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बिहार में जल क्रांति: 14.5 हजार से अधिक सरकारी भवनों पर ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ सिस्टम तैयार, भूजल स्तर सुधारने में मिली बड़ी कामयाबी

मिशन मोड में चल रहा जल संरक्षण का कार्य; स्कूलों और अस्पतालों की छतों पर सहेजा जा रहा है बारिश का पानी, मंत्री श्रवण कुमार ने बताया 'मील का पत्थर'

Patna News: भविष्य के जल संकट से निपटने और गिरते भूगर्भ जल स्तर को थामने के लिए बिहार सरकार का ‘जल-जीवन-हरियाली’ मिशन अब धरातल पर रंग लाने लगा है। राज्य भर में सरकारी भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) की संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिससे न केवल पानी की बर्बादी रुकी है बल्कि धरती की प्यास बुझाने में भी मदद मिल रही है।

​सात वर्षों का सफर: 14 हजार से अधिक संरचनाएं स्थापित

​ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में राज्य भर में कुल 14,665 रेन वाटर हार्वेस्टिंग (RWH) सिस्टम लगाए गए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों की छतों पर गिरने वाले बारिश के पानी को सीधे जमीन के अंदर (Recharge) भेजना है।

​वर्ष-वार प्रगति: कब कितनी बनीं संरचनाएं?

​योजना के क्रियान्वयन में साल दर साल आई तेजी को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:

  • ​2019-20 (सबसे सफल वर्ष): 6,753 सिस्टम लगे।
  • ​2020-21: 5,752 संरचनाएं।
  • ​2024-25: 595 संरचनाएं।
  • ​2025-26: 403 संरचनाएं। (नोट: निर्माण कार्य अभी भी कई जिलों में निरंतर जारी है।)

​इन भवनों को बनाया गया केंद्र

​योजना के तहत किसी भी सार्वजनिक भवन को नहीं छोड़ा गया है। ग्रामीण विकास विभाग ने विशेष रूप से निम्नलिखित श्रेणियों पर ध्यान केंद्रित किया है:

  1. ​शिक्षा संस्थान: प्राथमिक विद्यालयों से लेकर बड़े महाविद्यालयों तक।
  2. ​स्वास्थ्य केंद्र: जिला अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)।
  3. ​प्रशासनिक भवन: समाहरणालय, ब्लॉक ऑफिस और थाना परिसर।

​“पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम” — ग्रामीण विकास मंत्री

​बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा:

​“जल-जीवन-हरियाली अभियान का उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि जल का संचयन भी है। सरकारी और गैर-सरकारी भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन संरचनाएं भूगर्भ जल पुनर्भरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। यह अभियान जल संकट को दूर करने और पर्यावरण को बचाने का सबसे सशक्त माध्यम है।”

 आम जनता के लिए संदेश

​सरकार के इन प्रयासों से यह स्पष्ट है कि जल संरक्षण अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जिम्मेदारी बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निजी भवनों के मालिक भी इस तकनीक को अपनाएं, तो बिहार आने वाले वर्षों में जल संकट से पूरी तरह मुक्त हो सकता है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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