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बिहार के गांवों की बदलती तकदीर: अब संकरी गलियों से नहीं, सीधे हाईवे से जुड़ेंगे प्रदेश के टोले; ‘सुलभ संपर्कता योजना’ ने पकड़ी रफ्तार

1.21 लाख ग्रामीण बसावटों तक पहुँची पक्की सड़कें; एनएच और एसएच से जुड़कर सरपट दौड़ेंगे वाहन, जाम और कच्चे रास्तों से मिलेगी मुक्ति

Patna News: बिहार के ग्रामीण इलाकों में आवागमन की सूरत बदलने के लिए राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘सुलभ संपर्कता योजना’ के माध्यम से अब गांवों को केवल पक्की सड़कों से ही नहीं जोड़ा जा रहा, बल्कि उन्हें सीधे नेशनल हाईवे (NH) और स्टेट हाईवे (SH) जैसे बड़े मार्गों से कनेक्ट किया जा रहा है। इस पहल से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का जिला मुख्यालयों और बड़े शहरों से संपर्क बेहद आसान हो जाएगा।

मिशन 1.29 लाख: लक्ष्य के करीब पहुँचा बिहार

​राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना और ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के तहत कुल 1,29,990 संपर्क विहीन बसावटों की पहचान की थी।

  • अब तक की उपलब्धि: 1,21,151 बसावटों को 1,20,178 किलोमीटर लंबी पक्की सड़कों से जोड़ा जा चुका है।
  • अगला कदम: शेष बचे टोलों और गांवों में भी युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य जारी है ताकि शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा सके।

क्या है ‘सुलभ संपर्कता योजना’ और इसके फायदे?

​अब तक कई गांवों में पक्की सड़कें तो थीं, लेकिन वे संकरी या घुमावदार थीं, जिससे बड़े वाहनों या एंबुलेंस को हाईवे तक पहुँचने में समय लगता था। सुलभ संपर्कता योजना इस समस्या का स्थायी समाधान है:

  1. सीधा जुड़ाव: गांवों को सीधे एनएच (NH), एसएच (SH) और वृहद जिला पथों से जोड़ा जा रहा है।
  2. वैकल्पिक मार्ग: जाम से बचने के लिए ‘थ्रू रूट’ और ‘बाईपास’ का निर्माण किया जा रहा है।
  3. जर्जर सड़कों का कायाकल्प: पुरानी और टूटी सड़कों का पुनर्निर्माण कर उन्हें उच्च श्रेणी का बनाया जा रहा है।
  4. प्रशासनिक तेजी: अब तक 74 नई योजनाओं का चयन हुआ है, जिनमें 65 को मंजूरी मिल चुकी है और 16 पर काम शुरू भी हो गया है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी ‘सुपरफास्ट’ रफ्तार

​सड़कों के इस जाल का सबसे बड़ा लाभ बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होगा।

  • व्यापार में सुगमता: किसानों की फसलें और स्थानीय उत्पाद अब बिना देरी के बड़े बाजारों तक पहुँच सकेंगे।
  • आपातकालीन सेवाएं: संकरे रास्तों के जाम में फंसे बिना एंबुलेंस सीधे हाईवे का रास्ता ले सकेंगी, जिससे कीमती जान बचाई जा सकेगी।
  • शिक्षा और रोजगार: छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए अनुमंडल या जिला मुख्यालय जाना अब घंटों का नहीं, बल्कि मिनटों का काम होगा।
विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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