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बिहार में 213 नए डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ आज, अब गांव के युवाओं को घर के पास मिलेगी उच्च शिक्षा

सम्राट सरकार का ऐतिहासिक फैसला: डिग्री कॉलेज-विहीन प्रखंडों में खुलेगी ज्ञान की नई खिड़की, 15 जुलाई से शुभारंभ

Bhagalpur News: बिहार के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा का सपना अब उनके अपने ही घर के पास सच होने जा रहा है। राज्य में दूरी, समय और आर्थिक तंगहाली के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होने वाले छात्र-छात्राओं को एक बहुत बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने राज्य के शिक्षा जगत में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम उठाया है।

​सरकार ने राज्य के उन 213 प्रखंडों (Blocks) में नए डिग्री कॉलेजों की स्थापना करने का निर्णय लिया है, जहाँ अब तक एक भी डिग्री कॉलेज नहीं था। इस भव्य और दूरगामी पहल का विधिवत शुभारंभ आज भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखण्ड के कासिल गांव से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी रिमोट का बटन दबाकर करेंगे।

बेटियों की पढ़ाई को मिलेगी ‘नई उड़ान’, दूर होगी दूरी की बाधा

​अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण इलाकों में डिग्री कॉलेज दूर होने के कारण सबसे ज्यादा नुकसान छात्राओं को उठाना पड़ता था। सुरक्षा और परिवहन की दिक्कतों की वजह से कई माता-पिता बेटियों को आगे की पढ़ाई के लिए शहर भेजने से कतराते थे। सरकार के इस फैसले से:

  • बेटियों को मिलेगा समान अवसर: अब छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए अपने घर और गांव से दूर नहीं जाना पड़ेगा।
  • आर्थिक बोझ होगा कम: शहर में रहकर पढ़ाई करने का खर्च बचेगा, जिससे गरीब परिवारों के बच्चे भी ग्रेजुएशन कर सकेंगे।
  • ड्रॉपआउट रेट में आएगी कमी: इंटरमीडिएट (12वीं) के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भारी गिरावट आएगी।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे नए कॉलेज

​यह पहल सिर्फ कॉलेज की बिल्डिंग बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार का फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education) पर है। इन 213 नए डिग्री कॉलेजों में निम्नलिखित आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी:

  • स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक लैब: डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तकनीक का इस्तेमाल।
  • अनुभवी प्राध्यापक (Faculty): छात्रों को सही मार्गदर्शन देने के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति।
  • रोजगारपरक पाठ्यक्रम: पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाले कोर्सेज पर जोर।

GER (सकल नामांकन अनुपात) में होगा ऐतिहासिक सुधार

​”शिक्षा के विस्तार के माध्यम से बिहार का युवा सशक्त होगा और राज्य विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर होगा।”

 

​इस ऐतिहासिक निर्णय का एक मुख्य उद्देश्य राज्य के सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio – GER) में सुधार करना है। उच्च शिक्षा को सुलभ और समावेशी (Inclusive) बनाकर सरकार बिहार के हर वर्ग तक ज्ञान की रोशनी पहुंचाना चाहती है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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