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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में बिहार का डंका, बेगूसराय को मिला राष्ट्रीय सम्मान

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5 लाख से अधिक आबादी वाले जिलों की श्रेणी में बेगूसराय बना “Best Performing Model District”; डिजिटल हेल्थ सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना

Patna News: बिहार के डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बेगूसराय जिले को राष्ट्रीय स्तर पर “Best Performing Model District” के सम्मान से नवाजा गया है। यह पुरस्कार 5 लाख से अधिक आबादी वाले जिलों की श्रेणी में प्रदान किया गया।

यह सम्मान आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के 8 वर्ष और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के 5 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘आरोग्य मंथन 2026’ कार्यक्रम के दौरान दिया गया। नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने यह पुरस्कार प्रदान किया।

बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से अरविंद कुमार वर्मा, IAS, विशेष सचिव, स्वास्थ्य विभाग-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति (BSSS) ने यह सम्मान ग्रहण किया।

डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में बिहार को राष्ट्रीय पहचान

बेगूसराय को मिला यह सम्मान बिहार में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान के तौर पर देखा जा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ने, स्वास्थ्य संस्थानों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम से जोड़ने तथा नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है।

बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति (BSSS) के नेतृत्व में राज्य में ABDM के विभिन्न घटकों के क्रियान्वयन और विस्तार को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य व्यवस्था में डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ाना और मरीजों तथा स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों का परिणाम

बेगूसराय की इस उपलब्धि में जिला प्रशासन, जिला ABDM टीम, स्वास्थ्य संस्थानों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य संबंधित हितधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान जिले में ABDM के प्रभावी क्रियान्वयन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों को रेखांकित करता है।

जिले में डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों और स्वास्थ्यकर्मियों को मिशन के विभिन्न घटकों से जोड़ने तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया गया है।

नागरिकों के लिए डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बनाने पर जोर

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में एक मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक के साथ जोड़कर नागरिकों के लिए स्वास्थ्य संबंधी डिजिटल सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

बेगूसराय को मिला “Best Performing Model District” सम्मान इस दिशा में जिले में किए गए कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान को दर्शाता है।

बिहार की डिजिटल स्वास्थ्य यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि

बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति की ओर से इस उपलब्धि पर बेगूसराय जिला प्रशासन, जिला ABDM टीम, स्वास्थ्य संस्थानों, स्वास्थ्यकर्मियों और सभी संबंधित हितधारकों को बधाई दी गई है।

यह सम्मान बिहार की डिजिटल स्वास्थ्य यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है। साथ ही, इससे राज्य में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने के प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

बिहार की नई औद्योगिक निवेश नीति 2026 की तैयारी तेज, उद्योग विभाग और IIM बोधगया के बीच हुआ MoU

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शोध, आर्थिक विश्लेषण और हितधारकों की राय के आधार पर तैयार होगी BIIPP 2026; निवेश, उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा देने पर जोर

Patna News: बिहार में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उद्योग विभाग, बिहार सरकार और IIM बोधगया के बीच बिहार इंडस्ट्रीज इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी (BIIPP) 2026 तैयार करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर एवं उसका आदान-प्रदान किया गया।

यह पहल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व और उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह के मार्गदर्शन में राज्य में निवेश का अनुकूल माहौल तैयार करने तथा भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक सुदृढ़ नीति विकसित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

MoU का आदान-प्रदान निदेशक, उद्योग  मुकुल कुमार गुप्ता और IIM बोधगया की निदेशक डॉ. विनिता सिंह सहाय के बीच हुआ।

IIM बोधगया बनेगा Knowledge & Research Partner

समझौते के तहत IIM बोधगया Knowledge & Research Partner के रूप में काम करेगा। संस्थान BIIPP 2026 के निर्माण में नीति अनुसंधान, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेंचमार्किंग, हितधारक परामर्श, आर्थिक विश्लेषण और नीति ड्राफ्टिंग से जुड़े कार्यों में सहयोग करेगा।

नई नीति तैयार करने की प्रक्रिया में शोध और आंकड़ों के आधार पर राज्य की औद्योगिक क्षमता, निवेश की संभावनाओं और विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित हितधारकों से परामर्श लेकर नीति को व्यावहारिक और निवेशक-अनुकूल बनाने का प्रयास किया जाएगा।

उद्योग विभाग के पास रहेगा अंतिम निर्णय का अधिकार

BIIPP 2026 का निर्माण उद्योग विभाग के समग्र नेतृत्व और संस्थागत पर्यवेक्षण में किया जाएगा। विभाग नीति की प्राथमिकताओं, राजकोषीय मानदंड, परामर्श की रूपरेखा और अपेक्षित परिणाम निर्धारित करेगा।

IIM बोधगया की ओर से दी जाने वाली अनुशंसाएं परामर्शात्मक होंगी। नीति से जुड़े अंतिम निर्णय और अनुमोदन का अधिकार उद्योग विभाग के पास रहेगा।

‘सभी क्षेत्रों के लिए मदर पॉलिसी’ बनाने पर जोर

इस अवसर पर उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि IIM बोधगया के बहुविषयक पाठ्यक्रम, शोध क्षमता और मजबूत अकादमिक वातावरण को देखते हुए संस्थान BIIPP 2026 के निर्माण में महत्वपूर्ण साझेदार साबित होगा।

उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति में बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। इसमें बिहार की जमीनी वास्तविकताओं, उपलब्ध संसाधनों, औद्योगिक क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखा जाएगा।

उन्होंने BIIPP 2026 को “सभी क्षेत्रों के लिए मदर पॉलिसी” बताते हुए कहा कि यह भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों के लिए तैयार होने वाली नीतियों और नीति हस्तक्षेपों के लिए आधारभूमि तैयार करेगी।

कुंदन कुमार के अनुसार, IIM बोधगया के साथ यह साझेदारी शोध, संस्थागत विशेषज्ञता और नीति निर्माण को एक मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य के दीर्घकालिक औद्योगिक विकास के लिए मजबूत आधार तैयार करने में मदद मिल सकती है।

बिहार की युवा प्रतिभा और संभावनाओं को जोड़ने पर जोर

IIM बोधगया की निदेशक डॉ. विनिता सिंह सहाय ने बिहार की विशाल संभावनाओं, जनसांख्यिकीय क्षमता और जैव-विविधता का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य में उभर रहे अवसरों के साथ युवा प्रतिभाओं को जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

नई नीति के निर्माण में बिहार की मानव संसाधन क्षमता और युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों को ध्यान में रखने की दिशा में भी विचार किया जाएगा।

निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य

BIIPP 2026 के लिए हुए इस समझौते का व्यापक उद्देश्य बिहार के औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करना और राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करना है। नीति के जरिए निवेशकों के लिए बेहतर वातावरण, उद्यमिता को बढ़ावा और रोजगार के नए अवसरों के सृजन पर जोर दिया जाएगा।

इस पहल में शोध-आधारित, साक्ष्य-आधारित और निवेशक-अनुकूल औद्योगिक नीति तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। बहु-क्षेत्रीय अध्ययन और हितधारकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर तैयार होने वाली नीति भविष्य में बिहार के औद्योगिक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

MoU कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

MoU आदान-प्रदान के अवसर पर डॉ. बिद्या नंद सिंह, निदेशक, हैंडलूम एवं सेरिकल्चर; अमन समीर, निदेशक, MSME; खंडेकर श्रीकांत कुंडलिक, संयुक्त सचिव; बिहार राज्य उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग के प्रतिनिधि तथा विभिन्न हितधारक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

उद्योग विभाग और IIM बोधगया के बीच हुआ यह समझौता बिहार में नई औद्योगिक निवेश नीति तैयार करने की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत के रूप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब शोध, परामर्श और आर्थिक विश्लेषण के आधार पर BIIPP 2026 का मसौदा तैयार करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

डॉ. अच्युत सामंत को रोमानिया के मिलिशाउत्सी नगर की मानद नागरिकता, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई प्रतिष्ठित सम्मान

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शिक्षा, सामाजिक विकास और मानवीय सेवा में आजीवन योगदान का सम्मान; ‘की टू द सिटी ऑफ बर्लाद’, ‘लीडर ऑफ द ईयर’ और FIDE के ‘Education Philanthropic Award’ से भी नवाजा गया

Bhuvneshwar News: प्रख्यात शिक्षाविद्, समाज सुधारक एवं KIIT, KISS और KIIMS के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत को शिक्षा, सामाजिक विकास, मानवीय सेवा, खेल और संस्थान निर्माण के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो रहे हैं। इसी क्रम में 21 सितंबर 2026 को उन्हें रोमानिया के मिलिशाउत्सी (Milișăuți) नगर की मानद नागरिकता प्रदान की गई।

रोमानिया में किसी नगर द्वारा दी जाने वाली मानद नागरिकता को महत्वपूर्ण नागरिक सम्मानों में माना जाता है। डॉ. सामंत को इसी यात्रा के दौरान बर्लाद (Bârlad) नगर पालिका की ओर से ‘की टू द सिटी ऑफ बर्लाद’ से भी सम्मानित किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे दो रोमानियाई नगर पालिकाओं से इस प्रकार के नागरिक सम्मान प्राप्त करने वाले पहले ओड़िया व्यक्ति बने हैं।

बर्लाद में मिला ‘की टू द सिटी’ सम्मान

डॉ. अच्युत सामंत ने रोमानिया में भारत के राजदूत डॉ. मनोज कुमार मोहापात्रा के साथ बर्लाद का दौरा किया। इस दौरान उन्हें नगर की ओर से प्रतिष्ठित ‘की टू द सिटी’ प्रदान की गई।

‘की टू द सिटी’ यूरोप की एक पुरानी सम्मान परंपरा है। ऐतिहासिक रूप से नगरों के प्रवेश द्वारों की चाबी महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती थी। समय के साथ यह चाबी किसी विशिष्ट व्यक्ति के प्रति नगर के सम्मान, विश्वास और आत्मीयता के प्रतीक के रूप में प्रदान किए जाने लगी।

सम्मान मिलने पर डॉ. सामंत ने रोमानिया के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मिलिशाउत्सी में मिले आत्मीय स्वागत ने उन्हें भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों शहरों के लोगों से मिला प्रेम और स्नेह उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।

CEEMAN Champions Awards में ‘Leader of the Year’

डॉ. अच्युत सामंत को CEEMAN Champions Awards 2026 में भी ‘Leader of the Year’ सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान शिक्षा, सामाजिक विकास, मानवीय सेवा और संस्थान निर्माण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया।

यह पुरस्कार रोमानिया में आयोजित 34वें CEEMAN Annual Conference के दौरान प्रदान किया गया। डॉ. सामंत की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि ने उनकी ओर से यह सम्मान ग्रहण किया।

CEEMAN यानी International Association for Management Development in Dynamic Societies का मुख्यालय स्लोवेनिया के ब्लेड में है। संगठन से लगभग 50 देशों के करीब 180 सदस्य जुड़े हुए हैं।

FIDE ने दिया ‘Education Philanthropic Award’

डॉ. सामंत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण सम्मान FIDE Education Philanthropic Award के रूप में मिला। 24 सितंबर 2026 को उज्बेकिस्तान में आयोजित Summit on Chess in Education के दौरान, 46वें FIDE Chess Olympiad and Congress के अवसर पर उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।

डॉ. सामंत की ओर से उनके प्रतिनिधि ने पुरस्कार ग्रहण किया। यह सम्मान FIDE के कार्यवाहक अध्यक्ष विश्वनाथन आनंद तथा FIDE Management Board की उपाध्यक्ष डाना रेज़निएसे ने प्रदान किया।

कार्यक्रम में करीब 120 देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। डॉ. सामंत को खेल और शिक्षा के क्षेत्र में उनके आजीवन योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

शिक्षा में शतरंज को बढ़ावा देने के लिए KIIT-KISS और FIDE के बीच MoU

FIDE सम्मान समारोह के दौरान शिक्षा में शतरंज को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल हुई। FIDE, KIIT और KISS के बीच ‘Chess in Education’ से जुड़ी पहलों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस पहल को शिक्षा के साथ शतरंज को जोड़ने और विद्यार्थियों के बीच इसके विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

कोसोवो में भी मिले चार महत्वपूर्ण सम्मान

डॉ. अच्युत सामंत को इससे पहले कोसोवो की राजधानी प्रिस्टिना में आयोजित 45वें World Congress of Poets के दौरान भी कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया।

उन्हें यहां—

  • ‘Mother Teresa Award’
  • AAB University College, Pristina की ओर से ‘Professor Honoris Causa’
  • City of Peja की ओर से सम्मान
  • World Congress of Poets के अध्यक्ष का Medal

प्रदान किया गया।

इस तरह डॉ. अच्युत सामंत को हाल के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में शिक्षा, सामाजिक विकास, मानवीय सेवा, खेल, साहित्यिक-सांस्कृतिक क्षेत्र और संस्थान निर्माण में उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है।

ओडिशा से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहचान

KIIT और KISS जैसे संस्थानों की स्थापना से जुड़े डॉ. अच्युत सामंत शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले ये सम्मान उनके कार्यों की वैश्विक पहचान को दर्शाते हैं। रोमानिया के दो नगरों से नागरिक सम्मान, CEEMAN का ‘Leader of the Year’, FIDE का ‘Education Philanthropic Award’ और कोसोवो में मिले सम्मान ने उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की सूची में कई महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिए हैं।

भागलपुर में सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा: जमीन में दबा मिला शव, पैसों के लेन-देन में दोस्त ही बने कातिल; 2 गिरफ्तार

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Crime News: भागलपुर के ईशाकचक थाना क्षेत्र के बरहपुरा जगरनाथबली, विक्रमशीला कॉलोनी के पास जमीन में गाड़कर छुपाए गए शव के मामले का पुलिस ने त्वरित खुलासा कर दिया है। पैसों के लेन-देन को लेकर हुए विवाद में इस दर्दनाक वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने हत्याकांड में शामिल दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

बदबू आने पर हुई थी खुदाई, जमीन के नीचे दबा मिला था शव

22 सितंबर को स्थानीय लोगों ने विक्रमशीला कॉलोनी के पास एक नई मिट्टी भरी जगह से तेज दुर्गंध आने की शिकायत पुलिस से की थी। लोगों को आशंका थी कि जमीन में कोई सड़ा-गला पदार्थ या शव दबा हो सकता है।

सूचना मिलते ही ईशाकचक थानाध्यक्ष दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और जगह की खुदाई करवाई। खुदाई के दौरान जमीन के अंदर से एक युवक का शव बरामद हुआ। इसके तुरंत बाद FSL (फॉरेंसिक) टीम को बुलाकर जरूरी साक्ष्य जुटाए गए।

मायागंज अस्पताल में रखवाया गया था शव, पुलिस ने दर्ज की FIR

शुरुआत में शव की पहचान नहीं हो सकी थी, जिसके कारण उसे पहचान सुनिश्चित करने के लिए मायागंज अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया गया। इसके बाद थानाध्यक्ष के लिखित आवेदन पर अज्ञात के खिलाफ ईशाकचक थाना कांड संख्या-209/2026 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

विशेष जांच टीम (SIT) का गठन और CCTV से मिली सफलता

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) भागलपुर के निर्देशन और सिटी SP व SDPO सिटी-1 के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया।

पुलिस टीम ने वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और मानवीय सूचनाओं का सहारा लिया। जांच के आधार पर दो संदिग्धों—मो. सलमान उर्फ फेकू और मो. सारिक उर्फ मोनू (दोनों निवासी प्राणवती लेन, बरहपुरा) को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

19 सितंबर को हुई थी हत्या, मृतक की हुई पहचान

कड़ाई से की गई पूछताछ में हिरासत में लिए गए युवकों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपियों के बयान के आधार पर मृतक की पहचान मो. सलमान (पिता: मो. कटना, निवासी: इस्लामनगर, थाना: ईशाकचक) के रूप में हुई।

पूछताछ में यह बात सामने आई कि पैसों के लेन-देन को लेकर हुए विवाद के कारण 19 सितंबर 2026 को ही मो. सलमान की हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की नीयत से शव को मिट्टी में गाड़ दिया गया था।

हत्या में इस्तेमाल कुल्हाड़ी और कुदाल बरामद

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार और सामान भी बरामद कर लिए हैं:

  • कुल्हाड़ी: 01
  • खंती: 02
  • कुदाल: 01

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण:

  1. मो. सलमान उर्फ फेकू (पिता: मो. समशाद)
  2. मो. सारिक उर्फ मोनू (पिता: मो. डब्लू) (दोनों निवासी: प्राणवती लेन, बरहपुरा, थाना- ईशाकचक, जिला- भागलपुर)

कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम

इस सफल उद्भेदन में ईशाकचक थानाध्यक्ष आलोक कुमार के साथ पु.अ.नि. मंटू कुमार, राजीव कुमार, पूजा कुमारी, सिपाही विजय कुमार, विश्वनाथ चंद्रवंशी, मितुल कुमारी, शिवानी कुमारी और स्वीटी कुमारी की मुख्य भूमिका रही। पुलिस दोनों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है और मामले के अन्य पहलुओं की भी गहराई से जांच कर रही है।

बिहार में लॉ एंड ऑर्डर पर सरकार का सख्त रुख, अपराधी कोई भी हो, बचेगा नहीं

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CM सम्राट चौधरी का दो टूक संदेश—अपराध की कोई जाति या धर्म नहीं, कानून को चुनौती देने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

Patna News:  बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बार फिर सरकार के सख्त रुख को स्पष्ट किया है। हाल के दिनों में अपराध और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों के बीच मुख्यमंत्री ने कहा है कि अपराध करने वाले की कोई जाति या धर्म नहीं होता। कानून को चुनौती देने वाले अपराधियों के खिलाफ पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी होगी।

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब जमुई की घटना को लेकर बिहार में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार की ओर से भी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का संदेश दिया गया है।

अपराधी की कोई जाति नहीं—CM का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अपराध को जाति और धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि जो व्यक्ति अपराध करता है, वह अपराधी है और उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अपराधी पुलिस को चुनौती देता है, तो पुलिस उसका जवाब देगी।

पुलिस कार्रवाई पर सरकार की नजर

बिहार में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियानों में गिरफ्तारी, वारंट का निष्पादन और अपराध से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं। सितंबर 2026 में चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान बड़ी संख्या में वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी और अपराधियों की संपत्ति पर कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई है।

वहीं, पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि कानून का पालन हर स्थिति में जरूरी है। भोजपुर के एक मुठभेड़ मामले में मुख्यमंत्री ने पुलिस की चूक स्वीकार किए जाने और न्यायिक जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की बात भी कही है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार एक तरफ अपराधियों के खिलाफ सख्ती की बात कर रही है, वहीं पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही पर भी जोर दे रही है।

कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तकनीक पर भी जोर

बिहार सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निजी प्रतिष्ठानों में लगे CCTV कैमरों को सरकारी निगरानी व्यवस्था से जोड़ने से संबंधित नियमों को भी मंजूरी दी है। सरकार का उद्देश्य निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और अपराध की घटनाओं की जांच में तकनीकी सहायता बढ़ाना बताया गया है।

सरकार का संदेश साफ

बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार का मौजूदा संदेश यही है कि अपराध करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई उसकी पहचान, जाति या धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि उसके कथित अपराध और कानून के तहत होगी। आने वाले दिनों में पुलिस कार्रवाई, अपराध नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार की कार्यप्रणाली पर लोगों की नजर बनी रहेगी।

तेतड़ी पंचायत में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ की गूंज, ग्रामीणों को सिखाया गया कचरा अलग करने का सही तरीका

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गीला, सूखा, सेनेटरी और ई-कचरा अलग-अलग रखने की दी गई जानकारी; ग्रामीणों ने स्वच्छ और आदर्श पंचायत बनाने का लिया संकल्प

Bhagalpur News: भागलपुर जिले के नवगछिया प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत तेतड़ी में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को घर से निकलने वाले कचरे के उचित प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरे को अलग करने और उसके सुरक्षित निस्तारण के प्रति जागरूक करना रहा। इस दौरान स्वच्छता कर्मियों और संबंधित प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management-SWM) नियम, 2026 से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी।

चार डस्टबिन से आसान होगा कचरे का प्रबंधन

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान चार अलग-अलग रंगों के डस्टबिन रखकर ग्रामीणों को बताया गया कि किस प्रकार के कचरे को किस डस्टबिन में रखा जाना चाहिए। स्वच्छता टीम ने समझाया कि घर पर ही कचरे को अलग-अलग रखने से उसके निस्तारण और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है।

हरा डस्टबिन—गीला कचरा:
रसोई से निकलने वाले कचरे, फल-सब्जियों के छिलके, बचा हुआ भोजन और अन्य जैविक अपशिष्ट को हरे डस्टबिन में रखने की जानकारी दी गई। ऐसे जैविक कचरे से खाद तैयार करने की संभावना के बारे में भी ग्रामीणों को बताया गया।

नीला डस्टबिन—सूखा कचरा:
कागज, प्लास्टिक, कार्डबोर्ड, बोतल, थैली और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को नीले डस्टबिन में रखने की जानकारी दी गई।

लाल डस्टबिन—हानिकारक एवं सेनेटरी कचरा:
डायपर, सैनिटरी पैड, मेडिकल अपशिष्ट और एक्सपायर्ड दवाइयों जैसे कचरे को सामान्य कचरे से अलग रखने और निर्धारित तरीके से सुरक्षित निस्तारण करने के बारे में जागरूक किया गया।

काला डस्टबिन—ई-कचरा एवं खतरनाक अपशिष्ट:
बैटरी, खराब CFL बल्ब, ट्यूबलाइट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक एवं खतरनाक अपशिष्ट को सामान्य कचरे में नहीं मिलाने की आवश्यकता समझाई गई।

घर से शुरू होगी गांव की स्वच्छता

जागरूकता सत्र के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि स्वच्छता केवल सार्वजनिक स्थानों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत प्रत्येक घर से होती है। यदि घर से निकलने वाले कचरे को शुरुआत में ही अलग-अलग कर दिया जाए तो पूरे गांव की कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

स्वच्छता टीम ने ग्रामीणों से खुले में कचरा नहीं फेंकने और घर के आसपास गंदगी नहीं फैलाने की अपील की। साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचने और अपने घर एवं आसपास के परिसर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने का संदेश दिया गया।

बीमारी से बचाव में भी मददगार है बेहतर कचरा प्रबंधन

कार्यक्रम में ग्रामीणों को बताया गया कि कचरे का उचित प्रबंधन केवल गांव को साफ-सुथरा रखने के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि इससे गंदगी और कचरे से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की रोकथाम में भी मदद मिल सकती है।

कचरे को खुले में फेंकने के बजाय निर्धारित व्यवस्था के तहत रखने और निस्तारित करने से गांव के वातावरण को स्वच्छ रखने में सहायता मिलेगी।

ग्रामीणों ने ली स्वच्छता की शपथ

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने और सामूहिक भागीदारी के साथ गांव को स्वच्छ रखने की शपथ भी दिलाई गई। उपस्थित ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत तेतड़ी को स्वच्छ, स्वस्थ एवं आदर्श पंचायत बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने स्वच्छता अभियान को निरंतर सहयोग देने और अपने घर, गली-मोहल्ले तथा आसपास के सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की प्रतिबद्धता जताई।

स्वच्छ गांव के लिए जनभागीदारी जरूरी

‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के तहत आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीण स्तर पर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और कचरा प्रबंधन को व्यवहार का हिस्सा बनाने की दिशा में केंद्रित रहा। तेतड़ी पंचायत में ग्रामीणों को कचरे की सही पहचान, अलग-अलग संग्रहण और सुरक्षित निस्तारण की जानकारी देकर स्वच्छता अभियान में जनभागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

अपराध पर नकेल कसने के लिए बिहार में सख्ती, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने DM-SP को दिए कड़े निर्देश

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई हाईलेवल समीक्षा बैठक में कानून-व्यवस्था की समीक्षा, गश्त बढ़ाने, फील्ड मॉनिटरिंग मजबूत करने और फेक न्यूज पर तत्काल कार्रवाई का निर्देश

Patna News: बिहार में कानून-व्यवस्था और जन सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने प्रशासनिक और पुलिस महकमे को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) की भागीदारी रही।

बैठक में अपराध नियंत्रण, पुलिस की सक्रियता, फील्ड मॉनिटरिंग, आगामी त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से निपटने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

मुख्य सचिव ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था के मामले में किसी तरह की शिथिलता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन के “इकबाल” को बनाए रखने और धरातल पर पुलिस-प्रशासन की सक्रियता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

अपराध नियंत्रण में लापरवाही पर सख्ती

समीक्षा बैठक में अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और पुलिस की फील्ड मौजूदगी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि अपराधियों में कानून का भय होना जरूरी है और पुलिस की कार्यशैली में किसी तरह की शिथिलता नहीं होनी चाहिए।

पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति की नियमित निगरानी करने और पुलिस बल का प्रभावी नेतृत्व करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही सघन गश्त और फील्ड विजिट बढ़ाने को कहा गया है।

अनुमंडल स्तर तक कानून-व्यवस्था की निगरानी मजबूत करने तथा खराब प्रदर्शन करने वाले या अपने दायित्वों के प्रति गंभीरता नहीं दिखाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

सड़कों पर सक्रिय रहे पुलिस, जरूरत पर तत्काल चेकपोस्ट

बैठक में पुलिस इकाइयों को लगातार सक्रिय और अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए। अपराध नियंत्रण के लिए रणनीतिक स्थानों पर आवश्यकता के अनुसार चेकपोस्ट लगाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया।

मुख्य सचिव ने हालिया घटनाओं में पुलिस की त्वरित कार्रवाई का उल्लेख करते हुए जमुई पुलिस की कार्रवाई की सराहना की और अन्य जिलों में भी इसी तरह की तत्परता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

मुख्यालय के अधिकारी करेंगे जिलों का फील्ड विजिट

कानून-व्यवस्था की जमीनी स्थिति की बेहतर निगरानी के लिए पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों को जिलों के साथ टैग करने का निर्देश दिया गया है। ये अधिकारी संबंधित जिलों में जाकर फील्ड विजिट करेंगे और जरूरत के अनुसार वहीं रात्रि विश्राम भी करेंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य कागजी रिपोर्ट के बजाय जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की निगरानी करना और स्थानीय समस्याओं की जानकारी सीधे हासिल करना है।

त्योहारों को लेकर बढ़ाई जाएगी सतर्कता

आगामी त्योहारों को देखते हुए सभी जिलों के DM और SP को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े इंतजामों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतने को कहा गया है।

प्रशासन को स्थानीय स्तर पर संभावित विवादों और संवेदनशील परिस्थितियों की पहले से पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने पर भी ध्यान देने को कहा गया है।

फेक न्यूज पर तत्काल कानूनी कार्रवाई के निर्देश

समीक्षा बैठक में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं को लेकर भी निर्देश जारी किए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसी सूचनाओं पर तत्काल नजर रखी जाए, खासकर ऐसी सामग्री पर जो सामाजिक सद्भाव या सार्वजनिक शांति को प्रभावित कर सकती है।

प्रशासन को फेक न्यूज फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ तथ्यों की पुष्टि के बाद त्वरित और कानून के अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

DM-SP के कामकाज की लगातार होगी समीक्षा

बैठक के समापन पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के कामकाज की लगातार समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों के मूल्यांकन में उनकी त्वरित प्रतिक्रिया, जनता से मिलने वाला फीडबैक और धरातल पर सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति जैसे पहलुओं को ध्यान में रखने की बात कही गई।

बिहार में कृषि सांख्यिकी को मजबूत करने की कवायद, पटना में दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला

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विश्वसनीय और समयबद्ध कृषि आंकड़ों पर सरकार का जोर, दक्षिण और उत्तर बिहार के अधिकारियों-कर्मियों को दिया जा रहा तकनीकी प्रशिक्षण

Patna News: बिहार में कृषि क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, बिहार, पटना की ओर से खरीफ मौसम का राज्य स्तरीय वार्षिक आवृत्तीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि सांख्यिकी से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ आंकड़ों के संग्रहण और विश्लेषण की व्यवस्था को और मजबूत करना है।

कार्यक्रम में योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान योजना एवं विकास विभाग के अपर सचिव श्याम बिहारी मीणा, अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के निदेशक डॉ. नुरूल हक शिवानी सहित विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार के सभी प्रमंडलों से प्रमंडलीय उप निदेशक (सांख्यिकी), सभी जिलों के जिला सांख्यिकी पदाधिकारी तथा अन्य संबंधित सांख्यिकी पदाधिकारी एवं कर्मी भाग ले रहे हैं।

कृषि आंकड़ों से बेहतर बनेगी योजना निर्माण की प्रक्रिया

बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में कृषि क्षेत्र से जुड़े सही और प्रमाणिक आंकड़े सरकार के लिए नीति निर्माण, योजनाओं की तैयारी, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और कृषि गतिविधियों के आकलन में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में कृषि सांख्यिकी के संग्रहण, संधारण, सत्यापन, गुणवत्ता सुधार और सांख्यिकीय विश्लेषण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों को जानकारी दी जा रही है।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि मैदानी स्तर से जुटाए जाने वाले आंकड़े अधिक सटीक और विश्वसनीय हों तथा उन्हें निर्धारित समय सीमा में व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराया जा सके।

दो चरणों में आयोजित किया जा रहा प्रशिक्षण

राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को दक्षिण और उत्तर बिहार के प्रतिभागियों के लिए दो चरणों में आयोजित किया गया है।

  • दक्षिण बिहार: 22 सितंबर 2026 से 23 सितंबर 2026 तक
  • उत्तर बिहार: 24 सितंबर 2026 से 25 सितंबर 2026 तक

इस व्यवस्था के तहत अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों को कृषि सांख्यिकी से संबंधित प्रक्रियाओं और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जा रही है।

मैदानी सर्वेक्षण और आंकड़ों की गुणवत्ता पर विशेष फोकस

प्रशिक्षण के दौरान कृषि गतिविधियों से संबंधित आंकड़ों के संग्रहण और मैदानी सर्वेक्षण की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही आंकड़ों की गुणवत्ता की जांच, व्यवस्थित संधारण और सांख्यिकीय विश्लेषण की तकनीकों को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है।

कृषि सांख्यिकी के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों से फसल उत्पादन और कृषि गतिविधियों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलती है। यही आंकड़े भविष्य में कृषि से संबंधित योजनाओं और नीतियों के लिए तथ्यात्मक आधार तैयार करने में उपयोगी होते हैं।

डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल पर भी जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम में आधुनिक और डिजिटल माध्यमों के उपयोग को भी महत्व दिया जा रहा है। आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से संकलित करने, सुरक्षित रखने और उपलब्ध सूचनाओं का प्रभावी विश्लेषण करने से संबंधित तकनीकी पहलुओं पर प्रतिभागियों की क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

विभाग का उद्देश्य कृषि सांख्यिकी से जुड़े मानव संसाधनों को नई तकनीकों और बेहतर कार्यप्रणाली से परिचित कराना है, ताकि जिला और मैदानी स्तर पर आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।

डेटा आधारित योजना निर्माण को मिलेगी मजबूती

कार्यक्रम में मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा की उपस्थिति ने कृषि सांख्यिकी और डेटा आधारित योजना निर्माण के महत्व को रेखांकित किया। योजना एवं विकास विभाग की कार्यप्रणाली में आंकड़ों के आधार पर योजनाओं के निर्माण, उनकी निगरानी और विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों और कर्मियों को बेहतर सांख्यिकीय प्रक्रिया की जानकारी मिलने से भविष्य में कृषि क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों को अधिक प्रभावी तरीके से संकलित और विश्लेषित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

विश्वसनीय आंकड़े बनेंगे बेहतर कृषि योजना का आधार

अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की ओर से आयोजित यह प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला राज्य में कृषि सांख्यिकी की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसका सीधा फोकस कृषि से जुड़े आंकड़ों की शुद्धता, विश्वसनीयता और समयबद्धता बढ़ाने पर है।

प्रशिक्षण के दौरान हासिल तकनीकी जानकारी को मैदानी स्तर पर लागू किए जाने से कृषि सांख्यिकी के संग्रहण और विश्लेषण की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। इससे सरकार को कृषि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति समझने और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर योजनाओं के निर्माण में बेहतर तथ्यात्मक आधार मिल सकेगा।

विश्वसनीय आंकड़े, बेहतर योजना और सुदृढ़ कृषि विकास के व्यापक उद्देश्य के साथ आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बिहार में डेटा आधारित विकास व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

भागलपुर में SSP का बड़ा एक्शन: लोदीपुर थानेदार समेत सभी अफसरों का वेतन बंद, विभागीय कार्रवाई का कड़ा आदेश

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Bhagalpur News: भागलपुर के लोदीपुर थाने में औचक निरीक्षण के दौरान पाई गई गंभीर कमियों और काम में लापरवाही को लेकर वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव ने सख्त रुख अपनाया है। एसएसपी ने लोदीपुर थानाध्यक्ष (SHO) समेत थाने के सभी पुलिस अधिकारियों के वेतन पर रोक (वेतन धारित) लगा दी है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का कड़ा आदेश जारी किया है।

निरीक्षण के दौरान खुली कार्यशैली की पोल

गुरुवार को वरीय पुलिस अधीक्षक, भागलपुर द्वारा लोदीपुर थाना का गहन निरीक्षण किया गया। इस दौरान एसएसपी ने थाना परिसर की साफ-सफाई, मालखाना, हाजत, शस्त्रागार, महिला हेल्प डेस्क, सीसीटीवी व्यवस्था के साथ-साथ थाने में रखे जाने वाले विभिन्न रिकॉर्ड्स (पंजियों एवं अभिलेखों) का बारीकी से जायजा लिया।

इसके अलावा, थाने में पेंडिंग मामलों (लंबित कांडों) की स्थिति, केस इन्वेस्टिगेशन की रफ्तार, वारंट एवं कुर्की-जब्ती के मामलों तथा इलाके के दागी/संदिग्ध व्यक्तियों के भौतिक सत्यापन कार्यों की भी समीक्षा की गई।

किन-किन मामलों में पाई गई लापरवाही?

समीक्षा के दौरान कई गंभीर खामियां और कार्य में शिथिलता सामने आईं:

  • थाने के जरूरी अभिलेखों और पंजियों (Registers) के रखरखाव में भारी लापरवाही पाई गई।
  • क्षेत्र के दागी और आपराधिक किस्म के व्यक्तियों के सत्यापन कार्य में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया।
  • कई महत्वपूर्ण कांडों के अनुसंधान (Investigation) में ढिलाई और तय प्रक्रिया के उल्लंघन की बात सामने आई।

SSP का सख्त आदेश और दिशा-निर्देश

लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए एसएसपी भागलपुर ने तत्काल प्रभाव से लोदीपुर थानाध्यक्ष सहित सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश दिया और सभी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया।

निरीक्षण के अंत में एसएसपी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि थाने का हर कार्य और रिकॉर्ड निर्धारित नियमावली के तहत ही अपडेट होना चाहिए। उन्होंने निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए:

  1. अनुसंधान (Investigation) के कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
  2. दागी और संदिग्ध लोगों का सत्यापन नियमित और असरदार तरीके से किया जाए।
  3. पेंडिंग केसों का तुरंत निपटारा किया जाए और फरार व वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी तेज हो।
  4. क्षेत्र में रात्रि गश्ती (Night Patrolling) और वाहन जांच अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

भागलपुर पुलिस प्रशासन का यह एक्शन स्पष्ट संदेश देता है कि जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विक्रमशिला पुल पर आवागमन को लेकर प्रशासन अलर्ट, वैकल्पिक रास्तों और नाव परिचालन की तैयारियों की समीक्षा

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बोर्डिंग-डीबोर्डिंग प्वाइंट से लेकर संपर्क पथों तक की समीक्षा, कौआ पुल की मरम्मत में तेजी लाने का निर्देश

Bhagalpur News: विक्रमशिला पुल पर आवागमन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक यातायात व्यवस्था तत्काल प्रभावी करने को लेकर भागलपुर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को जिला पदाधिकारी, अलंकृता पांडे की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विक्रमशिला पुल की वर्तमान यातायात व्यवस्था के साथ-साथ वैकल्पिक मार्ग, नौका परिचालन, घाटों तक पहुंचने वाले संपर्क पथ और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

प्रशासन की ओर से संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया गया। जिला पदाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आम लोगों के आवागमन में किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसके लिए वैकल्पिक यातायात व्यवस्था को पहले से पूरी तरह तैयार रखा जाए।

विक्रमशिला पुल के लिए वैकल्पिक यातायात व्यवस्था पर जोर

बैठक के दौरान विक्रमशिला पुल पर मौजूदा यातायात व्यवस्था की समीक्षा की गई। संभावित परिस्थितियों में यातायात को किस तरह सुचारु रखा जा सके, इस पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा हुई।

जिला पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वैकल्पिक मार्गों से जुड़ी सभी तैयारियां समय पर पूरी की जाएं। जरूरत पड़ने पर आम नागरिकों और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

नौका परिचालन के लिए घाटों पर बनेंगे बेहतर इंतजाम

बैठक में संभावित आवश्यकता को देखते हुए नौका परिचालन की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। इसके लिए उपयुक्त बोर्डिंग और डीबोर्डिंग प्वाइंट चिन्हित करने पर चर्चा हुई।

प्रशासन ने निर्देश दिया कि चिन्हित स्थानों पर यात्रियों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं। साथ ही नौका से आवागमन करने वाले लोगों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देने को कहा गया है।

घाटों तक पहुंचने वाली सड़कों की भी होगी मरम्मत

वैकल्पिक यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए केवल नौका परिचालन ही नहीं, बल्कि घाटों तक पहुंचने वाले अप्रोच रोड और संपर्क पथों को भी दुरुस्त करने पर जोर दिया गया।

बैठक में पथ निर्माण विभाग (RCD) की सड़कों की स्थिति और मरम्मत कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों से कार्यों की अद्यतन जानकारी लेते हुए आवश्यक सड़कों और संपर्क पथों को आवागमन के लिए सुगम बनाने के काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।

कौआ पुल की मरम्मत की भी हुई समीक्षा

बैठक में कहलगांव स्थित कौआ पुल की मरम्मत और उससे जुड़े कार्यों पर भी विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों से पुल की वर्तमान स्थिति, मरम्मत कार्य की प्रगति और आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए किए जा रहे तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रयासों की जानकारी ली गई।

जिला पदाधिकारी ने शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कराने का निर्देश दिया। पुल से जुड़े कार्यों में किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं हो, इसे लेकर नियमित निगरानी पर भी जोर दिया गया।

प्रशासन की सभी व्यवस्थाओं पर लगातार नजर

जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि विक्रमशिला पुल, वैकल्पिक यातायात मार्ग, नौका परिचालन, बोर्डिंग-डीबोर्डिंग प्वाइंट, घाटों तक जाने वाले संपर्क पथ और कौआ पुल से संबंधित कार्यों की नियमित निगरानी की जाए।

उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ आवश्यक तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करें, ताकि जरूरत की स्थिति में आम नागरिकों के आवागमन में किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो।

प्रशासन की इस बैठक को विक्रमशिला पुल से जुड़े संभावित यातायात दबाव और वैकल्पिक व्यवस्था को पहले से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर नौका परिचालन के लिए घाटों तक पहुंचने वाले मार्गों, बोर्डिंग-डीबोर्डिंग प्वाइंट और संपर्क सड़कों को तैयार रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।