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भागलपुर में सहकारिता मंत्री ने की समीक्षा बैठक: किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर दिया जोर

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Bhagalpur News: सहकारिता को ग्रामीण विकास और किसानों की आय में वृद्धि का मुख्य साधन मानते हुए बिहार सरकार ने भागलपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। 20 जुलाई को डॉ. प्रेम कुमार, माननीय सहकारिता मंत्री, बिहार सरकार की अध्यक्षता में यह बैठक सर्किट हाउस, भागलपुर में आयोजित की गई, जिसमें पैक्स, व्यापार मंडलों, अन्य सहकारी समितियों के अध्यक्षों, प्रबंधकों एवं किसानों ने भाग लिया।

किसानों की आय दोगुनी करना है मुख्य लक्ष्य

बैठक में माननीय मंत्री ने कहा,

“सहकार से समृद्धि की ओर राज्य को ले जाना है। रैयत हो या गैर-रैयत कृषक, सभी को सहकारिता से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाएगा।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार सहकारी संगठनों के माध्यम से पारदर्शी और प्रभावी योजनाएं लागू कर रही है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल सके।

फसल सहायता योजना में अभूतपूर्व भागीदारी

सहकारिता विभाग द्वारा किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए फसल सहायता योजना चलाई जा रही है।

  • रबी 2024 में 33,344 किसानों के आवेदन प्राप्त हुए
  • रबी 2023 में 472 आवेदन
  • खरीफ 2023 में 32,182 आवेदन
  • खरीफ 2024 में 4,140 आवेदन
    इन सभी का सत्यापन कर विभाग को भेजा जा चुका है।

धान एवं गेहूँ अधिप्राप्ति में बड़ी सफलता

  • धान अधिप्राप्ति लक्ष्य: 50,731 मैट्रिक टन
  • अब तक अधिप्राप्त: 42,196.38 एमटी (6,698 किसानों से)
  • CMR आपूर्ति: 26,727 एमटी (20 जुलाई तक)
  • गेहूं अधिप्राप्ति: 14 किसानों से 7.30 एमटी गेहूं

सभी किसानों को समय पर भुगतान कर दिया गया है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर किसानों का विश्वास बढ़ा है।

दलहन और सब्ज़ी अधिप्राप्ति को बढ़ावा

  • 5 व्यापार मंडलों का चयन दलहन क्रय हेतु
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य:
    • चना: ₹5650/क्विंटल
    • मसूर: ₹8700/क्विंटल
    • सरसों: ₹6950/क्विंटल
  • दलहन क्रय प्रारंभ: 25 जून 2025 से

12 प्रखंडों में किसान उत्पादन सहकारी समितियों का गठन और 15 प्रखंडों में सब्जी उत्पादक समितियों की स्थापना की जा चुकी है।

सहकारी समितियों से मिल रही व्यापक सुविधाएं

  • 75 पैक्स में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) कार्यरत
    • 300 प्रकार की सेवाएं उपलब्ध: बिजली बिल, जाति/आय प्रमाण पत्र, रेलवे टिकट, धान अधिप्राप्ति आवेदन आदि
  • 12 प्रखंडों में शहद उत्पादन व प्रसंस्करण सहकारी समिति
  • दुग्ध सहकारी समिति (सुधा) के माध्यम से गाय/भैंस पालन को बढ़ावा
  • गोदाम निर्माण, पंचायत स्तरीय ग्राहक सेवा केंद्र, JLG समूह, संदेश दीदी योजना जैसे प्रयासों से रोजगार का सृजन

सहकारिता: एक जन-आंदोलन की ओर

बैठक में मंत्री ने कहा कि अब सहकारिता केवल संस्था नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का आंदोलन बन चुका है। बुनकर, मत्स्यपालक, मधुमक्खी पालक—हर वर्ग को सहकारी ढांचे से जोड़कर उन्हें आगे लाया जाएगा।

बैठक का समापन

बैठक के अंत में मंत्री ने संयुक्त निबंधक, जिला सहकारिता पदाधिकारी, एवं भागलपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक सहित सभी अधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

तेज रफ्तार ट्रक ने ली दो मजदूरों की जान, गोराडीह में शोक और आक्रोश का माहौल

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भागलपुर: भागलपुर जिले के गोराडीह थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब दोनों मजदूर ढलाई कार्य के लिए मिक्सर मशीन लेकर बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान एक तेज़ रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक ने पीछे से उनकी बाइक को ज़ोरदार टक्कर मार दी।

हादसा इतना भयावह था कि एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे को गंभीर हालत में मायागंज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतकों में से एक की पहचान प्रदीप कुमार यादव (निवासी: नया टोला, अगरपुर) के रूप में हुई है।

मौके पर चीख-पुकार, परिजनों पर टूटा दुख का पहाड़

जैसे ही घटना की सूचना मृतकों के परिजनों तक पहुँची, उनका रो-रो कर बुरा हाल हो गया। परिजन तुरंत घटनास्थल पर पहुँचे, जहां का मंजर देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। स्थानीय ग्रामीणों ने घटना से क्षुब्ध होकर सड़क पर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

सूचना मिलने के बाद गोराडीह थाना पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ट्रक को जब्त कर लिया गया है, हालांकि चालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

ग्रामीणों ने बताया कि गोराडीह क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहनों का आतंक दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। मुख्य सड़क पर स्पीड कंट्रोल के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका हमेशा बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है।

प्रशासन के लिए चेतावनी

यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासन और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी।

भागलपुर में शुरू हुआ IdeaGram Incubator: स्टार्टअप्स को दिशा देने की एक नई पहल

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भागलपुर, बिहार: बढ़ती बेरोजगारी, सीमित सरकारी नौकरियाँ और अस्थिर प्राइवेट सेक्टर की चुनौतियों के बीच, बिहार के भागलपुर में एक नई पहल की शुरुआत हुई है—IdeaGram Incubator। यह इनक्यूबेशन सेंटर उन युवाओं के लिए एक संभावित समाधान बनकर उभरा है, जो या तो अपने बिज़नेस आइडिया को साकार नहीं कर पा रहे हैं, या जो लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे हुए हैं, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही।

समस्या की जड़: विकल्प सीमित, तैयारी अंतहीन
हर साल लाखों छात्र स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी करते हैं। उनमें से एक बड़ी संख्या विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लग जाती है।
हालांकि, हकीकत यह है कि सरकारी नौकरियों की संख्या लगातार घटती जा रही है, परीक्षाएं बार-बार स्थगित हो रही हैं, और अनिश्चितता का माहौल युवाओं को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित कर रहा है।

दूसरी ओर, निजी क्षेत्र की नौकरियाँ भी स्थायी नहीं रहीं। डिजिटल ऑटोमेशन, कॉन्ट्रैक्ट वर्क कल्चर, और तेज़ी से बदलती स्किल डिमांड्स ने प्राइवेट जॉब्स को भी अस्थिर बना दिया है। इन सबके बीच सवाल उठता है—युवाओं के पास विकल्प क्या हैं?

बिज़नेस की ओर झुकाव, लेकिन शुरुआत कैसे करें?
इन परिस्थितियों में कई युवा अपना खुद का काम शुरू करना चाहते हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या होती है —

सही आइडिया की कमी,

बाज़ार की समझ का अभाव,

शुरुआती पूँजी न होना, और

यह डर कि अगर असफल हो गए तो आगे क्या होगा।

IdeaGram Incubator इन्हीं सवालों का जवाब देने की कोशिश कर रहा है। इसका उद्देश्य है युवाओं को सिर्फ एक मोटिवेशनल भाषण नहीं, बल्कि व्यवस्थित प्रशिक्षण, संसाधन और मार्गदर्शन देना, ताकि वे अपने विचारों को व्यवस्थित ढंग से व्यवसाय में बदल सकें।

IdeaGram क्या करता है?
IdeaGram Incubator, भागलपुर स्थित एक प्रशिक्षण और सहायता केंद्र है, जो स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक युवाओं को शुरुआती स्तर से लेकर लॉन्च और विस्तार तक की प्रक्रिया में मदद करता है। यह विशेष रूप से दो वर्गों के लिए प्रासंगिक है:

वे युवा जिनके पास कोई आइडिया है लेकिन उसे क्रियान्वित करने की जानकारी नहीं है,

और वे जो अब भी पारंपरिक नौकरी विकल्पों में सफलता नहीं पा सके हैं, और एक नया रास्ता तलाशना चाहते हैं।

इस सेंटर में दिए जाने वाले प्रशिक्षण में शामिल हैं:

बिज़नेस आइडिया डेवलपमेंट वर्कशॉप्स,

मार्केट रिसर्च और कस्टमर अंडरस्टैंडिंग,

लघु पूँजी में स्टार्टअप मॉडल तैयार करना,

व्यावसायिक योजना (बिजनेस प्लान) बनाना,

पिच डेक और फंडिंग की मूल बातें,

और व्यवसाय में आने वाली कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी।

इसके अलावा, प्रतिभागियों को कंसल्टेंट्स की मेंटरशिप, कार्यस्थल, और निजी मीटिंग स्पेस जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

अगर आइडिया नहीं है तो?
एक बड़ी विशेषता यह है कि यह इनक्यूबेटर उन लोगों के लिए भी उपयुक्त है जिनके पास अभी कोई व्यवसायिक विचार नहीं है। IdeaGram में एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसके ज़रिये समस्याओं की पहचान से लेकर उनके समाधान पर आधारित बिज़नेस आइडिया बनाने तक की ट्रेनिंग दी जाती है। इस प्रक्रिया में स्थानीय और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए युवाओं को व्यावहारिक और सामाजिक रूप से उपयोगी समाधान खोजने के लिए तैयार किया जाता है।

स्थापना के पीछे का अनुभव
IdeaGram Incubator के संस्थापक और निदेशक हैं शशांक शेखर, जो एक अनुभवी बिज़नेस कंसल्टेंट हैं। उनके पास 20 वर्षों का अनुभव है और उन्होंने अमेरिका, अफ्रीका और एशिया में विभिन्न निजी और सरकारी परियोजनाओं का नेतृत्व किया है।
उनका मानना है कि “बेरोजगारी सिर्फ एक आर्थिक चुनौती नहीं है, यह सामाजिक असंतुलन का कारण भी बन सकती है। अगर युवाओं को सही दिशा, प्लेटफॉर्म और आत्मविश्वास मिले, तो वे खुद न सिर्फ अपने लिए रोजगार पैदा कर सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी अवसर उत्पन्न कर सकते हैं।”

क्या यह मॉडल स्केलेबल है?
IdeaGram की यह पहल माइक्रो इनक्यूबेशन मॉडल पर आधारित है, जिसे छोटे शहरों और कस्बों में दोहराया जा सकता है। इसकी ज़रूरत इसलिए है क्योंकि भारत में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली युवा छोटे शहरों में रहते हैं, जिन तक अभी तक स्टार्टअप इकोसिस्टम की पहुँच नहीं हो पाई है।
इस मॉडल की सफलता आने वाले वर्षों में यह तय करेगी कि क्या भारत की इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप यात्रा सचमुच गांवों और कस्बों तक पहुंच पाती है या नहीं।

निष्कर्ष
भागलपुर जैसे शहरों में IdeaGram Incubator की शुरुआत इस बात का संकेत है कि अब इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप केवल महानगरों तक सीमित नहीं रह गए हैं।
सही दिशा, संसाधन और सहयोग के साथ, छोटे शहरों के युवा भी आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं।

स्थान: आशियाना, न्यू कॉलोनी, छोटी खंजरपुर (अल्फा जिम के बगल में), भागलपुर
संपर्क: 📞 9170079555
Instagram: @ideagrambhagalpur

भागलपुर में संभावित बाढ़ से निपटने को लेकर प्रशासन पूरी तरह तैयार: आपदा प्रबंधन की व्यापक व्यवस्था

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भागलपुर: संभावित बाढ़ को लेकर भागलपुर जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन के तहत सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिला के 16 अंचलों के 238 पंचायतों में ऑटोमेटिक रेन गेज (वर्षा मापक यंत्र) स्थापित किए गए हैं, जो सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। 19 जुलाई तक जिले में कुल 122.70 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

प्रशासन ने बाढ़ से संभावित रूप से प्रभावित 447 गांवों की पहचान की है, जो 122 पंचायतों में स्थित हैं। राहत व बचाव कार्यों के लिए 94 दलों का गठन किया गया है, जिनमें एसडीआरएफ के 57 जवान तैनात हैं। इनके साथ 106 मोटरबोट भी तैयार रखी गई हैं।

राहत शिविर और स्वास्थ्य सुविधाएं

  • कुल 171 मानव राहत शिविरों की पहचान की गई है जहां सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की जा रही है।
  • 4,06,507 परिवारों का डेटा आपदा संपूर्ति पोर्टल पर अपलोड किया गया है।
  • शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है:
    • 3,65,093 हाइड्रोजन टैबलेट,
    • 15,07,141 ओआरएस पैकेट,
    • 4980 सर्पदंश की दवाएं,
    • 61,641 एंटी-रेबीज वैक्सीन,
    • 19,35,437 अजिथ्रोमाइसिन टैबलेट और
    • 13,555 सिरप उपलब्ध हैं।
  • 186 चिकित्सा राहत केंद्र, 28 पशु स्वास्थ्य केंद्र, और 33 पशु उप-स्वास्थ्य केंद्र चिन्हित किए गए हैं।

तटबंधों और संरचनात्मक सुरक्षा पर कार्य

  • तटबंधों पर अब तक:
    • 35.30 मीटर मिट्टी भराई,
    • 242 मीटर सीट पीलिंग,
    • 570 मीटर बोल्डर क्रेटिंग,
    • 440 मीटर गैबियन वर्क,
    • 19751 जियोबैग से दो लेयर पिचिंग कराई गई है।

मानव संसाधन और आपात उपकरण

  • जिले में 248 प्रशिक्षित गोताखोर और 501 आपदा मित्र उपलब्ध हैं।
  • 128 निजी नावें, 95 लाइफ जैकेट, 22,302 पॉलिथीन सीट, और 12 टेंट की व्यवस्था की गई है।
  • 200 अतिरिक्त लाइफ जैकेट की खरीद के लिए निविदा निकाली जा चुकी है।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24×7 सक्रिय

प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, जो 22 जुलाई से 31 अक्टूबर 2025 तक 24 घंटे कार्यरत रहेगा।

📞 दूरभाष संख्या: 0641-2402871
📱 मोबाइल नंबर: 9471920050

जिला प्रशासन की इन तैयारियों से स्पष्ट है कि बाढ़ से निपटने के लिए भागलपुर हर स्तर पर सजग और सक्रिय है।

जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने की कई विभागों की समीक्षा, बाढ़ और विकास कार्यों पर दिया विशेष जोर

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भागलपुर: भागलपुर समाहरणालय में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण विभागों की समग्र समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य फोकस आपदा प्रबंधन, भू-अर्जन, बाढ़ से बचाव, स्वच्छता अभियान, सड़क मरम्मत और जनशिकायतों के त्वरित समाधान पर रहा।

बैठक में बताया गया कि जिले में नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और इसके लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं। 12 एसडीआरएफ टीम, 22 हजार पॉलिथीन सीट, 171 शरण स्थल, 166 सामुदायिक किचन, तथा 128 निजी नावों को चिन्हित किया गया है। बिंद टोली में तटबंध सुरक्षा हेतु स्टील शीट की दीवार लगाई गई है।

जिलाधिकारी ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों की निगरानी, 100 बच्चों के लिए अतिरिक्त लाइफ जैकेट, और स्लोप खाली कराने जैसे निर्देश दिए। जल संसाधन विभाग को तटबंधों के खतरनाक बिंदुओं की पहचान कर कार्रवाई करने को कहा गया।

इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण कार्य, भोलानाथ पुल और बौंसी आरओबी जैसे परियोजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा की गई। रेलवे से संबंधित 18 में से 15 भूखंडों का अधिग्रहण पूर्ण हो चुका है।

आरटीपीएस पोर्टल पर भागलपुर जिला पहले स्थान पर पहुंचने के लिए आईटी प्रबंधक श्रीमती पूनम कुमारी को बधाई दी गई। विकास शाखा द्वारा स्वच्छता अभियान, डोर-टू-डोर कचरा उठाव, और मनरेगा योजनाओं की स्थिति से भी जिलाधिकारी को अवगत कराया गया।

नवगछिया जीरोमाइल तक सड़क मरम्मत को 48 घंटे में पूरा करने, विक्रमशिला पुल पर सीसीटीवी कैमरा लगाने और उसे आई-ट्रिपल-सीसीसी से जोड़ने के निर्देश दिए गए।

बैठक में विभिन्न विभागों के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे और सभी को दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

ममलखा कालीघाट और चायचक में गंगा कटाव तेज, सांसद प्रतिनिधि अर्पणा कुमारी ने किया स्थलीय निरीक्षण

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भागलपुर: गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के कारण ममलखा कालीघाट और चायचक क्षेत्रों में हो रहे गंभीर नदी कटाव को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। सोमवार को इस संबंध में सांसद प्रतिनिधि सुश्री अर्पणा कुमारी ने बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ कटाव स्थलों का निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिए।

कटाव रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्रवाई के निर्देश

निरीक्षण के दौरान अर्पणा कुमारी ने अधिकारियों से कहा कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कटाव को रोकने के लिए मानवबल, संसाधनों और मशीनरी को तुरंत मौके पर लगाने के निर्देश दिए ताकि स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके।

विभाग के अधिकारी मौके पर रहे मौजूद

निरीक्षण के समय बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता मौके पर मौजूद थे। उन्होंने सांसद प्रतिनिधि को स्थिति की विस्तृत जानकारी दी और कटाव से निपटने के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया।

ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद

स्थानीय लोगों ने बताया कि गंगा की धारा तेजी से किनारों को काट रही है, जिससे खेत, घर और सड़कें खतरे में हैं। सांसद प्रतिनिधि की सक्रियता से ग्रामीणों को राहत की उम्मीद जगी है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द बचाव कार्य और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

भागलपुर व्यवहार न्यायालय से निकला मध्यस्थता जागरूकता रथ, सुलभ न्याय की दिशा में 90 दिवसीय अभियान की शुरुआत

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भागलपुर: जनता को तेज़, सुलभ और शांतिपूर्ण न्याय दिलाने के उद्देश्य से भागलपुर व्यवहार न्यायालय से सोमवार को एक विशेष “मध्यस्थता जागरूकता रथ” को रवाना किया गया। यह रथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों को मध्यस्थता (Mediation) के माध्यम से विवादों के समाधान के बारे में जागरूक करेगा।

इस अवसर पर फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश श्री राजकुमार राजपूत सहित विभिन्न न्यायालयों के माननीय न्यायाधीशों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रथ को रवाना किया।

1 जुलाई से 30 सितंबर तक चलेगा मध्यस्थता विशेष अभियान

इस पहल को प्रधान जिला न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, भागलपुर के निर्देश पर शुरू किया गया है। यह अभियान 1 जुलाई से 30 सितंबर 2025 तक यानी कुल 90 दिनों तक चलेगा। इसका उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों में कमी लाना और जनता को सुलह-सफाई के माध्यम से त्वरित समाधान का अवसर देना है।

मध्यस्थता: त्वरित न्याय की एक प्रभावी विधि

मध्यस्थता वह प्रक्रिया है जिसमें पक्षकार आपसी बातचीत और समन्वय के माध्यम से किसी विवाद का समाधान निकालते हैं — बिना लम्बे कानूनी संघर्ष के।
जागरूकता रथ इस संदेश को गांव-गांव और शहर के कोनों तक पहुंचाने का कार्य करेगा। लोगों को बताया जाएगा कि कैसे वे बिना मुकदमेबाज़ी के भी न्याय प्राप्त कर सकते हैं — और वो भी कम समय, कम खर्च और तनाव रहित तरीके से।

न्यायालय का उद्देश्य: न्याय हर द्वार

इस अभियान के माध्यम से न्यायालय की यह पहल स्पष्ट संदेश देती है — न्याय को सिर्फ अदालतों तक सीमित न रखते हुए आमजन के द्वार तक पहुंचाना है। यह जागरूकता रथ मेडिएशन सेंटर, जिला विधिक सेवा प्राधिकार भागलपुर की ओर से संचालित किया जा रहा है।

भागलपुर रेलवे स्टेशन पर RPF थाना में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, दस्तावेज और फ्रिज जलकर राख

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भागलपुर: भागलपुर रेलवे स्टेशन स्थित रेलवे सुरक्षा बल (RPF) थाना में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब थाना निरीक्षक के चैंबर में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।

महत्वपूर्ण कागजात और इलेक्ट्रॉनिक सामान जलकर खाक

घटना में चेंबर में रखे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और एक फ्रिज पूरी तरह से जलकर खाक हो गया। आग की लपटें और धुआं उठते ही थाने में मौजूद कर्मी सतर्क हो गए और तुरंत अग्निशामक यंत्र का उपयोग कर आग पर काबू पाने की कोशिश की।

समय पर पाया गया नियंत्रण, बड़ी दुर्घटना टली

थोड़ी देर की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, जिससे स्टेशन पर किसी बड़े हादसे की आशंका टल गई। हालांकि कागजातों और उपकरणों का नुकसान हुआ है, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई।

दमकल विभाग ने की जांच

घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को ही आग लगने का कारण माना जा रहा है। विभागीय रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

भागलपुर में जमीन विवाद बना खूनी संघर्ष का कारण, सगे भाई ने चाकू मारकर की हत्या

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भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। लोदीपुर थाना क्षेत्र के कोहड़ा सरमसपुर गांव में जमीन विवाद को लेकर एक युवक ने अपने ही सगे भाई की चाकू मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी भाई ने खुद थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।

भाई बना हत्यारा, ताबड़तोड़ चाकू से किया हमला

मृतक की पहचान सुजीत कुमार के रूप में हुई है, जो सोमवार सुबह अपने घर पर किसी काम में व्यस्त था। इसी दौरान उसका छोटा भाई सुमित कुमार वहां पहुंचा और अचानक चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। परिजन घायल सुजीत को फौरन मायागंज अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जमीन बेचने के दबाव से उपजा था विवाद

परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, सुजीत के पास बाईपास के पास कीमती जमीन थी। आरोपी सुमित उस जमीन को बेचने के लिए दबाव बना रहा था। इसी बात को लेकर दोनों भाइयों के बीच बीते कई दिनों से तनाव चल रहा था। यह पारिवारिक विवाद आखिरकार खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया।

थाने पहुंचकर आरोपी ने किया आत्मसमर्पण

हत्या की इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद सुमित कुमार खुद लोदीपुर थाना पहुंचा और आत्मसमर्पण कर अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

बाइट: परिजन दिनेश कुमार का बयान

“जमीन को लेकर पहले भी दोनों में झगड़ा होता था, लेकिन हमलोगों ने कभी सोचा नहीं था कि सुमित ऐसा कर देगा। सुजीत बहुत सीधा लड़का था।”

पुलिस ने शुरू की कानूनी प्रक्रिया

पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला जमीन विवाद का ही है, लेकिन हर पहलू से जांच की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आरोपी से पूछताछ जारी है।

सावन की दूसरी सोमवारी पर अजगैबीनाथ धाम में आस्था का जनसैलाब, बोल बम के नारों से गूंज उठा सुल्तानगंज

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सुल्तानगंज (भागलपुर): सावन की दूसरी सोमवारी पर श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम में। बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर की ओर जाने वाले लाखों कांवरियों का जनसैलाब सोमवार सुबह से ही गंगा तट पर उमड़ पड़ा।

हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। नमामि गंगे घाट से लेकर कच्ची कावड़िया पथ तक श्रद्धालुओं की लहरें बहती नजर आईं। कांवरिये पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर, जल भरकर पैदल बाबा धाम की ओर रवाना हो रहे हैं।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, घाटों पर एसडीआरएफ तैनात

श्रावणी मेला को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त किया है। गंगा घाटों पर एसडीआरएफ की टीम लगातार गश्त कर रही है। स्थानीय गोताखोरों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि जल में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।

श्रद्धालुओं से गुलजार हुआ अजगैबीनाथ मंदिर परिसर

अजगैबीनाथ मंदिर परिसर और आसपास के घाटों पर स्नान और पूजा-पाठ के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु यहां से कांवर यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं। कंधे पर कांवर, सिर पर आस्था और होठों पर “बम बम भोले” के स्वर — हर दिशा में शिवभक्ति का रंग बिखरा हुआ है।

श्रावण सोमवार: शिवभक्ति का पर्व

सावन मास का हर सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन गंगाजल अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसलिए कांवर यात्रा को लेकर आस्था और उत्साह दोनों चरम पर होता है।