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वैशाली पुलिस की बड़ी सफलता: चार शातिर अपराधी गिरफ्तार, हथियार-कारतूस व वाहन बरामद

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वैशाली, 14 सितम्बर: वैशाली पुलिस को अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय, वैशाली से मिली जानकारी के अनुसार औद्योगिक थाना क्षेत्र में डकैती की योजना बना रहे चार शातिर अपराधियों को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर धर दबोचा। गिरफ्तार अपराधियों के पास से भारी मात्रा में हथियार, जिंदा कारतूस, कार, मोबाइल व अन्य सामान बरामद किया गया।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर) हाजीपुर, श्री सुबोध कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने 13 सितम्बर को हाजीपुर रोड पर चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान एक कार में सवार चार अपराधी पकड़े गए। गिरफ्तार अपराधियों की पहचान सचिन कुमार (साको-फकौली), ईशान कुमार (साको-प्रतापटांड), सुमित कुमार (साको-बेलकुंडा) और प्रियंरजन उर्फ गब्बर सिंह (साको-दौलतपुर चौंडी) के रूप में हुई है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने उनके पास से 01 देशी पिस्टल (हत्या में प्रयुक्त), 01 अन्य देशी पिस्टल, 01 कट्टा, 21 जिंदा कारतूस, 02 मैगजीन, 01 कार और 05 मोबाइल फोन बरामद किए। जांच में खुलासा हुआ कि ये अपराधी एक कूरियर कंपनी को लूटने की योजना बनाकर निकले थे, लेकिन पुलिस की तत्परता से बड़ी वारदात होने से पहले ही इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार अपराधियों से पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि इनका संबंध हाल ही में 25 अगस्त को बिदुपुर थाना क्षेत्र के बैरूपुर गांव में हुए शिवशंकर प्रसाद सिंह हत्याकांड से भी है। इस घटना में शराब के पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने अपराधी सचिन कुमार की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार और कारतूस भी बरामद कर लिया है।

वैशाली पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अपराधियों की गिरफ्तारी अपराध नियंत्रण की दिशा में बड़ी सफलता है। पुलिस की प्रिवेंटिव पॉलिसिंग रणनीति के तहत लगातार छापेमारी की जा रही है और अन्य फरार अपराधियों की भी तलाश जारी है।

इस अभियान में पुलिस की सक्रियता और सजगता से न केवल संभावित डकैती की वारदात टल गई, बल्कि एक पुराने हत्या कांड का भी पर्दाफाश हो गया। वैशाली पुलिस ने स्पष्ट किया कि अपराधियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जिले में शांति व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे।

पाटलिपुत्र खेल परिसर में खेलो इंडिया जोनल तीरंदाजी प्रतियोगिता का भव्य समापन

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पटना, 14 सितंबर: बिहार में पहली बार आयोजित खेलो इंडिया एनटीपीसी जोनल आर्चरी टूर्नामेंट 2025 का आज पाटलिपुत्र खेल परिसर, कंकड़बाग में भव्य समापन हुआ। 13 और 14 सितंबर को आयोजित इस टूर्नामेंट में बिहार सहित झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, एसपीएसबी, आरएसपीबी और सीएसईबी के करीब 350 प्रतिभागी, प्रशिक्षक, प्रबंधक और तकनीकी पदाधिकारी शामिल हुए। इसमें 200 पुरुष और 120 महिला खिलाड़ियों ने दमखम दिखाया।

कंपाउंड स्पर्धा में शानदार मुकाबले

प्रतियोगिता के अंतिम दिन कंपाउंड वर्ग में कड़े मुकाबले देखने को मिले।

  • पुरुष वर्ग में आरएसपीबी के शुभम दास ने स्वर्ण पदक, झारखंड के दिव्यांशु सिंह ने रजत पदक और बिहार के विक्रम कुमार ने कांस्य पदक अपने नाम किया। चौथे स्थान पर एमडी आदिल (एसपीएसबी) रहे।
  • महिला वर्ग में पश्चिम बंगाल की प्राप्ति वेटेबल ने स्वर्ण पदक जीतकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। झारखंड की संगीता कुमारी मुर्मू को रजत पदक, राज अदिति कुमारी को कांस्य पदक और सलोनी उरांव चौथे स्थान पर रहीं।

बिहार को मिला पदक

बिहार के लिए गौरव का क्षण तब आया जब नालंदा जिले के विक्रम कुमार ने कंपाउंड पुरुष वर्ग में कांस्य पदक जीता। यह प्रदर्शन राज्य के खिलाड़ियों के उत्साह को नई ऊँचाई देगा।

सम्मान और पुरस्कार वितरण

विजेता खिलाड़ियों को पदक और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

  • प्रथम स्थान: ₹20,000
  • द्वितीय स्थान: ₹15,000
  • तृतीय स्थान: ₹10,000
  • चतुर्थ स्थान: ₹5,000

पुरस्कार वितरण समारोह में बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के निदेशक सह सचिव रविंद्र नाथ चौधरी, बिहार तीरंदाजी संघ के सचिव मनोज कुमार, कंपटीशन डायरेक्टर (भारतीय तीरंदाजी संघ) हरेश कुमार, बिहार ओलंपिक संघ की उपाध्यक्ष श्रीमती नूतन कुमारी और अंजलि कुमारी शामिल हुईं।

खिलाड़ियों में उत्साह

इस प्रतियोगिता में बिहार से 36 पुरुष और 36 महिला सहित कुल 72 खिलाड़ी शामिल हुए। आयोजन के सफल समापन ने बिहार में तीरंदाजी खेल की लोकप्रियता और खिलाड़ियों की प्रतिभा को एक नया मंच दिया है।

पूर्णिया से बिहार को 40 हजार करोड़ की सौगात देंगे प्रधानमंत्री मोदी – विकास को नई उड़ान

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पटना, 14 सितंबर: बिहार विकास की नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 सितंबर को पूर्णिया से राज्य को 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की सौगात देंगे। यह अवसर न केवल सीमांचल बल्कि पूरे बिहार के लिए ऐतिहासिक होगा, क्योंकि इससे आधारभूत संरचना, ऊर्जा, परिवहन और आवास योजनाओं को नई गति मिलेगी।

पूर्णिया एयरपोर्ट को मिलेगा नया टर्मिनल

प्रधानमंत्री मोदी पूर्णिया एयरपोर्ट के अंतरिम टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसी मौके पर एयरपोर्ट से पहली वाणिज्यिक उड़ान की शुरुआत भी होगी। यह सीमांचल के लोगों को देश के अन्य हिस्सों तक तेज, किफायती और सुगम यात्रा सुविधा उपलब्ध कराएगा। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्णिया एयरपोर्ट राज्य का सबसे बड़ा रनवे वाला एयरपोर्ट है, जिससे बिहार की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।

ऊर्जा और जल परियोजनाओं का शिलान्यास

भागलपुर जिले के पीरपैंती में 3×800 मेगावाट क्षमता की थर्मल पावर परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री करेंगे। यह राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी। इसके साथ ही सुपौल और कटिहार जिलों में आई एंड डी और एसटीपी परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी।
पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए कटिहार, भागलपुर और दरभंगा जिलों में नई पेयजल परियोजनाओं की शुरुआत होगी।

सीमांचल के किसानों और पशुपालकों को मिलेगा लाभ

पूर्णिया में सेक्स सॉर्टेड सीमेन उत्पादन केंद्र का उद्घाटन किया जाएगा। यह सुविधा सीमांचल के किसानों और पशुपालकों को आधुनिक तकनीक से लैस करेगी, जिससे दूध उत्पादन और पशुधन विकास को बढ़ावा मिलेगा।

रेल संपर्क को मिलेगी नई दिशा

प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा में कई नई रेल सेवाओं की भी सौगात देंगे।

  • अररिया-गलगलिया रेलखंड पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।
  • जोगबनी-दानापुर वंदे भारत एक्सप्रेस,
  • सहरसा-छेहरटा (अमृतसर) अमृत भारत एक्सप्रेस,
  • जोगबनी-ईरोड अमृत भारत एक्सप्रेस का शुभारंभ करेंगे।
    इसके अलावा विक्रमशिला से कटारेह तक नई रेल लाइन का भी निर्माण होगा।

कोसी-मेची लिंक परियोजना का शुभारंभ

बहुप्रतीक्षित कोसी-मेची अंतरदलीय लिंक परियोजना के पहले चरण का शिलान्यास भी प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। यह परियोजना बिहार के जल प्रबंधन और सिंचाई प्रणाली को मजबूत करेगी।

पीएम आवास योजना के लाभार्थियों को गृह प्रवेश

प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान पीएम आवास योजना के 35,000 ग्रामीण और 5,920 शहरी लाभार्थियों को गृह प्रवेश का तोहफ़ा देंगे। साथ ही, एनआरएलएम के तहत क्लस्टर लेवल फेडरेशनों को सामुदायिक निवेश फंड का वितरण भी किया जाएगा।

ऐतिहासिक अवसर

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जब भी बिहार आते हैं, वे राज्य को विकास की सौगात देते हैं। 2015 में उन्होंने 1.65 लाख करोड़ का विशेष आर्थिक पैकेज दिया था। अब एक बार फिर 40 हजार करोड़ की योजनाएं बिहार को विकास के नए पथ पर अग्रसर करेंगी।

पूर्णिया से होने वाली यह शुरुआत सीमांचल समेत पूरे बिहार के विकास को नई उड़ान देने जा रही है।

बर्खास्त संविदा कर्मियों की वापसी का रास्ता खुला – अब तक 1575 ने की अपील, 235 को मिली स्वीकृति

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पटना, 14 सितंबर: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय) द्वारा हड़ताल पर गए विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मियों को पुनः सेवा में लौटने का अवसर देने की पहल रंग लाने लगी है। विभाग द्वारा अपील दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद अब तक 1575 कर्मियों ने अपनी सेवा में वापसी के लिए अभ्यावेदन प्रस्तुत किया है। इनमें से 235 कर्मियों की अपील को स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है, जबकि शेष मामलों पर प्रक्रिया जारी है।

ईमेल और ऑफलाइन माध्यम से अपील का अवसर

विभाग की ओर से बर्खास्त कर्मियों को अपील का मौका देने के लिए एक निर्धारित ईमेल आईडी (appealdlrs@gmail.com) जारी की गई है। इच्छुक कर्मी कार्यालय समय में पटना स्थित विभागीय कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से भी अपील दर्ज कर सकते हैं। इस लचीले प्रावधान से बड़ी संख्या में कर्मियों ने अपनी पुनर्बहाली के लिए आवेदन किया है।

3321 कर्मी पहले ही लौट चुके काम पर

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अब तक 3321 संविदा कर्मी हड़ताल छोड़कर कार्य पर वापस लौट चुके हैं। यह स्थिति इस पहल के सकारात्मक परिणाम को स्पष्ट करती है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में पहले दिन 54 कर्मियों ने वापसी की थी, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

सरकार का स्पष्ट रुख

राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि इच्छुक संविदा कर्मियों को पुनः सेवा में लौटने का अवसर दिया जाएगा, बशर्ते वे तय प्रक्रिया का पालन करें। सरकार का यह निर्णय उन हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर है जो संविदा कर्मियों की नौकरी पर निर्भर हैं।

सकारात्मक परिणाम से विभाग को मिली राहत

विशेष सर्वेक्षण कार्य लंबे समय से प्रभावित हो रहा था। लेकिन कर्मियों की वापसी से विभागीय कामकाज में तेजी आई है। अधिकारियों का कहना है कि अपील प्रक्रिया ने न केवल संविदा कर्मियों को नया अवसर दिया है, बल्कि विभाग को भी अपने अधूरे कार्यों को गति देने का मौका मिला है।

संविदा कर्मियों में जागी उम्मीद

इस पहल ने उन संविदा कर्मियों में भी उम्मीद जगाई है जो लंबे समय से असमंजस में थे। अब बड़ी संख्या में कर्मी अपील करने के लिए आगे आ रहे हैं। यह पहल एक बार फिर राज्य सरकार के “संवाद और समाधान” के दृष्टिकोण को मजबूत करती है।

कुल मिलाकर, बर्खास्त संविदा कर्मियों की वापसी से जहां विभागीय कार्यों में तेजी आएगी, वहीं हजारों परिवारों को आर्थिक स्थिरता भी मिलेगी। आने वाले दिनों में अपील की संख्या और स्वीकृति की दर में वृद्धि होने की पूरी संभावना है।

बिहार बना डिजिटल एग्रीकल्चर का हब – सभी 38 जिलों में फसलों की रियल टाइम मॉनिटरिंग

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पटना, 14 सितंबर: बिहार कृषि क्षेत्र में एक नई पहचान बना रहा है। पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए राज्य ने डिजिटल क्रॉप सर्वे की शुरुआत की है। इसके तहत सभी 38 जिलों में खरीफ फसलों का डाटा अब डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल किसानों के लिए न सिर्फ पारदर्शिता लेकर आई है बल्कि राज्य सरकार की कृषि योजनाओं को और भी प्रभावी और लक्ष्य आधारित बनाने में मददगार साबित हो रही है।

1.99 करोड़ प्लॉट का होगा डिजिटल सर्वे

कृषि विभाग खरीफ 2025-26 के दौरान राज्य के 1 करोड़ 99 लाख से अधिक प्लॉट्स का डिजिटल सर्वे कर रहा है। इसके बाद सभी 30,652 गांवों में उगाई जाने वाली फसलों का विस्तृत डाटा उपलब्ध होगा। इससे यह आसानी से पता चलेगा कि किस जिले में कौन सी फसल कितने क्षेत्र में बोई गई है। साथ ही, फसलों की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी।

कृषि योजना बनाने में हो रही है मदद

डिजिटल क्रॉप सर्वे से सरकार को यह स्पष्ट आंकड़े मिल रहे हैं कि राज्य के किस हिस्से में किस फसल की कितनी पैदावार हो रही है। इस आधार पर खाद्य आपूर्ति, सिंचाई, बीज वितरण और बाजार उपलब्धता जैसी योजनाएं ज्यादा सटीक ढंग से तैयार की जा रही हैं। इससे किसानों को सीधे लाभ पहुंच रहा है और उत्पादन क्षमता भी बढ़ रही है।

आधुनिक तकनीक से खुशहाल हो रहे हैं किसान

डिजिटलाइजेशन के साथ उपग्रह आधारित आंकड़े, ड्रोन तकनीक, मोबाइल एप्स और ई-गवर्नेंस टूल्स का इस्तेमाल कृषि में किया जा रहा है। इन तकनीकों से फसलों की स्थिति की निगरानी, उत्पादन का आकलन और मौसम संबंधी जानकारी तुरंत उपलब्ध हो जाती है। किसान अब बेहतर फैसले ले पा रहे हैं और उनकी आमदनी में लगातार वृद्धि हो रही है।

देश का पहला डिजिटल कृषि निदेशालय

कृषि क्षेत्र में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने डिजिटल कृषि निदेशालय का गठन किया है। अपने तरह का यह देश का पहला निदेशालय है, जो रियल टाइम में किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं से जोड़ता है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आई है और किसानों को लाभ पहुंचाने में तेजी हुई है।

पारंपरिक ढांचे से आधुनिक कृषि की ओर

राज्य सरकार की योजनाबद्ध नीतियों और आधुनिक तकनीक के समावेश ने बिहार की कृषि को पारंपरिक ढांचे से बाहर निकालकर एक आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ प्रणाली में बदल दिया है। अब कृषि सिर्फ जीविकोपार्जन का साधन नहीं रही बल्कि किसानों के लिए समृद्धि और खुशहाली का मार्ग बन रही है।

बिहार का डिजिटल क्रॉप सर्वे और डिजिटल कृषि निदेशालय न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है। यह पहल यह साबित करती है कि तकनीक और नीति के सही संयोजन से कृषि को भविष्य के अनुरूप ढाला जा सकता है।

बिहार बना देश का नंबर वन राज्य – सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने में अव्वल

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पटना, 14 सितंबर: बिहार ने एक बार फिर से अपनी उपलब्धियों से देशभर में परचम लहरा दिया है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने के मामले में बिहार ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह रैंकिंग स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के एवीडीएमएस केंद्रीय डैशबोर्ड द्वारा अगस्त 2025 के लिए जारी की गई है। बिहार ने 82.13 अंक के साथ अव्वल स्थान प्राप्त किया है, जबकि 78.61 अंक के साथ राजस्थान दूसरे और 73.28 अंक के साथ पंजाब तीसरे स्थान पर रहा।

11 महीने से लगातार कायम है दबदबा

पिछले वर्ष अक्टूबर में बिहार ने 79.34 अंकों के साथ राजस्थान को पछाड़ते हुए पहली बार नंबर वन की पोजीशन हासिल की थी। इसके बाद से लगातार 11 महीनों तक राज्य ने अपनी इस उपलब्धि को बरकरार रखा है। अगस्त 2025 की रैंकिंग में भी बिहार ने बाजी मार ली और यह साबित कर दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में राज्य सरकार की कोशिशें सफल हो रही हैं।

स्वास्थ्य सुविधाओं में हो रहा निरंतर सुधार

राज्य स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार ने लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम किया है। इसके तहत गंभीर बीमारियों के साथ-साथ सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी दवाएं अब आसानी से सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी अस्पतालों तक मरीजों को मुफ्त दवा सुविधा मिल रही है।

मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में 611 प्रकार की दवाएं

राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कुल 611 प्रकार की दवाएं मरीजों को मुफ्त दी जा रही हैं। इनमें मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों के ओपीडी में 356 प्रकार की दवाएं और आईपीडी में 255 प्रकार की दवाएं शामिल हैं।

  • जिला अस्पतालों में ओपीडी के लिए 287 व आईपीडी के लिए 169 दवाएं
  • अनुमंडलीय अस्पतालों में ओपीडी के लिए 212 व आईपीडी के लिए 101 दवाएं
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी के लिए 212 व आईपीडी के लिए 97 दवाएं
  • रेफरल अस्पतालों में ओपीडी के लिए 203 व आईपीडी के लिए 98 दवाएं
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी के लिए 201 व आईपीडी के लिए 93 दवाएं
  • शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 180 प्रकार की दवाएं
  • अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी के लिए 140 व आईपीडी के लिए 53 दवाएं
  • हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में 151 प्रकार की दवाएं
  • स्वास्थ्य उपकेंद्रों में 97 प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मरीजों को बड़ी राहत

सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा सुविधा से आम जनता को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिली है। अब मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर वित्तीय बोझ कम हुआ है।

बिहार का यह प्रदर्शन न केवल राज्य के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि निरंतर प्रयासों और बेहतर प्रबंधन से किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

भागलपुर आयुक्त कार्यालय में हिंदी दिवस पर गूंजा हिंदी का स्वर, आयुक्त बोले– हिंदी हमारी पहचान और एकता का आधार

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भागलपुर, 14 सितंबर:  आयुक्त कार्यालय, भागलपुर प्रमंडल के सभागार में हिंदी दिवस का आयोजन बड़े ही उत्साह और गरिमा के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त  हिमांशु कुमार राय ने की। इस अवसर पर आयुक्त ने हिंदी भाषा के इतिहास, महत्व और वर्तमान समय में इसकी भूमिका पर विस्तृत विचार रखे।

आयुक्त श्री राय ने कहा कि कोई भी भाषा ध्वनि का स्वरूप होती है, जिसे हम बोलकर या लिखकर प्रकट करते हैं। हिंदी का उद्भव सदियों पहले विभिन्न भाषाओं और बोलियों के मेल से हुआ। सल्तनत और मुगल काल में सेना मुख्यालयों में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की बोलियों के मिश्रण से हिंदवी का विकास हुआ, जिसे आगे चलकर हिंदी और उर्दू के नाम से जाना गया। उन्होंने बताया कि हिंदी आज न केवल भारत में बल्कि अफगानिस्तान और ईरान तक समझी जाती है। हिंदी फिल्मों और साहित्य ने इसके प्रसार में विशेष योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया और तब से यह दिन हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज के डिजिटल युग में हिंदी को सशक्त बनाने की आवश्यकता है। हिंदी का विकास तभी संभव है जब सभी लोग अपनी बोलियों के साथ हिंदी का प्रयोग अधिक से अधिक करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि हिंदी हमारी मां है तो अंग्रेजी हमारी मौसी है, और दोनों भाषाओं को सम्मान देना आवश्यक है।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय विकास पदाधिकारी श्री अनिल कुमार राय ने भी संबोधित किया। उन्होंने हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी दिलों को जोड़ने वाली भाषा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान, चिकित्सा और अभियांत्रिकी जैसे विषयों की पुस्तकें हिंदी में लिखी जानी चाहिए ताकि हिंदी भाषा और अधिक सशक्त बने।

अवर सचिव  रघुवीर मंडल ने हिंदी के महत्व पर विचार रखते हुए इसे राष्ट्र की एकता और संस्कृति की धरोहर बताया। वहीं संयुक्त निदेशक जनसंपर्क  नागेंद्र कुमार गुप्ता ने हिंदी साहित्य और भाषा के विकास की ऐतिहासिक यात्रा पर विस्तार से चर्चा की।

इस अवसर पर आयुक्त के सचिव विनोद कुमार सिंह सहित आयुक्त कार्यालय के सभी अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क विभाग द्वारा किया गया।

पीरपैंती में 3×800 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट का शिलान्यास कल

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भागलपुर। ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर बिहार आज एक और कदम बढ़ाने जा रहा है। पीरपैंती, भागलपुर में 3×800 मेगावाट क्षमता वाले थर्मल पावर प्लांट का शिलान्यास 15 सितंबर 2025 (सोमवार) को होगा। इस भव्य अवसर पर  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिलान्यास करेंगे।

इस समारोह की विशेषता यह है कि यह बिहार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। 2400 मेगावाट क्षमता वाले इस पावर प्रोजेक्ट से राज्य ही नहीं, पूरे पूर्वी भारत की बिजली व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं।

शिलान्यास कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही राज्य मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ मंत्री, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनेंगे।

उल्लेखनीय है कि इस परियोजना से न सिर्फ क्षेत्र की बिजली आपूर्ति सुधरेगी, बल्कि हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिलेगा। औद्योगिक विकास और स्थानीय कारोबार को भी इससे बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह प्रोजेक्ट ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

समारोह को लेकर पूरे भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोग इस प्रोजेक्ट को अपने क्षेत्र के विकास के लिए नई उम्मीद के रूप में देख रहे हैं। पावर प्लांट से मिलने वाली बिजली से कृषि, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में नई ऊर्जा का संचार होगा।

कार्यक्रम का आयोजन आज दोपहर 2:30 बजे पीरपैंती, भागलपुर में किया जाएगा। आम नागरिकों को भी इस अवसर पर शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।

ऊर्जा विभाग, बिहार सरकार ने इसे राज्य की बड़ी उपलब्धियों में से एक बताते हुए कहा है कि आने वाले वर्षों में बिहार ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि ऊर्जा आपूर्ति में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से सम्मानित डॉ. अजय कुमार सिंह का अंग की धरती पर भव्य स्वागत

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भागलपुर, 14 सितम्बर: जीवन जागृति सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह को हाल ही में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी, लंदन में “बेस्ट कम्युनिटी इम्पेक्ट अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें समाजसेवा, शिक्षा और जनकल्याण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया गया है। रविवार को जब वे अंग की धरती पर लौटे तो लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

एयरपोर्ट से लेकर भागलपुर आगमन तक जगह-जगह समर्थकों और समाजसेवियों ने फूलमालाओं और नारों के साथ उनका अभिनंदन किया। शहर में निकाली गई स्वागत यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। डॉ. सिंह के स्वागत में युवाओं और बुजुर्गों दोनों में उत्साह देखने को मिला।

डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि पूरे अंग प्रदेश और बिहार की उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि समाज की बेहतरी और जरूरतमंदों की सेवा ही उनका संकल्प है और यह सम्मान उनकी जिम्मेदारियों को और बढ़ा देता है।

जीवन जागृति सोसायटी वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में कार्य कर रही है। डॉ. सिंह के नेतृत्व में संस्था ने हजारों जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुँचाई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अंग प्रदेश के व्यक्ति को सम्मान मिलना गर्व की बात है। इस अवसर पर कई सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों ने भी बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

डॉ. सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे समाजसेवा की राह पर और अधिक मजबूती के साथ काम करते रहेंगे। उनके इस सम्मान ने भागलपुर और पूरे अंग क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

वार्ड 14 में हंगामा, महापौर और पार्षद के खिलाफ मुस्लिम समाज का आमरण अनशन शुरू

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भागलपुर, 14 सितम्बर: भागलपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 14 आशानंदपुर के सिया टोली मोहल्ले में रविवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने महापौर वसुंधरा लाल, उप महापौर सलाउद्दीन हसन और वार्ड पार्षद अनिल पासवान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नाराज लोगों ने वार्ड की समस्याओं को लेकर कचहरी चौक पर आमरण अनशन शुरू कर दिया है।

अनशनकारियों का आरोप है कि वार्ड पार्षद अनिल पासवान मुस्लिम बहुल इलाकों में जानबूझकर विकास कार्य नहीं करवाते। उनका कहना है कि न तो सड़क बनी है, न नाला, और न ही जल निकासी की व्यवस्था की गई है। इलाके के लोग गंदगी और पानी भराव से परेशान हैं, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार पदाधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली।

विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि वार्ड पार्षद ने साफ शब्दों में कहा था कि मुस्लिम समाज ने उन्हें वोट नहीं दिया, इसलिए उनके मोहल्ले में कोई विकास कार्य नहीं होगा। अनशनकारियों ने बताया कि करीब नौ महीने पहले पार्षद का पुतला दहन किया गया था, इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। हाल ही में मोहल्ले के लोगों ने महापौर वसुंधरा लाल का भी पुतला जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया था।

इधर, पार्षद अनिल पासवान का कहना है कि सिया टोली के लोगों ने चुनाव में उनका समर्थन नहीं किया और विरोध स्वरूप पहले उनका पुतला जलाया था। इसी वजह से वे उनके दबाव में नहीं झुकना चाहते। वहीं महापौर और उप महापौर पर भी भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया है।

सिया टोली के अनशनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आमरण अनशन से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है और वार्ड में विकास कार्य शुरू होने तक वे अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे।

इस बीच प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों अब तक वार्ड 14 की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। बढ़ते विरोध को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप कर सकता है।