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हरित जीविका, हरित बिहार: पर्यावरण की रक्षक बनीं जीविका दीदियां, 6 साल में रोपे 4 करोड़ पौधे

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Patna News: बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली जीविका दीदियां अब प्रदेश को हरा-भरा बनाने में क्रांतिकारी भूमिका निभा रही हैं। ‘हरित जीविका, हरित बिहार’ अभियान के तहत पिछले छह वर्षों में राज्य की लगभग एक करोड़ जीविका दीदियों ने मिलकर 4 करोड़ से अधिक पौधरोपण कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि ग्रामीण रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी मील का पत्थर साबित हो रही है।

​नर्सरी बना आय का नया स्रोत: 987 केंद्रों का विकास

​ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, वर्ष 2019 से अब तक राज्य भर में जीविका दीदियों द्वारा 987 नर्सरी विकसित की जा चुकी हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण योगदान ‘दीदी की नर्सरी’ और ‘दीदी की पौधशाला’ का है:

  • ​677 दीदी की पौधशाला: जहाँ छोटे पौधों को तैयार किया जा रहा है।
  • ​310 दीदी की नर्सरी: जो बड़े स्तर पर पौधों की आपूर्ति कर रही हैं।
  • ​सफलता का पैमाना: लगाए गए पौधों में से 1.04 करोड़ पौधे 4 फीट से अधिक की ऊंचाई प्राप्त कर चुके हैं, जो इस अभियान की सफलता और उचित देखभाल को दर्शाता है।

​आर्थिक सशक्तिकरण का ‘नर्सरी मॉडल’

​’दीदी की नर्सरी’ अब एक सफल बिजनेस मॉडल के रूप में उभर रहा है। कम लागत में शुरू होने वाला यह उद्यम महिलाओं को स्थिर और सतत आय प्रदान कर रहा है। सामुदायिक उद्यम के रूप में संचालित इन नर्सरियों ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है।

​कैसे होता है चयन और प्रशिक्षण?

​नर्सरी संचालन के लिए दीदियों का चयन संकुल स्तरीय संघ (CLF) के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाता है:

  1. ​पात्रता: स्वयं सहायता समूह (SHG) की सक्रिय सदस्य, समूह नियमों का पालन और अच्छी क्रेडिट रेटिंग (ऋण वापसी का रिकॉर्ड)।
  2. ​तकनीकी प्रशिक्षण: इमारती लकड़ियों (Timber) के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
  3. ​फलदार वृक्षों का संरक्षण: कृषि विभाग के तहत सेंटर फॉर एक्सीलेंस (देसारी, वैशाली) में 15 दिनों का आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है।

​जलवायु परिवर्तन पर कड़ा प्रहार

​पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में पौधरोपण से बिहार के ‘ग्रीन कवर’ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जीविका दीदियों का यह मौन आंदोलन ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों से निपटने में बिहार की एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है।

उत्तर बिहार में नाबार्ड का ‘सेतु चमत्कार’: बाढ़ के अभिशाप को मात दे रही नई ग्रामीण संपर्कता

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Patna News: उत्तर बिहार का वह इलाका जो दशकों से कोसी, गंडक, बागमती और कमला जैसी नदियों की उफान के कारण हर साल महीनों तक शेष दुनिया से कटा रहता था, अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। ग्रामीण कार्य विभाग ने नाबार्ड (NABARD) योजना के तहत नदियों पर ग्रामीण पुलों का ऐसा जाल बिछाया है, जिसने इलाके की भौगोलिक बाधाओं को काफी हद तक समाप्त कर दिया है।

​बाढ़ प्रभावित जिलों में युद्धस्तर पर निर्माण

​नाबार्ड की वित्तीय सहायता से उत्तर बिहार के उन संवेदनशील जिलों को प्राथमिकता दी गई है, जहाँ बरसात के दिनों में आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता था। जिलेवार प्रगति पर एक नजर:

  • ​पूर्वी चंपारण: इस जिले ने विकास की दौड़ में बाजी मारी है, यहाँ सर्वाधिक 50 ग्रामीण पुलों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।
  • ​दरभंगा: बाढ़ की सबसे अधिक मार झेलने वाले इस जिले में कुल 74 पुलों का लक्ष्य है, जिनमें से 54 पुल जनता को समर्पित किए जा चुके हैं।
  • ​मधुबनी एवं समस्तीपुर: मधुबनी में 55 और समस्तीपुर में 58 पुलों के निर्माण से सुदूर ग्रामीण इलाकों की संपर्कता बेहद सुदृढ़ हुई है।
  • ​सीतामढ़ी: सामरिक और भौगोलिक रूप से संवेदनशील सीतामढ़ी में भी 44 पुलों का काम पूरा कर लिया गया है।

​नावों के जोखिम से मिली मुक्ति

​एक समय था जब इन इलाकों में हल्की बारिश या नदियों का जलस्तर बढ़ते ही आवागमन का एकमात्र सहारा असुरक्षित छोटी नावें होती थीं। बीमारों को अस्पताल ले जाना हो या बच्चों को स्कूल भेजना, सब कुछ जान जोखिम में डालकर करना पड़ता था। बाढ़ के दौरान प्रखंड और जिला मुख्यालयों से संपर्क पूरी तरह कट जाने के कारण राहत कार्यों में भी देरी होती थी।

​विकास की नई रफ्तार: बारहमासी संपर्कता

​ग्रामीण कार्य विभाग के अनुसार, इन पुलों के निर्माण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब सुदूर गांवों को ‘बारहमासी सड़क संपर्कता’ मिल गई है।

 ​आर्थिक मजबूती: किसान अब अपनी उपज को किसी भी मौसम में मंडियों तक पहुँचा पा रहे हैं।

​आपातकालीन सेवा: एम्बुलेंस और पुलिस जैसी सेवाएं अब बिना किसी बाधा के गांवों तक पहुँच रही हैं।

पलायन पर रोक: बेहतर बुनियादी ढांचे के कारण गांवों में ही रोजगार के छोटे अवसर पैदा हो रहे हैं।

​“नाबार्ड योजना के तहत निर्मित ये पुल केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं हैं, बल्कि उत्तर बिहार के करोड़ों लोगों के लिए विकास और सुरक्षा की जीवन रेखा हैं।”

बिहार की माटी और कलाकारों का जलवा: हिंदी फिल्म ‘सरकारी मीडियम’ की शूटिंग संपन्न

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Patna News: बिहार में फिल्म निर्माण के एक नए युग की शुरुआत हो रही है। इसी कड़ी में हिंदी फिल्म ‘सरकारी मीडियम’ की शूटिंग पूर्वी चम्पारण जिले में सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। फिल्म के आखिरी दृश्य शुक्रवार को मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी और ऐतिहासिक गांव चन्द्रहिया में फिल्माए गए। 17 अप्रैल से शुरू हुआ यह शूटिंग शेड्यूल 1 मई को संपन्न हुआ।

​सामाजिक सरोकार की कहानी है ‘सरकारी मीडियम’

​फिल्म के मुख्य अभिनेता और निर्माता कुमार कन्हैया सिंह ने शूटिंग पूरी होने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि ‘सरकारी मीडियम’ एक सामाजिक सरोकार वाली फिल्म है, जो दर्शकों को एक गहरा संदेश देगी। बिहार की लोकेशंस पर काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे यहाँ की संभावनाओं से बेहद उत्साहित हैं और आने वाले समय में कई और प्रोजेक्ट्स बिहार में लाने की योजना बना रहे हैं।

​सिंगल विंडो क्लीयरेंस ने बदला फिल्म निर्माण का तरीका

​फिल्म के निर्देशक राज सागर, जो स्वयं मोतिहारी के ही निवासी हैं और पिछले एक दशक से मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं, ने बिहार सरकार की नीतियों की सराहना की। उन्होंने बताया:

  • ​आसान प्रक्रिया: ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ की वजह से अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़े।
  • ​प्रशासनिक सहयोग: जिला प्रशासन और बिहार राज्य फिल्म विकास निगम के सहयोग से शूटिंग बिना किसी बाधा के समय पर पूरी हुई।
  • ​विविधता: बिहार की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता हर शैली की फिल्म के लिए उपयुक्त है।

​स्थानीय कलाकारों के लिए सुनहरा अवसर

​बिहार सरकार अब कलाकारों और वेंडर्स का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार कर रही है। फिल्म विकास निगम की आधिकारिक वेबसाइट (https://film.bihar.gov.in/) पर जाकर स्थानीय कलाकार अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं, ताकि आने वाली फिल्मों में उन्हें प्राथमिकता मिल सके।

​प्रमुख कलाकार और टीम

​इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में कुमार कन्हैया सिंह, डॉ. तृष्या श्री, प्रिंस गुप्ता, आयुष पाण्डेय और सुकन्या पंडित जैसे मंझे हुए कलाकार नजर आएंगे।

  • ​निर्देशक: राज सागर
  • ​निर्माता: कुमार कन्हैया सिंह एवं भरत पटेल
  • ​सिनेमेटोग्राफी (DOP): नरेश चंद्र
  • ​क्रिएटिव डायरेक्टर: अनिल कमल चौहान

​कब होगी रिलीज?

​फिल्म का पोस्ट-प्रोडक्शन कार्य अगले महीने से शुरू हो जाएगा। निर्माताओं के अनुसार, यह फिल्म इसी साल के अंत तक बड़े पर्दे और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों के सामने होगी।

एससी-एसटी वर्ग के सपनों को पंख लगा रहे ‘प्राक् परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र’; 2025 में 91 युवाओं ने मारी बाजी

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Patna News: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्राक् परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए वरदान साबित हो रही है। आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को यूपीएससी और बीपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं के लिए तैयार करने के मकसद से शुरू की गई इस पहल के शानदार परिणाम सामने आ रहे हैं।

​सफलता का साल: 2025 में 91 विद्यार्थियों का चयन

​राज्य सरकार के प्रयासों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, इन केंद्रों से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 91 विद्यार्थियों ने विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में सफलता का परचम लहराया है। सफल अभ्यर्थियों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में अपनी जगह बनाई है:

  • ​शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE)
  • ​स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC)
  • ​रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB)
  • ​बिहार पुलिस सेवा

​राज्य के 10 जिलों में चल रहे हैं केंद्र

​एससी-एसटी कल्याण विभाग द्वारा राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों के समन्वय से कुल 10 प्राक्-परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर वर्तमान में लगभग 2400 अभ्यर्थियों को निशुल्क प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

​केंद्रों की सूची:

ये केंद्र पटना, भागलपुर, गया, आरा (भोजपुर), सारण (छपरा), मुजफ्फरपुर, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर और दरभंगा जिलों में स्थित हैं।

​प्रबंधन क्षेत्र के लिए ‘स्टूडेंट गाइडेंस सेंटर’

​प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा, प्रबंधन (Management) के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए पटना स्थित चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान में ‘स्टूडेंट गाइडेंस सेंटर’ चलाया जा रहा है। यहाँ प्रति वर्ष 60 छात्रों को विशेष रूप से GMAT/CAT जैसी कठिन प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।

​कौन ले सकता है लाभ? (पात्रता शर्तें)

​इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ अनिवार्य शर्तें रखी हैं:

  • ​अभ्यर्थी को बिहार का स्थाई निवासी होना आवश्यक है।
  • ​अभ्यर्थी अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से होना चाहिए।
  • ​परिवार की कुल वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।

​डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने संभाली समाज कल्याण विभाग की कमान; बोले— ‘अंतिम पायदान तक लाभ पहुँचाना ही लक्ष्य’

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Patna News: बिहार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने शुक्रवार को समाज कल्याण विभाग के सचिव के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया है l पदभार संभालते ही उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली और जन कल्याणकारी योजनाओं को लेकर अपने कड़े और सकारात्मक इरादे स्पष्ट कर दिए हैं।

​कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण सर्वोच्च प्राथमिकता

​कार्यभार संभालने के बाद डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने स्पष्ट किया कि विभाग का मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित और जरूरतमंद तबके की सेवा करना है。 उन्होंने कहा:

​”समाज के वंचित, कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों के सशक्तिकरण के लिए विभाग की सभी योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी”।

 

​अधिकारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक

​पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद सचिव ने विभाग के अपर सचिव योगेश कुमार सागर और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की。 इस बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:

  • ​योजनाओं की समीक्षा: विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई。
  • ​पारदर्शिता पर जोर: सचिव ने निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी होना चाहिए。
  • ​अंतिम व्यक्ति तक पहुँच: उन्होंने जोर दिया कि योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुँच सुनिश्चित की जाए。

​वंचितों के लिए नई उम्मीद

​डॉ. चन्द्रशेखर सिंह के नेतृत्व में अब समाज कल्याण विभाग से यह उम्मीद की जा रही है कि वृद्धावस्था पेंशन, बाल विकास योजनाएं (ICDS), और दिव्यांगजन सशक्तिकरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में तेजी आएगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी। बैठक के दौरान विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने नए सचिव का स्वागत किया और विभाग के लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई。

भारत-नेपाल संबंधों में नया अध्याय: कोसी और गंडक परियोजनाओं पर बनी ऐतिहासिक सहमति

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Patna News: बिहार और नेपाल के बीच जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारत-नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजनाओं की संयुक्त समिति (JCKGP) की दो दिवसीय 11वीं बैठक नेपाल की राजधानी काठमांडू में सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। 30 अप्रैल से 01 मई 2026 तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में कई दशकों से लंबित तकनीकी और प्रशासनिक मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए गए।

​प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व

​इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व बिहार जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने किया, जबकि नेपाली पक्ष का प्रतिनिधित्व वहां के जलश्रोत एवं सिंचाई विभाग के महानिदेशक मित्र बराल ने किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में केंद्र सरकार और बिहार सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

​बैठक के मुख्य बिंदु और बड़े फैसले

​ अतिक्रमण मुक्त होंगी नहरें और बराज क्षेत्र

​बैठक में नेपाली पक्ष ने पश्चिमी कोशी मुख्य नहर के 35 किलोमीटर लंबे नेपाली हिस्से, कोशी बराज, पूर्वी एवं पश्चिमी तटबंधों और वाल्मिकीनगर स्थित गंडक बराज क्षेत्र को शीघ्र अतिक्रमणमुक्त कराने पर अपनी सहमति दे दी है। इसके साथ ही नहर के बांधों पर लगे बिजली के खंभों को भी हटाया जाएगा, जिससे मरम्मत और संचालन में आ रही बाधाएं दूर होंगी।

​ बाढ़ पूर्व कटाव निरोधक कार्यों को मिली मंजूरी

​वर्ष 2026 की मानसून अवधि से पहले वीरपुर परिक्षेत्र के कोशी वनटप्पू क्षेत्र में कटाव रोकने के लिए आवश्यक सामग्री (बालू, मिट्टी, सिल्ट) के उपयोग पर सहमति बनी है। निर्माण सामग्री और वाहनों के दिवा-रात्रि (दिन-रात) आवागमन को भी हरी झंडी मिल गई है, ताकि कार्य समय पर पूरा हो सके।

​ GPS तकनीक से होगा भूमि का सीमांकन

​कोशी परियोजना के तहत लीज पर ली गई भूमि के विवादों को सुलझाने के लिए GPS तकनीक का सहारा लिया जाएगा। एक निश्चित समय सीमा के भीतर स्थल पर भौतिक रूप से भूमि का सीमांकन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

​ अवैध वसूली और सुरक्षा पर आश्वासन

​नेपाल में स्थानीय नगरपालिकाओं द्वारा भारतीय वाहनों पर लगाए जाने वाले अवैध स्थानीय कर को रोकने के लिए नेपाली पक्ष ने आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया है। साथ ही, कोशी बराज के पास मछली मारने या लकड़ी निकालने जैसी गतिविधियों से बराज संचालन में होने वाली बाधा को भी दूर किया जाएगा।

​ जल जमाव और डेटा शेयरिंग

​नेपाल प्रभाग में जल जमाव की समस्या को दूर करने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधि संयुक्त निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा, बाढ़ के सटीक पूर्वानुमान के लिए मानसून के दौरान नेपाल के वर्षा और नदी जलश्राव के आंकड़ों (Rainfall and Discharge data) को साझा करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

​“यह बैठक दोनों देशों के बीच सहयोग के एक नए युग की शुरुआत है। अतिक्रमण हटने और सुचारू डेटा साझा होने से बिहार और नेपाल, दोनों क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन पहले से कहीं अधिक प्रभावी होगा।”

 

​भविष्य की योजना: पायलट चैनल का निर्माण

​कोशी नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए इस वर्ष बाढ़ से पहले बराज के अपस्ट्रीम में जमा सिल्ट (Shoal) को हटाने और डाउनस्ट्रीम में 2.50 किमी लंबा पायलट चैनल बनाने का कार्य किया जा रहा है। इससे नदी की मुख्य धारा को केंद्र में रखने में मदद मिलेगी।

​बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

  • ​भारत सरकार:  सुमन शेखर (प्रथम सचिव, भारतीय दूतावास),  सुनील कुमार (सदस्य, GFCC), श्री पीयूष कुमार त्रिपाठी।
  • ​बिहार सरकार:  वरुण कुमार (अभियंता प्रमुख),  ब्रजेश मोहन (अभियंता प्रमुख), संजीव शैलेश (मुख्य अभियंता, वीरपुर) सहित अन्य वरिष्ठ

भागलपुर प्रशासन का बड़ा कदम: ‘सरकार आपके द्वार’ मुहिम के तहत 19 मई से पंचायतों में लगेंगे ‘सहयोग शिविर’

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। अब छोटी-छोटी समस्याओं, जमीन संबंधी विवादों या सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए आपको भागलपुर शहर स्थित जिला मुख्यालय या समाहरणालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की विशेष पहल पर आगामी 19 मई से पंचायत स्तर पर ‘सहयोग शिविर’ की शुरुआत होने जा रही है।

​गाँव में ही होगा न्याय: अधिकारियों की पूरी टीम रहेगी मौजूद

​इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य शासन और प्रशासन को सीधे जनता से जोड़ना है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इन शिविरों में केवल प्रखंड स्तर के ही नहीं, बल्कि जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस प्रशासन के आला अफसर भी मौजूद रहेंगे। यह पहला मौका है जब प्रशासन इतनी बड़ी तैयारी के साथ सीधे पंचायतों की दहलीज पर जा रहा है।

​‘पहले आवेदन, फिर समाधान’: शिविर की अनूठी कार्ययोजना

​शिविरों को महज औपचारिक बनने से रोकने के लिए प्रशासन ने एक ठोस रणनीति बनाई है। जिलाधिकारी के अनुसार:

  • ​शिविर आयोजित होने की तिथि से पहले ही पंचायत सरकार भवन में लोगों के आवेदन जमा कर लिए जाएंगे।
  • ​संबंधित विभाग उन आवेदनों पर प्रारंभिक जाँच और कार्रवाई पहले ही शुरू कर देगा।
  • ​इसका बड़ा फायदा यह होगा कि 19 मई को लगने वाले शिविर के दिन अधिकतर समस्याओं का त्वरित (Instant) निपटारा कर दिया जाएगा।

​समीक्षा भवन में बनी रणनीति: अधिकारियों को सख्त निर्देश

​इस महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए भागलपुर के समीक्षा भवन में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव और उप विकास आयुक्त (DDC) प्रदीप कुमार सिंह सहित सभी विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने साफ कहा कि इस अभियान में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी।

​जनता को मिलेगा सीधा लाभ: पारदर्शी व्यवस्था पर जोर

​प्रशासन की इस पहल से न केवल ग्रामीणों के समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि दलालों और बिचौलियों की भूमिका भी खत्म होगी। जमीन विवाद, दाखिल-खारिज, राशन कार्ड, पेंशन योजना और पुलिस से जुड़ी शिकायतों का समाधान अब एक ही छत के नीचे पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।

अडानी पावर प्लांट का मुख्य सचिव ने किया औचक निरीक्षण: बिजली उत्पादन से पहले ‘पुनर्वास’ और ‘पर्यावरण’ पर सरकार का बड़ा फैसला

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Bhagalpur News: बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने आज भागलपुर के पिरपैंती में निर्माणाधीन अडानी पावर प्लांट का विस्तृत निरीक्षण किया। इस हाई-प्रोफाइल दौरे का मुख्य उद्देश्य परियोजना की वर्तमान स्थिति का आकलन करना और निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को दूर करना था। मुख्य सचिव के साथ जिला प्रशासन के आला अधिकारी और अडानी समूह के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

​ग्राउंड जीरो पर समीक्षा: अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ बैठक

​निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पावर प्लांट के चप्पे-चप्पे का जायजा लिया। उनके साथ भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव और पावर प्लांट के CEO नरेश गोयल मुख्य रूप से उपस्थित थे। अधिकारियों ने मुख्य सचिव को पावर ग्रिड, यूनिट्स के निर्माण और ट्रांसमिशन लाइन की प्रगति के बारे में तकनीकी जानकारी दी।

​बिजली उत्पादन से पहले ‘शर्तें’ लागू: डीएम ने दी अहम जानकारी

​निरीक्षण के बाद भागलपुर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि सरकार के लिए विकास के साथ-साथ जनता का हित सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि पावर प्लांट में बिजली उत्पादन (Power Generation) शुरू करने से पहले निम्नलिखित बिंदुओं पर काम पूरा करना अनिवार्य होगा:

  1. ​पुनर्वास (Rehabilitation): विस्थापितों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया को पारदर्शी और संतोषजनक बनाया जाएगा।
  2. ​प्लांटेशन (Afforestation): पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा।
  3. ​स्थानीय मांगें: स्थानीय ग्रामीणों की वाजिब मांगों और उनकी बुनियादी जरूरतों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।

​पर्यावरण और स्थानीय हितों को प्राथमिकता

​मुख्य सचिव का यह दौरा संकेत देता है कि बिहार सरकार अडानी पावर प्लांट को राज्य के विकास के लिए मील का पत्थर तो मानती है, लेकिन इसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों की अनदेखी नहीं करना चाहती। बिजली उत्पादन की प्रक्रिया तभी शुरू की जाएगी जब स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और जन-भावनाओं के बीच एक बेहतर संतुलन स्थापित हो जाएगा।

​पिरपैंती के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

​अडानी पावर प्लांट न केवल भागलपुर बल्कि पूरे बिहार के लिए बिजली की किल्लत दूर करने में सहायक होगा। जिलाधिकारी ने बताया कि निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और प्रशासन हर कदम पर मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि परियोजना समय पर पूरी हो सके और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हों।

पिरपैंती विधायक मुरारी पासवान का एक्शन: स्कूलों का औचक निरीक्षण, लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों को दी सख्त चेतावनी

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Bhagalpur News: बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और स्कूलों की जमीनी हकीकत जानने के लिए पिरपैंती विधायक मुरारी पासवान इन दिनों फुल एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। क्षेत्र के बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर विधायक ने शनिवार को विभिन्न स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

​स्कूलों में जमीनी हकीकत का मुआयना

​विधायक मुरारी पासवान अपने दौरे के क्रम में सबसे पहले मध्य विद्यालय महेशपुर, उसके बाद मध्य विद्यालय महादेवटीकर और मध्य विद्यालय सिमानपुर पहुँचे। इस दौरान उन्होंने स्कूल के क्लासरूम, मिड-डे मील की गुणवत्ता और साफ-सफाई का बारीकी से निरीक्षण किया। स्कूलों में पहुँचने पर प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने बुके देकर विधायक का स्वागत किया।

​बच्चों से पूछे सवाल, शिक्षा की गुणवत्ता को परखा

​निरीक्षण के दौरान विधायक केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने सीधे क्लासरूम में जाकर बच्चों से संवाद किया। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, किताबों की उपलब्धता और स्कूल में मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। विधायक ने खुद कुछ सवाल पूछकर बच्चों के ज्ञान के स्तर को भी परखा।

​लापरवाही पर सख्त रुख: ‘बर्दाश्त नहीं होगा बच्चों के भविष्य से खिलवाड़’

​विधायक ने स्कूल कमेटी के सदस्यों और शिक्षकों के साथ बैठक की। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि पिरपैंती के बच्चों की शिक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​”शिक्षा ही समाज की नींव है। अगर बच्चों को सही माहौल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिली, तो यह पूरे क्षेत्र का नुकसान है। जो भी शिक्षक अपनी ड्यूटी में कोताही बरतेंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” – मुरारी पासवान, विधायक, पिरपैंती

 

​पिरपैंती को मिलेगा नया इंटर स्तरीय हाई स्कूल

​क्षेत्र के छात्रों की उच्च शिक्षा को ध्यान में रखते हुए विधायक ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पिरपैंती विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वे नए इंटर स्तरीय हाई स्कूल की स्थापना के लिए शिक्षा विभाग और राज्य सरकार को जल्द ही प्रस्ताव भेजेंगे।

​स्थानीय लोगों में जगी उम्मीद की किरण

​विधायक के इस सक्रिय रवैये से अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि जनप्रतिनिधि के इस तरह के औचक दौरों से शिक्षकों की जवाबदेही बढ़ेगी और स्कूलों की जर्जर हालत में सुधार होगा। इस अवसर पर विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों के साथ-साथ भारी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।

श्रद्धांजलि: प्रवीण सिंह कुशवाहा—वो सिपाही जिसने आखिरी सांस तक बुलंद रखा कांग्रेस का झंडा

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Bhagalpur News: राजनीति में जब अवसरवादिता और दल-बदल एक आम बात हो गई है, ऐसे समय में भागलपुर ने एक ऐसा नेता खो दिया है जिसकी रगों में कांग्रेस का खून दौड़ता था। प्रवीण सिंह कुशवाहा सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भागलपुर कांग्रेस के एक ऐसे समर्पित योद्धा थे, जिन्होंने उतार-चढ़ाव के हर दौर में पार्टी का हाथ थामे रखा। आज कन्नौज के पास हुए एक दर्दनाक हादसे ने आज भागलपुर के इस चहेते नेता को हमसे हमेशा के लिए छीन लिया।

​पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा: कभी नहीं बदला पाला

​प्रवीण सिंह कुशवाहा की सबसे बड़ी पहचान उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता थी। भागलपुर की राजनीति को करीब से जानने वाले बताते हैं कि उन्होंने कभी भी सत्ता के लोभ में अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया। कई बार ऐसे मौके आए जब नेताओं ने पाला बदला, लेकिन प्रवीण जी “हाथ के निशान” के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे। उनकी इसी वफादारी का सम्मान करते हुए हाल ही में कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें भागलपुर जिला अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी।

​कहलगांव की धरती से विधानसभा तक का सफर

​प्रवीण सिंह कुशवाहा न केवल संगठन के व्यक्ति थे, बल्कि जनता के बीच भी उनकी गहरी पैठ थी। साल 2025 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए कहलगांव विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। उस चुनाव में उन्होंने पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा और कांग्रेस के झंडे को गांव-गांव तक पहुँचाया। हार-जीत से परे, उन्होंने कहलगांव की जनता के दिलों में अपनी एक अलग जगह बनाई थी।

​एक वैक्यूम जो कभी नहीं भरेगा

​एक तरफ जहाँ वे कार्यकर्ताओं के लिए ‘बड़े भाई’ की तरह थे, वहीं दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व के लिए एक भरोसेमंद सलाहकार। उनके निधन से भागलपुर कांग्रेस में एक ऐसा शून्य (वैक्यूम) पैदा हो गया है, जिसे भरना निकट भविष्य में नामुमकिन लगता है। दिल्ली से पार्टी के काम निपटाकर लौटते वक्त हुए इस हादसे ने भागलपुर के राजनीतिक भविष्य को एक बड़ा जख्म दिया है।

​“प्रवीण जी ने सिखाया कि राजनीति में पद से बड़ा कद होता है और कद आपकी निष्ठा से बनता है। भागलपुर का हर कांग्रेस कार्यकर्ता आज अनाथ महसूस कर रहा है।” — एक भावुक कांग्रेस कार्यकर्ता