Homeभागलपुर सिटीमिडिल ईस्ट संकट का असर: भागलपुर की रसोई से LPG गायब, फिर...

मिडिल ईस्ट संकट का असर: भागलपुर की रसोई से LPG गायब, फिर लौटा मिट्टी के चूल्हों और कोयले का दौर

सिलेंडर हुआ 'आउट', मिट्टी का चूल्हा फिर से 'इन'।

Bhagalpur News: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध के तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अब आम आदमी की थाली पर भी वार करना शुरू कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में आई बाधा का सीधा असर बिहार के भागलपुर में देखने को मिल रहा है। जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर की भारी किल्लत के बीच अब लोगों ने आधुनिकता को छोड़ अपनी जड़ों की ओर लौटना शुरू कर दिया है।

 गैस सिलेंडरों की किल्लत, मिट्टी के चूल्हों की बढ़ी मांग

​शहर के चौक-चौराहों से लेकर ग्रामीण गलियारों तक अब रसोई की तस्वीर बदल गई है। गैस चूल्हों की नीली लौ की जगह अब मिट्टी के चूल्हों का धुआं नजर आने लगा है। बाजार में मिट्टी के चूल्हों की मांग में रातों-रात जबरदस्त उछाल आया है। आलम यह है कि जो लोग सालों पहले गैस कनेक्शन मिलने पर चूल्हा फेंक चुके थे, वे आज फिर से उसे खरीदने या बनाने में जुट गए हैं।

 300 से लेकर 5000 रुपये तक बिक रहे हैं चूल्हे

​भागलपुर के बाजारों में इन दिनों लाल मिट्टी से बने चूल्हों की दुकान पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है।

  • साधारण चूल्हा: 300 रुपये से शुरू।
  • बड़ी भट्टियां: बनावट और मजबूती के आधार पर 5,000 रुपये तक बिक रही हैं। सिर्फ घरों में ही नहीं, बल्कि बड़े होटलों और रेस्टोरेंट में भी अब कोयले की भट्टी का इस्तेमाल अनिवार्य होता जा रहा है ताकि ग्राहकों को समय पर भोजन दिया जा सके।

 शादियों के सीजन में कैटरिंग व्यवसाय पर ‘संकट के बादल’

​वर्तमान में लग्न और शादी-विवाह का सीजन चरम पर है। ऐसे में कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सैकड़ों लोगों का खाना बनाने के लिए बड़ी मात्रा में कमर्शियल सिलेंडर की जरूरत होती है, जिसकी सप्लाई फिलहाल ठप है।

व्यवसायी बताते हैं कि: “बिना गैस के बुकिंग पूरी करना मुश्किल हो रहा है। मजबूरी में हमें कोयले और लकड़ी के बड़े चूल्हे खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे न केवल खर्च बढ़ रहा है बल्कि खाना बनाने में समय भी अधिक लग रहा है।”

 

 क्या कहते हैं दुकानदार और खरीदार?

दुकानदार संतोष कुमार का कहना है: > “पिछले कई सालों से चूल्हों की बिक्री न के बराबर थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में अचानक मांग इतनी बढ़ गई है कि स्टॉक कम पड़ रहा है। लोग गैस की अनिश्चितता से डरे हुए हैं और बैकअप के तौर पर कोयले वाली भट्टी ले जा रहे हैं।”

खरीदार प्रमोद साह का दर्द: > “गैस एजेंसी के चक्कर काटकर थक गए हैं। बुकिंग के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहा। घर में चूल्हा जलना बंद न हो जाए, इसलिए आज मिट्टी का चूल्हा खरीदने आए हैं। महंगाई के इस दौर में अब पुराने तरीके ही सहारा हैं।”

आधुनिकता पर भारी पड़ा संकट

​भागलपुर की यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि जब वैश्विक संकट दस्तक देता है, तो तकनीक और आधुनिक सुविधाएं धरी की धरी रह जाती हैं। एक बार फिर ‘पुराना ही सोना है’ (Old is Gold) वाली कहावत चरितार्थ हो रही है, जहां लोग धुएं और राख के बीच अपनी रसोई बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
Hindi News, हिंदी न्यूज, Latest News in Hindi, Aaj ki Taaja Khabar पढ़ें SilkTVNews पर.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Bhāgalpur
light rain
32.1 ° C
32.1 °
32.1 °
64%
4.9m/s
100%
Sat
34 °
Sun
34 °
Mon
32 °
Tue
31 °
Wed
34 °

Most Popular