Patna News: बिहार में बैंकों की मनमानी और सुस्त कार्यप्रणाली पर राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त कदम उठाया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री-सह-वित्त मंत्री बीजेन्द्र प्रसाद यादव ने बैंकों के खराब प्रदर्शन को सुधारने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की 5 सूत्रीय कड़क अनुशंसाओं को हरी झंडी दे दी है।
वित्त विभाग ने साफ अल्टीमेटम दिया है कि जो बैंक बिहार के विकास और किसानों को ऋण (Loan) देने में ढीला रवैया अपनाएंगे, अगले 6 महीनों में सुधार न दिखने पर उनके सरकारी डिपॉजिट (Government Deposit) पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी।
विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति ने दिए कड़े निर्देश
बीते 22 जनवरी 2026 को आयोजित 95वीं त्रैमासिक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव, आरबीआई (RBI) के निदेशक, नाबार्ड (NABARD) के सीजीएम और एसबीआई (SBI) के सीजीएम शामिल हैं। समिति ने गहन समीक्षा के बाद सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है।
रडार पर आए ये 15 प्रमुख बैंक (इन्हें सुधार के लिए भेजा जाएगा पत्र)
वित्त विभाग ने 100 अंकों के मेजरमेंट इंडेक्स के आधार पर बैंकों की रैंकिंग तय की है। जिन बैंकों का साख जमा अनुपात (CD Ratio) और एनुअल क्रेडिट प्लान (ACP) का लक्ष्य 50 से 60 प्रतिशत से नीचे है, उन्हें कड़ी निगरानी में रखा गया है। इन 15 बैंकों की सूची इस प्रकार है:
- State Bank of India (SBI)
- Punjab National Bank (PNB)
- Central Bank of India
- Union Bank of India
- Bank of India
- UCO Bank
- IDBI Bank
- Indian Overseas Bank
- Bandhan Bank
- Bank of Maharashtra
- Karnataka Bank
- IndusInd Bank
- Unity Small Finance Bank
- Utkarsh Small Finance Bank
- Karur Vysya Bank
उच्च स्तरीय समिति की 5 बड़ी रणनीतिक अनुशंसाएं (Key Recommendations)
अनुशंसा संख्या | प्रमुख निर्णय और रणनीतिक दिशा-निर्देश |
|---|---|
अनुशंसा – 1 | ACP का नया लक्ष्य: राज्य का CD Ratio बढ़ाने के लिए संभावित डिपॉजिट का न्यूनतम 80% लक्ष्य तय हो। नाबार्ड ने इस वर्ष PLP को संशोधित कर ₹3,55,532 करोड़ निर्धारित किया है। |
अनुशंसा – 2 | बड़े बैंकों को ज्यादा टारगेट: समीक्षा में पाया गया कि अगर SBI और PNB को हटा दें तो अन्य छोटे बैंकों का CD Ratio 72.75% है, जो बहुत अच्छा है। इसलिए अब SBI और PNB जैसे बड़े बैंकों को साख योजना (ACP) में बड़ा लक्ष्य दिया जाएगा। |
अनुशंसा – 3 | जनसमर्थ पोर्टल से लिंकेज: ऋण वितरण और मॉनिटरिंग को आसान बनाने के लिए KCC और अन्य सरकारी योजनाओं को भारत सरकार के ‘जनसमर्थ पोर्टल’ (Jan Samarth Portal) से इंटीग्रेट (जोड़ा) किया जाएगा। |
अनुशंसा – 4 | पंचायत स्तर पर शिविर: जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से KCC खातों की संख्या बढ़ाने के लिए पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगेंगे। इसके जरिए जीविका दीदियों, स्वयं सहायता समूहों और 50 लाख लक्षित किसानों को आसानी से जोड़ा जाएगा। |
अनुशंसा – 5 | 6 महीने का अल्टीमेटम: 60% से कम उपलब्धि वाले बैंकों को वित्त सचिव स्तर से चेतावनी पत्र भेजा जाएगा। 6 महीने में सुधार न होने पर सरकारी फंड जमा करने पर रोक लगेगी। |
छोटे बैंकों का प्रदर्शन बेहतर, दिग्गजों की सुस्ती ने बढ़ाई चिंता
समिति की रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि राज्य के कुल आंकड़ों में से केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का डिपॉजिट हटा दिया जाए, तो राज्य का वर्तमान साख जमा अनुपात (CD Ratio) बढ़कर 68.16 प्रतिशत हो जाता है। वहीं, अगर SBI और PNB दोनों को हटा दिया जाए, तो यह आंकड़ा 72.75 प्रतिशत पर पहुंच जाता है।
साफ है कि बिहार के छोटे बैंक लोन देने में आगे हैं, जबकि बड़े सरकारी बैंक राज्य से भारी-भरकम डिपॉजिट लेने के बाद भी यहां के किसानों और युवाओं को लोन देने में पीछे चल रहे हैं। इसी असंतुलन को ठीक करने के लिए अब सरकार ने कमर कस ली है।


