Home Blog Page 95

बिहार में गन्ना किसानों की बदलेगी तकदीर: ईख आयुक्त की अध्यक्षता में ‘गन्ना परामर्शदात्री समिति’ का गठन

0

Patna News: बिहार के गन्ना उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को ईखायुक्त अनिल कुमार झा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय ‘गन्ना परामर्शदात्री समिति’ का गठन किया गया। इस समिति का मुख्य उद्देश्य गन्ने की उत्पादकता में सुधार करना और चीनी मिलों के साथ किसानों का बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

​समिति की संरचना: विशेषज्ञों और किसानों का अनूठा संगम

​इस नई समिति में तकनीकी विशेषज्ञों से लेकर जमीनी स्तर के किसानों तक को जगह दी गई है, ताकि निर्णय समावेशी हों:

  • ​अध्यक्ष:  अनिल कुमार झा (ईखायुक्त)।
  • ​प्रमुख सदस्य: निदेशक (ईख अनुसंधान संस्थान, पूसा) और निदेशक (गन्ना प्रजनक संस्थान, कोयंबटूर)।
  • ​सदस्य सचिव: ईख विकास के संयुक्त निदेशक या उपनिदेशक।
  • ​प्रतिनिधि: राज्य की सभी चीनी मिलों के महाप्रबंधक और सभी सहायक निदेशक (ईख विकास)।
  • ​किसानों की भागीदारी: प्रत्येक चीनी मिल क्षेत्र से एक-एक मनोनीत किसान और गैर-चीनी मिल क्षेत्रों से अधिकतम पांच प्रगतिशील किसानों को सदस्य बनाया गया है।

​क्या होंगे इस समिति के मुख्य कार्य?

​गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार, यह समिति केवल कागजी नहीं बल्कि धरातल पर बदलाव लाने के लिए काम करेगी:

  1. ​योजनाओं का निर्माण: गन्ना विकास के लिए नई योजनाओं का सूत्रण और उनकी मॉनिटरिंग करना।
  2. ​गुणवत्ता में सुधार: गन्ने की नई किस्मों और उन्नत खेती के तरीकों पर परामर्श देना।
  3. ​इनोवेशन: चीनी उद्योग में नए तकनीकी घटकों और इनोवेटिव आइडियाज को लागू करने के सुझाव देना।
  4. ​समग्र विकास: गन्ना आधारित उद्योगों और किसानों के हित से जुड़े हर आवश्यक विषय पर सरकार को सलाह देना।

​जरूरत पड़ने पर शामिल होंगे बाहरी विशेषज्ञ

​विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यकता हुई, तो समिति में अन्य विभागों के अधिकारियों और कृषि क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को भी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है। इससे बिहार के गन्ना क्षेत्र को ग्लोबल स्टैंडर्ड के अनुसार विकसित करने में मदद मिलेगी।

बिहार में डिजिटल गणना की रफ्तार तेज: मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की समीक्षा, भागलपुर-सहरसा समेत 5 जिले अव्वल

0

Patna News: बिहार में चल रहे जनगणना कार्यों और डिजिटल डेटा संग्रह को लेकर राज्य सरकार एक्शन मोड में है। सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलाधिकारियों (DMs) के साथ स्व-गणना (Self-Enumeration) और हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLB) के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यह राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​इन जिलों ने मारी बाजी, कुछ को मिली कड़ी चेतावनी

​समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जिलों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी रैंकिंग और प्रगति पर चर्चा की:

  • ​स्व-गणना में ‘सुपर 5’: वैशाली, मधुबनी, खगड़िया, भागलपुर और सहरसा ने स्व-गणना कार्य में सबसे शानदार प्रदर्शन किया है।
  • ​जियो-टेगिंग में अग्रणी: हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स के डिमारकेशन और जियो-टेगिंग कार्य में सहरसा, सिवान, रोहतास, पूर्णिया और खगड़िया की प्रगति सबसे बेहतर पाई गई।
  • ​पिछड़े जिलों को निर्देश: जिन जिलों की प्रगति धीमी है, उन्हें मुख्य सचिव ने ‘स्पेशल स्ट्रेटेजी’ बनाकर अगले एक सप्ताह के भीतर काम में तेजी लाने का कड़ा निर्देश दिया है।

​तकनीकी बाधाओं के लिए ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ तैयार

​जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक रंजीता ने बैठक में बताया कि मैदानी स्तर पर काम कर रहे प्रगणकों को तकनीकी दिक्कतें न आएं, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं:

  1. ​जिला नोडल अधिकारी: हर जिले में एक नोडल अधिकारी नामित किया गया है जो ट्रेनिंग और जियो-टेगिंग में मदद करेंगे।
  2. ​QRT की तैनाती: निदेशालय स्तर पर 3 क्विक रिस्पॉन्स टीमें बनाई गई हैं, जो जिला स्तर की समस्याओं का तुरंत समाधान करेंगी।
  3. ​अब तक की उपलब्धि: बिहार में अब तक 3 लाख 28 हजार से अधिक नागरिकों ने स्व-गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

​मुख्य सचिव का संदेश: “प्रतिदिन करें समीक्षा”

​मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि वे स्वयं इस कार्य की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कहा कि जियो-टेगिंग और ब्लॉक्स का डिमारकेशन सटीक होना चाहिए क्योंकि इसी पर भविष्य की योजनाओं का खाका निर्भर करता है।

नवगछिया में ‘मिट्टी’ के नीचे पुलिस ने पकड़ा शराब से लदा हाईवा, 7800 बोतलें देख उड़े होश!

0

Bhagalpur News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस लगातार एक्शन मोड में है। इसी कड़ी में नवगछिया पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। गुप्त सूचना के आधार पर इस्माइलपुर थाना पुलिस ने विक्रमशिला सेतु के पास एक हाईवा ट्रक से भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की है। तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए शराब के कार्टन को मिट्टी के नीचे दबाकर रखा था।

​मिट्टी के नीचे दबा था ‘मैखाना’, पुलिस भी रह गई हैरान

​पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि झारखंड के रास्ते एक हाईवा में अवैध शराब की बड़ी खेप नवगछिया की ओर आ रही है। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित कर विक्रमशिला सेतु के पास सघन वाहन जांच शुरू की गई।

​जांच के दौरान जब एक संदिग्ध हाईवा को रोककर तलाशी ली गई, तो ऊपर से सिर्फ मिट्टी दिख रही थी। लेकिन जब गहराई से जांच हुई, तो मिट्टी के नीचे छिपाकर रखे गए 325 कार्टन बरामद हुए। इन कार्टन से कुल 7,800 बोतल विदेशी शराब निकाली गई।

​आंकड़ों में पुलिस की कार्रवाई

  • ​कुल बरामद शराब: 7,800 बोतलें
  • ​कुल मात्रा: लगभग 2,925 लीटर
  • ​जब्त वाहन: हाईवा (मिट्टी लदा हुआ)
  • ​गिरफ्तार आरोपी: कुंदन कुमार (निवासी- सहरसा)

​सहरसा का चालक गिरफ्तार, सिंडिकेट की तलाश जारी

​मौके से पुलिस ने हाईवा चालक कुंदन कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जो सहरसा जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि शराब की यह खेप झारखंड में कहां से लोड की गई थी और नवगछिया या आसपास के इलाकों में इसे किसे डिलीवर किया जाना था।

​क्या बोले एसपी?

​मामले की जानकारी देते हुए नवगछिया एसपी राजेश कुमार ने बताया:

​”शराब माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम किया जा रहा है। गुप्त सूचना के आधार पर इस्माइलपुर पुलिस ने बेहतरीन कार्य किया है। इस पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है और इसमें संलिप्त अन्य लोगों को भी जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”

 

​प्रशासन की चेतावनी

​इस बड़ी बरामदगी के बाद पुलिस ने साफ कर दिया है कि चेकपोस्टों और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और कड़ी कर दी गई है। अवैध धंधे में शामिल लोगों की संपत्ति कुर्क करने और सख्त कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

मारवाड़ी कॉलेज में छात्रों का महासंग्राम! जर्जर छात्रावास और बदहाली को लेकर आर-पार की जंग

0

Bhagalpur News: शिक्षा के मंदिर में छात्र पढ़ाई की जगह अब अपनी जान की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। सोमवार को भागलपुर के प्रसिद्ध मारवाड़ी महाविद्यालय के छात्रों ने छात्रावास की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। बड़ी संख्या में छात्रों ने प्राचार्य कार्यालय का घेराव कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

​किसी भी वक्त गिर सकती है छत, डर के साये में कट रही रातें

​आंदोलित छात्रों का आरोप है कि महाविद्यालय का छात्रावास अब रहने लायक नहीं बचा है। भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि छत के प्लास्टर गिरना आम बात हो गई है। छात्रों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा:

​”हम रात को सोते समय चैन की नींद नहीं सो पाते। हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं सोते समय ऊपर से छत ही न गिर जाए। क्या कॉलेज प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?”

 

​बुनियादी सुविधाओं का भी टोटा: पीने के पानी तक को तरसे छात्र

​छात्रों ने केवल जर्जर भवन ही नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि हॉस्टल में पीने के शुद्ध पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। साफ-सफाई से लेकर अन्य जरूरी सुविधाओं के अभाव में छात्रों का जीना दूभर हो गया है।

​प्रशासनिक आश्वासन और 72 घंटे का अल्टीमेटम

​हंगामे और प्रदर्शन के बाद छात्रावास अधीक्षक छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और जल्द ही मरम्मत का कार्य शुरू कराया जाएगा। हालांकि, छात्र अब खोखले आश्वासनों पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।

​छात्रों ने दो-टूक लहजे में कॉलेज प्रशासन को 03 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि:

  • ​अगर 3 दिनों के भीतर पानी और मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
  • ​जरूरत पड़ने पर कॉलेज के मुख्य गेट पर तालाबंदी भी की जाएगी।

भागलपुर: दहेज की भेंट चढ़ी खुशियां? विवाहिता फरहा खातून लापता, ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप

0

Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर जिले के सबौर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक विवाहिता फरहा खातून संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई है। पीड़िता के पिता ने पति मो. मुन्ना और ससुराल वालों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और बेटी को गायब करने का गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

​2019 में हुई थी शादी, दहेज बना जी का जंजाल

​जानकारी के अनुसार, फरहा खातून का निकाह वर्ष 2019 में सनोखर थाना क्षेत्र के वंशीटिकर निवासी मो. अनवर के पुत्र मो. मुन्ना के साथ पूरे धूमधाम से हुआ था। लेकिन परिजनों का आरोप है कि निकाह के कुछ समय बाद ही खुशियों को दहेज के दानव की नजर लग गई। ससुराल पक्ष द्वारा लगातार दो लाख रुपये की मांग की जा रही थी। मांग पूरी न होने पर फरहा के साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न का सिलसिला शुरू हो गया।

​बच्चों से अलग कर घर से निकालने का आरोप

​परिजनों ने आवेदन में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोप है कि 7 अप्रैल 2026 को ससुराल वालों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए फरहा को उसके मासूम बच्चों से अलग कर दिया और जबरन घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद 15 अप्रैल को पति मो. मुन्ना ने फोन कर सूचना दी कि फरहा कहीं चली गई है।

​”जब हम अपनी बेटी की सुध लेने ससुराल पहुंचे, तो वहां मदद के बजाय हमारे साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई।” — पीड़ित परिजन

 

​पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल

​पीड़ित परिवार का आरोप केवल ससुराल पक्ष तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि जब वे न्याय की उम्मीद लेकर सबौर थाना पहुंचे, तो पुलिस का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें सहयोग देने के बजाय पुलिस द्वारा कथित रूप से धमकी देकर भगा दिया गया, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।

​अनहोनी की आशंका, न्याय की गुहार

​फरहा खातून के अचानक लापता होने से मायके पक्ष में किसी बड़ी अनहोनी की आशंका गहरा गई है। परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  • ​मो. मुन्ना और दोषी ससुराल पक्ष पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो।
  • ​फरहा खातून की जल्द से जल्द बरामदगी सुनिश्चित की जाए।
  • ​मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों को कड़ी सजा दी जाए।

भोजपुर में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के सभी 5 आरोपी 07 घंटे में गिरफ्तार

0

Patna News: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वारदात को अंजाम दिया गया। हालांकि, घटना की सूचना मिलते ही भोजपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महज 7 घंटे के भीतर कांड में शामिल सभी 5 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।

​क्या है पूरा मामला?

​पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, घटना 19 अप्रैल 2026 की है। पीड़िता रविवार की रात करीब 8:30 बजे शौच के लिए गांव के बाहर गई थी। इसी दौरान गांव के ही पांच युवकों ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया।

​घटना की जानकारी मिलते ही शाहपुर थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू की। पीड़िता के फर्दबयान के आधार पर शाहपुर थाना कांड संख्या 99/26 दर्ज किया गया।

​इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

​पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ कठोर धाराओं में मामला दर्ज किया है:

  • ​धारा 70 (2) BNS 2023 (सामूहिक दुष्कर्म)
  • ​धारा 4/6 POCSO Act 2012 (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम)

​SIT का गठन और त्वरित गिरफ्तारी

​भोजपुर पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशानुसार, मामले के त्वरित उद्भेदन के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जगदीशपुर के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया।

​गठित टीम ने तकनीकी अनुसंधान और गुप्त सूचनाओं के आधार पर छापेमारी की और घटना के मात्र 07 घंटे के भीतर सभी 5 आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

​गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान

​पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बनकट के रहने वाले हैं:

  1. ​प्रमोद धानुक उर्फ प्रमोद कुमार प्रसाद (पिता- नंदजी धानुक)
  2. ​दिप्पू धानुक उर्फ दिप्पू कुमार प्रसाद (पिता- बहादुर धानुक)
  3. ​बबलू धानुक उर्फ बबलू कुमार (पिता- महावीर धानुक)
  4. ​टेंगटी पाल उर्फ संजय पाल (पिता- छोटक पाल)
  5. ​जितेश कुमार (पिता- रामायण ठाकुर)

​पुलिस की मुस्तैदी की सराहना

​इतने संवेदनशील मामले में भोजपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई की स्थानीय स्तर पर सराहना हो रही है। पुलिस का कहना है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए स्पीडी ट्रायल का सहारा लिया जाएगा।

सुल्तानगंज-अगुवानी घाट पुल को लेकर मुख्य सचिव का बड़ा फैसला; मई 2026 तक एप्रोच रोड हर हाल में पूरा करने का अल्टीमेटम

0

Patna News: बिहार की बहुप्रतीक्षित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सुल्तानगंज-अगुवानी घाट महासेतु परियोजना को लेकर राज्य सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सोमवार को मुख्य सचिव  प्रत्यय अमृत ने इस 2×2 लेन पुल और इसके पहुँच पथ (Approach Road) के निर्माण कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि मई 2026 की समय-सीमा पत्थर की लकीर है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​पसराहा ROB और इंटरचेंज: बाधाएं हुईं दूर

​समीक्षा बैठक के दौरान परियोजना की तकनीकी बाधाओं को सुलझाने पर सकारात्मक चर्चा हुई:

  • ​डिजाइन को हरी झंडी: पसराहा रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) के लिए CSIR से डिजाइन और ड्राइंग का अनुमोदन 10 अप्रैल 2026 को प्राप्त हो चुका है, जिससे निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
  • ​पसराहा इंटरचेंज: इसके पुनरीक्षित प्रस्ताव पर NOC के लिए बेगूसराय पीआईयू (PIU) के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर मामलों को जल्द सुलझाने का निर्देश दिया गया है।

​सेफ्टी ऑडिट में देरी पर ‘रेड सिग्नल’

​मुख्य सचिव ने सुरक्षा मानकों को लेकर संवेदक (ठेकेदार) को सख्त चेतावनी दी। EDB-3 (P13 से P16) के लिए लंबित ‘सेफ्टी ऑडिट’ और ‘इंटीग्रिटी टेस्ट रिपोर्ट’ अभी तक जमा नहीं करने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आदेश दिया कि पुल की सुरक्षा से जुड़ी ये रिपोर्ट्स अविलंब सौंपी जाएं ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

​मुख्य सचिव के 4 ‘सुपर निर्देश’:

  1. ​संसाधनों में भारी वृद्धि: मई 2026 तक एप्रोच रोड का काम खत्म करने के लिए साइट पर मशीनरी और श्रमिकों (Manpower) की संख्या तुरंत बढ़ाने का हुक्म दिया गया है।
  2. ​टाइमलाइन का कड़ाई से पालन: मुख्य सचिव ने कहा कि पहुँच पथ के बिना पुल की उपयोगिता अधूरी है, इसलिए इसे प्राथमिकता पर रखा जाए।
  3. ​प्रशासनिक समन्वय: रेलवे और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर उन बाधाओं को दूर किया जाए जिनकी वजह से काम रुक सकता है।
  4. ​जीरो टॉलरेंस ऑन क्वालिटी: गति बढ़ाने के चक्कर में निर्माण की गुणवत्ता और संरचनात्मक सुरक्षा (Structural Safety) के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

​क्यों अहम है यह पुल?

​भागलपुर के सुल्तानगंज और खगड़िया के अगुवानी घाट को जोड़ने वाला यह महासेतु न केवल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले के दौरान कांवरियों और स्थानीय व्यापारियों के लिए वरदान साबित होगा। 1700 करोड़ से अधिक की लागत वाली इस परियोजना पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हैं।

उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले ‘बख्तियारपुर-ताजपुर महासेतु’ पर बड़ा अपडेट; मुख्य सचिव ने दिए ‘मिशन मोड’ में काम के निर्देश

0

Patna News: बिहार की परिवहन व्यवस्था और कनेक्टिविटी के लिए गेम-चेंजर मानी जाने वाली बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु परियोजना अब अपनी निर्णायक स्थिति में पहुँच गई है। मुख्य सचिव  प्रत्यय अमृत ने आज इस ग्रीनफील्ड महासेतु के अवशेष कार्यों की गहन समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव ने साफ कर दिया कि यह सेतु केवल एक पुल नहीं, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच की दूरी कम करने वाली जीवनरेखा है, इसलिए इसकी समय-सीमा और गुणवत्ता में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​प्रगति रिपोर्ट: सेगमेंट कास्टिंग ने पकड़ी रफ्तार

​समीक्षा बैठक में मिले आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो महीनों में निर्माण कार्य में तेजी देखी गई है:

  • ​मार्च 2026: निर्धारित 40 सेगमेंट की कास्टिंग के लक्ष्य के मुकाबले 39 सेगमेंट का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
  • ​अप्रैल 2026: अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक 29 सेगमेंट का लक्ष्य था, जिसमें से 26 सेगमेंट तैयार हो चुके हैं।
  • ​आने वाला लक्ष्य: एजेंसी को शेष 438 सेगमेंट की कास्टिंग के लिए प्रति माह 40 सेगमेंट की रफ़्तार (Asking Rate) बनाए रखने का टास्क दिया गया है।
  • ​इरेक्शन अपडेट: लॉन्चिंग गर्डर (LG) के माध्यम से काम जारी है और पीयर P-29 तक इरेक्शन कार्य को मई 2027 तक पूर्ण करने का प्रस्ताव रखा गया है।

​मुख्य सचिव के कड़े निर्देश: संसाधनों की कमी को तुरंत करें दूर

​मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने समीक्षा के दौरान एजेंसी और अधिकारियों को कार्य कुशलता बढ़ाने के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए:

  1. ​संसाधनों में बढ़ोतरी: P-33 से A2 तक के 12 महत्वपूर्ण स्पैन का कार्य समय पर पूरा करने के लिए सी़एफटी (CFT) सेटों की संख्या तुरंत बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
  2. ​मानसून के लिए विशेष रणनीति: मुख्य सचिव ने कहा कि मानसून के दौरान आने वाली बाधाओं को ध्यान में रखते हुए अभी से सेगमेंट कास्टिंग की दर को बढ़ाकर रखा जाए, ताकि वार्षिक लक्ष्य प्रभावित न हो।
  3. ​साप्ताहिक मॉनिटरिंग: एजेंसी के काम और साप्ताहिक लक्ष्यों की निगरानी अब मुख्यालय स्तर से की जाएगी। किसी भी तकनीकी समस्या का समाधान तुरंत ‘ऑन द स्पॉट’ करने के निर्देश दिए गए हैं।
  4. ​डेडलाइन पर कड़ाई: मुख्य सचिव ने दोटूक शब्दों में कहा कि मई 2027 तक इस महासेतु को जनता के लिए समर्पित करना सरकार की प्राथमिकता है।

​क्यों खास है यह महासेतु?

​यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट बख्तियारपुर (NH-31) को सीधे ताजपुर (NH-28) से जोड़ेगा। इसके शुरू होने से पटना से समस्तीपुर, बेगूसराय और उत्तर बिहार के अन्य जिलों की यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। 1822.23 करोड़ रुपये की अवशेष लागत वाली यह परियोजना राज्य के व्यापार और आर्थिक विकास को नई गति देगी।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का ‘एक्शन प्लान’; मंडई वीयर और नहर परियोजना को समय पर पूरा करने का अल्टीमेटम

0

Patna News: बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और सिंचाई नेटवर्क को विस्तार देने के लिए राज्य सरकार बेहद गंभीर है। इसी कड़ी में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने आज मंडई वीयर (Mandai Weir) और उससे जुड़ी मुख्य नहर प्रणाली की प्रगति की हाई-लेवल समीक्षा की। 232.83 करोड़ रुपये की इस परियोजना में संसाधनों की कमी देख मुख्य सचिव ने सख्त नाराजगी जाहिर की और अधिकारियों को ‘वॉर-फुटिंग’ (युद्धस्तर) पर काम करने का आदेश दिया।

​प्रगति रिपोर्ट: कहाँ तक पहुँचा काम?

​बैठक में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मुख्य सचिव को अवगत कराया गया कि परियोजना के विभिन्न हिस्सों पर काम चल रहा है। 06 अप्रैल 2026 के बाद से हुई प्रगति के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • ​कररूआ डिस्ट्रीब्यूटरी: यहाँ सबसे अच्छी प्रगति देखी गई है, जहाँ 4.50% की बढ़त के साथ कुल 65.55% काम पूरा हो चुका है।
  • ​लेफ्ट हेड रेगुलेटर (Left H/R): इसका 62.10% भौतिक कार्य संपन्न हो गया है।
  • ​मुख्य नहरें (RMC & LMC): दायां मुख्य नहर (RMC) का 48.95% और बायां मुख्य नहर (LMC) का 53.60% काम पूरा हुआ है।
  • ​एफ़्लक्स बंद: लेफ्ट एफ़्लक्स बंद का 33.50% और राइट एफ़्लक्स बंद का 33.30% कार्य पूरा कर लिया गया है।

​मुख्य सचिव के कड़े निर्देश: संसाधनों की कमी पर जताई नाराजगी

​समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने पाया कि कई साइट्स पर लेबर और मशीनों (एक्सकेवेटर, टिपर) की संख्या मानक से कम है। इस पर उन्होंने निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. ​संसाधनों में तत्काल वृद्धि: मुख्य सचिव ने दोटूक कहा कि मैनपावर और मशीनरी की कमी को तुरंत दूर किया जाए। काम की गति बढ़ाने के लिए अतिरिक्त लेबर और उपकरण तैनात किए जाएं।
  2. ​मानसून ‘डेडलाइन’: बारिश का मौसम शुरू होने से पहले मिट्टी (Earthwork) और लाइनिंग के सभी महत्वपूर्ण कार्यों को हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है, ताकि मानसून में काम प्रभावित न हो।
  3. ​मिट्टी की बाधा होगी दूर: जिन क्षेत्रों में मिट्टी की उपलब्धता या परिवहन (Transport) की समस्या है, वहां जिला प्रशासन के सहयोग से वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
  4. ​साप्ताहिक रिपोर्टिंग: अब इस परियोजना की निगरानी केवल दफ्तरों से नहीं होगी। वरीय अधिकारियों को नियमित साइट विजिट करने और हर हफ्ते प्रगति रिपोर्ट (Weekly Progress Report) सौंपने का आदेश दिया गया है।
  5. ​पेंडिंग फाइलों का निपटारा: निविदा (Tender) प्रक्रिया और तकनीकी स्वीकृतियों के जो भी मामले लंबित हैं, उन्हें तत्काल क्लियर करने का निर्देश दिया गया है।

​किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

​मुख्य सचिव ने जोर देकर कहा कि मंडई वीयर परियोजना बिहार के एक बड़े ग्रामीण क्षेत्र के लिए जीवन रेखा है। इसके पूर्ण होते ही हजारों एकड़ भूमि तक सिंचाई का पानी पहुँचेगा, जिससे न केवल पैदावार बढ़ेगी बल्कि किसानों की आय में भी इजाफा होगा।

​बैठक में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित जिलों के जिलाधिकारी और संवेदक (Contractors) भी शामिल हुए।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का कड़ा रुख; उत्तर कोयल जलाशय योजना को मानसून से पहले रफ्तार देने का निर्देश

0

Patna News: बिहार की कृषि और सिंचाई व्यवस्था के लिए लाइफलाइन मानी जाने वाली उत्तर कोयल जलाशय योजना (North Koel Reservoir Project) को समय पर पूरा करने के लिए सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। सोमवार को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग (मुख्य सचिव कोषांग) में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव  प्रत्यय अमृत ने परियोजना के अवशेष कार्यों की गहन समीक्षा की और अधिकारियों को ‘मिशन मोड’ में काम करने की चेतावनी दी।

​प्रगति रिपोर्ट: 13 दिनों में दिखी तेजी, पर अभी लंबा सफर बाकी

​समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने परियोजना के वर्तमान आंकड़ों का विश्लेषण किया। बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार:

  • ​कुल भौतिक प्रगति: पूरी परियोजना का अब तक 29.97% कार्य संपन्न हो चुका है।
  • ​राइट मेन कैनाल (RMC): इसका 55.04% कार्य पूरा हो गया है। विशेष रूप से पिछले 13 दिनों में 4.11% की तेज प्रगति दर्ज की गई है, जिसे मुख्य सचिव ने सकारात्मक तो बताया, लेकिन इसे और बढ़ाने के निर्देश दिए।
  • ​ग्राउंड जीरो पर संसाधन: वर्तमान में कार्यस्थल पर 571 कर्मी और भारी मशीनरी (एक्सकेवेटर, डम्पर, लाइनिंग पेवर) तैनात हैं।

​भू-अर्जन पर ‘डेडलाइन’ का प्रहार

​परियोजना में सबसे बड़ी बाधा बन रहे भू-अर्जन के मामलों पर मुख्य सचिव ने सख्त रुख अख्तियार किया है। औरंगाबाद और गया जिलों के जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं:

  1. ​औरंगाबाद: 41.251 हेक्टेयर भूमि के शेष हिस्से का अधिग्रहण हर हाल में 30 अप्रैल 2026 तक पूरा करना होगा।
  2. ​गया: यहाँ भी भू-अर्जन की प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुँचाकर जल्द से जल्द जमीन सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।

​मुख्य सचिव के 5 कड़े निर्देश: कार्य में लापरवाही की जगह नहीं

​”हमारा लक्ष्य कमांड एरिया के किसानों तक जल्द से जल्द पानी पहुँचाना है। इसमें किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” – प्रत्यय अमृत, मुख्य सचिव

 

  1. ​मानसून से पहले का लक्ष्य: मानसून की बारिश शुरू होने से पहले नहरों के अर्थ वर्क और लाइनिंग का अधिकतम कार्य पूरा कर लिया जाए।
  2. ​संसाधनों की बढ़ोतरी: जरूरत पड़ने पर मैनपावर और मशीनों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए ताकि शिफ्टों में काम चल सके।
  3. ​तकनीकी मूल्यांकन: वितरण प्रणाली (Distribution System) से जुड़ी निविदाओं (Tenders) का निपटारा तुरंत करने को कहा गया है।
  4. ​गुणवत्ता पर पहरा: निर्माण कार्य की क्वालिटी में कोई समझौता न हो, इसके लिए मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित रूप से ‘साइट विजिट’ करने का आदेश दिया गया है।
  5. ​विशेष संरचनाओं पर ध्यान: KM 64.150 और KM 68.00 पर बन रहे गेट और होइस्ट सिस्टम के काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है।

​परियोजना का महत्व

​1367.61 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना के पूर्ण होने से औरंगाबाद और गया जिलों के हजारों हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। यह न केवल सूखे की समस्या को समाप्त करेगी बल्कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।