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विकसित बिहार 2047′ के निर्माण में मुख्यमंत्री फेलोज़ निभाएंगे बड़ी भूमिका, पटना में ओरिएंटेशन प्रोग्राम का भव्य आयोजन

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Patna News: बिहार को वर्ष 2047 तक एक विकसित राज्य बनाने की परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने युवाओं की मेधा और नवाचार पर बड़ा भरोसा जताया है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के अंतर्गत बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी (बीपीएसएमएस) द्वारा गुरुवार को पटना के अधिवेशन भवन (पुराना सचिवालय) में ‘मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना’ के तहत चयनित फेलोज़ के लिए एक विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार के विकास आयुक्त  मिहिर कुमार सिंह और सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव सह मिशन निदेशक डॉ. बी. राजेन्दर सहित आईआईएम बोधगया के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

​नीति-निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सीधे योगदान देंगे युवा

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने इस योजना को बिहार के भविष्य के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने मुख्य बातें साझा कीं:

  • ​विकसित बिहार 2047: यह विजन इस पूरी योजना की आधारशिला है, जिसमें इन युवा फेलोज़ का योगदान सबसे महत्वपूर्ण होगा।
  • ​केंद्रित शिक्षण कार्यक्रम: यह पारंपरिक नियुक्ति प्रक्रियाओं से बिल्कुल अलग है। यह एक ऐसा मंच है जहाँ युवा प्रशासनिक बारीकियों को सीखेंगे भी और सुशासन में अपना प्रत्यक्ष योगदान भी देंगे।
  • ​अग्रणी राज्य बना बिहार: देश में मुख्यमंत्री फेलोशिप को इतने व्यापक और महत्वाकांक्षी स्तर पर लागू करने वाले गिने-चुने राज्यों में अब बिहार भी शामिल हो गया है।

​केस स्टडी की तरह काम करें फेलोज़, राष्ट्र सेवा को बनाएं ध्येय: विकास आयुक्त

​विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने चयनित फेलोज़ को जमीनी हकीकत से जुड़ने की सलाह दी:

  • ​डेटा आधारित परिवर्तन: असली बदलाव ग्राउंड जीरो पर ही दिखता है। वर्तमान में चल रहे सहयोग शिविर मुख्यमंत्री फेलोज़ के लिए बेहतरीन केस स्टडी हैं।
  • ​अंतिम व्यक्ति तक लाभ: योजना का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी लाभ पहुंचाना है।
  • ​अध्ययन की सलाह: विकास आयुक्त ने सभी फेलोज़ को ‘भारत आर्थिक सर्वेक्षण’ और ‘बिहार आर्थिक सर्वेक्षण’ जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का गहराई से अध्ययन करने के निर्देश दिए।

​आईआईएम (IIM) बोधगया के सहयोग से तैयार हुआ है पूरा खाका

​नीति-निर्माण को सशक्त बनाने और शासन तंत्र में आधुनिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), बोधगया के साथ विशेष साझेदारी की है। इस योजना को राज्य सरकार के सुशासन कार्यक्रम के तहत 09 सितंबर 2025 को मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली थी। कठोर चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद कुल 121 स्वीकृत पदों के मुकाबले 106 अर्ली एवं मिड-कैरियर प्रोफेशनल्स का चयन किया गया है, जो दो वर्षों तक सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगे।

​किसे कहाँ मिली जिम्मेदारी और कितना मिलेगा मानदेय (Salary)?

​प्रशासनिक स्तर और मानदेय के आधार पर मुख्यमंत्री फेलोज़ का वर्गीकरण इस प्रकार किया गया है:

पदस्थापना स्थल (Deployment)

फेलोज़ की संख्या

प्रति माह मानदेय (Stipend)

मुख्यमंत्री सचिवालय एवं उपमुख्यमंत्री कार्यालय

06

₹1.50 लाख

मुख्य सचिव कार्यालय एवं विकास आयुक्त कार्यालय

04

₹1.25 लाख

विभिन्न सचिवालय विभाग

40

₹1.00 लाख

प्रमंडलीय आयुक्त, डीएम एवं नगर निगम आयुक्त कार्यालय

57

₹80 हजार

​”आप जो भी कार्य करेंगे, उसे राष्ट्र सेवा की भावना से करें। आपके द्वारा किया गया प्रत्येक छोटा और सकारात्मक बदलाव बड़े सामाजिक परिदृश्य पर असर डालता है।”

—  मिहिर कुमार सिंह, विकास आयुक्त, बिहार

​ओरिएंटेशन में दी गई जिम्मेदारियों की ट्रेनिंग

​इस एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान चयनित सभी मुख्यमंत्री फेलोज़ को उनके कार्यदायित्वों, सरकार की अपेक्षाओं और बिहार की प्रशासनिक प्रणाली की कार्यशैली के बारे में विस्तार से ब्रीफ किया गया, ताकि वे अपने-अपने विभागों और जिलों में जाकर तुरंत काम संभाल सकें।

भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा सख्त: नो-मेन्स लैंड से तत्काल हटेंगे अतिक्रमण, संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर मुख्य सचिव का कड़ा एक्शन

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Patna News: बिहार सरकार ने भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा, अखंडता और आर्थिक पारदर्शिता को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आज एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा, नो-मेन्स लैंड (No Man’s Land) से अतिक्रमण हटाने, लापता सीमा पिलरों के पुनर्गठन, एसएसबी (SSB) चौकियों के सुदृढ़ीकरण और सीमावर्ती जिलों में पनप रहे संदिग्ध व्यावसायिक व वित्तीय नेटवर्क पर बिंदुवार समीक्षा की गई और कई कड़े निर्देश जारी किए गए।

​बिहार में 735 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा का पूरा खाका

​बिहार राज्य की सुरक्षा और भूगोल के लिहाज से भारत-नेपाल सीमा अत्यंत संवेदनशील है। इस सीमा के प्रबंधन का पूरा ढांचा इस प्रकार है:

  • ​सीमा की लंबाई: बिहार में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 735 किलोमीटर है।
  • ​प्रभावित जिले: इस सीमा पर बिहार के 7 प्रशासनिक जिले—पश्चिम चम्पारण (बेतिया), पूर्वी चम्पारण (मोतिहारी), सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया एवं किशनगंज सहित 1 पुलिस जिला-बगहा अवस्थित हैं।
  • ​सुरक्षा बल: सीमा की सुरक्षा के लिए बिहार पुलिस के 70 पुलिस थाने तथा सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 194 सीमा चौकियां (BOPs) चौबीसों घंटे तैनात हैं।

​अतिक्रमण पर सर्जिकल स्ट्राइक: नो-मेन्स लैंड से हटाए गए 1349 अवैध निर्माण

​मुख्य सचिव ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के 0-15 किलोमीटर क्षेत्र और नो-मेन्स लैंड में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में अब तक की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई, जो इस प्रकार है:

जिला

चिन्हित अतिक्रमण

हटाए गए अतिक्रमण

शेष बचे

पश्चिम चम्पारण

272

272

0

पूर्वी चम्पारण

231

229

02

सीतामढ़ी

139

133

06

मधुबनी

245

245

0

सुपौल

101

100

01

अररिया

336

336

0

किशनगंज

35

34

01

कुल योग

1359

1349

मुख्य सचिव का निर्देश: “नो-मेन्स लैंड में बचे हुए मात्र 10 अतिक्रमणों को तत्काल हटाया जाए। साथ ही सीमा से 15 किमी के दायरे में सरकारी जमीनों पर जो 117 अतिक्रमण शेष हैं, उन्हें भी जल्द से जल्द खाली कराया जाए। भविष्य में यहाँ कोई नया अतिक्रमण नहीं पनपना चाहिए।”

लापता और क्षतिग्रस्त सीमा पिलरों की होगी मरम्मत

​भारत-नेपाल सीमा पर कुल 5343 पिलर अवस्थित हैं। ‘फील्ड सर्वे टीम’ (FST) की समीक्षा के दौरान पिलरों की वर्तमान स्थिति सामने आई:

  • ​अच्छी स्थिति में: 3771 पिलर
  • ​क्षतिग्रस्त (Damaged): 317 पिलर
  • ​लापता (Missing): 1155 पिलर
  • ​नया निर्माण होना शेष: 100 पिलर इन लापता और क्षतिग्रस्त पिलरों की मरम्मत और पुनर्गठन के कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है।

​वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में SSB चौकियों का होगा सुदृढ़ीकरण

​पश्चिम चम्पारण के वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव अभ्यारण्य के भीतर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वन भूमि हस्तांतरण (Forest Clearance) की समीक्षा की गई। इस क्षेत्र में एसएसबी की 29 सीमा चौकियां (BOPs) हैं, जिनमें से 17 कोर जोन में और 12 बफर जोन में स्थित हैं। अब एसएसबी के क्षेत्रीय पदाधिकारी और जिला वन्य पदाधिकारी महीने में दो बार अनिवार्य रूप से बैठक करेंगे ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना स्वीकृत क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास और नियमित गश्त सुनिश्चित की जा सके।

​संदिग्ध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और विदेशी निवेश पर कसता शिकंजा

​सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और एसएसबी द्वारा सैकड़ों व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की गहन जांच की गई है। जांच में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:

  • ​सीतामढ़ी: 159 में से 28 संस्थान संदिग्ध पाए गए।
  • ​किशनगंज: 21 संस्थान संदिग्ध पाए गए।
  • ​पश्चिम चम्पारण: 09 संस्थान संदिग्ध मिले।
  • ​मधुबनी व सुपौल: 06-06 संस्थान संदिग्ध पाए गए।
  • ​अररिया व पूर्वी चम्पारण: 05-05 संस्थान संदिग्ध पाए गए हैं।

​आयकर विभाग करेगा जांच: अररिया जिले में जांच के दौरान कई संस्थाओं और व्यावसायिक फर्मों में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और संदिग्ध विदेशी निवेश (Foreign Investment) के मामले सामने आए हैं, जिसे आगे की कड़ी जांच के लिए आयकर निदेशक (अन्वेषण), बिहार को सौंप दिया गया है।

​बैंकिंग सेक्टर में बड़ा फैसला: बैंक कर्मियों का होगा पुलिस वेरिफिकेशन

​अक्सर साइबर फ्रॉड और संदिग्ध ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) के संचालन में बैंक कर्मियों की संलिप्तता की आशंका को देखते हुए मुख्य सचिव ने बड़ा आदेश जारी किया है:

  1. ​पुलिस सत्यापन: आरबीआई के निर्देशानुसार सीमावर्ती जिलों की सभी 1292 बैंक शाखाओं के सभी बैंक कर्मियों का पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।
  2. ​नकली नोट छांटने वाली मशीनें: सीमा पर स्थित 1292 बैंक शाखाओं में से अब तक 1259 शाखाओं में नकली नोट पकड़ने वाली मशीनें (Counterfeit Money Detector) लगाई जा चुकी हैं, शेष में जल्द लगाने का निर्देश है।
  3. ​अनिवार्य रिपोर्टिंग: बैंकों को CTR, STR, CCR और FNV जैसी महत्वपूर्ण रिपोर्ट वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) और आरबीआई को समय पर भेजने तथा ग्राहकों का C-KYC सत्यापन अनिवार्य करने को कहा गया है।

​रजिस्ट्री में PAN अनिवार्य और अचल संपत्तियों पर नजर

​वित्तीय हेराफेरी रोकने के लिए वित्त विभाग और निबंधन कार्यालयों ने 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों के निबंधन (रजिस्ट्री) में PAN कार्ड अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा 2 लाख रुपये से अधिक के नकद लेनदेन की रिपोर्ट हर महीने आयकर विभाग को भेजी जा रही है।

​साइबर अपराधियों और म्यूल खातों पर पुलिस का प्रहार

​सीमावर्ती जिलों में भोले-भाले नागरिकों को ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश पर भारी मुनाफे और नौकरी का झांसा देकर ठगने वाले गिरोहों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है:

  • ​बेतिया: 78 खाते फ्रीज किए गए तथा 05 FIR दर्ज की गईं।
  • ​बगहा: आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा 18 म्यूल खातों के सत्यापन के बाद 04 केस दर्ज कर 13 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
  • ​अन्य जिले: कुल 33 केस दर्ज कर 148 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है।

मानिकपुर में 42 वर्षों की आस्था को मिलेगा नया रूप: मां दुर्गा मंदिर में सजेगा भव्य ‘पिंडी प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव’

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Bhagalpur News: भागलपुर के मानिकपुर इलाके में मां दुर्गा की भक्ति और अटूट आस्था से जुड़ा एक ऐतिहासिक और भव्य धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। पिछले 42 वर्षों की सामूहिक साधना अब एक नए और दिव्य रूप में सामने आ रही है। मानिकपुर में प्राचीन दुर्गा मंदिर के नवनिर्मित स्वरूप में इस वर्ष मां भगवती की पिंडी प्राण प्रतिष्ठा पूजन समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसे लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और भक्ति का माहौल है।

​1982 से निरंतर चली आ रही है आस्था की परंपरा

​मानिकपुर गांव में वर्ष 1982 से ही ग्रामीणों के अद्वितीय सहयोग से लगातार शारदीय दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता रहा है। इसी आस्था के धागे को मजबूत करते हुए ग्रामीणों ने प्राचीन दुर्गा मंदिर के भव्य निर्माण का संकल्प लिया था, जो निरंतर चलता रहा। अब मां भगवती की असीम अनुकंपा से वह शुभ घड़ी आ गई है जब मंदिर में पिंडी की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी।

​महोत्सव का पूरा कार्यक्रम: तारीख दर तारीख

​धार्मिक अनुष्ठान को पूर्ण विधि-विधान और भव्यता के साथ संपन्न कराने के लिए पूरा कार्यक्रम तय कर लिया गया है:

  • ​20 जून: भव्य एवं भव्य कलश शोभायात्रा के साथ धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत होगी।
  • ​24 जून: विख्यात आचार्य पंडित रविंद्र झा के पावन सानिध्य में मुख्य ‘पिंडी प्राण प्रतिष्ठा पूजन’ संपन्न कराया जाएगा।
  • ​25 जून: महाप्रसाद (भंडारा) का आयोजन होगा और इसी शाम एक विशाल ‘भव्य जागरण संध्या’ सजेगी, जिसमें माता के भजनों पर श्रद्धालु झूम उठेंगे।

​तैयारियों में जुटे ग्रामीण, आपसी भाईचारे की मिसाल

​इस महापर्व को ऐतिहासिक बनाने के लिए मानिकपुर के ग्रामीण दिन-रात एकजुट होकर तैयारियों में जुटे हैं। आयोजन को सफल बनाने में मुख्य रूप से:

    • ​कुमार सौरभ मिश्रा, आनंद प्रकाश, अमरजीत भारती, मृत्युंजय सिन्हा, पंकज वर्मा, राजीव सिन्हा, रिशु झा, राहुल झा, रवि मिश्रा, अमरेश झा, संजय झा, और डॉक्टर तन्मय सहित समाज के तमाम प्रबुद्ध लोग अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

​”यह मंदिर और यह दिव्य आयोजन केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि मानिकपुर की दशकों पुरानी आस्था, समृद्ध संस्कृति और हमारे आपसी भाईचारे का जीवंत प्रतीक है।”

— मानिकपुर ग्रामीण एवं आयोजन समिति

 

​हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद

​42 साल के लंबे इंतजार के बाद हो रहे इस भव्य पिंडी प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में न केवल मानिकपुर बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। आयोजन समिति द्वारा आने वाले भक्तों के लिए सुरक्षा, पेयजल और महाप्रसाद की व्यापक व्यवस्था की जा रही है।

भागलपुर में जुटेगा देशभर के हड्डी रोग विशेषज्ञों का महाकुंभ, 20-21 जून को MIDCON 2026 का शंखनाद

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Bhagalpur News: भागलपुर स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़े ऐतिहासिक आयोजन का गवाह बनने जा रहा है। बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के तत्वावधान में पूर्वी भारत का सबसे प्रतिष्ठित वार्षिक ऑर्थोपेडिक सम्मेलन ‘MIDCON 2026’ आगामी 20 और 21 जून को भागलपुर के होटल रूप विहार में आयोजित होने जा रहा है। इस दो दिवसीय महासम्मेलन में देश के कोने-कोने से प्रख्यात ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ, सर्जन और चिकित्सक जुटेंगे।

​देशभर के दिग्गज डॉक्टरों का होगा समागम

​भागलपुर ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक प्रेस वार्ता में आयोजन समिति ने बताया कि इस सम्मेलन को लेकर तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। सम्मेलन में देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले शीर्ष ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ और चिकित्सक शामिल होकर चिकित्सा जगत के नए आयामों पर मंथन करेंगे।

​इन आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर होगी मुख्य चर्चा

​सम्मेलन के दौरान हड्डी और जोड़ से जुड़ी दुनिया की सबसे एडवांस और आधुनिक तकनीकों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर गहन चर्चा होगी:

    • ​रोबोटिक एवं नेविगेशन आधारित सर्जरी: बिना किसी चूक के सटीक ऑपरेशन की नई तकनीक।
    • ​ज्वाइंट रिप्लेसमेंट व ट्रॉमा सर्जरी: जटिल फ्रैक्चर और जोड़ प्रत्यारोपण के आधुनिक तरीके।
    • ​स्पोर्ट्स इंजरी और आर्थोस्कोपी: खिलाड़ियों की चोटों और दूरबीन विधि से इलाज।
    • ​बाल अस्थि रोग (Pediatric Orthopedics): बच्चों में जन्मजात और अन्य हड्डी रोगों का इलाज।

​”यह सम्मेलन केवल चिकित्सा ज्ञान का मंच नहीं है, बल्कि यह देश भर के अनुभवों और नई तकनीकों के आदान-प्रदान का एक अनूठा अवसर है। इससे बिहार में ऑर्थोपेडिक चिकित्सा को एक नई और आधुनिक पहचान मिलेगी।”

— डॉ. बिहारी लाल, आयोजन अध्यक्ष

 

​वैज्ञानिक सत्रों के साथ दिखेगी सांस्कृतिक झलक

​भागलपुर ऑर्थोपेडिक सोसाइटी के पदाधिकारियों के अनुसार, इस दो दिवसीय कार्यक्रम में सिर्फ गंभीर वैज्ञानिक सत्र ही नहीं होंगे, बल्कि डॉक्टरों के तनाव को कम करने और आपसी जुड़ाव बढ़ाने के लिए शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। देश के प्रसिद्ध डॉक्टर अपने जीवन के अनुभवों और केस स्टडीज को युवा डॉक्टरों के साथ साझा करेंगे।

​भागलपुर को मिलेगी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान

​आयोजन समिति ने प्रेस वार्ता में गर्व के साथ कहा कि MIDCON 2026 का मुख्य उद्देश्य भागलपुर को राष्ट्रीय चिकित्सा मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना है। इस तरह के बड़े आयोजन से न केवल स्थानीय डॉक्टरों का ज्ञानवर्धन होगा, बल्कि क्षेत्र के मरीजों को भी भविष्य में विश्वस्तरीय इलाज की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी। मौके पर डॉ मनोज कुमार चौधरी, डॉ सोमेन चटर्जी, डॉ अमर कुमार, डॉ मणिभूषण, डॉ नितिन सहित कई विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद थे l

बिहार के खिलाड़ियों के लिए सम्राट कैबिनेट ने बदला नियम, अब सीधे सरकारी अफसर बनेंगे मेडल विजेता; जानें किसे मिलेगी कौन सी रैंक

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Patna News: बिहार के खेल जगत और युवाओं के लिए आज का दिन एक नया सवेरा लेकर आया है। राज्य सरकार ने प्रतिभावान खिलाड़ियों को उनकी खेल उपलब्धियों के अनुरूप सम्मानजनक और ऊंची सरकारी नौकरियां देने की दिशा में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। बुधवार को आयोजित मंत्रिपरिषद् (कैबिनेट) की बैठक में ‘बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति (संशोधन) नियमावली, 2026’ के अधिसूचना प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है।

​इस नए संशोधन के बाद अब बिहार के मेडल विजेता खिलाड़ियों को नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि उन्हें सीधे बड़े पदों (अधिकारी स्तर) पर सीधी नियुक्ति दी जाएगी।

​ “मेडल लाओ, सीधे अफसर बनो”: जानिए किस खेल के लिए कौन सा ग्रेड पे

​संशोधित नियमावली के तहत खिलाड़ियों की खेल उपलब्धियों के आधार पर नौकरियों को तीन बड़े स्तरों (Salary Levels) में बांटा गया है:

​ 1. वेतन स्तर-09 (ग्रेड पे ₹5400 – राजपत्रित/अधिकारी पद)

​बिहार सरकार इन खिलाड़ियों को सीधे उच्च पदों पर नियुक्त करेगी:

  • ​ओलंपिक खेलों में स्वर्ण, रजत या कांस्य (Gold, Silver, Bronze) पदक जीतने वाले खिलाड़ी।
  • ​ओलंपिक में शामिल किसी भी खेल विधा के किसी भी प्रारूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व (Representation) करने वाले खिलाड़ी।
  • ​क्रिकेट (Cricket) के किसी भी प्रारूप (Test, ODI, T20) में भारतीय टीम की जर्सी पहनने वाले खिलाड़ी।
  • ​एशियाई खेल (Asian Games) और राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games) में स्वर्ण पदक (Gold Medal) विजेता।

​ 2. वेतन स्तर-07 (ग्रेड पे ₹4600)

  • ​एशियाई खेल (Asian Games) और राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी।
  • ​इन खेलों में रजत (Silver) और कांस्य (Bronze) पदक जीतने वाले खिलाड़ी।

​ 3. वेतन स्तर-06 (ग्रेड पे ₹4200)

  • ​नेशनल गेम्स (National Games) और सीनियर नेशनल चैंपियनशिप के किसी भी प्रारूप में स्वर्ण (Gold) या रजत (Silver) पदक जीतने वाले खिलाड़ी।

​ “बिहार के लाखों युवाओं के लिए खुलेगा करियर का नया रास्ता” — श्रेयसी सिंह

​खिलाड़ी से राजनेता बनीं बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह ने मुख्यमंत्री और कैबिनेट के इस फैसले का दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को नौकरी की स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहा है।

​खेल मंत्री ने अपने संबोधन में कहा:

​”बिहार के खिलाड़ियों ने हमेशा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस संशोधित नियमावली के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे खिलाड़ियों को उनके परिश्रम और त्याग का उचित सम्मान मिले। मुझे पूरा भरोसा है कि यह ऐतिहासिक निर्णय न केवल हमारे वर्तमान खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाएगा, बल्कि बिहार के लाखों युवाओं को खेलों को एक सुरक्षित करियर के रूप में चुनने के लिए प्रेरित करेगा।”

 

​ बिहार में पनपेगी ‘खेल संस्कृति’, पलायन पर लगेगा रोक

​अब तक उचित नीतियों के अभाव में बिहार के कई प्रतिभावान खिलाड़ी दूसरे राज्यों या रेलवे जैसे विभागों का रुख करते थे। लेकिन नीतीश सरकार के इस मास्टरस्ट्रोक से बिहार में एक मजबूत खेल संस्कृति (Sports Culture) का विकास होगा। खेल मंत्री ने यह भी साफ किया कि राज्य सरकार केवल नौकरियां ही नहीं दे रही, बल्कि विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना (Infrastructure), आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर और खिलाड़ियों के समग्र कल्याण के लिए जमीन पर लगातार काम कर रही है।

​बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप के जमीन मालिकों को बड़ी राहत: सरकार खरीदेगी जमीन, बाजार रेट से 4 गुना तक मिलेगा दाम

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Patna News: बिहार में नियोजित शहरीकरण और रियल एस्टेट सेक्टर को गति देने के लिए नीतीश सरकार ने एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य के ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक से परेशान भू-स्वामियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने जमीन के हस्तांतरण और क्रय-विक्रय के नए नियमों को मंजूरी दे दी है।

​नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि बुधवार को आयोजित मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में भू-स्वामियों की तात्कालिक एवं आकस्मिक आवश्यकताओं (जैसे शादी, बीमारी या शिक्षा) को ध्यान में रखते हुए यह जनहितैषी फैसला लिया गया है। मंत्री ने इसे “विकास, निवेश और जनहित का संतुलित निर्णय” करार दिया है।

​ “बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026” के तहत मिलेगा बंपर मुआवजा

​मंत्री श्री नीतीश मिश्रा ने जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे का पूरा गणित समझाते हुए बताया कि अब रैयतों (जमीन मालिकों) को किसी भी हाल में नुकसान नहीं होगा। ‘बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026’ के तहत मुआवजा इस प्रकार तय किया गया है:

  • ​ग्रामीण क्षेत्रों के लिए: जमीन का बाजार मूल्य (Market Value) या सर्किल रेट (MVR), जो भी अधिक होगा, उसका 4 गुना (चार गुना) दाम दिया जाएगा।
  • ​शहरी क्षेत्रों के लिए: बाजार मूल्य या सर्किल रेट (MVR), जो भी अधिक होगा, उसका 2 गुना (दो गुना) दाम मिलेगा।
  • ​10% अतिरिक्त बोनस: जमीन स्वामियों को प्रोत्साहित करने के लिए कुल निर्धारित राशि पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रतिफल (Incentive) भी दिया जाएगा।
  • ​रेट का निर्धारण: जमीन के सही बाजार मूल्य को तय करने के लिए एक ‘जिला स्तरीय रैयती भूमि क्रय समिति’ बनाई जाएगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

​ आपात स्थिति में ‘बिहार राज्य आवास बोर्ड’ सीधे खरीदेगा जमीन

​अब तक टाउनशिप क्षेत्र घोषित होने के बाद किसान या भू-स्वामी अपनी जमीन नहीं बेच पा रहे थे। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने तीन विकल्प दिए हैं:

    1. ​बिहार राज्य आवास बोर्ड (Bihar State Housing Board): यदि किसी रैयत को अचानक पैसों की जरूरत (आकस्मिक आवश्यकता) होती है, तो आवास बोर्ड उनसे सीधे जमीन खरीदेगा।
    2. ​सरकारी परियोजनाएं: केंद्र या राज्य सरकार की परियोजनाओं के लिए संबंधित प्राधिकार आवश्यकतानुसार भू-अर्जन (Land Acquisition) कर सकेंगे।
    3. ​निजी निवेशक (Private Investors): राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के लिए निजी निवेशक सीधे किसानों से जमीन खरीद सकेंगे या उसे लीज (Lease) पर ले सकेंगे।

​”इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी तथा मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ। इससे राज्य में नियोजित शहरी विकास, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को अभूतपूर्व गति मिलेगी।”

— नीतीश मिश्रा, नगर विकास एवं आवास मंत्री

 

​ इन 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लाखों लोगों को होगा फायदा

​आपको बता दें कि बिहार सरकार ने इसी साल 22 अप्रैल 2026 को राज्य में कुल 11 नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के गठन को मंजूरी दी थी। इस नए फैसले का सीधा लाभ इन 11 टाउनशिप क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले जमीन मालिकों को मिलेगा:

    • ​पाटलिपुत्र और हरिहरनाथपुर
    • ​मगध और मिथिला
    • ​कोशी और पूर्णियां
    • ​अंग, सीतापुरम और विक्रमशिला
    • ​तिरहुत और सारण

बिहार में 33 नए मेडिकल कॉलेजों के लिए देश-विदेश के निवेशकों ने मिलाया हाथ, पीपीपी मॉडल से बदलेगी तस्वीर

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Patna News: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और चिकित्सा शिक्षा (Medical Education) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय शुरू होने जा रहा है। राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोक-निजी भागीदारी (PPP Model) के तहत नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के संचालन को लेकर बुधवार को पटना में एक भव्य और महत्वपूर्ण हितधारक (Stakeholders) बैठक आयोजित की गई।

​इस बैठक में देश-विदेश के निवेशकों ने बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश करने के लिए जबरदस्त उत्साह दिखाया है, जिससे आने वाले समय में राज्य के नागरिकों को उनके घर के पास ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

​ मुख्य सचिव का बड़ा बयान: “निवेशकों के लिए रेड कारपेट, पारदर्शिता हमारी प्राथमिकता”

​बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना नीतीश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

​मुख्य सचिव ने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा:

​”बिहार सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए बेहद अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। हम निवेशकों और संस्थानों को बेहतर आधारभूत संरचना, पारदर्शी प्रक्रियाएं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) और सिंगल विंडो क्लियरेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार सभी हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर इस महत्वाकांक्षी पहल को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

 

​ 17 जिलों में मिलेगी 25-25 एकड़ जमीन, ट्रांसपेरेंट टेंडर से होगा चयन

​स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने योजना का पूरा खाका सामने रखते हुए बताया कि राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को दो श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. ​ग्रीनफील्ड परियोजना: इसके अंतर्गत 17 जिलों में नए स्वीकृत मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को पीपीपी मोड में संचालित किया जाएगा। इन संस्थानों के लिए राज्य सरकार हर जिले में लगभग 20 से 25 एकड़ भूमि उपलब्ध कराएगी।
  2. ​ब्राउनफील्ड परियोजना: इसके तहत 16 मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों का संचालन किया जाना प्रस्तावित है।

​पारदर्शिता के लिए उठाए जा रहे कदम:

  • ​परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए एक ट्रांजेक्शन एडवाइजर (Transaction Advisor) की नियुक्ति की जाएगी।
  • ​संस्थानों का चयन पूरी तरह से पारदर्शी निविदा (Tender) प्रक्रिया के माध्यम से होगा।
  • ​सभी हितधारकों से लिखित सुझाव भी मांगे गए हैं, ताकि नीति को और अधिक व्यावहारिक बनाया जा सके।

​ पंजाब से केरल तक के 80+ दिग्गज संस्थान बैठक में हुए शामिल

​इस बैठक की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इसमें सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, केरल, उत्तर प्रदेश सहित देश-विदेश के 80 से अधिक प्रतिष्ठित संस्थानों, निवेशकों और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

​केरल और अन्य राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने बिहार सरकार की इस नीति की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल से न केवल बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयां मिलेंगी, बल्कि राज्य में रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे।

​ फूलों के बजाय ‘पौधपात्र’ से स्वागत, ये वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

​कार्यक्रम की शुरुआत में बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (BMSICL) के प्रबंध निदेशक अमित पाण्डेय ने मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत और स्वास्थ्य सचिव श्री कुमार रवि का स्वागत पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘पौधपात्र’ (Planted Sapling) देकर किया।

​इस उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य समिति के तमाम बड़े चेहरे मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • ​ अमित कुमार पाण्डेय (कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति)
  • ​श्रीमती छिरिङ वाई० भूटिया (अपर सचिव, स्वास्थ्य विभाग)
  • ​ अरविंद वर्मा (मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बीएसएसएस)
  • ​ कुमार गौरव (अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति)
  • ​डॉ. अनुपमा सिंह (अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति)

ग्राहक सम्मेलन में Montra Electric Super Rick का भव्य लॉन्च, ई-रिक्शा बाजार में मचाई हलचल

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Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर स्थित अलीगंज तीन पुलिया स्थित ए पी मोटर्स (A P Motors) में आयोजित दो दिवसीय ग्राहक सम्मान समारोह के दौरान ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बड़ा धमाका हुआ। प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी Montra Electric ने अपने बहुप्रतीक्षित और अत्याधुनिक Montra Electric Super Rick (Super E-Rickshaw) को आधिकारिक तौर पर बाजार में लॉन्च कर दिया है।

​इस लॉन्चिंग के साथ ही ई-रिक्शा बाजार में हलचल तेज हो गई है। शानदार लुक, दमदार लिथियम बैटरी और बेजोड़ रेंज के कारण यह सुपर ई-रिक्शा आते ही ग्राहकों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है।

​🪔 धूमधाम से हुआ उद्घाटन, शोरूम में दिखा उत्सव का माहौल

​लॉन्चिंग कार्यक्रम का उद्घाटन एपी मोटर्स के निदेशक आशीष मोहन, पूजा मोहन, दीनबंधु, अमित कुमार, मो. सोहराब, सोनम, अभिषेक और गुड्डू आलम सहित कई गणमान्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की शुरुआत बेहद भव्य तरीके से फीता काटकर, केक काटकर, दीप प्रज्वलित कर और गाड़ी से पर्दा हटाकर की गई।

​इस दौरान पूरे शोरूम में गजब का उत्साह देखा गया। मोंट्रा (Montra) के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर मौजूद ग्राहकों को गाड़ी की सर्विस, फाइनेंस की सुविधाओं और इसकी कीमत के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वाहन खरीदने आए कई ग्राहक कंपनी के इस नए कदम से बेहद खुश नजर आए और उन्होंने मोंट्रा ई-रिक्शा को लेकर अपने सकारात्मक सुझाव भी साझा किए।

​👥 चालकों और व्यवसायियों की उमड़ी भारी भीड़

​इस भव्य लॉन्चिंग कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ई-रिक्शा चालक, वाहन मालिक, परिवहन व्यवसायी और कंपनी के पुराने ग्राहक मौजूद रहे। कंपनी ने इस अवसर पर नए ‘सुपर ई-रिक्शा’ की खूबियों का लाइव डेमो दिया और इसे लंबी दूरी तय करने वाला व बेहद कम रखरखाव लागत (Low Maintenance) वाला एक भरोसेमंद वाहन बताया।

​कंपनी प्रतिनिधियों ने कहा:

​”Montra Electric Super Rick को खास तौर पर उन चालकों और छोटे व्यवसायियों की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जो रोजाना अधिक दूरी तय करते हैं और बेहतर कमाई के लिए एक मजबूत, टिकाऊ व किफायती वाहन चाहते हैं।”

 

​💎 Montra Electric Super Rick की 5 सबसे बड़ी खूबियां जो इसे बनाती हैं “सुपर”

​1. 5 साल या 1 लाख किलोमीटर की दमदार वारंटी

​यह सुपर ई-रिक्शा अपने सेगमेंट में सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है। कंपनी ग्राहकों को इस वाहन पर 5 वर्ष अथवा 1 लाख किलोमीटर तक की लंबी वारंटी दे रही है। इससे वाहन मालिक लंबे समय तक बिना किसी मेंटेनेंस की चिंता के निश्चिंत होकर सड़कों पर गाड़ी चला सकेंगे।

​2. 157 किलोमीटर की ‘सुपर प्रमाणित रेंज’

​इस ई-रिक्शा की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी 157 किलोमीटर की प्रमाणित (Certified) रेंज है। मात्र एक बार फुल चार्ज करने के बाद यह लंबी दूरी तय कर सकता है। दैनिक संचालन के लिए यह क्षमता इसे बेहद किफायती बनाती है, जिससे चालकों को दिनभर में बार-बार चार्जिंग की टेंशन नहीं होगी और उनकी दैनिक आय में भी भारी इजाफा होगा।

​3. ‘बोर्न स्टील’ से निर्मित मजबूत चेसिस और मेटल बॉडी

​सड़कों की खराब स्थिति को देखते हुए इसमें बोर्न स्टील (Born Steel) से बना मजबूत चेसिस और फुल मेटल बॉडी दी गई है। यह कॉम्बिनेशन वाहन को बेहतरीन मजबूती और टिकाऊपन प्रदान करता है, जिससे गड्ढों और कठिन परिस्थितियों में भी गाड़ी बिना किसी नुकसान के स्मूथ चलती है।

​4. 5.5 kWh की पावरफुल लिथियम बैटरी और आधुनिक फीचर्स

​मोंट्रा ने इस सुपर ई-रिक्शा को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लैस किया है। इसके मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं:

  • ​पावरहाउस: 5.5 किलोवाट (kWh) की बेहद शक्तिशाली लिथियम-आयन बैटरी।
  • ​लाइटिंग: रात के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए हाई-विजिबिलिटी वाली दमदार हेडलाइट।
  • ​टायर: पंक्चर की चिंता से मुक्त रखने वाले मजबूत ट्यूबलेस टायर।
  • ​लोडिंग: भारी वजन उठाने के लिए उन्नत सस्पेंशन और बेहतर लोडिंग क्षमता।
  • ​कंफर्ट: चालक और सवारियों के लिए एर्गोनोमिक और आरामदायक सीटिंग डिजाइन।

​5. मेंटेनेंस और बैटरी बदलने के भारी खर्च से बड़ी राहत

​पारंपरिक ई-रिक्शा में हर एक-दो साल में बैटरी बदलने और बार-बार मेंटेनेंस कराने का भारी खर्च आता है। कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि Montra Super Rick को इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी उन्नत लिथियम बैटरी और सॉलिड मैन्युफैक्चरिंग ग्राहकों के जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को पूरी तरह कम कर देगी।

​🗣️ “कम खर्च, ज्यादा कमाई” – ग्राहकों ने बांधे तारीफों के पुल

​लॉन्चिंग के दौरान टेस्ट ड्राइव लेने वाले और वाहन को करीब से देखने वाले ग्राहकों ने इसकी जमकर सराहना की। शोरूम पर मौजूद ग्राहकों ने कहा कि यह ई-रिक्शा भविष्य की जरूरतों के बिल्कुल अनुकूल है। कम बिजली खर्च में ज्यादा दूरी तय करने और इतनी लंबी वारंटी मिलने से यह मध्यमवर्गीय परिवारों और चालकों के लिए कमाई का सबसे बेहतरीन जरिया साबित होगा।

भागलपुर को बेहतर बनाना मेरा सपना! श्रावणी मेला से पहले चमकेगा बौंसी पुल: मंत्री इंजीनियर शैलेन्द्र

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Bhagalpur News: आगामी विश्वप्रसिद्ध सुल्तानगंज-देवघर श्रावणी मेला से पहले भागलपुर और इसके आस-पास के श्रद्धालुओं के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। बिहार सरकार के नवनियुक्त पथ निर्माण मंत्री सह बिहपुर विधायक, इंजीनियर शैलेन्द्र ने कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि श्रावणी मेला शुरू होने से पहले ही बौंसी पुल का मरम्मत कार्य हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।

​बौंसी पुल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने साफ किया कि इस रूट पर वीआईपी (VIP) और आम श्रद्धालुओं के आवागमन में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।

​श्रावणी मेला से पहले हर हाल में दुरुस्त होगा बौंसी पुल

​बौंसी पुल इस पूरे क्षेत्र की लाइफलाइन माना जाता है, खासकर सावन के महीने में जब लाखों की संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु इस मार्ग से होकर गुजरते हैं। पुल की जर्जर स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय से चिंता थी।

​निरीक्षण के बाद मंत्री इंजीनियर शैलेन्द्र ने कहा:

​”पुल का मरम्मत कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। मैंने स्वयं प्रगति का जायजा लिया है और इसे बहुत जल्द पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाएगा। हमारा लक्ष्य बिल्कुल साफ है— श्रावणी मेला के आगाज से पहले यह पुल वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए तैयार होगा, ताकि किसी भी श्रद्धालु या आम नागरिक को परेशानी न झेलनी पड़े।”

 

​गुणवत्ता से समझौता नहीं, अधिकारियों को समय-सीमा की चेतावनी

​एक कुशल इंजीनियर और जनप्रतिधि होने के नाते मंत्री ने मौके पर मौजूद पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों और संवेदक (ठेकेदार) को सख्त लहजे में हिदायत दी। उन्होंने कहा कि काम में तेजी लाने का मतलब यह कतई नहीं है कि गुणवत्ता (Quality) की अनदेखी की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य के हर तकनीकी पहलू की बारीकी से निगरानी करने और तय समय-सीमा के भीतर काम को फाइनल टच देने का निर्देश दिया।

​”मैं यहीं का हूं, भागलपुर का विकास मेरा सपना है”

​पत्रकारों द्वारा भागलपुर की ढांचागत समस्याओं को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए मंत्री भावुक और बेहद गंभीर नजर आए। उन्होंने क्षेत्र से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को साझा करते हुए कहा:

​”मैं इसी मिट्टी का लाल हूं, यहीं का स्थानीय निवासी हूं। इसलिए भागलपुर के विकास को लेकर मेरे मन में एक विशेष लगाव और जिम्मेदारी की भावना है। मेरा सपना है कि मैं अपने कार्यकाल में भागलपुर को हर क्षेत्र में एक आदर्श और बेहतर जिला बनाऊं। सड़क, पुल और अन्य आधारभूत संरचनाओं (Infrastructure) का जाल बिछाकर जनता को विश्वस्तरीय सुविधाएं देना ही हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

 

​बदलेगी भागलपुर की तस्वीर, जगी नई उम्मीद

​मंत्री के इस बेबाक और कड़े आश्वासन के बाद वर्षों से जाम और खराब सड़कों की समस्या से जूझ रहे स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में विकास की एक नई उम्मीद जगी है। इंजीनियर शैलेन्द्र ने विश्वास दिलाया कि आने वाले दिनों में भागलपुर में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई अन्य बड़ी और महत्वाकांक्षी योजनाएं धरातल पर उतरने वाली हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

भागलपुर में यूपी पुलिस का रौब पड़ा भारी! नो-एंट्री में घुसी गाड़ी का ट्रैफिक पुलिस ने सरेराह काटा चालान

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Bhagalpur News: भागलपुर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में से एक स्टेशन चौक पर उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब ‘नो-एंट्री’ जोन में घुसी एक उत्तर प्रदेश (UP) नंबर की लग्जरी गाड़ी को ट्रैफिक पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद गाड़ी में सवार लोगों और ऑन-ड्यूटी ट्रैफिक जवानों के बीच बीच सड़क पर ही हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया। वर्दी का रौब दिखाने की कोशिश कर रहे लोगों के आगे भागलपुर ट्रैफिक पुलिस टस से मस नहीं हुई और अंततः नियमों का उल्लंघन करने पर भारी चालान थमा दिया।

​नो-एंट्री में एंट्री और फिर सरेराह तीखी नोकझोंक

​घटना स्टेशन चौक की है, जहां यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सख्त नो-एंट्री नियम लागू हैं। इसी दौरान यूपी रजिस्ट्रेशन नंबर की एक गाड़ी प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल हो गई। मौके पर तैनात मुस्तैद ट्रैफिक पुलिस के जवानों ने तुरंत गाड़ी को रुकवाया।

​जब पुलिसकर्मियों ने नियम तोड़ने की बात कहते हुए वैधानिक कार्रवाई शुरू की, तो गाड़ी में सवार एक महिला समेत चार लोग भड़क गए। उन्होंने नियमों को मानने से साफ इनकार कर दिया और पुलिसकर्मियों से ही सीधे उलझ गए। देखते ही देखते मामला सामान्य बहस से तीखी नोकझोंक में बदल गया।

​’मैं यूपी पुलिस की अधिकारी हूं…’ धौंस काम न आई

​प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के मुताबिक, गाड़ी में मौजूद महिला ने खुद को उत्तर प्रदेश पुलिस का बड़ा अधिकारी बताते हुए भागलपुर पुलिस पर ही अपना रौब झाड़ने की कोशिश की। महिला का इशारा था कि पुलिस विभाग में होने के नाते उन पर यह नियम लागू नहीं होता।

​लेकिन, ऑन-ड्यूटी भागलपुर ट्रैफिक पुलिस के जवानों और अधिकारियों ने साफ कर दिया कि कानून सबके लिए बराबर है और नियमों के आगे किसी का वीआईपी (VIP) कल्चर या व्यक्तिगत रौब नहीं चलेगा।

​तमाशबीन बनी भीड़, आखिरकार काटना पड़ा चालान

​स्टेशन चौक जैसे व्यस्त चौराहे पर हो रहे इस ड्रामे को देखकर देखते ही देखते वहां सैकड़ों राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों की भारी भीड़ जुट गई। लोग बीच सड़क पर चल रहे ‘नियम बनाम रौब’ के इस लाइव मुकाबले को देखते रहे।

​हंगामा बढ़ता देख और गाड़ी सवारों के अड़ियल रवैये को भांपते हुए भागलपुर ट्रैफिक पुलिस ने कड़ा रुख अख्तियार किया। पुलिस की सख्ती के आगे आखिरकार यूपी से आए सैलानियों/अधिकारियों की एक न चली। ट्रैफिक पुलिस ने नो-एंट्री का सरकारी चालान काटा और जुर्माना वसूलने के बाद ही वाहन को आगे जाने की अनुमति दी।

​सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना वाकया

​स्टेशन चौक पर कुछ देर के लिए चला यह ड्रामा पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय लोगों ने भागलपुर ट्रैफिक पुलिस के जवानों की इस बात के लिए जमकर तारीफ की कि उन्होंने बिना किसी दबाव के, निष्पक्ष होकर कानून का पालन कराया। यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि सड़कों पर सुरक्षा और नियम हर नागरिक के लिए एक समान हैं, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।