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विक्रमशिला सेतु अवरुद्ध: भागलपुर जिलाधिकारी ने संभाला मोर्चा, गंगा मार्ग से शुरू होगी वैकल्पिक यातायात व्यवस्था

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Bhagalpur News: विक्रमशिला सेतु का मार्ग अवरुद्ध होने से उत्पन्न हुई यातायात समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने सोमवार को अधिकारियों की टीम के साथ बरारी घाट से महादेवपुर घाट तक गंगा नदी का निरीक्षण किया। मोटर बोट पर सवार होकर जल मार्ग का जायजा लेने के बाद जिलाधिकारी ने आम जनता की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

​सुबह 5 से शाम 5 बजे तक मिलेगी निःशुल्क सरकारी नाव

​निरीक्षण के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि नवगछिया और भागलपुर के बीच प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। लोगों की परेशानी को देखते हुए निःशुल्क सरकारी नाव की व्यवस्था की जा रही है। यह सेवा प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

​निजी नावों के लिए प्रशासन तय करेगा किराया

​सरकारी नावों के अतिरिक्त पंजीकृत निजी नावों का परिचालन भी शुरू किया जाएगा। हालांकि, यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसके लिए प्रशासन सख्त है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रति यात्री और वाहन का शुल्क जिला प्रशासन द्वारा ही निर्धारित किया जाएगा, जिसका पालन करना अनिवार्य होगा।

​सुरक्षा और सुविधाओं का रखा जाएगा विशेष ख्याल

​प्रशासन ने जल मार्ग से यात्रा करने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है:

    • ​प्रकाश व बैरिकेडिंग: घाटों पर पर्याप्त रोशनी और भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था होगी।
    • ​पेयजल व चिकित्सा: यात्रियों के लिए घाट पर पीने के पानी और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध रहेगी।
    • ​सुरक्षा बल व गोताखोर: सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेंगे और किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए नावों पर गोताखोरों की मौजूदगी अनिवार्य होगी।

​जिलाधिकारी की अपील: “नावों पर यात्रियों की क्षमता स्पष्ट रूप से अंकित रहेगी। यात्रियों से अनुरोध है कि क्षमता से अधिक होने पर नाव पर न चढ़ें और अपनी सुरक्षा का स्वयं भी ध्यान रखें।”

 

​निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे वरीय अधिकारी

​इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी के साथ वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP)  प्रमोद कुमार यादव, उप विकास आयुक्त (DDC)  प्रदीप कुमार सिंह, नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा सहित जिले के अन्य संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे।

भागलपुर में रफ्तार का कहर: अनियंत्रित CNG वाहन ने पेंट मिस्त्री को रौंदा, मायागंज अस्पताल में जिंदगी की जंग जारी

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले में तेज रफ्तार वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कजरैली थाना क्षेत्र के गौराचक्की का है, जहां एक अनियंत्रित CNG वाहन ने बाइक सवार युवक को जोरदार टक्कर मार दी। इस सड़क हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे आनन-फानन में इलाज के लिए मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

​मोबाइल पर बात करने के दौरान पीछे से आई ‘मौत’

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, घायल युवक की पहचान रघु सिंह के रूप में हुई है, जो पेशे से एक पेंट मिस्त्री है। परिजनों ने बताया कि रघु शनिवार सुबह अपने घर से काम की तलाश में निकला था। गौराचक्की के समीप उसने अपनी बाइक सड़क किनारे खड़ी की और किसी जरूरी काम से मोबाइल पर बात करने लगा। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार CNG वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि रघु बाइक समेत सड़क पर काफी दूर जा गिरा।

​हादसे के बाद मची अफरा-तफरी, स्थानीय लोगों ने की मदद

​हादसे के तुरंत बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घटना की जानकारी घायल के परिजनों को दी और उसे तुरंत एंबुलेंस के जरिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) पहुँचाया।

​अस्पताल में इलाज जारी, स्थिति स्थिर

​मायागंज अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, रघु सिंह को शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। फिलहाल उसका उपचार इमरजेंसी वार्ड में चल रहा है और उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। वहीं, घटना के बाद आरोपी वाहन चालक मौके का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा।

​पुलिस को दी गई सूचना

​घटना की जानकारी स्थानीय कजरैली थाना पुलिस को दे दी गई है। पुलिस अब मामले की छानबीन में जुट गई है और सीसीटीवी फुटेज व प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर दोषी वाहन चालक की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

विक्रमशिला सेतु की सेहत सुधारेगा IIT पटना और BRO: 3 महीने में मरम्मत का लक्ष्य, दिसंबर से नए पुल पर दौड़ेंगे वाहन

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Patna News: विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद पैदा हुए संकट को दूर करने के लिए बिहार सरकार ने ‘मिशन मोड’ में काम शुरू कर दिया है। रविवार देर रात पुल का स्लैब गिरने के बाद अब इसकी मरम्मत के लिए देश की दिग्गज संस्थाओं का सहयोग लिया जा रहा है। सोमवार को पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने भविष्य की रूपरेखा साझा की।

​3 महीने में दुरुस्त होगा पुराना पुल, दिसंबर तक ‘समांतर सेतु’ का तोहफा

​प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने दो बड़ी समय-सीमाओं (Deadlines) का ऐलान किया:

  • ​मरम्मत कार्य: विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त स्पैन को ठीक करने में लगभग 3 महीने का समय लगेगा। इस कार्य में IIT पटना के विशेषज्ञों की तकनीकी मदद ली जाएगी।
  • ​नया विकल्प: विक्रमशिला सेतु के बगल में बन रहे समांतर गंगा पुल पर इस साल दिसंबर तक वाहनों का परिचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भागलपुर के लोगों को जाम और पुराने पुल के दबाव से स्थायी मुक्ति मिलेगी।

​मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्रालय से साधा संपर्क, इंजीनियर पर गिरी गाज

​हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं:

  • ​सस्पेंशन: लापरवाही बरतने के आरोप में पुल निर्माण निगम के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
  • ​BRO की मदद: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात की है। पुल की जल्द और मजबूत मरम्मत के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) का भी सहयोग मांगा गया है।

​वैकल्पिक मार्ग और स्टीमर सेवा: यात्रियों के लिए नई व्यवस्था

​पुल बंद होने के कारण यात्रियों को हो रही असुविधा को देखते हुए प्रशासन ने नए रूट जारी किए हैं:

  • ​भारी वाहन: उत्तर बिहार जाने के लिए अब मुंगेर (श्रीकृष्ण सिंह सेतु) और खगड़िया के गंगा पुल का इस्तेमाल करना होगा।
  • ​स्टीमर सेवा: मानसून की आहट को देखते हुए पीपा पुल बनाना संभव नहीं है, इसलिए भागलपुर और नवगछिया के बीच जल्द ही स्टीमर सेवा शुरू की जाएगी।
  • ​प्रशासन की सतर्कता: पुल के पिलर संख्या 133 के पास धंसाव देखते ही ट्रैफिक रोकना एक बड़ा कदम था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।

​पुल के टूटने की मुख्य वजह: भारी दबाव और अनदेखी

​अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि पुल पर यातायात का दबाव क्षमता से कहीं अधिक था। पूर्व में हुई जांच में भी कई खामियां सामने आई थीं। अब सरकार का फोकस न केवल मरम्मत पर है, बल्कि दिसंबर तक नए पुल को शुरू कर भागलपुर की लाइफलाइन को फिर से पूरी रफ्तार देने पर है।

भागलपुर की लाइफलाइन ‘विक्रमशिला सेतु’ पर संकट: फल, सब्जी और दूध की सप्लाई चेन टूटी, नाव के भरोसे जोखिम भरा सफर

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Bhagalpur News:  भागलपुर जिले की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ माना जाने वाला विक्रमशिला सेतु क्या बंद हुआ, मानो शहर की रफ्तार पर ब्रेक लग गया हो। पुल के क्षतिग्रस्त होने से न केवल यातायात ठप है, बल्कि भागलपुर की स्थानीय अर्थव्यवस्था, विशेषकर कृषि आधारित व्यापार पर ‘इमरजेंसी’ जैसे हालात बन गए हैं।

​किसानों की कमर टूटी: 30 किमी का सफर अब लहरों के हवाले

​रोजाना सुबह ग्रामीण इलाकों से हजारों किसान अपनी साइकिलों और मोटरसाइकिलों पर ताजी सब्जियां, फल और दूध लादकर शहर की मंडियों में पहुंचते थे।

  • ​खतरा: पुल बंद होने के बाद अब किसान जान जोखिम में डालकर निजी नावों के जरिए गंगा पार कर रहे हैं।
  • ​लागत: नाव का अतिरिक्त किराया और समय की बर्बादी ने किसानों के मुनाफे को शून्य कर दिया है।
  • ​मजबूरी: 30 किलोमीटर का जमीनी रास्ता अब नाव के अनिश्चित सफर में बदल चुका है, जिससे दूध जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की बर्बादी बढ़ गई है।

​महंगाई की आहट: मालवाहक गाड़ियों के बदले रास्ते

​पुल बंद होने का सबसे बड़ा असर माल ढुलाई पर पड़ा है। ट्रक और अन्य मालवाहक वाहनों को अब घंटों का लंबा चक्कर लगाकर वैकल्पिक रास्तों से गुजरना पड़ रहा है।

​असर: परिवहन लागत (Transportation Cost) में भारी बढ़ोतरी हुई है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो भागलपुर के बाजारों में हरी सब्जियों और फलों की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

 

​ट्रैफिक पुलिस का अलर्ट: वैकल्पिक मार्गों का सहारा

​शहर में जाम की स्थिति न बने, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है।

  • ​लगातार माइकिंग के जरिए लोगों को सेतु की ओर न आने की चेतावनी दी जा रही है।
  • ​वैकल्पिक मार्गों के नक्शे और जानकारी साझा की जा रही है ताकि एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को रास्ता मिल सके।

​अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रहार

​यह केवल एक पुल का बंद होना नहीं है, बल्कि भागलपुर की लोकल इकोनॉमी पर एक बड़ा प्रहार है।

​व्यापारिक घाटा: मंडियों में आवक कम होने से कारोबार सुस्त पड़ा है।

​आम जनजीवन: दफ्तर जाने वाले और छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

​जोखिम: ओवरलोडेड नावों के परिचालन से कभी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

​ प्रशासन को न केवल मरम्मत कार्य में तेजी लानी होगी, बल्कि किसानों के लिए सुरक्षित और सुलभ परिवहन के वैकल्पिक पुख्ता इंतजाम भी करने होंगे, ताकि भागलपुर की थाली से सब्जी और दूध गायब न हो।

विक्रमशिला सेतु पर मची चीख-पुकार: पिलर नंबर 133 का स्लैब गंगा में समाया, बाल-बाल बची सैकड़ों जान

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Bhagalpur News: आधी रात का वक्त, चारों ओर सन्नाटा, और अचानक एक जोरदार आवाज के साथ विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा ओझल हो गया। भागलपुर की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु पर पिलर नंबर 133 के पास एक बड़ा स्लैब अचानक टूटकर गंगा की लहरों में विलीन हो गया। इस खौफनाक मंजर ने न केवल व्यवस्था की पोल खोल दी, बल्कि यह भी दिखा दिया कि मौत और जिंदगी के बीच फासला महज कुछ मिनटों का था।

​ मौत का वो सन्नाटा: 12:50 बजे जब कांप उठा महासेतु

​रात के करीब 12:50 बजे, जब भागलपुर और नवगछिया के बीच वाहनों की सामान्य आवाजाही जारी थी, तभी पिलर नंबर 133 के पास सड़क के बीचों-बीच एक गहरा गैप दिखने लगा। ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय थाना अध्यक्ष की नजर जैसे ही इस पर पड़ी, उनके होश उड़ गए।

  • ​देवदूत बने पुलिसकर्मी: पुल पर उस समय दर्जनों गाड़ियाँ सवार थीं। पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना वाहनों को रुकवाया और पीछे धकेला।
  • ​कुछ मिनटों का फासला: जैसे ही अंतिम वाहन सुरक्षित दूरी पर पहुँचा, वह विशाल स्लैब भरभराकर गंगा में गिर गया। अगर प्रशासन ने पलक झपकते फैसला न लिया होता, तो आज सैकड़ों परिवार उजड़ सकते थे।

​ ग्राउंड जीरो पर डीएम-एसएसपी: रातों-रात सील हुआ रास्ता

​घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी और एसएसपी प्रमोद यादव दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने तुरंत सेतु पर आवागमन को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का आदेश जारी किया।

​”हमारी पहली प्राथमिकता जानमाल की सुरक्षा है। पिलर नंबर 133 के पास स्लैब गिरना एक गंभीर घटना है। जब तक तकनीकी टीम इसकी पूरी जाँच नहीं कर लेती, तब तक पुल पर पैदल चलना भी मना है।” — नवल किशोर चौधरी, जिलाधिकारी

 

​ अब मुंगेर होगा सहारा: यातायात के लिए नए रूट जारी

​विक्रमशिला सेतु के बंद होने से भागलपुर का सीधा संपर्क नवगछिया, पूर्णिया, कटिहार और पूरे सीमांचल से कट गया है। प्रशासन ने यातायात को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग की घोषणा की है:

  • ​रूट डायवर्जन: अब सभी वाहनों को मुंगेर और सुल्तानगंज के रास्ते भेजा जा रहा है।
  • ​मरीजों के लिए अलर्ट: एसएसपी प्रमोद यादव ने विशेष रूप से एम्बुलेंस चालकों को निर्देश दिया है कि पटना रेफर होने वाले मरीज मुंगेर के रास्ते ही जाएँ, ताकि सेतु पर आकर समय बर्बाद न हो।
  • ​सुरक्षा घेरा: भागलपुर और नवगछिया दोनों छोरों पर भारी बैरिकेडिंग कर दी गई है।

​ निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल: अब विशेषज्ञों की बारी

​यह हादसा बिहार के बुनियादी ढांचे और निर्माण की गुणवत्ता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। आखिर करोड़ों की लागत से बना यह सेतु इतनी जल्दी जर्जर कैसे हो गया?

  • ​इंजीनियरों की टीम: आज सुबह तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों की एक उच्च स्तरीय टीम मौके पर पहुँचेगी।
  • ​जांच के बिंदु: टीम यह पता लगाएगी कि क्या यह स्ट्रक्चरल फेलियर (संरचनात्मक विफलता) है या पुल की उम्र से पहले की कमजोरी।

​यात्रियों के लिए विशेष सूचना (Bullet Points):

  • ​सेतु की स्थिति: पूरी तरह बंद (पैदल यात्रियों के लिए भी)।
  • ​वैकल्पिक मार्ग: मुंगेर-सुल्तानगंज रूट।
  • ​सावधानी: नवगछिया या पूर्णिया जाने वाले लोग घर से निकलने से पहले डाइवर्टेड रूट की जानकारी लें।
  • ​प्रशासनिक सहयोग: किसी भी आपात स्थिति में नजदीकी पुलिस चेकपोस्ट से संपर्क करें।

भागलपुर: स्मार्ट सिटी के बाद अब ‘विक्रमशिला टाउनशिप’ से बदलेगी सिल्क सिटी की सूरत!

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Bhagalpur News: सिल्क सिटी भागलपुर अब विकास के एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की शानदार सफलता के बाद, बिहार सरकार और जिला प्रशासन ने अब ‘विक्रमशिला टाउनशिप’ के रूप में एक नई और महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। यह टाउनशिप न केवल भागलपुर के शहरीकरण के दबाव को कम करेगी, बल्कि इसे राज्य के एक बड़े औद्योगिक और रिहायशी हब (Industrial & Residential Hub) के रूप में स्थापित करेगी।

​क्यों खास है विक्रमशिला टाउनशिप?

​यह परियोजना केवल एक रिहायशी इलाका नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा एक ‘सैटेलाइट टाउन’ है। इसकी योजना को इस तरह तैयार किया गया है कि यहाँ रहने वालों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिल सकें:

  • ​अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: टाउनशिप के भीतर वर्ल्ड क्लास चौड़ी सड़कें, 24/7 निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति और जल निकासी के लिए हाई-टेक ड्रेनेज सिस्टम का जाल बिछाया जाएगा।
  • ​शिक्षा और स्वास्थ्य का केंद्र: प्रशासन ने टाउनशिप के अंदर ही अंतरराष्ट्रीय स्कूलों, उच्च शिक्षण संस्थानों और मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों के लिए विशेष भूमि आरक्षित की है, ताकि शिक्षा और इलाज के लिए लोगों को बाहर न जाना पड़े।
  • ​ग्रीन सिटी का संकल्प: पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए टाउनशिप के कुल क्षेत्रफल का लगभग 30% हिस्सा पार्कों, जलाशयों और ग्रीन बेल्ट के लिए सुरक्षित रखा गया है।

​सिल्क उद्योग को मिलेगी नई संजीवनी

​भागलपुर के पारंपरिक रेशम उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए टाउनशिप में एक समर्पित ‘इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ विकसित किया जा रहा है। यहाँ टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना होगी, जहाँ आधुनिक मशीनों और बेहतर लॉजिस्टिक्स के माध्यम से भागलपुरी सिल्क के उत्पादन और निर्यात को नई ऊंचाई मिलेगी।

​हजारों युवाओं को मिलेगा घर के पास रोजगार

​इस प्रोजेक्ट से भागलपुर और आसपास के जिलों के युवाओं के लिए खुशहाली की खबर आई है। टाउनशिप के निर्माण चरण से लेकर इसके पूर्ण संचालन तक:

  1. ​आईटी और मैन्युफैक्चरिंग: कई बड़ी कंपनियों के यहाँ निवेश करने की संभावना है, जिससे आईटी और तकनीकी क्षेत्र में नौकरियां पैदा होंगी।
  2. ​स्थानीय बाजार: नए शहर के बसने से रिटेल, सर्विस सेक्टर और छोटे व्यवसायों को बड़ा बाजार मिलेगा।

​प्रशासनिक तैयारी: जल्द शुरू होगा टेंडर

​जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, विक्रमशिला टाउनशिप के लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। सरकार की योजना है कि मानसून के तुरंत बाद बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया जाए।

भागलपुर ने खोया अपना ‘.लोकप्रिय बेटा’: कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह कुशवाहा का सड़क हादसे में निधन, शोक में डूबा बिहार

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Bhagalpur News: बिहार की राजनीति और विशेषकर सिल्क सिटी भागलपुर के लिए आज का दिन अत्यंत दुखद है। भागलपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और क्षेत्र के लोकप्रिय नेता  प्रवीण सिंह कुशवाहा अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार, 1 मई की रात दिल्ली से पटना लौटने के क्रम में एक भीषण सड़क दुर्घटना में उनका असामयिक निधन हो गया। इस खबर के फैलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है और राजनीतिक गलियारों में सन्नाटा पसरा है।

​पार्थिव शरीर पहुँचा भागलपुर: उमड़ी समर्थकों की भारी भीड़

​स्व. प्रवीण सिंह कुशवाहा के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए दीप नगर स्थित कांग्रेस मुख्यालय में रखा गया है। अपने प्रिय नेता की एक झलक पाने के लिए समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता का हुजूम उमड़ पड़ा है। हर आँख नम है और लोग उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों को याद कर रहे हैं।

​अंतिम विदाई का विस्तृत कार्यक्रम

​परिजनों और प्रशासन द्वारा अंतिम संस्कार के लिए जो कार्यक्रम तय किया गया है, वह इस प्रकार है:

  • ​कल सुबह 8:00 बजे (3 मई): ‘रामगीता आस्था लाइफस्टाइल सिटी’ (ग्लोकल हॉस्पिटल के बगल में) से उनकी अंतिम यात्रा शुरू होगी।
  • ​कल सुबह 9:00 बजे: अंतिम यात्रा बिहपुर (जीतू) स्थित उनके पैतृक आवास पहुँचेगी, जहाँ स्थानीय लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
  • ​अंतिम गंतव्य: बिहपुर से पार्थिव शरीर को बरारी श्मशान घाट लाया जाएगा, जहाँ राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा।

​राजनीतिक शून्यता: मुख्यमंत्री और दिग्गज नेताओं ने जताया शोक

​प्रवीण सिंह कुशवाहा का जाना भागलपुर की राजनीति के लिए एक बड़े युग का अंत माना जा रहा है। वे न केवल कांग्रेस के एक मजबूत स्तंभ थे, बल्कि सभी दलों के नेताओं के साथ उनके मधुर संबंध थे।

  • ​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि “प्रवीण जी एक संघर्षशील नेता थे, समाज के प्रति उनका समर्पण सदैव याद रखा जाएगा।”
  • ​पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे बिहार की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

​जनता के दुख-सुख के साथी थे प्रवीण कुशवाहा

​एक समर्पित नेता के रूप में उन्होंने भागलपुर की समस्याओं को हमेशा प्रमुखता से उठाया। चाहे किसानों के मुद्दे हों या युवाओं के रोजगार की बात, वे हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने एक नेता नहीं, बल्कि अपना अभिभावक खो दिया है।

पशुपालकों के लिए बड़ी राहत: पटना के अत्याधुनिक लैब में पशुओं की सभी जांचें अब बिल्कुल मुफ्त

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Patna News: बिहार के पशुपालकों और डेयरी किसानों के लिए राज्य सरकार ने खुशहाली की एक नई राह खोली है। पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और बीमारियों के सटीक उपचार के लिए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने पटना में ‘पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान’ को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कर दिया है। यहाँ अब पशुओं की छोटी-बड़ी सभी जांचें पूरी तरह निशुल्क की जा रही हैं।

​अत्याधुनिक लैब में बीमारियों की सटीक पहचान

​बीमार पशुओं का इलाज अक्सर इसलिए कठिन हो जाता है क्योंकि उनकी बीमारी का सही समय पर पता नहीं चल पाता। इसी समस्या को दूर करने के लिए बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय के समीप स्थित इस संस्थान में हाई-टेक प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं। यहाँ खून (Blood) और मूत्र (Urine) के सैंपल से बीमारियों की गहराई तक जांच की जा रही है।

​संस्थान में उपलब्ध प्रमुख निशुल्क जांचें:

​पशुपालक अपने पशुओं के लिए निम्नलिखित जांच सुविधाओं का लाभ बिना किसी खर्च के उठा सकते हैं:

  • ​संक्रामक रोग जांच: जोंस डिजीज, टीबी (TB), ब्रुसेलोसिस और ग्लैंडर्स जैसे खतरनाक संक्रमणों की जांच।
  • ​रक्त जांच (Blood Test): हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रोटोजोआ, टीसी, डीसी, ईएसआर की सुविधा।
  • ​दुग्ध एवं मूत्र जांच: मिल्क कल्चर सेंसिटिविटी, यूरिन रूटीन और यूरिन कल्चर टेस्ट।
  • ​विशेष जांच: गोबर की जांच, स्किन स्क्रैपिंग और लिम्फ नोड बायोप्सी।
  • ​पोल्ट्री सेवाएं: मुर्गी पालन से जुड़ी महत्वपूर्ण पीएम जांच, बैक्टीरियोलॉजिकल और जल जांच की सुविधा।

​पशुपालकों के लिए क्यों जरूरी है यह पहल?

​अक्सर प्राइवेट लैब्स में पशुओं की जांच काफी महंगी होती है, जिससे गरीब किसान कतराते हैं। पटना में स्थित इस संस्थान में आधुनिक मशीनों द्वारा की जाने वाली जांच न केवल मुफ्त है, बल्कि इसकी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टरों को पशुओं का सटीक उपचार करने में बड़ी मदद मिल रही है। इससे पशुओं की मृत्यु दर में कमी आएगी और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी।

​कहाँ स्थित है संस्थान?

​यह संस्थान पटना में बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय (Bihar Veterinary College) के पास स्थित है। पशुपालक यहाँ अपने पशुओं के सैंपल लेकर सीधे लैब पहुँच सकते हैं और विशेषज्ञों की सलाह ले सकते हैं।

राष्ट्रीय पटल पर बिहार की पंचायतों का डंका: तेलकप बनी देश की दूसरी सर्वश्रेष्ठ पंचायत

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Patna News: बिहार की ग्रामीण शासन व्यवस्था और विकास मॉडल ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए जारी पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 रिपोर्ट में बिहार की पंचायतों ने शानदार प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से रोहतास जिले की तेलकप ग्राम पंचायत ने इतिहास रचते हुए देश भर में गौरव बढ़ाया है।

​तेलकप पंचायत: विकास का ग्लोबल मॉडल

​रोहतास जिले की तेलकप ग्राम पंचायत ने स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्यों (LSDG) के सभी 9 थीमों पर उत्कृष्ट कार्य किया है।

  • ​राष्ट्रीय उपलब्धि: तेलकप पंचायत को राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है।
  • ​सम्मान: इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए तेलकप का चयन ‘नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार’ के लिए किया गया है।

​PAI 2.0 रिपोर्ट: बिहार की स्थिति

​देशभर की 2,59,867 ग्राम पंचायतों के बीच हुए इस कड़े मुकाबले में बिहार की स्थिति काफी उत्साहजनक रही है:

  • ​फ्रंट रनर (ग्रेड-A): बिहार की 2 ग्राम पंचायतों ने सर्वोच्च ‘ए’ श्रेणी में जगह बनाई है।
  • ​परफॉर्मर (ग्रेड-B): राज्य की 771 पंचायतें ग्रेड-बी श्रेणी में शामिल हुई हैं, जो ग्रामीण विकास की सक्रियता को दर्शाता है।
  • ​थीम आधारित सफलता: पंचायतों ने मुख्य रूप से ‘गरीबी मुक्त आजीविका’ और ‘स्वस्थ पंचायत’ के क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ अंक प्राप्त किए हैं।

​क्या है PAI और इसकी श्रेणियां?

​PAI 2.0 पंचायतों के प्रदर्शन का एक विस्तृत ‘रिपोर्ट कार्ड’ है, जो सुशासन, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता और स्वास्थ्य जैसे मानकों पर आधारित होता है। स्कोर के आधार पर इसे 5 श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. ​A+ (अचीवर): सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन।
  2. ​A (फ्रंट रनर): अग्रणी पंचायतें।
  3. ​B (परफॉर्मर): बेहतर कार्य करने वाली।
  4. ​C (एस्पिरेंट): आकांक्षी पंचायतें।
  5. ​D (बिगिनर): शुरुआत करने वाली।

​बिहार की ‘थीम वाइज’ टॉपर पंचायतें

​विभिन्न श्रेणियों (LSDG थीम) में बिहार के अलग-अलग जिलों की इन पंचायतों ने राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है:

थीम

पंचायत का नाम

प्रखंड

जिला

गरीबी मुक्त आजीविका

अम्बा उतर

पिपराही

शिवहर

स्वस्थ पंचायत

कहलावा

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बिहार में चीनी मिलों का होगा कायाकल्प: 25 जिलों में नई मिलें खोलने की तैयारी, सरकार ने जिलाधिकारियों को भेजा रिमाइंडर

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Patna News: बिहार में गन्ना किसानों के अच्छे दिन आने वाले हैं। राज्य सरकार ने सूबे में चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। गन्ना उद्योग विभाग ने उन 25 जिलाधिकारियों को कड़ा रिमाइंडर भेजा है, जिन्होंने अब तक नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए भूमि चयन का प्रस्ताव विभाग को उपलब्ध नहीं कराया है।

​सात निश्चय-3: रोजगार और औद्योगिकीकरण पर जोर

​राज्य सरकार ने अपने महत्वाकांक्षी ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत बिहार की बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने और 25 नई अत्याधुनिक चीनी मिलें स्थापित करने का बड़ा निर्णय लिया है। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो सीधे तौर पर प्रोजेक्ट की निगरानी कर रही है।

​100 एकड़ भूमि की तलाश: कहाँ फंसा है पेंच?

​सरकार के निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक नई चीनी मिल की स्थापना के लिए कम से कम 100 एकड़ एकमुश्त भूमि की आवश्यकता है। विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार:

  • ​सकारात्मक प्रगति: कुछ जिलों ने सफलतापूर्वक भूमि चिन्हित कर ली है और उनका प्रस्ताव गन्ना उद्योग विभाग को मिल चुका है।
  • ​देरी पर सख्ती: जिन जिलों से अब तक प्रस्ताव नहीं आया है, वहां विभाग ने पत्र भेजकर ‘शीघ्र प्रस्ताव’ उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया है। विभाग चाहता है कि मानसून के बाद निर्माण संबंधी प्राथमिक प्रक्रियाओं को गति दी जा सके।

​किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

​विशेषज्ञों का मानना है कि इन चीनी मिलों के चालू होने से न केवल गन्ना उत्पादक किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य और बाजार मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी प्राप्त होगा। यह कदम बिहार को एथेनॉल और चीनी उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।