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विक्रमशिला सेतु पर नहीं रुकेगा पहिया: छोटे वाहनों का परिचालन रहेगा जारी, प्रशासन ने अफवाहों पर लगाया विराम

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Bhagalpur News: भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाले लाइफलाइन ‘विक्रमशिला सेतु’ को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चल रही कयासबाज़ियों पर जिला प्रशासन ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। समाहरणालय, भागलपुर (जिला जन-सम्पर्क कार्यालय) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 1777 के अनुसार, पुल पर छोटे और हल्के वाहनों का परिचालन पूरी तरह सुरक्षित है और यह निर्बाध रूप से जारी रहेगा।

​ क्यों आई थी पुल पर संकट की स्थिति?

​पथ निर्माण विभाग, बिहार के प्रबंध निदेशक से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 3 मई 2026 की मध्यरात्रि को विक्रमशिला सेतु के P2-P3 स्पैन (Span) के 34 मीटर लंबे सस्पेंडेड (Suspended) हिस्से में क्षति पहुंची थी। इसके बाद पुल पर बड़े वाहनों के आवागमन को लेकर सुरक्षात्मक कदम उठाए गए थे।

​ IIT पटना और BRO ने संभाली कमान, बनाए गए 4 बेली ब्रिज

​पुल के क्षतिग्रस्त होने के तुरंत बाद विभागीय निर्देशों का पालन करते हुए IIT पटना की टीम से प्रारंभिक जांच कराई गई। आईआईटी पटना के जांच प्रतिवेदन के आधार पर सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीम से तुरंत संपर्क किया गया। BRO ने तत्परता दिखाते हुए पुल के प्रभावित और संवेदनशील हिस्से (Distress Span) पर मजबूती देने के लिए 4 अदद बेली ब्रिज (Bailey Bridge) का निर्माण किया। ये बेली ब्रिज क्रमशः:

  • ​V5-P1
  • ​P1-P2
  • ​P2-P3
  • ​P3-P4 के ऊपर बनाए गए हैं, ताकि पुल का संतुलन और मजबूती बनी रहे।

​ गैप (Gap) बढ़ने की खबरों पर प्रशासन का बड़ा खुलासा: ‘स्थिति पहले जैसी यथावत’

​आज (10 जून 2026) प्रिंट और डिजिटल मीडिया में यह खबरें तेजी से वायरल हो रही थीं कि पुल के एक्सपेंशन जॉइंट (Expansion Joint) के बीच का गैप बढ़ गया है, जिससे लोगों में डर का माहौल था। इस पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और अभियंताओं (Engineers) की टीम ने त्वरित कार्रवाई की।

​जांच के मुख्य बिंदु:

  • ​हाई-टेक मॉनिटरिंग: पुल के ऊपर और नीचे से ड्रोन वीडियो और कैमरों के माध्यम से विस्तृत फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई।
  • ​ऑन-स्पॉट मापी: स्थल पर मौजूद एक्सपर्ट अभियंताओं ने खुद जाकर एक्सपेंशन जॉइंट के गैप को मापा।
  • ​क्या निकला नतीजा?: जांच में पाया गया कि भागलपुर की तरफ औसतन गैप 90-100mm और नवगछिया की तरफ औसतन गैप 40-50mm है। यह बिल्कुल वही माप है जो बेली ब्रिज निर्माण के दौरान विजुअल इंस्पेक्शन में पाई गई थी। यानी गैप में रत्ती भर की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है, स्थिति पूरी तरह पहले की तरह यथावत और नियंत्रित है।

 

​ हल्के वाहनों के लिए ग्रीन सिग्नल, अफवाहों पर न दें ध्यान

​संयुक्त निदेशक जनसंपर्क, भागलपुर ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए हल्के और छोटे वाहनों का परिचालन पूरी तरह सुचारू रखा जा सकता है। इसमें किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे पुल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही किसी भी भ्रामक खबर या अफवाह पर ध्यान न दें। पुल विशेषज्ञों की निगरानी में पूरी तरह सुरक्षित है।

विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026: सुल्तानगंज से दुम्मा तक दिखेगा भव्य नजारा, टेंट सिटी में पहली बार मिलेंगी ये खास सुविधाएं

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Patna News: बिहार में इस वर्ष आयोजित होने वाला विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला ऐतिहासिक और भव्य होने जा रहा है। सुल्तानगंज के बाबा अजगैबीनाथ धाम से लेकर बिहार की सीमा दुम्मा तक का पूरा कांवरिया पथ इस बार ‘शिवमय’ नजर आएगा।

​बुधवार को पर्यटन विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने विभाग के वरीय अधिकारियों और भागलपुर, मुंगेर व बांका के जिला पदाधिकारियों (DM) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में तैयारियों को समय से पूरा करने और श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया।

​📅 30 जुलाई से 28 अगस्त तक सजेगा आस्था का बाजार

​इस वर्ष श्रावणी मेले का आयोजन 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक किया जाएगा। पर्यटन विभाग का मुख्य फोकस कांवरियों के लिए सुगम रास्ता, सुरक्षा और उच्च स्तरीय बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना है।

​पर्यटन सचिव का संकल्प: “इस बार श्रावणी मेला पथ को पूरी तरह शिवमय बनाया जाएगा। अजगैबीनाथ मंदिर से लेकर दुम्मा बॉर्डर तक लेजर शो, ड्रोन शो और शिवमंत्रों की गूंज से श्रद्धालुओं का अनुभव अलौकिक होगा।”

 

​🎪 सुरक्षित आवासन के लिए बनेंगी हाई-टेक टेंट सिटी (बेड्स की संख्या बढ़ी)

​श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए इस बार रिकॉर्ड संख्या में बेड युक्त टेंट सिटी का निर्माण कराया जा रहा है। पहली बार कई नए इलाकों को भी इसमें जोड़ा गया है:

​कहाँ कितने बेड की होगी टेंट सिटी:

  • ​भागलपुर (सुल्तानगंज): बाबा अजगैबीनाथ धाम में बेड की संख्या 200 से बढ़ाकर 500 की गई।
  • ​बांका जिला: अबरखा में 600 बेड, धौरी (पहली बार) में 200 बेड और गोड़ियारी में 250 बेड।
  • ​मुंगेर जिला: खैरा में 200 बेड, धोबई में 200 बेड, असरगंज (पहली बार) में 300 बेड, तारापुर में 200 बेड और संग्रामपुर में 200 बेड।

​✨ मेले के मुख्य आकर्षण: ड्रोन शो और भागलपुर में ‘स्विस कॉटेज’

  • ​शिवमय माहौल: मेला पथ में भव्य स्वागत गेट, विशेष लाइटिंग, साज-सज्जा की जाएगी।
  • ​आधुनिक शो: अजगैबीनाथ और अन्य टेंट सिटी में लाइट एंड साउंड शो, फाउंटेन शो, लेजर शो और ड्रोन शो के जरिए श्रावणी मेले की महिमा का बखान होगा।
  • ​भागलपुर में स्विस कॉटेज: सोनपुर मेले की तर्ज पर भागलपुर में 25 आलीशान स्विस कॉटेज का निर्माण कराया जाएगा, जिसके लिए जिला प्रशासन जमीन मुहैया कराएगा।

​🍲 पहली बार ‘जीविका दीदी की रसोई’ का स्वाद

​कांवरियों के स्वास्थ्य और शुद्ध खान-पान को ध्यान में रखते हुए इस बार सभी टेंट सिटी में ‘जीविका दीदी की रसोई’ की व्यवस्था की जाएगी। यहाँ श्रद्धालुओं को किफायती दर पर शुद्ध, सात्विक और पौष्टिक भोजन मिल सकेगा। इसके अलावा टेंट सिटी में चौबीसों घंटे बिजली, शुद्ध पेयजल, आधुनिक शौचालय, स्नानघर, कांवर स्टैंड और मेडिकल कैंप की व्यवस्था रहेगी।

​🎵 सांस्कृतिक महाकुंभ: गूंजेंगे राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय कलाकारों के सुर

​मेले के दौरान टेंट सिटी में रहने वाले श्रद्धालुओं के मनोरंजन और भक्तिभाव के लिए पूरे एक महीने सांस्कृतिक कार्यक्रम चलेंगे:

  • ​उद्घाटन और समापन: देश के राष्ट्रीय स्तर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।
  • ​प्रत्येक सोमवार: टेंट सिटी में राज्यस्तरीय कलाकारों का जमावड़ा लगेगा।
  • ​अन्य दिन: स्थानीय और जिलास्तरीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। इसके लिए जिलाधिकारियों को ‘स्क्रीनिंग कमेटी’ बनाने का निर्देश दिया गया है।

​बैठक में ये रहे मौजूद

​इस उच्चस्तरीय बैठक में बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंदकिशोर, पर्यटन निदेशक सह विशेष सचिव उदयन मिश्रा, जीविका के सीइओ हिमांशु शर्मा और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के महाप्रबंधक चंदन चौहान सहित कई आला अधिकारी उपस्थित थे।

नगर निकाय जनप्रतिनिधियों के लिए खुशखबरी: नीतीश मिश्रा ने भत्ते के भुगतान हेतु ₹4.81 करोड़ से अधिक की राशि को दी मंजूरी

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Patna News: बिहार के नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए राहत की बड़ी खबर है। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने राज्य के शहरी निकायों के जनप्रतिनिधियों को हर महीने मिलने वाले नियत भत्ते के भुगतान के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम चार माह की सहायक अनुदान राशि स्वीकृत कर दी है। सरकार द्वारा कुल 4.81 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि जारी की गई है।

​”सशक्त निकाय, समृद्ध शहर” हमारा संकल्प: नीतीश मिश्रा

​राशि की स्वीकृति देते हुए नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार नगर निकायों को प्रशासनिक और वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

​मंत्री नीतीश मिश्रा का बयान: “नगर निकाय हमारी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की सबसे बुनियादी और मजबूत इकाइयाँ हैं। स्थानीय स्तर पर नागरिकों की समस्याओं को सुलझाने और विकास को जमीन पर उतारने में इन जनप्रतिनिधियों की भूमिका सबसे अहम होती है। यही वजह है कि उनके निर्धारित भत्तों का समय पर भुगतान करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।”

 

​किस निकाय को मिला कितना बजट? (आंकड़े एक नजर में)

​जनप्रतिनिधियों के भत्तों को समय पर सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने पूरी राशि का वर्गीकरण इस प्रकार किया है:

निकाय का प्रकार

निकायों की संख्या

स्वीकृत सहायक अनुदान राशि

लाभार्थी जनप्रतिनिधि

नगर निगम (Municipal Corporations)

18

₹1,00,54,000 (एक करोड़ चौवन हजार रुपये)

महापौर, उपमहापौर एवं सभी वार्ड पार्षद

नगर परिषद (Municipal Councils)

89

₹2,17,64,000 (दो करोड़ सत्रह लाख चौंसठ हजार रुपये)

सभापति, उपसभापति एवं सभी वार्ड पार्षद

नगर पंचायत (Town Panchayats)

153

₹1,54,92,000 (एक करोड़ चौवन लाख बानवे हजार रुपये)

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सभी वार्ड पार्षद

पटना नगर निगम (Patna Ward)

विशेष

₹8,38,000 (आठ लाख अड़तीस हजार रुपये)

पटना के मेयर, डिप्टी मेयर और वार्ड पार्षद

सुशासन और जवाबदेही पर सरकार का विशेष ध्यान

​मंत्री नीतीश मिश्रा ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कुशल नेतृत्व में बिहार सरकार शहरी स्थानीय निकायों को अधिक सक्षम, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में चौतरफा काम कर रही है। शहरों में बेहतर नागरिक सुविधाएं जैसे- साफ-सफाई, ड्रेनेज सिस्टम और सड़कों का जाल बिछाने के लिए निकायों को जरूरी वित्तीय संसाधन समय पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

​उन्होंने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि इस स्वीकृत राशि से जनप्रतिनिधियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अपने क्षेत्रों के विकास और जनता की सेवा में और अधिक ऊर्जा और प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे।

​बिहार में बैंकिंग सेक्टर के ढीले रवैये पर वित्त विभाग सख्त: 6 महीने में सुधार नहीं तो सरकारी डिपॉजिट पर लगेगी रोक, 15 बड़े बैंक रडार पर

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Patna News: बिहार में बैंकों की मनमानी और सुस्त कार्यप्रणाली पर राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त कदम उठाया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री-सह-वित्त मंत्री बीजेन्द्र प्रसाद यादव ने बैंकों के खराब प्रदर्शन को सुधारने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की 5 सूत्रीय कड़क अनुशंसाओं को हरी झंडी दे दी है।

​वित्त विभाग ने साफ अल्टीमेटम दिया है कि जो बैंक बिहार के विकास और किसानों को ऋण (Loan) देने में ढीला रवैया अपनाएंगे, अगले 6 महीनों में सुधार न दिखने पर उनके सरकारी डिपॉजिट (Government Deposit) पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी।

​विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति ने दिए कड़े निर्देश

​बीते 22 जनवरी 2026 को आयोजित 95वीं त्रैमासिक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव, आरबीआई (RBI) के निदेशक, नाबार्ड (NABARD) के सीजीएम और एसबीआई (SBI) के सीजीएम शामिल हैं। समिति ने गहन समीक्षा के बाद सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है।

​रडार पर आए ये 15 प्रमुख बैंक (इन्हें सुधार के लिए भेजा जाएगा पत्र)

​वित्त विभाग ने 100 अंकों के मेजरमेंट इंडेक्स के आधार पर बैंकों की रैंकिंग तय की है। जिन बैंकों का साख जमा अनुपात (CD Ratio) और एनुअल क्रेडिट प्लान (ACP) का लक्ष्य 50 से 60 प्रतिशत से नीचे है, उन्हें कड़ी निगरानी में रखा गया है। इन 15 बैंकों की सूची इस प्रकार है:

  1. ​State Bank of India (SBI)
  2. ​Punjab National Bank (PNB)
  3. ​Central Bank of India
  4. ​Union Bank of India
  5. ​Bank of India
  6. ​UCO Bank
  7. ​IDBI Bank
  8. ​Indian Overseas Bank
  9. ​Bandhan Bank
  10. ​Bank of Maharashtra
  11. ​Karnataka Bank
  12. ​IndusInd Bank
  13. ​Unity Small Finance Bank
  14. ​Utkarsh Small Finance Bank
  15. ​Karur Vysya Bank

​उच्च स्तरीय समिति की 5 बड़ी रणनीतिक अनुशंसाएं (Key Recommendations)

अनुशंसा संख्या

प्रमुख निर्णय और रणनीतिक दिशा-निर्देश

अनुशंसा – 1

ACP का नया लक्ष्य: राज्य का CD Ratio बढ़ाने के लिए संभावित डिपॉजिट का न्यूनतम 80% लक्ष्य तय हो। नाबार्ड ने इस वर्ष PLP को संशोधित कर ₹3,55,532 करोड़ निर्धारित किया है।

अनुशंसा – 2

बड़े बैंकों को ज्यादा टारगेट: समीक्षा में पाया गया कि अगर SBI और PNB को हटा दें तो अन्य छोटे बैंकों का CD Ratio 72.75% है, जो बहुत अच्छा है। इसलिए अब SBI और PNB जैसे बड़े बैंकों को साख योजना (ACP) में बड़ा लक्ष्य दिया जाएगा।

अनुशंसा – 3

जनसमर्थ पोर्टल से लिंकेज: ऋण वितरण और मॉनिटरिंग को आसान बनाने के लिए KCC और अन्य सरकारी योजनाओं को भारत सरकार के ‘जनसमर्थ पोर्टल’ (Jan Samarth Portal) से इंटीग्रेट (जोड़ा) किया जाएगा।

अनुशंसा – 4

पंचायत स्तर पर शिविर: जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से KCC खातों की संख्या बढ़ाने के लिए पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगेंगे। इसके जरिए जीविका दीदियों, स्वयं सहायता समूहों और 50 लाख लक्षित किसानों को आसानी से जोड़ा जाएगा।

अनुशंसा – 5

6 महीने का अल्टीमेटम: 60% से कम उपलब्धि वाले बैंकों को वित्त सचिव स्तर से चेतावनी पत्र भेजा जाएगा। 6 महीने में सुधार न होने पर सरकारी फंड जमा करने पर रोक लगेगी।

छोटे बैंकों का प्रदर्शन बेहतर, दिग्गजों की सुस्ती ने बढ़ाई चिंता

​समिति की रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि राज्य के कुल आंकड़ों में से केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का डिपॉजिट हटा दिया जाए, तो राज्य का वर्तमान साख जमा अनुपात (CD Ratio) बढ़कर 68.16 प्रतिशत हो जाता है। वहीं, अगर SBI और PNB दोनों को हटा दिया जाए, तो यह आंकड़ा 72.75 प्रतिशत पर पहुंच जाता है।

​साफ है कि बिहार के छोटे बैंक लोन देने में आगे हैं, जबकि बड़े सरकारी बैंक राज्य से भारी-भरकम डिपॉजिट लेने के बाद भी यहां के किसानों और युवाओं को लोन देने में पीछे चल रहे हैं। इसी असंतुलन को ठीक करने के लिए अब सरकार ने कमर कस ली है।

​68 साल बाद इतिहास: बिहार राज्य भंडार निगम में पहली बार नियमित नियुक्ति, 15 युवाओं को मिला नियुक्ति पत्र

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Patna News: बिहार के सहकारिता क्षेत्र और रोजगार की दिशा में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। बिहार सरकार के सहकारिता विभाग के अंतर्गत आने वाले बिहार राज्य भंडार निगम (Bihar State Warehousing Corporation) में लगभग 68 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पहली बार नियमित नियुक्ति प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।

​पटना के विकास भवन स्थित सभागार में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने पी.सी.डी.ओ. पद पर चयनित 15 अभ्यर्थियों को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र सौंपे।

​वर्ष 1958 के बाद पहली बार हुआ यह कमाल

​सभागार को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव भावुक और उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1958 के बाद से निगम में नियमित बहाली नहीं हुई थी। वर्षों से लंबित इस प्रक्रिया का पूरा होना राज्य सरकार की पारदर्शिता और युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

​सहकारिता मंत्री का युवाओं से आह्वान: “आपकी भूमिका केवल दफ्तर के फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में आपकी महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी। अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ करें।”

 

​एक नजर में नियुक्ति प्रक्रिया के मुख्य बिंदु

विवरण

महत्वपूर्ण जानकारी

ऐतिहासिक अंतराल

68 वर्षों के बाद पहली बार नियमित बहाली

चयनित पद

पी.सी.डी.ओ. (PCDO)

कुल चयनित अभ्यर्थी

15 अभ्यर्थी

परीक्षा नियंत्रक एजेंसी

आई.बी.पी.एस. (IBPS), मुंबई

आगामी योजना

अगले महीने सहायक और तकनीकी सहायक के 11 पदों पर दूसरे चरण की बहाली

IBPS मुंबई के जरिए पूरी तरह पारदर्शी परीक्षा

​इस ऐतिहासिक भर्ती प्रक्रिया की सबसे खास बात इसकी पारदर्शिता रही। सहकारिता विभाग ने पूरे रोस्टर क्लीयरेंस और प्रशासनिक मंजूरी के बाद देश की प्रतिष्ठित बैंकिंग परीक्षा एजेंसी आई.बी.पी.एस. (IBPS), मुंबई के माध्यम से देशव्यापी प्रतियोगी परीक्षा आयोजित कराई थी, जिससे मेधावी छात्रों का चयन बिना किसी पक्षपात के हो सका।

​अगले महीने फिर बंटेगा नियुक्ति पत्र, बदलेंगे भंडारण के आयाम

​कार्यक्रम में मौजूद सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह और बिहार राज्य भंडार निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. गगन ने निगम के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं:

  • ​अगले महीने दूसरा चरण: डॉ. गगन ने बताया कि निगम में सहायक और तकनीकी सहायक जैसे 11 विभिन्न पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया तेजी से चल रही है। अगले महीने यानी जुलाई 2026 में इसके दूसरे चरण का नियुक्ति पत्र वितरित किया जाएगा।
  • ​कोल्ड चेन और आधुनिक स्टोरेज की जरूरत: सचिव धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि अब भंडारण के तरीके बदल रहे हैं। बिहार में जल्द ही बड़े पैमाने पर कोल्ड चेन और कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया जाएगा। एफसीआई, कृषि और स्वास्थ्य विभाग के लिए यह निगम रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहा है।

​क्या है बिहार राज्य भंडार निगम?

​यह निगम भारत सरकार के केन्द्रीय भंडारण निगम (CWC) और बिहार सरकार का एक संयुक्त लोक उपक्रम (Joint Venture) है, जो वेयरहाउसिंग अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत काम करता है। राज्य में अनाज और अन्य आवश्यक सामग्रियों के सुरक्षित रख-रखाव की जिम्मेदारी इसी एजेंसी के कंधों पर होती है।

​इस ऐतिहासिक मौके पर कौन-कौन रहे मौजूद:

आज के इस गौरवमयी कार्यक्रम में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, निबंधक (सहयोग समितियां) रजनीश कुमार, अपर सचिव अभय कुमार सिंह सहित विभाग और निगम के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।

 

 

अमानक बीज बेचने वाली कंपनियों पर होगी सख्त कार्रवाई, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने तलब किया 3 वर्षों का ब्योरा

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Patna News: ​बिहार के किसानों के हितों की रक्षा और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में साफ कर दिया है कि किसानों को नकली या घटिया (अमानक) बीज बेचने वाली कंपनियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

​मंत्री ने पिछले तीन वर्षों में अमानक पाए गए बीजों और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा तलब किया है।

​बीज विश्लेषण प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर

​किसानों को सिर्फ और सिर्फ उत्तम गुणवत्ता वाले बीज ही मिलें, इसके लिए कृषि मंत्री ने राज्य में बीज विश्लेषण प्रयोगशालाओं (Seed Analysis Laboratories) की स्थापना और उन्हें आधुनिक बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

  • ​31 जिलों में प्रयोगशालाओं को मंजूरी: राज्य सरकार ने अब तक 31 जिला स्तरीय बीज विश्लेषण प्रयोगशालाओं की स्थापना को हरी झंडी दे दी है।
  • ​अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट: मंत्री ने अधिकारियों से पूछा है कि इन प्रयोगशालाओं की स्थापना किस वित्तीय वर्ष में शुरू हुई थी और वर्तमान में इनके विस्तार की स्थिति क्या है।

​समीक्षा बैठक की मुख्य बातें (Quick Highlights)

मुख्य बिंदु

निर्णय / निर्देश

कार्रवाई का दायरा

पिछले 3 वर्षों के अमानक (Sub-standard) बीजों की सूची और कंपनियों पर हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगा।

लैब नेटवर्क

बिहार के 31 जिलों में बीज विश्लेषण प्रयोगशालाओं के संचालन में तेजी लाने का निर्देश।

बीज श्रृंखला

आधार (Foundation) बीज से प्रमाणित (Certified) बीज उत्पादन की कड़ी को मजबूत करने पर बल।

एजेंसी की जिम्मेदारी

बिहार राज्य बीज निगम के माध्यम से समय पर बीज उपलब्धता सुनिश्चित करना।

अमानक बीज बेचने वालों की अब खैर नहीं!

​कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि बाजार में बिकने वाले बीजों की लगातार निगरानी की जाए।

​कृषि मंत्री का कड़ा संदेश: “प्रत्येक वर्ष बाजार में अमानक बीजों की शिकायतें आती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है। अगर बाजार में बिक रहे बीजों में कोई भी कमी या अमानकता पाई जाती है, तो संबंधित बीज कंपनियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर और यथोचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।”

 

​आधार और प्रमाणित बीज उत्पादन श्रृंखला होगी मजबूत

​कृषि मंत्री ने राज्य के राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्रों के कार्यों की भी गहन समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मौसम और समय की मांग के अनुसार आधार (Foundation) बीज के उत्पादन के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं।

​इसके साथ ही, आधार बीज से प्रमाणित (Certified) बीज बनाने की पूरी चेन को बिहार राज्य बीज निगम के माध्यम से और अधिक मजबूत किया जाएगा। इससे राज्य के किसानों को सही समय पर, सही दाम में और पर्याप्त मात्रा में उच्च श्रेणी के बीज मिल सकेंगे।

​”बीज ही कृषि उत्पादन का असली आधार है”

​बैठक के अंत में कृषि मंत्री ने दोहराया कि गुणवत्तायुक्त बीज ही कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण जरिया है। राज्य सरकार किसानों को हर हाल में बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

 

​गया, नवादा और जहानाबाद के किसानों की ‘जीवनरेखा’ बनी ढाढर परियोजना, जानें 60 साल का पूरा इतिहास

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Patna News: बिहार के मगध क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। सालों से सूखे की मार झेल रहे गया, नवादा और जहानाबाद जिले के लाखों किसानों के लिए ‘ढाढर सिंचाई परियोजना’ अब किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। इस परियोजना के चालू होने से खेतों तक पानी पहुंचाना बेहद आसान हो गया है और किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।

​आइए जानते हैं कि करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना की पूरी कहानी क्या है और यह कैसे तीन जिलों की तकदीर बदल रही है।

​2020 में सीएम नीतीश कुमार ने किया था उद्घाटन

​साल 2020 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस परियोजना का विधिवत उद्घाटन किया था। गया जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत सोहजना दोनैया गांव में ढाढ़र नदी पर 138 मीटर लंबा बैराज बनाया गया है। इसी बैराज के जरिए गया, नवादा और जहानाबाद के खेतों तक सिंचाई का पानी डाइवर्ट किया जाता है।

​भले ही कुछ लोग इस नहर प्रणाली को बरसाती नाला कहते हों, लेकिन मानसून के सीजन में यह नहर लाखों किसानों के लिए ‘अमृत’ का काम करती है।

​एक नजर में परियोजना के मुख्य आंकड़े

विवरण

आंकड़े

कुल लागत

करीब ₹300 करोड़

बैराज की लंबाई

138 मीटर (सोहजना दोनैया, फतेहपुर)

वर्तमान खरीफ सिंचाई क्षमता

6,900 हेक्टेयर

कुल लक्ष्य (तिलैया पानी मिलने पर)

31,700 हेक्टेयर

भावी बिजली उत्पादन लक्ष्य

60 मेगावाट (MW)

जानिए कैसे काम करती है यह सिंचाई प्रणाली?

​मानसून के मौसम में जब ढाढ़र नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो सोहजना दोनैया बैराज के जरिए पानी को रोककर विभिन्न नहरों और उनकी उप-शाखाओं (Branches) की ओर मोड़ा जाता है।

  • ​खरीफ सीजन में राहत: विभागीय सूत्रों के अनुसार, खरीफ फसलों के समय इस बैराज से 739 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है।
  • ​सीधे खेतों तक पहुंच: यह पानी बिना किसी बाधा के सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचता है, जिससे डीजल पंपों पर किसानों की निर्भरता खत्म हो गई है।

​सांसद सत्यभामा देवी की पहल और 60 साल का लंबा संघर्ष

​इस परियोजना का इतिहास बेहद पुराना और संघर्षों से भरा है। जानकारों के मुताबिक, इसकी कहानी साल 1960-1970 के दशक से शुरू होती है:

  • ​1964 में रखी गई नींव: जहानाबाद की तत्कालीन सांसद सत्यभामा देवी की पहल पर ‘तिलैया ढाढ़र सिंचाई परियोजना’ की रूपरेखा तैयार की गई थी। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के.एन. राव के सामने गया के सुखाड़ की समस्या रखते हुए इसका प्रस्ताव दिया था।
  • ​1974 में मिली अंतिम मंजूरी: सत्यभामा देवी के प्रयासों के बाद 1974 में इस योजना को अंतिम रूप दिया गया।
  • ​1984 में शिलांयास: 20 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने बैराज का शिलांयास किया था। तब इसके लिए 13 करोड़ 43 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे और इसे 1990 तक पूरा करने का लक्ष्य था।

​झारखंड बंटवारे के बाद अधर में लटकी योजना

​शुरुआत में यह योजना बिहार और झारखंड (तब संयुक्त बिहार) की एक संयुक्त योजना थी। मूल योजना (तिलैया ढाढ़र अपसरण योजना) के तहत झारखंड के तिलैया जलाशय से 1.40 लाख एकड़ फीट पानी नहर के माध्यम से ढाढ़र नदी में लाना था।

​बंटवारे का दंश: साल 2000 में जैसे ही झारखंड अलग राज्य बना, झारखंड सरकार ने बिहार को पानी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद यह मेगा प्रोजेक्ट पूरी तरह अधर में लटक गया।

 

​सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची लड़ाई

​इस परियोजना को दोबारा जीवित करने के लिए प्रसिद्ध समाजसेवी महेंद्र सिंह (अधिवक्ता) और कई संगठनों ने गया से लेकर पटना और दिल्ली तक आंदोलन किए। साल 1998 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। केंद्र सरकार ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए इसे 9वीं पंचवर्षीय योजना में शामिल किया और ₹30 करोड़ की राशि जारी की, जिसके बाद काम आगे बढ़ सका।

​…लेकिन अभी भी एक चुनौती बाकी है!

​यद्यपि यह परियोजना किसानों के लिए लाइफलाइन बन चुकी है, लेकिन अभी भी इसका पूरा फायदा मिलना बाकी है:

  • ​अभी सिर्फ खरीफ को पानी: वर्तमान में केवल ढाढ़र नदी के अपने पानी से 6,900 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की सिंचाई हो पा रही है।
  • ​झारखंड से पानी की दरकार: शेष 24,800 हेक्टेयर (कुल 31,700 हेक्टेयर) भूमि पर सालों भर सिंचाई की सुविधा बहाल करने के लिए अभी भी झारखंड के तिलैया जलाशय से अतिरिक्त पानी की आवश्यकता है।

​अगर दोनों राज्यों के बीच इस पानी को लेकर सहमति बन जाती है, तो अकेले गया जिले की 35 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि साल के 12 महीने हरी-भरी रहेगी। इसके अलावा, परियोजना के तहत 60 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य भी रखा गया है, जिसपर काम तेजी से जारी है।

 

​TNB कॉलेज में NSUI का सदस्यता अभियान; युवाओं ने लिया छात्र हितों के लिए लड़ने का संकल्प

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Bhagalpur News: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के अंतर्गत आने वाले शहर के प्रतिष्ठित टीएनबी (TNB) कॉलेज परिसर में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) द्वारा चलाया गया विशेष सदस्यता अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस अभियान के तहत कॉलेज के छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह देखा गया और बड़ी संख्या में युवाओं ने संगठन की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। इस पूरे अभियान को सफल और प्रभावी बनाने में टीएमबीयू एनएसयूआई के उपाध्यक्ष शाहरुख शेख ने मुख्य और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

​‘टीम शाहरुख शेख’ की सक्रियता: इन साथियों ने संभाली कमान

​अभियान के दौरान कॉलेज कैंपस में छात्रों को संगठन की विचारधारा और छात्र हितों के मुद्दों से अवगत कराने के लिए एनएसयूआई की टीम ने सघन जनसंपर्क किया। इस अभियान को धरातल पर सफल बनाने में उपाध्यक्ष शाहरुख शेख के साथ मुख्य रूप से:

  • ​अमन कुमार मिनाटी
  • ​अभिनंदन
  • ​तौसीफ लतीफ
  • ​मोहम्मद अरवाज
  • ​मृत्युंजय कुमार
  • ​अनिल

​सहित दर्जनों सक्रिय साथियों ने अग्रिम पंक्ति में रहकर कमान संभाली और रिकॉर्ड तोड़ संख्या में नए छात्रों को एनएसयूआई परिवार का हिस्सा बनाया।

​“छात्रों के अधिकारों के लिए सड़क से सदन तक लड़ेंगे” – शाहरुख शेख

​सदस्यता अभियान की सफलता पर छात्रों को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष शाहरुख शेख ने कहा:

​”NSUI का यह सदस्यता अभियान सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक नए युग की शुरुआत है। हमारा मुख्य उद्देश्य कैंपस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समय पर छात्रवृत्ति, कैंपस प्लेसमेंट (रोजगार) और छात्र हितों से जुड़े हर छोटे-बड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना है। संगठन भविष्य में भी छात्रों की बुलंद आवाज़ बनकर उनके हक और हुकूक की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ता रहेगा।”

 

​इन मुख्य पांच मुद्दों पर केंद्रित रहेगा NSUI का आगामी आंदोलन:

​नवनियुक्त सदस्यों और छात्र नेताओं ने कॉलेज प्रशासन व सरकार के सामने आने वाले दिनों में निम्नलिखित प्राथमिकताओं को रखने का संकल्प लिया:

  1. ​गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: कॉलेज के सभी विभागों में नियमित और आधुनिक स्तर की पढ़ाई सुनिश्चित करना।
  2. ​समय पर छात्रवृत्ति: आर्थिक रूप से कमजोर और आरक्षित वर्ग के छात्रों को समय पर स्कॉलरशिप दिलाना।
  3. ​रोजगार के अवसर: विश्वविद्यालय स्तर पर बेहतर प्लेसमेंट सेल की स्थापना और रोजगार मेलों का आयोजन।
  4. ​कैंपस की समस्याएं: छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाओं (पेयजल, लाइब्रेरी, वाई-फाई) को दुरुस्त कराना।
  5. ​छात्र हित सर्वोपरि: कॉलेज प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ छात्रों की आवाज को दबाने न देना।

​समारोह के अंत में कार्यकर्ताओं ने ‘NSUI ज़िंदाबाद’ और ‘छात्र हित सर्वोपरि’ के गगनभेदी नारों के साथ अभियान का समापन किया और आगामी छात्र संघ चुनावों व आंदोलनों के लिए अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।

भागलपुर के जांबाजों का जलवा: 22 पदकों के साथ कैमूर से लौटी ताइक्वांडो टीम, खिलाड़ियों का जोरदार स्वागत

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Bhagalpur News: कैमूर जिले के भभुआ में आयोजित 37वीं बिहार राज्य ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भागलपुर के खिलाड़ियों ने अपने हुनर का लोहा मनवाते हुए जिले का नाम पूरे राज्य में रोशन किया है। 6, 7 और 8 जून तक चली इस कांटे की प्रतियोगिता में भागलपुर की टीम कुल 22 पदक (02 स्वर्ण, 07 रजत और 13 कांस्य) जीतकर पूरे दमखम के साथ वापस लौटी है। खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक सफलता से खेल प्रेमियों और पूरे जिले में जश्न का माहौल है।

​450+ खिलाड़ियों के बीच भागलपुर का ‘सुपर-26’ स्ट्राइक रेट

​कैमूर में आयोजित इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में बिहार के विभिन्न जिलों से 450 से अधिक दिग्गज खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। भागलपुर जिले से कुल 26 खिलाड़ियों ने इस चैंपियनशिप में शिरकत की थी। बेहतरीन तकनीक और कड़े मुकाबले के दम पर इन 26 में से 22 खिलाड़ियों ने पदक जीतकर इतिहास रच दिया। टीम को इस मुकाम तक पहुंचाने में कोच और अधिकारियों की भूमिका सराहनीय रही।

​जीत के पीछे के मार्गदर्शक (कोच और मैनेजर)

  • ​मुख्य भूमिका/सचिव: राकेश कुमार साहू (सचिव, भागलपुर जिला ताइक्वांडो संघ)
  • ​कोचिंग टीम: तुलसी कुमार, जय, निखिल और रोहित खेतान।
  • ​दल प्रबंधक (टीम मैनेजर): विद्या राय।

 

​विजेता खिलाड़ियों की सूची: किसने कौन सा मेडल जीता?

​प्रतियोगिता के अलग-अलग आयु और भार वर्ग में भागलपुर के खिलाड़ियों ने पदक तालिका में अपना नाम दर्ज कराया:

​1. सब जूनियर वर्ग (Sub-Junior Category):

  • ​रजत पदक (Silver): प्राप्ति प्रिया, याशी, निशित श्रीवास्तव, निहाल चौधरी और कनिष्क टेकरीवाल।
  • ​कांस्य पदक (Bronze): दीक्षा श्री, परी कुमारी और सर्वज्ञ आरव।

​2. कैडेट वर्ग (Cadet Category):

  • ​स्वर्ण पदक (Gold): अर्पित राज एवं सौम्या ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भागलपुर की झोली में दो गोल्ड मेडल डाले।
  • ​रजत पदक (Silver): कल्पना।
  • ​कांस्य पदक (Bronze): ख्याति श्री, ध्रुव कुमार और यश राज।

​3. जूनियर वर्ग (Junior Category):

  • ​रजत पदक (Silver): आशुतोष कुमार।
  • ​कांस्य पदक (Bronze): आरुष राज, उत्कर्ष, तान्या रैना और ईशा किरण।

​4. सीनियर वर्ग (Senior Category):

  • ​कांस्य पदक (Bronze): एलेन जॉयदीप, आयुष कुमार और दिशु राज।

​कोच रोहित खेतान ने दी बधाई, उज्जवल भविष्य की कामना

​इस शानदार परिणाम की आधिकारिक जानकारी देते हुए कोच रोहित खेतान ने कहा कि खिलाड़ियों ने मैदान पर जी-तोड़ मेहनत की थी, जिसका परिणाम आज सबके सामने है। जिला ताइक्वांडो संघ के पदाधिकारियों ने सभी विजेता छात्र-छात्राओं को बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि ये खिलाड़ी आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार और भागलपुर का नाम रोशन करेंगे।

भागलपुर: सुल्तानगंज और शाहकुण्ड में RJD का महा-प्रदर्शन; महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरे कार्यकर्ता

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Bhagalpur News: देश और राज्य में लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सुल्तानगंज और शाहकुण्ड प्रखंड मुख्यालय परिसर में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन किया। बिहार व्यापी आंदोलन के तहत आयोजित इस प्रदर्शन में आरजेडी कार्यकर्ताओं ने बिहार सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोनों प्रखंडों के विकास पदाधिकारियों (BDO) को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

​तैयारियों और नेतृत्व की कमान: दोनों प्रखंडों में दिखा राजद का दम

​यह धरना प्रदर्शन बिहार के सभी प्रखंडों में राजद के शीर्ष नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित किया गया था। भागलपुर के इन दोनों प्रमुख प्रखंडों में कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम देखने को मिला:

  • ​सुल्तानगंज प्रखंड: यहाँ प्रदर्शन की कमान राजद प्रखंड अध्यक्ष विवेकानंद यादव के हाथों में थी।
  • ​शाहकुण्ड प्रखंड: यहाँ राजद प्रखंड अध्यक्ष कन्हैया सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।

​“भ्रष्ट सरकार में आम जनता त्राहिमाम, सत्ता में रहने का हक नहीं” – डॉ. चक्रपाणि हिमांशु

​धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पूर्व बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष डॉ. चक्रपाणि हिमांशु और राजद के वरिष्ठ नेता रामचन्द्र चौधरी ने डबल इंजन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:

​”आज बिहार और केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण महंगाई और बेरोजगारी अपने चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। महादलित परिवारों के साथ-साथ समाज का हर तबका और आम जनता दाने-दाने को तरस रही है और त्राहिमाम कर रही है। ऐसी जनविरोधी और भ्रष्ट सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”

 

​‘हरा गमछा’ विवाद: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को घेरने की तैयारी

​प्रदर्शन के दौरान राजद नेताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर एक गंभीर आरोप लगाते हुए मामले को राजनीतिक रूप से गरमा दिया। राजद नेताओं ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने ‘हरा गमछा’ का अपमान किया है।

​राजद नेताओं का बड़ा बयान:

“हरा गमछा हमारी संस्कृति और भारतीय झंडे के प्रतीकों का सम्मान है। इसका अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम महामहिम राष्ट्रपति जी से मांग करते हैं कि हरा गमछा का अपमान करने वाले ऐसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।”

 

​BDO को सौंपा ज्ञापन, दर्जनों दिग्गज नेता रहे मौजूद

​प्रदर्शन के अंत में राजद शिष्टमंडल ने सुल्तानगंज और शाहकुण्ड के प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को अपनी मांगों से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें स्थानीय स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की मांग भी शामिल थी।

​इस मौके पर उपस्थित प्रमुख चेहरे:

इस महा-प्रदर्शन में अरविंद यादव, शशिर कुमार सिंह, नटबिहारी मंडल, मो. मेराज, अफरोज आलम, मंजीत ठाकुर, अनिरुद्ध यादव, मो. मंजूर आलम, डॉ. नईम उदिन, सदानंद यादव, सकलदेव यादव, बिकेष कुमार संन्टु, विजय यादव, विभुति यादव सहित दर्जनों वरिष्ठ राजद नेता और सैकड़ों सक्रिय कार्यकर्ता मौजूद थे।