Patna News: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और चिकित्सा शिक्षा (Medical Education) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय शुरू होने जा रहा है। राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोक-निजी भागीदारी (PPP Model) के तहत नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के संचालन को लेकर बुधवार को पटना में एक भव्य और महत्वपूर्ण हितधारक (Stakeholders) बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में देश-विदेश के निवेशकों ने बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश करने के लिए जबरदस्त उत्साह दिखाया है, जिससे आने वाले समय में राज्य के नागरिकों को उनके घर के पास ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
मुख्य सचिव का बड़ा बयान: “निवेशकों के लिए रेड कारपेट, पारदर्शिता हमारी प्राथमिकता”
बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना नीतीश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्य सचिव ने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा:
”बिहार सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए बेहद अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। हम निवेशकों और संस्थानों को बेहतर आधारभूत संरचना, पारदर्शी प्रक्रियाएं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) और सिंगल विंडो क्लियरेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार सभी हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर इस महत्वाकांक्षी पहल को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
17 जिलों में मिलेगी 25-25 एकड़ जमीन, ट्रांसपेरेंट टेंडर से होगा चयन
स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने योजना का पूरा खाका सामने रखते हुए बताया कि राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
- ग्रीनफील्ड परियोजना: इसके अंतर्गत 17 जिलों में नए स्वीकृत मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को पीपीपी मोड में संचालित किया जाएगा। इन संस्थानों के लिए राज्य सरकार हर जिले में लगभग 20 से 25 एकड़ भूमि उपलब्ध कराएगी।
- ब्राउनफील्ड परियोजना: इसके तहत 16 मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों का संचालन किया जाना प्रस्तावित है।
पारदर्शिता के लिए उठाए जा रहे कदम:
- परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए एक ट्रांजेक्शन एडवाइजर (Transaction Advisor) की नियुक्ति की जाएगी।
- संस्थानों का चयन पूरी तरह से पारदर्शी निविदा (Tender) प्रक्रिया के माध्यम से होगा।
- सभी हितधारकों से लिखित सुझाव भी मांगे गए हैं, ताकि नीति को और अधिक व्यावहारिक बनाया जा सके।
पंजाब से केरल तक के 80+ दिग्गज संस्थान बैठक में हुए शामिल
इस बैठक की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इसमें सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, केरल, उत्तर प्रदेश सहित देश-विदेश के 80 से अधिक प्रतिष्ठित संस्थानों, निवेशकों और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
केरल और अन्य राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने बिहार सरकार की इस नीति की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल से न केवल बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयां मिलेंगी, बल्कि राज्य में रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे।
फूलों के बजाय ‘पौधपात्र’ से स्वागत, ये वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम की शुरुआत में बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (BMSICL) के प्रबंध निदेशक अमित पाण्डेय ने मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत और स्वास्थ्य सचिव श्री कुमार रवि का स्वागत पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘पौधपात्र’ (Planted Sapling) देकर किया।
इस उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य समिति के तमाम बड़े चेहरे मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:
- अमित कुमार पाण्डेय (कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति)
- श्रीमती छिरिङ वाई० भूटिया (अपर सचिव, स्वास्थ्य विभाग)
- अरविंद वर्मा (मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बीएसएसएस)
- कुमार गौरव (अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति)
- डॉ. अनुपमा सिंह (अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति)


