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भागलपुर को बड़ी सौगात: 6 नए सरकारी डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ, अब गांव के बच्चों को घर के पास मिलेगी उच्च शिक्षा

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Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में उच्च शिक्षा की तस्वीर अब बदलने वाली है। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। जिले के छह प्रखंडों—इस्माईलपुर, गोपालपुर, पीरपैंती, गोराडीह, खरीक और रंगरा चौक—में नए स्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों का औपचारिक शुभारंभ कर दिया गया है।

​सबसे खास बात यह है कि छात्रों की पढ़ाई में कोई देरी न हो, इसके लिए स्थायी भवन बनने तक इन कॉलेजों को चिन्हित सरकारी विद्यालय भवनों से तुरंत संचालित किया जा रहा है। इससे इसी सत्र से नामांकन और पठन-पाठन का कार्य सुचारू रूप से शुरू हो सकेगा।

​📍 जानिए, किस प्रखंड का कॉलेज अभी किस भवन में चलेगा?

​जिला प्रशासन द्वारा चिन्हित किए गए अस्थाई कॉलेज भवनों की सूची निम्नलिखित है:

  • ​इस्माईलपुर राजकीय डिग्री कॉलेज: उच्च उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामनगर
  • ​गोपालपुर राजकीय डिग्री कॉलेज: उच्च उच्च माध्यमिक विद्यालय, मुकुन्दपुर, गोपालपुर
  • ​पीरपैंती राजकीय डिग्री कॉलेज: मध्य विद्यालय, सिमानपुर, पीरपैंती
  • ​गोराडीह राजकीय डिग्री कॉलेज: उच्च माध्यमिक विद्यालय, कासील
  • ​खरीक राजकीय डिग्री कॉलेज: राजकीय बुनियादी विद्यालय, खरीक
  • ​रंगरा चौक राजकीय डिग्री कॉलेज: राजकीय संत विनोबा उच्च विद्यालय, तिनटंगा दियारा

​🏫 कॉलेजों में मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं

​विद्यार्थियों को बेहतर माहौल देने के लिए इन महाविद्यालयों में आवश्यक आधारभूत संरचना (Infrastructure) तैयार की जा रही है:

  • ​स्मार्ट क्लास और रिसोर्स: सुसज्जित कक्षाएं और समृद्ध पुस्तकालय (Library)।
  • ​डिजिटल शिक्षा: कंप्यूटर लैब और हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा।
  • ​प्रैक्टिकल नॉलेज: विज्ञान विषयों के लिए चरणबद्ध रूप से आधुनिक प्रयोगशालाएं (Labs)।
  • ​बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर: स्वच्छ पेयजल, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय, निर्बाध बिजली आपूर्ति।
  • ​सर्वांगीण विकास: खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम (Co-curricular) गतिविधियों के लिए पर्याप्त संसाधन।
  • ​योग्य फैकल्टी: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए योग्य शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों की तैनाती।

​🎓 ग्रामीण छात्रों और बेटियों को होगा सबसे बड़ा लाभ

​इन डिग्री कॉलेजों की स्थापना से भागलपुर के हजारों छात्र-छात्राओं को सीधे तौर पर फायदा पहुंचेगा:

​दूरी और खर्च का संकट होगा खत्म: ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को अब स्नातक (Graduation) की पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय या बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे उनके रहने-खाने और आने-जाने के खर्च में भारी बचत होगी।

​बेटियों की शिक्षा को मिलेगी उड़ान: घर के नजदीक कॉलेज होने से छात्राओं के ड्रॉप-आउट रेट में बड़ी कमी आएगी और उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी काफी बढ़ेगी।

 

​📋 समय सीमा में काम पूरा करने का निर्देश

​जिला प्रशासन इस पहल को लेकर पूरी तरह गंभीर है। प्रशासन द्वारा सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे समय सीमा के भीतर इन कॉलेजों के सुचारु संचालन के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर लें।

​भागलपुर में छह नए सरकारी डिग्री कॉलेजों की शुरुआत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है, जो यहां के युवाओं के शैक्षणिक और सामाजिक विकास को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

​बिहार: CM सम्राट चौधरी ने किया 211 नए डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ, भागलपुर में बनेगी देश की पहली AI यूनिवर्सिटी

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Bihar News: बिहार के शैक्षणिक और बुनियादी ढांचे के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री

सम्राट चौधरी ने आज भागलपुर के गोराडीह स्थित नवस्थापित डिग्री कॉलेज (कासिल परिसर) से राज्यभर के 211 नए डिग्री कॉलेजों में पठन-पाठन कार्य का भव्य शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही बिहार के हर प्रखंड में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प अब जमीन पर उतरने लगा है।

​समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा:

​”आज का दिन बिहार के लिए गौरव का क्षण है। शिक्षा ही हमारे राज्य की समृद्धि का सबसे बड़ा आधार बनेगी। हम बिहार को एक बार फिर वैश्विक ज्ञान और नवाचार (Innovation) का केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

 

​1. शिक्षा के क्षेत्र में महाक्रांति: भागलपुर को AI और मुजफ्फरपुर को आर्किटेक्चर यूनिवर्सिटी की सौगात

​मुख्यमंत्री ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य के अनुकूल बनाने के लिए कई बड़े ऐलान किए:

  • ​आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय: तकनीक के इस आधुनिक युग में बिहार के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भागलपुर में एक अत्याधुनिक AI एवं कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा।
  • ​आर्किटेक्चर एवं सिविल इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय: मुज़फ्फरपुर में विशेष रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजाइनिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इसकी स्थापना होगी।
  • ​निजी क्षेत्र को बढ़ावा: बिहार की उच्च शिक्षा को नई गति देने के लिए 4 नए निजी विश्वविद्यालयों को भी मंजूरी दी गई है।

​प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय की होगी घर वापसी

​बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय को आधुनिक स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इसके लिए लगभग 220 एकड़ भूमि हस्तांतरित की जा चुकी है और सरकार का लक्ष्य अगले एक वर्ष के भीतर विक्रमशिला विश्वविद्यालय को पूरी तरह स्थापित करने का है।

​2. इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प: मरीन ड्राइव, रोप-वे और 2 नए एयरपोर्ट

​भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों को कनेक्टिविटी का बड़ा हब बनाने के लिए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार किया है:

  • ​गंगा मरीन ड्राइव: मुंगेर से भागलपुर तक 83 किलोमीटर लंबी गंगा मरीन ड्राइव का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जिसका विस्तार आगे सबौर से लेकर राजमहल बॉर्डर तक किया जाएगा।
  • ​विक्रमशिला सेतु: लंबे समय से क्षतिग्रस्त विक्रमशिला सेतु को 30 नवंबर 2026 तक हर हाल में पूरी तरह चालू करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
  • ​बटेश्वरधाम रोप-वे: कहलगांव के प्रसिद्ध बटेश्वरधाम मंदिर तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शानदार रोप-वे का निर्माण कराया जाएगा।
  • ​डबल एयरपोर्ट: भागलपुर क्षेत्र के विकास को नई उड़ान देने के लिए दो नए एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे, जिसमें सुल्तानगंज में प्रस्तावित एयरपोर्ट भी शामिल है।

​3. उद्योग और रोजगार: सिल्क सिटी में ₹70,000 करोड़ का निवेश और 400 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र

​बिहार के युवाओं के पलायन को रोकने के लिए सरकार ने रोजगार सृजन का बड़ा खाका खींचा है:

  • ​औद्योगिक गलियारा: भागलपुर में लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा, जिससे हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
  • ​पीरपैंती पावर प्लांट: पीरपैंती में 2400 मेगावाट का विशाल पावर प्लांट लगने जा रहा है, जिसकी क्षमता को आगे चलकर 1600 मेगावाट और बढ़ाया जाएगा। इस पूरी परियोजना में 70,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश होगा।
  • ​प्रवासियों से अपील: मुख्यमंत्री ने राज्य से बाहर रह रहे लोगों से अपील की कि वे बिहार लौटें। राज्य सरकार उन्हें उद्योग लगाने के लिए जमीन, बिजली और पानी जैसी तमाम बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।

​4. महिला सशक्तिकरण और सुशासन पर बड़ा दांव

  • ​मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: इस योजना के तहत अब तक 1 करोड़ 81 लाख महिलाओं के बैंक खातों में सीधे सहायता राशि भेजी जा चुकी है। शेष बची सभी पात्र महिलाओं के खातों में 25 जुलाई तक पैसे ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।
  • ​ससमय शिकायत निवारण: ‘सहयोग शिविर’ के माध्यम से अब तक आए 6 लाख आवेदनों में से साढ़े पांच लाख मामलों का त्वरित निष्पादन किया जा चुका है।

​5. अपराधियों और कामचोर डॉक्टरों को सख्त चेतावनी

​मंच से जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग को लेकर बेहद कड़े तेवर दिखाए:

​“अपराधी चाहे किसी भी जाति या वर्ग का हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। अपराधियों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं है। उन्हें या तो भागलपुर जेल जाना होगा या बिहार छोड़ना होगा। स्पीडी ट्रायल के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जा रहा है।”

 

​साथ ही, स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने आदेश दिया कि 15 अगस्त के बाद कोई भी सरकारी डॉक्टर मरीजों को बेवजह बाहर के अस्पतालों में रेफर नहीं कर पाएगा। अनुमंडल और जिला अस्पतालों में ही इलाज सुनिश्चित करना होगा और कोताही बरतने वाले डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

​गरिमामयी उपस्थिति

​इस ऐतिहासिक शुभारंभ कार्यक्रम के अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उच्च शिक्षा एवं विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर, सांसद अजय कुमार मंडल, विधान परिषद और विधानसभा के स्थानीय सदस्य, मुख्य सचिव  प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं भारी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

भागलपुर को CM सम्राट चौधरी की महा-सौगात: विक्रमशिला पुल मरम्मत के लिए ₹126 करोड़ जारी, बनेगा मरीन ड्राइव; पीरपैंती पावर प्लांट में ₹70,000 करोड़ का होगा निवेश

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Bhagalpur News: भागलपुर के विकास और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणाओं का बड़ा पिटारा खोला है। भागलपुर वासियों के लिए यह खबर किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि इसमें यातायात की सबसे बड़ी समस्या ‘विक्रमशिला पुल’ से लेकर शहर के सौंदर्यीकरण और औद्योगिक क्रांति तक का पूरा खाका तैयार किया गया है। इन मेगा प्रोजेक्ट्स के धरातल पर उतरने से न केवल भागलपुर बल्कि पूरे अंग प्रदेश के विकास को एक नई और तेज रफ्तार मिलने जा रही है।

​विक्रमशिला पुल की मरम्मत को मिले ₹126 करोड़, 30 नवंबर तक का अल्टीमेटम

​भागलपुर की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला पुल की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री काफी गंभीर दिखे। उन्होंने बताया कि पुल की संवेदनशीलता को देखते हुए पूर्व में सेना (BRO टीम) की मदद लेकर एक अस्थायी वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कराई गई थी ताकि यातायात प्रभावित न हो। अब इसके स्थायी समाधान के लिए राज्य सरकार ने 126 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि पथ निर्माण विभाग को उपलब्ध करा दी है।

​मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए कहा कि 30 नवंबर 2026 से पहले हर हाल में मरम्मत का काम पूरा कर पुल को आम जनता के लिए पूरी तरह से सुचारू कर दिया जाए, ताकि लोगों को आने-जाने में कोई असुविधा न हो।

​मुंबई की तर्ज पर बनेगा ‘भागलपुर मरीन ड्राइव’

​शहरवासियों को एक और शानदार सरप्राइज देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऐलान किया कि मुंबई के प्रसिद्ध मरीन ड्राइव की तर्ज पर भागलपुर में भी गंगा नदी के किनारे ‘मरीन ड्राइव’ का निर्माण कराया जाएगा। यह प्रोजेक्ट भागलपुर के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल शहर का पर्यटन और सौंदर्य बढ़ेगा, बल्कि शहर के भीतर लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

​पीरपैंती में ₹70,000 करोड़ का निवेश, पैदा होंगे बंपर रोजगार

​औद्योगिक और आर्थिक मोर्चे पर भागलपुर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट को लेकर मुख्यमंत्री ने सबसे बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि इस पावर प्लांट की क्षमता को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जा रहा है।

  • ​पहले की निर्धारित क्षमता: 2400 मेगावाट (MW)
  • ​नया विस्तार प्रयास: 1600 मेगावाट (MW) अतिरिक्त
  • ​कुल क्षमता लक्ष्य: 4000 मेगावाट (MW)

​मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस मेगा परियोजना के दोनों चरण (Phases) पूरे होने पर क्षेत्र में करीब 70 हजार करोड़ रुपये का ऐतिहासिक निवेश होगा।

​”पीरपैंती का यह पावर प्लांट भागलपुर समेत पूरे बिहार के औद्योगिक परिदृश्य को बदलकर रख देगा। इस महा-परियोजना से न केवल बिजली उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।”

— सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री, बिहार

बिहार की शिक्षा में स्वर्ण युग की वापसी: विक्रमशिला यूनिवर्सिटी के लिए 200 एकड़ ज़मीन का हस्तांतरण

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Bhagalpur News: बिहार के शैक्षणिक इतिहास में 15 जुलाई 2026 की तारीख एक नए स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। राज्य शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित एक भव्य और महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान, विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए ज़मीन हस्तांतरण की औपचारिक प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। भागलपुर की पावन और ऐतिहासिक भूमि, जो कभी वैश्विक स्तर पर ज्ञान, बौद्ध दर्शन और संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र थी, एक बार फिर अपने पुराने गौरव को हासिल करने की राह पर अग्रसर है।

​220 एकड़ भूमि का आवंटन और ढांचागत बदलाव

​इस ऐतिहासिक परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 220 एकड़ भूमि विश्वविद्यालय को समर्पित कर दी है। कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि यह भूमि हस्तांतरण महज एक कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार को उच्च शिक्षा का ग्लोबल हब बनाने के संकल्प की शुरुआत है। इस विशाल परिसर को एक आधुनिक और स्मार्ट कैंपस के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पारंपरिक भारतीय ज्ञान के साथ-साथ समकालीन व आधुनिक विषयों पर उच्च स्तरीय शोध (Research) हो सकेगा।

​बिहार में शिक्षा का महा-अभियान: 211 नए डिग्री कॉलेज

​इस कार्यक्रम के मंच से सिर्फ विक्रमशिला ही नहीं, बल्कि बिहार के आम छात्रों के लिए एक और बड़ी सौगात की घोषणा की गई। शिक्षा विभाग ने जानकारी साझा की कि राज्य के विभिन्न कोनों में 211 नए डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ किया जा रहा है।

​यह कदम बिहार के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के उन मेधावी छात्रों के लिए वरदान साबित होगा, जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए अपने घर-परिवार से दूर बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। इससे न केवल राज्य में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) में सुधार होगा, बल्कि शिक्षण संस्थानों के आसपास एक नया आर्थिक और सामाजिक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) भी विकसित होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।

​”नालंदा के बाद अब विक्रमशिला का प्राचीन सपना धरातल पर उतर रहा है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर शिक्षा को हर स्तर पर सुदृढ़ कर रही हैं, जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है।”

— शिक्षा विभाग, बिहार सरकार

 

​पाल वंश की गौरवशाली विरासत की वापसी

​विक्रमशिला का प्राचीन इतिहास लगभग 4000 वर्ष पुराना है। पाल वंश के शासनकाल में स्थापित यह विश्वविद्यालय कभी दुनिया भर के जिज्ञासुओं और विद्वानों की पहली पसंद हुआ करता था। समय के थपेड़ों और आक्रमणों के कारण यह महान धरोहर नष्ट हो गई थी। आज जब देश अपनी सांस्कृतिक और शैक्षिक जड़ों की ओर लौट रहा है, तब प्राचीन नालंदा की तर्ज पर विक्रमशिला का पुनरुद्धार भारत की बौद्धिक क्षमता का लोहा एक बार फिर दुनिया में मनवाएगा।

​आने वाले एक साल में दिखेगा बदलाव

​प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, ज़मीन हस्तांतरण की पहली सीढ़ी पार करने के बाद अब निर्माण कार्य की गुणवत्ता और गति पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सरकार ने आश्वस्त किया है कि आने वाले एक वर्ष के भीतर नए परिसर के निर्माण कार्य में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिलेगी। इस आधुनिक परिसर में विश्वस्तरीय लाइब्रेरी, अत्याधुनिक शोध केंद्र और भव्य हॉस्टल की सुविधाएं तैयार की जाएंगी।

​यह ऐतिहासिक कदम न केवल बिहार के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदलेगा, बल्कि देश के शैक्षणिक मानचित्र पर राज्य को एक शीर्ष मुकाम पर वापस लाकर खड़ा कर देगा।

​भागलपुर: घरेलू कलह में युवक की संदिग्ध मौत, पत्नी ने सास-ससुर पर जड़े गंभीर आरोप; जांच में जुटी पुलिस

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Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां घरेलू विवाद के बीच एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के घर में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

​पत्नी ने लगाया प्रताड़ना का आरोप

​घटना के बाद मृतक की पत्नी ने अपने सास-ससुर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पत्नी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके पति को लंबे समय से पारिवारिक विवाद के कारण मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। लगातार मिल रहे मानसिक तनाव की वजह से ही उसके पति की संदिग्ध परिस्थितियों में जान चली गई।

​पिता ने बहू के दावों को बताया निराधार

​दूसरी ओर, मृतक के पिता ने अपनी बहू द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि असल में विवाद उनके बेटे और बहू के बीच ही होता था। आपसी कलह की वजह से घर में हमेशा तनाव का माहौल बना रहता था। पिता ने साफ तौर पर कहा कि इस दुखद घटना से उनका या उनकी पत्नी (सास-ससुर) का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।

​”बेटे और बहू के बीच अक्सर आपसी विवाद होता रहता था, जिससे घर का माहौल तनावपूर्ण था। हमारे ऊपर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं, मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”

— मृतक के पिता

 

​जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। पुलिस की टीम ने घटनास्थल का बारिकी से निरीक्षण किया है और परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आस-पास के लोगों से भी पूछताछ शुरू कर दी है।

​पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मौत के असली कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस मामले में हत्या, आत्महत्या या किसी अन्य साजिश समेत हर संभावित पहलू को ध्यान में रखकर गंभीरता से जांच कर रही है।

​आगे की कार्रवाई: पुलिस का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जो भी कानूनी तथ्य उजागर होंगे, उसी के आधार पर आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

बिहार में 213 नए डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ आज, अब गांव के युवाओं को घर के पास मिलेगी उच्च शिक्षा

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Bhagalpur News: बिहार के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा का सपना अब उनके अपने ही घर के पास सच होने जा रहा है। राज्य में दूरी, समय और आर्थिक तंगहाली के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होने वाले छात्र-छात्राओं को एक बहुत बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने राज्य के शिक्षा जगत में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम उठाया है।

​सरकार ने राज्य के उन 213 प्रखंडों (Blocks) में नए डिग्री कॉलेजों की स्थापना करने का निर्णय लिया है, जहाँ अब तक एक भी डिग्री कॉलेज नहीं था। इस भव्य और दूरगामी पहल का विधिवत शुभारंभ आज भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखण्ड के कासिल गांव से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी रिमोट का बटन दबाकर करेंगे।

​ बेटियों की पढ़ाई को मिलेगी ‘नई उड़ान’, दूर होगी दूरी की बाधा

​अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण इलाकों में डिग्री कॉलेज दूर होने के कारण सबसे ज्यादा नुकसान छात्राओं को उठाना पड़ता था। सुरक्षा और परिवहन की दिक्कतों की वजह से कई माता-पिता बेटियों को आगे की पढ़ाई के लिए शहर भेजने से कतराते थे। सरकार के इस फैसले से:

  • ​बेटियों को मिलेगा समान अवसर: अब छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए अपने घर और गांव से दूर नहीं जाना पड़ेगा।
  • ​आर्थिक बोझ होगा कम: शहर में रहकर पढ़ाई करने का खर्च बचेगा, जिससे गरीब परिवारों के बच्चे भी ग्रेजुएशन कर सकेंगे।
  • ​ड्रॉपआउट रेट में आएगी कमी: इंटरमीडिएट (12वीं) के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भारी गिरावट आएगी।

​ आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे नए कॉलेज

​यह पहल सिर्फ कॉलेज की बिल्डिंग बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार का फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education) पर है। इन 213 नए डिग्री कॉलेजों में निम्नलिखित आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी:

  • ​स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक लैब: डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तकनीक का इस्तेमाल।
  • ​अनुभवी प्राध्यापक (Faculty): छात्रों को सही मार्गदर्शन देने के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति।
  • ​रोजगारपरक पाठ्यक्रम: पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाले कोर्सेज पर जोर।

​ GER (सकल नामांकन अनुपात) में होगा ऐतिहासिक सुधार

​”शिक्षा के विस्तार के माध्यम से बिहार का युवा सशक्त होगा और राज्य विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर होगा।”

 

​इस ऐतिहासिक निर्णय का एक मुख्य उद्देश्य राज्य के सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio – GER) में सुधार करना है। उच्च शिक्षा को सुलभ और समावेशी (Inclusive) बनाकर सरकार बिहार के हर वर्ग तक ज्ञान की रोशनी पहुंचाना चाहती है।

भागलपुर में खेत जोत रहे किसान पर दबंगों ने किया जानलेवा हमला, गंभीर हालत में मायागंज रेफर; अपनों ने ही फेरा मुंह

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के शाहकुंड प्रखंड अंतर्गत खैरा मोड़ क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ अपने ही खेत में ट्रैक्टर से जुताई करा रहे एक सीधे-साधे किसान पर दबंगों ने लाठी-डंडों और लोहे के रॉड से जानलेवा हमला कर दिया। इस बर्बर हमले में किसान लहूलुहान होकर खेत में ही गिर पड़ा। गंभीर रूप से घायल किसान की पहचान मोहम्मद अयूब के रूप में हुई है, जो वर्तमान में भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।

​लाचारी की पराकाष्ठा: निजी अस्पताल से मायागंज जाने को मजबूर हुआ परिवार

​घटना के तुरंत बाद जब परिजनों को खबर मिली, तो वे आनन-फानन में मौके पर पहुंचे। लहूलुहान मोहम्मद अयूब को तड़पता देख परिजन उन्हें पहले एक निजी अस्पताल ले गए। लेकिन, अस्पताल का भारी-भरकम खर्च और घर की तंगहाली आड़े आ गई। आर्थिक तंगी से बेबस होकर आखिरकार लाचार परिवार ने उन्हें इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल), भागलपुर में भर्ती कराया। फिलहाल डॉक्टरों की टीम उनकी नाजुक हालत को देखते हुए कड़ी निगरानी में इलाज कर रही है।

​“जिन्होंने खून बहाया, वे रिश्ते में दादा लगते हैं…” – बेटे का दर्दनाक बयान

​घायल किसान के बेटे ने रोते हुए मीडिया को बताया कि उनके पिता की किसी से भी कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी। जिन लोगों ने उनके पिता पर लाठी और लोहे की रॉड से कातिलाना हमला किया है, वे कोई बाहरी नहीं बल्कि रिश्ते में उनके ही दादा लगते हैं।

​बेटे ने अपनों और समाज की बेरुखी पर गहरा दुख जताते हुए कहा:

​”एक तरफ पिता लहूलुहान होकर तड़प रहे थे, वहीं दूसरी तरफ न तो हमला करने वाले रिश्तेदारों को कोई पछतावा था और न ही गांव का कोई भी शख्स मदद के लिए आगे आया। हम लोग पाई-पाई के लिए मोहताज होकर किसी तरह अकेले ही पिता को अस्पताल लेकर पहुंचे।”

 

​दहशत में इलाका, पुलिस से सख्त एक्शन और न्याय की गुहार

​जमीन के टुकड़े के लिए अपनों द्वारा ही अपनों के खून के प्यासे हो जाने की इस घटना से पूरे खैरा मोड़ इलाके में दहशत और तनाव का माहौल है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों से हाथ जोड़कर न्याय की भीख मांगी है और नामजद आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों ने भी पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को अविलंब सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है।

​”अंगीका को अपनी ही धरती पर पहचान दिलाने का महासंकल्प!” भागलपुर में सजी विचार गोष्ठी; 24 और 25 अक्टूबर को मनेगा भव्य ‘अंगीका महोत्सव’

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Bhagalpur News: अंग प्रदेश की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान अंगीका को उसका हक और मान-सम्मान दिलाने के लिए भागलपुर में सुगबुगाहट तेज हो गई है। शहर के घंटाघर स्थित स्वर्गीय प्रवीण सिंह के आवास पर ‘अंगीका महा सभा’ के बैनर तले एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी सह बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी 24 और 25 अक्टूबर को आयोजित होने वाले ‘अंगीका महोत्सव’ को ऐतिहासिक और सफल बनाना है। बैठक में अंग प्रदेश के कई नामचीन कवि, साहित्यकार और प्रबुद्धजीवी शामिल हुए।

​अंगीका को मिले उसका असली हक: डॉ. अमरेंद्र कुमार

​मीडिया को संबोधित करते हुए प्रख्यात शिक्षाविद और अंगीका के पैरोकार डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बेहद आक्रामक और भावुक लहजे में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा:

​”अंगीका केवल एक बोली नहीं, बल्कि अंग प्रदेश की आत्मा है। जो संवैधानिक और सामाजिक पहचान अंगीका भाषा को मिलनी चाहिए थी, वह राजनीतिक और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अब तक नहीं मिल पाई है। अब समय आ गया है कि इस भाषा के मान-सम्मान के लिए हम सब एकजुट हों। 24-25 अक्टूबर को होने वाला अंगीका महोत्सव इसी दिशा में एक बड़ा आंदोलन साबित होगा।”

 

​अंगीका महोत्सव को सफल बनाने के लिए बनी रणनीति

​बैठक के दौरान महोत्सव के सफल संचालन और तैयारियों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। साहित्यकारों और आयोजन समिति के सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे। तय किया गया कि दो दिवसीय इस महोत्सव में अंगिका लोक कला, साहित्य, संगीत और विधाओं को वैश्विक पटल पर लाने के लिए कई रंगारंग और बौद्धिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें देश-विदेश से अंगीका प्रेमी और साहित्यकार शिरकत करेंगे।

​दिवंगत प्रवीण सिंह कुशवाहा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

​बैठक की शुरुआत में ही अंगीका आंदोलन और सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले दिवंगत प्रवीण सिंह कुशवाहा को याद किया गया। उनकी कमी को अंग प्रदेश के लिए एक अपूरणीय क्षति बताते हुए उपस्थित सभी कवियों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने दो मिनट का मौन धारण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

अब बेटियों को पढ़ाई के लिए नहीं जाना होगा दूर! कल भागलपुर आ रहे हैं सीएम सम्राट चौधरी; देंगे 211 डिग्री कॉलेजों और ‘पिंक बसों’ की महा-सौगात

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Bhagalpur News: बिहार में उच्च शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कल यानी 15 जुलाई का दिन एक नया इतिहास रचने जा रहा है। भागलपुर जिले के गौराडीह प्रखंड अंतर्गत काशील गांव में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भव्य आगमन होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान मुख्यमंत्री न केवल स्थानीय नवनिर्मित डिग्री कॉलेज का उद्घाटन करेंगे, बल्कि भागलपुर की इसी पावन धरती से पूरे बिहार के 211 डिग्री कॉलेजों का वर्चुअल माध्यम से महा-लोकार्पण कर राज्य को समर्पित करेंगे।

​मुख्यमंत्री के इस मेगा-विजिट को लेकर जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और पूरे इलाके में भारी उत्साह का माहौल है।

​6 ‘पिंक बसों’ को भी दिखाएंगे हरी झंडी, महिलाओं का सफर होगा सुरक्षित

​उच्च शिक्षा के इस महा-लोकार्पण के साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आधी आबादी यानी महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा व सुविधा के लिए एक और बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम के दौरान 6 विशेष ‘पिंक बसों’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह पहल राज्य में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के सफर को अधिक सुरक्षित, सुलभ और आरामदायक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

​अब घर के पास मिलेगी उच्च शिक्षा, छात्रों के चेहरे खिले

​काशील गांव में नए डिग्री कॉलेज के शुरू होने से न केवल इस प्रखंड बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के छात्र-छात्राओं का सालों पुराना सपना सच होने जा रहा है। स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों में इसे लेकर बेहद खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अब हमारे बच्चों को, विशेषकर बेटियों को, उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अपना घर छोड़कर दूर नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी और क्षेत्र में शिक्षा का स्तर तेजी से सुधरेगा।

​सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम, अंतिम मुआयने में जुटा प्रशासन

​इस वीआईपी कार्यक्रम की संवेदनशीलता और भव्यता को देखते हुए भागलपुर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए हैं। कार्यक्रम स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल और दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा, जर्मन हैंगर पंडाल, बैरिकेडिंग, और पार्किंग व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं। भागलपुर के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और स्वागत की तैयारियों में किसी भी स्तर पर कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।

भागलपुर के काशील गांव पहुंचेंगे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जनता से करेंगे सीधा संवाद; सजने लगा जर्मन हैंगर पंडाल

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Bhagalpur News: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आगामी 15 जुलाई को भागलपुर जिले के गौराडीह प्रखंड अंतर्गत काशील गांव में संभावित दौरा प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर पूरे जिले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री काशील गांव की धरती से सीधे आम जनता से रूबरू होंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर सीधा संवाद करेंगे।

​जर्मन हैंगर पंडाल और अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था

​मुख्यमंत्री के आगमन को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए भागलपुर जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कार्यक्रम स्थल पर अत्याधुनिक और विशाल जर्मन हैंगर पंडाल का निर्माण युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम स्थल और उसके आसपास के क्षेत्रों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

​प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग, वीआईपी और आम जनता के लिए अलग-अलग पार्किंग जोन, पेयजल और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की मुकम्मल व्यवस्था की जा रही है ताकि कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

​काशील सहित पूरे गौराडीह प्रखंड में भारी उत्साह का माहौल

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस संभावित दौरे को लेकर सिर्फ काशील ही नहीं, बल्कि आसपास के तमाम गांवों और पूरे गौराडीह प्रखंड में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह दौरा इस पिछड़े क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

​ग्रामीणों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए उन्हें अपनी बात, शिकायतें और क्षेत्र की वर्षों पुरानी विकास संबंधी मांगों को सीधे सूबे के मुखिया तक पहुंचाने का एक बेहतरीन और सीधा अवसर मिलेगा।

​अंतिम रूप देने में जुटा जिला प्रशासन

​भागलपुर के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान (SSP) सहित जिले के तमाम आला अधिकारी लगातार कार्यक्रम स्थल का मुआयना कर रहे हैं। तैयारियों में किसी भी स्तर पर कोई कमी न रह जाए, इसके लिए खुद कमिश्नर और वरीय अधिकारी हर गतिविधि की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जिला प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में चौबीसों घंटे जुटा हुआ है।