Home Blog Page 92

नवगछिया में कोहराम: सेप्टिक टैंक बना ‘काल’, दम घुटने से 3 मजदूरों की तड़प-तड़प कर मौत

0

Bhagalpur News: भागलपुर के नवगछिया पुलिस जिला अंतर्गत कदवा थाना क्षेत्र के खैरपुर कदवा गांव में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। यहाँ एक निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक की सेंट्रिंग खोलने उतरे तीन मजदूरों की जहरीली गैस की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान बमबम मंडल, जयनंदन मंडल और श्रीलाल मंडल के रूप में हुई है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर है।

​एक-दूसरे को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सबसे पहले श्रीलाल मंडल टैंक के अंदर काम करने के लिए उतरे थे। अंदर ऑक्सीजन की भारी कमी या जहरीली गैस के रिसाव के कारण वह बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें बचाने के लिए जयनंदन मंडल नीचे उतरे, लेकिन वे भी बाहर नहीं आ सके। इसके बाद बमबम मंडल ने अपने साथियों को निकालने के लिए टैंक में छलांग लगाई, पर नियति को कुछ और ही मंजूर था; तीनों ही टैंक के अंदर समा गए।

​चौथा व्यक्ति भी हुआ बेहोश, मची अफरा-तफरी

​मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने जब देखा कि तीनों में से कोई बाहर नहीं आ रहा है, तो चौथे व्यक्ति को रस्सी के सहारे नीचे उतारने की कोशिश की गई। लेकिन कुछ ही फीट नीचे जाते ही उसकी भी तबीयत बिगड़ने लगी और वह बेहोश होने लगा, जिसके बाद उसे तुरंत बाहर खींच लिया गया। काफी मशक्कत और स्थानीय लोगों के साहस के बल पर तीनों मजदूरों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

​प्रशासनिक अमला मौके पर, मुआवजे का भरोसा

​हादसे की खबर मिलते ही कदवा थाना समेत तीन थानों की पुलिस बल मौके पर पहुँची। एसडीपीओ (SDPO) ओम प्रकाश और डीसीएलआर ने घटनास्थल का जायजा लिया। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और सरकारी प्रावधानों के तहत हर संभव आर्थिक सहायता और मुआवजे का भरोसा दिलाया।

​सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल

​जिला परिषद अध्यक्ष बिपिन मंडल ने भी घटनास्थल पर पहुँचकर दुख व्यक्त किया। स्थानीय लोग इस घटना से बेहद मर्माहत हैं और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। एक ही गांव के तीन लोगों की मौत ने खैरपुर कदवा की हर आंख को नम कर दिया है।

भागलपुर: उधार में गुटखा नहीं दिया तो ‘दबंगों’ ने फूँक डाली दुकान, CCTV में कैद हुई खौफनाक वारदात

0

Bhagalpur News: भागलपुर के मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत भीमकित्ता चौक पर दबंगई और कानून के डर के खत्म होने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ महज उधार में गुटखा न देने पर कुछ युवकों ने एक गरीब दुकानदार की रोजी-रोटी को आग के हवाले कर दिया। पूरी घटना दुकान में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिसने आरोपितों की करतूतों की पोल खोल दी है।

​पहले मारपीट, फिर दुकान में लगा दी आग

​पीड़ित दुकानदार टिंकू चौधरी के अनुसार, घटना सोमवार रात की है। रात करीब 10 बजे जब वह अपनी जनरल स्टोर की दुकान बंद करने की तैयारी कर रहे थे, तभी गाँव के ही राजू चौधरी, मनोज चौधरी, विशाल चौधरी, रंजन चौधरी और आदित्य चौधरी वहाँ पहुँचे। इन युवकों ने दुकानदार से गुटखा उधार माँगा। जब टिंकू चौधरी ने उधार देने से मना किया, तो सभी ने मिलकर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की।

​देर रात ‘बदले’ की आग में जला डाला आशियाना

​दुकानदार ने बताया कि मारपीट के बाद वह घर चले गए, लेकिन आरोपितों का गुस्सा शांत नहीं हुआ था। देर रात करीब एक बजे सभी आरोपित दोबारा लौटे और बंद दुकान में आग लगा दी। आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते दुकान में रखा सारा कीमती सामान, राशन और नकदी जलकर राख हो गई। इस घटना से दुकानदार को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।

​CCTV फुटेज बना पुलिस के लिए अहम सबूत

​घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में आरोपित साफ तौर पर आगजनी की वारदात को अंजाम देते नजर आ रहे हैं। पीड़ित ने यह वीडियो साक्ष्य के तौर पर पुलिस को सौंप दिया है।

​पुलिस की कार्रवाई: गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू

​मधुसूदनपुर थानाध्यक्ष संजय कुमार मंडल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पीड़ित दुकानदार के आवेदन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पाँचों नामजद आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस की विशेष टीम आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। थानाध्यक्ष ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

भागलपुर में नशे के सौदागरों पर पुलिस का बड़ा प्रहार: ब्राउन शुगर के साथ 7 तस्कर गिरफ्तार

0

Crime News: भागलपुर पुलिस ने मादक पदार्थों के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति को जारी रखते हुए एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव के निर्देश पर अवैध शराब, हथियार और ड्रग्स के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मधुसूदनपुर थाना पुलिस ने ब्राउन शुगर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को रंगे हाथ धर दबोचा है।

​गुप्त सूचना पर गठित हुई स्पेशल टीम

​सिटी एसपी शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र के दिग्धी गांव में मादक पदार्थों की बड़ी खेप पहुंची है और वहां खरीद-बिक्री की जा रही है। सूचना मिलते ही एसपी नगर की निगरानी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (नगर 2) के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया और चिन्हित स्थल पर छापेमारी की गई।

​खदेड़कर पकड़े गए सात तस्कर

​पुलिस की छापेमारी टीम जैसे ही गांव पहुंची, वहां मौजूद तस्कर पुलिस को देखते ही भागने लगे। हालांकि, पहले से तैयार सशस्त्र बल ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी की और सभी सात संदिग्धों को खदेड़कर पकड़ लिया।

​गिरफ्तार आरोपियों की सूची:

  1. ​शिशु कुमार
  2. ​राहुल कुमार
  3. ​राजेश कुमार
  4. ​चंदन कुमार दास
  5. ​धर्मवीर कुमार दास
  6. ​सिंदु कुमार
  7. ​बुध नारायण ठाकुर

​ब्राउन शुगर और नकद बरामद

​गिरफ्तार आरोपियों की जब तलाशी ली गई, तो उनके पास से 8.15 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की गई। इसके अलावा, मादक पदार्थों की बिक्री से जुटाए गए 8,650 रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह खेप कहां से आई थी और शहर के किन इलाकों में इसकी सप्लाई होनी थी।

​पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस

​सिटी एसपी शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा रहा है। पुलिस इस पूरे ड्रग्स नेटवर्क के सरगना की तलाश में जुटी हुई है और इस मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां होने की प्रबल संभावना है।

भागलपुर में गूंजेगा ‘बाबू वीर कुंवर सिंह’ का जयघोष: कल निकलेगी ऐतिहासिक विजयोत्सव शोभा यात्रा

0

Bhagalpur News: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और अदम्य साहस के प्रतीक बाबू वीर कुंवर सिंह के शौर्य को याद करने के लिए भागलपुर पूरी तरह तैयार है। ‘बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह समिति’ के तत्वावधान में 23 अप्रैल, गुरुवार को शहर में एक भव्य विजयोत्सव और शोभा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को लेकर भागलपुर के युवाओं और आम लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

​वीर कुंवर सिंह चौक से होगा शंखनाद

​कार्यक्रम की शुरुआत गुरूवार सुबह 8 बजे वीर कुंवर सिंह चौक पर महानायक की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि के साथ होगी। इसके तुरंत बाद भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी। समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय सिंह ने बताया कि यह आयोजन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के बलिदान और वीरता से रूबरू कराने का एक सशक्त माध्यम है।

​हाथी-घोड़े और ढोल-नगाड़े बनेंगे आकर्षण का केंद्र

​इस वर्ष की शोभा यात्रा अपनी भव्यता के लिए याद की जाएगी। यात्रा में पारंपरिक गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों के साथ ऊंट, हाथी और घोड़े शामिल रहेंगे, जो 1857 के उस दौर के गौरव की याद दिलाएंगे। शहर के मुख्य मार्गों से गुजरने वाली इस झांकी में हजारों की संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

​पूर्व संध्या पर दीपों से जगमगाया प्रतिमा स्थल

​उत्सव की शुरुआत आज (22 अप्रैल) शाम से ही हो गई है। कार्यक्रम प्रभारी एडवोकेट डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि आज शाम प्रतिमा स्थल पर विशेष दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया है। मुख्य समारोह में कई वरिष्ठ राजनेताओं, बुद्धिजीवियों और विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है।

​प्रशासन के साथ रूट और सुरक्षा पर समन्वय

​भीड़ और यातायात को देखते हुए समिति ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर रूट प्लानिंग तैयार की है। मीडिया प्रभारी गोल्डन सिंह तोमर ने जानकारी दी कि सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियंत्रण के लिए वालंटियर्स की एक बड़ी टीम तैनात की गई है, ताकि शहरवासियों को किसी तरह की असुविधा न हो।

​शहरवासियों से जुड़ने की अपील

​समिति के सदस्यों— डॉ. अजय कुमार सिंह, स्वेता सिंह, राहुल चौहान और अन्य ने सभी सामाजिक व राजनीतिक संगठनों से दलगत भावना से ऊपर उठकर इस गौरवपूर्ण यात्रा का हिस्सा बनने की अपील की है।

​80 वर्ष की आयु में अपनी भुजा काटकर मां गंगा को अर्पित कर देने वाले बाबू वीर कुंवर सिंह का इतिहास भागलपुर की सड़कों पर कल जीवंत हो उठेगा। सिल्क सिटी का हर कोना ‘वीर कुंवर सिंह अमर रहें’ के नारों से गुंजायमान होने को तैयार है।

बिहार को कुपोषण मुक्त बनाने की बड़ी मुहिम: 23 अप्रैल तक चलेगा ‘पोषण पखवाड़ा’, 85% मस्तिष्क विकास पर फोकस

0

Patna News: बिहार को कुपोषण की बेड़ियों से मुक्त करने और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित 8वां पोषण पखवाड़ा 2026 अपने अंतिम चरण में है। 9 अप्रैल से शुरू हुआ यह अभियान 23 अप्रैल तक राज्य के सभी 38 जिलों में व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। इस वर्ष का मुख्य संदेश है— “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क विकास को अधिकतम करना।”

​मस्तिष्क विकास के लिए ‘प्रारंभिक उत्प्रेरण’ है जरूरी

​विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है। इसमें भी जीवन के पहले 1000 दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए, इस बार अभियान का फोकस 0-3 वर्ष के बच्चों के लिए ‘प्रारंभिक उत्प्रेरण’ और 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए ‘खेल-आधारित शिक्षा’ पर रखा गया है।

​अब केवल मां नहीं, पिता भी संभालेंगे जिम्मेदारी

​इस वर्ष के पोषण पखवाड़ा की सबसे बड़ी विशेषता पुरुषों (पिताओं) की सक्रिय भागीदारी है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष सत्र आयोजित कर पिताओं को यह सिखाया जा रहा है कि बाल पोषण केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक साझा पारिवारिक दायित्व है।

  • ​स्क्रीन टाइम पर लगाम: अभिभावकों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे बच्चों को मोबाइल/टीवी से दूर रखकर उनके साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं।
  • ​देखभाल में भूमिका: गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के खान-पान का ध्यान रखने के लिए पिताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

​आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिल रहा है पौष्टिक आहार

​अभियान के तहत बच्चों के पोषण के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं:

  • ​0-3 वर्ष के बच्चे: इन्हें ‘टेक-होम राशन’ के रूप में चावल, दाल और सोयाबड़ी दी जा रही है।
  • ​3-6 वर्ष के बच्चे: इन्हें केंद्रों पर ही गर्म पका हुआ भोजन जैसे खिचड़ी और पुलाव दिया जा रहा है, जो प्रोटीन और विटामिन से भरपूर है।
  • ​स्वास्थ्य जांच: सैम (SAM) और मैम (MAM) स्क्रीनिंग के जरिए कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें ‘पोषण पुनर्वास केंद्र’ भेजा जा रहा है।

​जन आंदोलन का रूप ले रहा अभियान

​समाज कल्याण विभाग की सचिव और आईसीडीएस निदेशक के नेतृत्व में इस अभियान ने एक ‘जन आंदोलन’ का रूप ले लिया है। अब तक राज्यभर में 64 लाख 91 हजार 371 गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिनमें पोषण पंचायत, स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता रैलियां शामिल हैं।

​बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक, पोषण पखवाड़ा कुपोषण, स्टंटिंग और एनीमिया जैसी चुनौतियों के खिलाफ एक मजबूत ढाल बनकर उभरा है। विभाग का लक्ष्य आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल भोजन वितरण केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास का सशक्त माध्यम बनाना है।

सीमांचल की बदल गई सूरत: 6,350 किमी पक्की सड़कों के जाल से विकास को मिली नई रफ़्तार

0

Patna News: बिहार के सुदूर और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प के साथ ग्रामीण कार्य विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत सीमांचल के चुनौतीपूर्ण जिलों में अब तक कुल 6,350 किलोमीटर लंबी पक्की सड़कों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह विकास कार्य न केवल आवागमन को सुगम बना रहा है, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर को भी बदल रहा है।

​अररिया जिले में हुआ सर्वाधिक निर्माण

​विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सीमांचल के चार प्रमुख जिलों में सड़कों का व्यापक जाल बिछाया गया है:

  • ​अररिया: यहाँ सबसे अधिक 2,155 किलोमीटर पक्की सड़कों का निर्माण हुआ है।
  • ​पूर्णिया: 1,747 किलोमीटर सड़कों के साथ दूसरे स्थान पर है।
  • ​कटिहार: जिले में 1,565 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कें बनकर तैयार हैं।
  • ​किशनगंज: अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इस संवेदनशील जिले में 883 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं।

​बाढ़ और जलजमाव की चुनौती का स्थायी समाधान

​सीमांचल और पूर्वी बिहार का एक बड़ा हिस्सा हर साल बाढ़ और भारी बारिश के कारण जलमग्न रहता है। इन बारहमासी (all-weather) सड़कों और पुलों के निर्माण से सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि अब आपदा की स्थिति में भी गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से नहीं टूटता। इससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और प्रशासनिक मदद समय पर ग्रामीणों तक पहुँच पा रही है।

​किसानों की आय में वृद्धि और व्यापार को गति

​सुदृढ़ सड़क संपर्कता का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। सीमांचल मखाना, जूट और अनानास की खेती के लिए प्रसिद्ध है। बेहतर सड़कों की वजह से किसान अब अपनी फसल को समय पर और कम लागत में बड़ी मंडियों तक पहुँचा पा रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सुगम रास्तों की वजह से माल की ढुलाई आसान हुई है, जिससे व्यापार की लागत घटी और मुनाफा बढ़ा है।

​सुदूर गांवों तक पहुँचा विकास

​ग्रामीण कार्य विभाग का लक्ष्य केवल सड़क बनाना ही नहीं, बल्कि गाँव के अंतिम व्यक्ति तक विकास की पहुँच सुनिश्चित करना है। सीमांचल के ये चुनौतीपूर्ण क्षेत्र, जो कभी दुर्गमता के लिए जाने जाते थे, आज पक्की सड़कों के माध्यम से राज्य के प्रमुख आर्थिक केंद्रों से जुड़ चुके हैं।

बिहार में ग्रामीण सड़कों और पुलों का काम पकड़ेगा रफ्तार, विभाग ने तय की डेडलाइन; लापरवाही पर गिरेगी गाज

0

Patna News: बिहार के ग्रामीण अंचलों में सड़कों और पुलों के जाल को और मजबूत करने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। विभाग का स्पष्ट संदेश है कि परियोजनाओं में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजधानी पटना के विश्वेश्वरैया भवन में विभाग के अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव निर्मल कुमार की अध्यक्षता में प्रमंडलवार समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हो गया है, जो आगामी 28 अप्रैल तक चलेगा।

​एमआईएस (MIS) पर अद्यतन स्थिति की बारीकी से जांच

​इन बैठकों का मुख्य एजेंडा कागजी दावों के बजाय जमीनी हकीकत को परखना है। विभाग अधूरा पड़ी योजनाओं की एमआईएस (Management Information System) पर अद्यतन स्थिति की विस्तृत जांच कर रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्य में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को तुरंत दूर कर काम में तेजी लाएं।

​भागलपुर और मुंगेर प्रमंडल की योजनाओं पर पैनी नजर

​समीक्षा की कड़ी में 20 अप्रैल को मुजफ्फरपुर, मोतिहारी और छपरा प्रमंडल के कार्यों को खंगाला गया। वहीं, 21 अप्रैल से भागलपुर, मुंगेर और सीवान प्रमंडल की परियोजनाओं की गहन समीक्षा की जा रही है। भागलपुर क्षेत्र के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ की कई महत्वपूर्ण ग्रामीण सड़कों के निर्माण से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने वाली है।

​आगामी बैठकों का शिड्यूल:

  • ​27 अप्रैल: गया और औरंगाबाद प्रमंडल।
  • ​28 अप्रैल: बेतिया और बेगूसराय प्रमंडल।

​8 अनिवार्य दस्तावेजों के साथ तलब किए गए अभियंता

​विभाग ने जवाबदेही तय करने के लिए सहायक अभियंताओं को मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है। लापरवाही की गुंजाइश खत्म करने के लिए उन्हें अपने साथ 8 अनिवार्य दस्तावेज लाने को कहा गया है, जिनमें शामिल हैं:

  1. ​प्रशासनिक स्वीकृति पत्र
  2. ​निविदा आमंत्रण (Tender)
  3. ​कार्य आवंटन आदेश
  4. ​लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस
  5. ​एकरारनामा (Agreement)
  6. ​एमआईएस प्रगति प्रतिवेदन
  7. ​भूमि विवाद स्ट्रिप चार्ट
  8. ​पर्ट चार्ट (Project Evaluation)

​डिजिटल मॉनिटरिंग: वीसी के जरिए जुड़ेंगे कनीय अभियंता

​जमीनी स्तर पर काम देख रहे कनीय अभियंताओं (JE) और तकनीकी पर्यवेक्षकों को भी ढील नहीं दी गई है। उन्हें निर्देश है कि वे अपने कार्यस्थल (On-Site) से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में जुड़ें ताकि मौके की स्थिति की वास्तविक जानकारी साझा की जा सके।

​बिहार सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण आधारभूत संरचना के विकास में समयबद्धता और गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। विभाग के इस सख्त रुख से उम्मीद जागी है कि मानसून शुरू होने से पहले कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा कर लिया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को सुगम आवाजाही का लाभ मिलेगा।

बिहार: ओलावृष्टि और आंधी-तूफान से प्रभावित किसानों के लिए बड़ी राहत, 5 मई तक करें कृषि इनपुट अनुदान के लिए आवेदन

0

Patna News: बिहार सरकार ने मार्च महीने में आए आंधी-तूफान, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए खजाना खोल दिया है। राज्य के 13 जिलों के प्रभावित किसानों के लिए ‘कृषि इनपुट अनुदान योजना’ के तहत ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रभावित किसान 5 मई, 2026 तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

​इन 13 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ

​फसल क्षति के आकलन के बाद कृषि विभाग ने राज्य के उन 13 जिलों का चयन किया है, जहाँ मार्च के तीसरे और चौथे सप्ताह में कुदरत का कहर बरपा था। इसमें 88 प्रखंडों की 1484 पंचायतें शामिल हैं।

  • ​प्रभावित जिले: भागलपुर, सहरसा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, अररिया, बेगूसराय, मधुबनी, पूर्णिया, खगड़िया, किशनगंज, मधेपुरा, दरभंगा और सुपौल।

​क्षति के अनुसार अनुदान की दरें

​सरकार ने अलग-अलग फसल क्षेत्रों के लिए सहायता राशि निर्धारित की है, जो सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी:

  1. ​असिंचित क्षेत्र (वर्षा आश्रित): 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।
  2. ​सिंचित क्षेत्र: 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर।
  3. ​शाश्वत/बहुवर्षीय फसल (गन्ना सहित): 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।

​यह अनुदान अधिकतम दो हेक्टेयर तक की भूमि के लिए देय होगा। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों के लिए न्यूनतम अनुदान राशि (1,000 से 2,500 रुपये तक) भी तय की गई है।

​रैयत और गैर-रैयत दोनों को मिलेगा मौका

​इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका लाभ केवल जमीन मालिक (रैयत) ही नहीं, बल्कि दूसरों की जमीन पर खेती करने वाले (गैर-रैयत) किसान भी उठा सकते हैं।

  • ​अनिवार्य शर्त: आवेदन के समय किसान को अपने परिवार का विवरण देना होगा।
  • ​सत्यापन: परिवार के विवरण के साथ आधार कार्ड आधारित सत्यापन अनिवार्य है। विवरण में किसी भी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता पाए जाने पर आवेदन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा।

​कैसे करें आवेदन और कहाँ से लें जानकारी?

​इच्छुक किसान कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यदि आवेदन प्रक्रिया या योजना से जुड़ी कोई समस्या हो, तो किसान इन माध्यमों का सहारा ले सकते हैं:

  • ​टोल फ्री नंबर: 1800-180-1551 (किसान कॉल सेंटर)
  • ​जिला कार्यालय: संबंधित जिला कृषि पदाधिकारी (DAO) से संपर्क किया जा सकता है।

​खेती को सहारा देने की सरकारी पहल

​बिहार के किसानों के लिए मार्च का महीना काफी चुनौतीपूर्ण रहा था। ऐसे में सरकार की यह पहल न केवल किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें अगली फसल की तैयारी के लिए आत्मविश्वास भी देगी। याद रखें, आवेदन की अंतिम तिथि 5 मई है, इसलिए समय रहते अपनी पंचायतों की स्थिति जांच कर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करें।

बिहार में डिजिटल जनगणना का शंखनाद: 4 दिनों में 3.69 लाख परिवारों ने दर्ज की अपनी जानकारी, वैशाली जिला सबसे आगे

0

Patna News: भारत की जनगणना 2027 को लेकर बिहार में उत्साह का माहौल है। 17 अप्रैल से शुरू हुए ‘स्व-गणना अभियान’ ने शुरुआती चार दिनों में ही बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं। राज्य के नागरिक तकनीक का लाभ उठाते हुए डिजिटल इंडिया के इस महाभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

​मात्र 96 घंटों में बड़ी उपलब्धि

​सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 अप्रैल से 20 अप्रैल तक राज्य के कुल 3,69,779 परिवारों ने स्व-गणना पोर्टल पर अपनी भागीदारी दर्ज कराई है।

  • ​सफलतापूर्वक पूर्ण: 3,23,879 परिवारों ने अपनी पूरी जानकारी पोर्टल पर सबमिट कर दी है।
  • ​प्रक्रियाधीन: लगभग 45,900 परिवारों ने पंजीकरण कर गणना की शुरुआत कर दी है।

​वैशाली का जलवा, खगड़िया और मधुबनी भी रेस में आगे

​स्व-गणना के मामले में बिहार के जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है।

  • ​वैशाली: 87,609 परिवारों के साथ पूरे राज्य में शीर्ष पर है।
  • ​खगड़िया: 50,222 परिवारों के साथ दूसरे स्थान पर है।
  • ​मधुबनी: 49,714 परिवारों के साथ तीसरे स्थान पर मजबूती से टिका हुआ है।
  • ​भागलपुर: सिल्क सिटी में भी डिजिटल जागरूकता दिख रही है, जहाँ 11,873 परिवारों ने स्व-गणना पूरी की है।

​01 मई तक का है मौका: घर बैठे दर्ज करें विवरण

​प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्व-गणना की यह सुविधा 01 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगी।

​कैसे करें? नागरिक अपने मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप के माध्यम से आधिकारिक SE पोर्टल पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया न केवल समय बचाती है, बल्कि डेटा की शुद्धता भी सुनिश्चित करती है।

 

​मई में शुरू होगा दूसरा चरण: प्रगणक आएंगे आपके द्वार

​स्व-गणना के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण 02 मई से 31 मई तक चलेगा। इस दौरान:

  1. ​प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और आवास की गणना करेंगे।
  2. ​जिन लोगों ने स्व-गणना कर ली है, उन्हें प्रगणक को अपनी एसई आईडी (SE ID) दिखानी होगी।
  3. ​इससे डेटा का मिलान आसान होगा और प्रगणक को आपके घर पर ज्यादा समय नहीं बिताना पड़ेगा।

​जिलों की रिपोर्ट: एक नजर में (प्रमुख आंकड़े)

जिला

परिवारों की संख्या

जिला

परिवारों की संख्या

वैशाली

87,609

मधुबनी

49,714

खगड़िया

50,222

मुजफ्फरपुर

17,695

समस्तीपुर

13,471

भागलपुर

11,873

पटना

11,608

दरभंगा

11,506

 

डिजिटल विकास की दिशा में बिहार का यह कदम सराहनीय है। प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले 10 दिनों में जनभागीदारी का यह आंकड़ा 10 लाख के पार पहुँच सकता है।

बिहार: राजस्व कर्मचारियों के निलंबन और वापसी पर स्थिति साफ; समाहर्ताओं ने नियमावली के तहत की कार्रवाई

0

Patna News: बिहार में पिछले कुछ दिनों से राजस्व कर्मचारियों के निलंबन और उनकी कार्य पर वापसी को लेकर चल रही उहापोह की स्थिति अब पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। राज्य सरकार और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ किया है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह प्रशासनिक और नियमानुकूल रही है।

​जिला समाहर्ताओं के पास है अनुशासनिक अधिकार

​विभागीय स्पष्टीकरण के अनुसार, बिहार राजस्व कर्मचारी संवर्ग नियमावली 2025 के तहत राजस्व कर्मचारियों की नियुक्ति और उन पर किसी भी प्रकार की अनुशासनिक कार्रवाई करने का पूर्ण अधिकार जिला समाहर्ताओं (District Collectors) को प्राप्त है। इसी नियमावली का पालन करते हुए जिलों में कार्रवाई सुनिश्चित की गई।

​क्यों हुई थी निलंबन की कार्रवाई?

​घटनाक्रम पर नजर डालें तो 11 फरवरी से 19 अप्रैल 2026 के बीच राजस्व कर्मचारियों की गतिविधियों और कार्य के प्रति उनकी गंभीरता को लेकर विभाग सख्त था।

  • ​अपर सचिव का निर्देश: 13 अप्रैल को अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर उन कर्मियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था जो कार्य पर वापस नहीं लौट रहे थे।
  • ​224 कर्मचारी हुए थे निलंबित: इस पत्र के आलोक में जिला प्रशासन ने सक्रियता दिखाई और 14 एवं 15 अप्रैल को विभिन्न जिलों में कुल 224 राजस्व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था।

​मंत्री स्तर पर निलंबन की खबरों का खंडन

​अधिकारियों ने उन चर्चाओं पर भी विराम लगा दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि निलंबन का आदेश सीधे राजनीतिक स्तर पर लिया गया। स्पष्ट किया गया है कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा व्यक्तिगत या सीधे तौर पर निलंबन का कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। यह पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन द्वारा स्थापित विभागीय नियमों के तहत ही संपन्न हुई।

​जनगणना 2027: निलंबन वापसी का मुख्य आधार

​राजस्व कर्मचारियों के निलंबन की वापसी के पीछे आगामी भारत की जनगणना 2027 को एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

  1. ​महत्वपूर्ण भूमिका: विभाग का मानना है कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में राजस्व कर्मचारियों की भूमिका अपरिहार्य है।
  2. ​नया मार्गदर्शन: 19 अप्रैल को डॉ. महेंद्र पाल द्वारा जारी नए पत्र में समाहर्ताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए, जिसके बाद जिलों में नियमों के अनुरूप निलंबन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई।
  3. ​कार्य पर वापसी: जो कर्मचारी 17 अप्रैल को स्वेच्छा से कार्य पर लौट आए थे, उनके संबंध में भी विभाग ने उदार रुख अपनाते हुए प्रशासनिक कार्यों को सामान्य करने के निर्देश दिए हैं।

​प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की कोशिश

​इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट है कि सरकार का उद्देश्य अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यों (जैसे जनगणना और भूमि सुधार) को बाधित होने से बचाना है। जिला स्तर पर हुई इस कार्रवाई और उसके बाद की गई वापसी ने प्रशासनिक तंत्र की मजबूती और नियमों की स्पष्टता को रेखांकित किया है।