीन द्वारा नापी कराने का निर्णय लिया।

​नापी के बाद स्थिति सामान्य

​नगर प्रबंधक की मौजूदगी में जब सड़क की दोबारा पैमाइश (नापी) की गई, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। नापी की रिपोर्ट सामने आने के बाद स्थानीय लोग संतुष्ट नजर आए और उन्होंने निर्माण कार्य में सहयोग करने की सहमति दी। इसके बाद ही इलाके में स्थिति सामान्य हो सकी और सड़क निर्माण का काम दोबारा शुरू हुआ।

​ विकास और समन्वय की जरूरत

​शहरी इलाकों में सड़क चौड़ीकरण अक्सर विवादों का कारण बनता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण से पहले अगर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच संवाद कायम हो जाए, तो इस तरह के हंगामे और काम में होने वाली देरी से बचा जा सकता है।