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दबंगई से रुका मिनी जलापूर्ति प्लांट का निर्माण, ग्रामीणों में आक्रोश

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भागलपुर: इमामपुर प्रखंड के मोहीबअलीचक गांव में मिनी जलापूर्ति योजना के तहत बन रहे जलमीनार का निर्माण दबंगई की भेंट चढ़ गया है। शनिवार को जैसे ही पीएचईडी विभाग की टीम ने सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कराया, गांव के ही राजा नामक व्यक्ति अपने सहयोगियों के साथ वहां पहुंचा और काम को जबरन रुकवा दिया।

स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों ने विरोध जताया तो उनके साथ बदसलूकी की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। दबंगई का आलम यह रहा कि बाहरी अज्ञात लोगों को भी मौके पर बुलाया गया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

ग्रामीणों का गुस्सा और थाने में शिकायत

घटना के बाद ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। वार्ड सदस्य नुसरत खान और पंच रीता देवी ने हबीबपुर थाना में लिखित शिकायत देकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में बताया गया कि लगभग 20 साल पहले इसी स्थान पर सरकारी ट्यूबवेल लगाया गया था, जो अब खराब हो चुका है। लोगों की सुविधा के लिए उसी जगह पर जलमीनार का निर्माण कराया जा रहा था, लेकिन दबंगों के विरोध से विकास कार्य बाधित हो गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यह हरकत न केवल सरकारी कार्य में अड़चन डालने वाली है, बल्कि गांव की गंभीर पेयजल समस्या को और बढ़ा सकती है। महिलाओं ने विशेष नाराजगी जताते हुए कहा कि पानी की किल्लत का सबसे ज्यादा असर उन्हीं पर पड़ता है क्योंकि रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है।

प्रशासन का पक्ष और कानूनी अड़चन

घटना के बाद ग्रामीण प्रतिनिधि सीओ सतीश कुमार से मिले और पूरी जानकारी दी। सीओ ने बताया कि फिलहाल इस जमीन को लेकर अदालत का आदेश बिहार सरकार के पक्ष में नहीं है। न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए फिलहाल कार्य रोक दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य पक्ष भी कोर्ट गए हुए हैं और जैसे ही नया आदेश मिलेगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गांव में गहराता संकट

गांव में पहले से ही स्वच्छ पेयजल की भारी किल्लत है। जलमीनार बनने से लोगों को बड़ी राहत मिल सकती थी, लेकिन काम रुकने से ग्रामीण निराश हैं। लोगों का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और सरकार जल्द से जल्द योजना का कार्य पुनः शुरू करे ताकि गांव को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा सके।

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कब तक दबंगई और कानूनी पेचिदगियों के कारण गांव की बुनियादी जरूरतें अधूरी रहेंगी।

एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन में हंगामा: मंत्री और पूर्व एमएलसी के बीच झड़प, नारेबाजी से बिगड़ा माहौल

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जमुई: जमुई जिले के चकाई विधानसभा क्षेत्र के सोनो प्रखंड में शनिवार को आयोजित एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन उस समय हंगामेदार हो गया जब मंच पर मौजूद नेताओं के समर्थक आपस में भिड़ गए। इस सम्मेलन में बिहार सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सुमित कुमार सिंह, भवन निर्माण मंत्री जयंत राज, पूर्व मंत्री श्याम रजक और अन्य कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

जैसे ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सुमित कुमार सिंह मंच पर पहुंचे, उनके समर्थक जोरदार नारेबाजी करने लगे। इस पर पूर्व एमएलसी संजय सिंह के समर्थक भी नारेबाजी करने लगे। दोनों गुटों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धी नारेबाजी जल्द ही नोकझोंक में बदल गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। मंच पर बैठे नेताओं के बीच भी तीखी बहस होने लगी।

स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों को बीच-बचाव करना पड़ा, लेकिन माहौल शांत नहीं हुआ। देखते ही देखते सम्मेलन अव्यवस्थित हो गया और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की होने लगी।

मंत्री और नेता छोड़कर गए मंच

तनाव बढ़ने पर विज्ञान मंत्री सुमित कुमार सिंह और पूर्व एमएलसी संजय सिंह मंच से उतरकर कार्यक्रम स्थल छोड़कर चले गए। इसके बाद भवन निर्माण मंत्री जयंत राज और जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने भी कार्यक्रम से किनारा कर लिया। इससे कार्यक्रम अधूरा रह गया और कार्यकर्ताओं में मायूसी छा गई।

एनडीए के लिए असहज स्थिति

एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को संगठित करना और आने वाले चुनावों को लेकर रणनीति बनाना था। लेकिन मंच पर हुई झड़प और नेताओं के कार्यक्रम छोड़ने से यह सम्मेलन विवादों में घिर गया। स्थानीय स्तर पर यह घटना चर्चा का विषय बन गई है और इससे एनडीए की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।

कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया

सम्मेलन में मौजूद कई कार्यकर्ताओं का कहना था कि नेताओं को संयम बरतना चाहिए था। उनका मानना है कि इस तरह के व्यवहार से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है और संगठन की छवि धूमिल होती है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि मंच पर नारेबाजी और आपसी खींचतान का यह दृश्य जनता के सामने पार्टी की कमजोरी को उजागर करता है।

आगे की चुनौती

जमुई के इस कार्यक्रम ने एनडीए नेतृत्व के सामने एक चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले समय में पार्टी को न केवल कार्यकर्ताओं का विश्वास बनाए रखना होगा, बल्कि गुटबाजी और असंतोष को भी काबू में करना होगा। अन्यथा इस तरह की घटनाएं संगठन की मजबूती के बजाय कमजोरी साबित हो सकती हैं।

भागलपुर में शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई बीपीएससी पीटी परीक्षा

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भागलपुर: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 71वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा शनिवार को भागलपुर जिले के 44 परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुई। परीक्षा को सुचारू रूप से कराने के लिए पूरे जिले को 23 जोन में बांटा गया था। प्रत्येक जोन में मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या कदाचार की संभावना न रहे।

सुबह से ही केंद्रों पर परीक्षार्थियों की भीड़ उमड़ पड़ी। आयोग के निर्देशानुसार गेट तय समय पर बंद कर दिए गए और केवल समय पर पहुंचे अभ्यर्थियों को ही प्रवेश मिला। परीक्षा दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक आयोजित की गई। प्रशासन की ओर से केंद्रों पर सख़्त चेकिंग की व्यवस्था थी। मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को प्रतिबंधित किया गया था।

परीक्षा समाप्त होने के बाद केंद्र से बाहर निकलते ही परीक्षार्थियों के चेहरों पर संतोष झलक रहा था। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रश्नपत्र सामान्य स्तर का रहा और अधिकांश सवाल उनकी अपेक्षा के अनुरूप थे। हालांकि करंट अफेयर्स से जुड़े कुछ प्रश्न थोड़े चुनौतीपूर्ण साबित हुए। इसके बावजूद परीक्षार्थियों का मानना है कि कुल मिलाकर पेपर संतुलित था और उन्होंने अच्छे अंकों की उम्मीद जताई।

जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त पहल से परीक्षा बिना किसी व्यवधान के सकुशल सम्पन्न हुई। अधिकारियों ने परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया और सुनिश्चित किया कि हर जगह शांति और पारदर्शिता बनी रहे।

भागलपुर में बीपीएससी की यह परीक्षा न केवल सुरक्षित और शांतिपूर्ण रही, बल्कि प्रशासन की तैयारियों और परीक्षार्थियों की अनुशासनात्मक भागीदारी का सफल उदाहरण भी बनी।

भागलपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 16 बेंचों पर होगा त्वरित निपटारा

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भागलपुर: बिहार के भागलपुर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। न्यायपालिका की इस विशेष पहल का उद्देश्य आमजन के लंबित मामलों का त्वरित और किफायती समाधान करना है। इस बार लोक अदालत में कुल 16 बेंचों का गठन किया गया है, जिन पर रेलवे, बैंक, बिजली, भूमि विवाद, पारिवारिक मामले और अन्य सिविल-क्रिमिनल विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी।

वर्ष 2025 में राष्ट्रीय लोक अदालत का यह तीसरा आयोजन है। इससे पहले हुए दोनों लोक अदालतों में हजारों मामलों का आपसी सहमति से समाधान किया गया था। अधिकारियों का मानना है कि इस बार भी बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित होंगे।

त्वरित न्याय की दिशा में प्रयास

प्रिंसिपल जज राजकुमार राजपूत ने बताया कि लोक अदालत का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों को सरल और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। यहां निर्णय आपसी सहमति और समझौते के आधार पर दिए जाते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे विवाद वर्षों तक अदालतों में लंबित रहते हैं, लेकिन लोक अदालत के जरिए उनका निपटारा एक ही दिन में संभव हो जाता है।

जागरूकता के लिए सेल्फी प्वाइंट

इस बार लोक अदालत में एक अनोखी पहल की गई है। अदालत परिसर में सेल्फी प्वाइंट बनाया गया है ताकि आने वाले लोग यहां तस्वीर खींचकर उसे सोशल मीडिया पर साझा करें। जज राजपूत का कहना है कि इस पहल से न केवल न्यायपालिका की सकारात्मक छवि बनेगी बल्कि आम जनता में लोक अदालत के प्रति जागरूकता और भरोसा भी बढ़ेगा।

आमजन को मिलेगा बड़ा लाभ

लोक अदालत में उन मामलों का समाधान प्राथमिकता से किया जाता है जिनमें दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार होते हैं। इससे मुकदमों का बोझ घटता है और आम लोगों को राहत मिलती है। रेलवे टिकट जुर्माने, बैंक रिकवरी, बिजली बिल, बीमा क्लेम, मोटर दुर्घटना मुआवजा और भूमि विवाद जैसे मामले इसमें प्रमुख रूप से शामिल होते हैं।

न्यायपालिका का मानवीय चेहरा

भागलपुर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत न केवल विवादों का समाधान करने का माध्यम है, बल्कि यह न्यायपालिका के मानवीय पहलू को भी सामने लाती है। त्वरित निपटारे की इस व्यवस्था से आम नागरिकों का विश्वास बढ़ता है और न्याय प्रणाली के प्रति उनकी भागीदारी मजबूत होती है।

नवगछिया रेलवे स्टेशन पर पेड़ की कटाई से पक्षियों का सामूहिक नरसंहार, सैकड़ों चूज़ों की मौत

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नवगछिया: पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति रक्षा के तमाम दावों के बीच नवगछिया रेलवे स्टेशन परिसर में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। प्लेटफॉर्म संख्या-1 पर स्थित वर्षों पुराना पेड़ रेलवे विभाग द्वारा काट दिया गया। यह पेड़ लंबे समय से लिटिल कॉर्मोरेंट और लिटिल एग्रेट प्रजाति के पक्षियों का विशाल कॉलोनीनुमा आवास था। पेड़ गिरते ही सैकड़ों नन्हे चूज़े जमीन पर आ गिरे। इनमें से अधिकांश की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई घायल अवस्था में तड़पते रहे।

यह दृश्य इतना भयावह था कि स्टेशन पर मौजूद यात्री और स्थानीय लोग स्तब्ध रह गए। पर्यावरण प्रेमियों के अनुसार यह किसी प्राकृतिक आपदा से कम नहीं, बल्कि मानवजनित असंवेदनशीलता का परिणाम है।

वन विभाग ने किया रेस्क्यू, रेलवे पर सवाल

घटना की जानकारी मिलते ही भागलपुर के डीएफओ को अवगत कराया गया। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी जीवित बचे चूज़ों को रेस्क्यू कर नवगछिया के सुंदरवन क्षेत्र में ले जाया गया। हालांकि तब तक सैकड़ों चूज़ों की असमय मौत हो चुकी थी।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने रेलवे विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पेड़ काटने से पहले वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई और न ही पक्षियों की सुरक्षा के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इससे साफ जाहिर होता है कि रेलवे ने पर्यावरणीय नियमों की खुली अवहेलना की है।

पर्यावरणीय त्रासदी और जिम्मेदारी का सवाल

इस घटना ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार जैव विविधता संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, वहीं दूसरी ओर रेलवे जैसी संस्था की लापरवाही से पक्षियों का पूरा आवास खत्म कर दिया गया। स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह सिर्फ घोंसलों का विनाश नहीं, बल्कि प्रकृति की हत्या है।

लोगों ने मांग की है कि इस घटना की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते वन विभाग हस्तक्षेप नहीं करता तो शायद एक भी चूज़ा जीवित नहीं बच पाता।

सबक और चेतावनी

नवगछिया रेलवे स्टेशन पर हुई यह त्रासदी हमें याद दिलाती है कि विकास कार्यों की आड़ में प्रकृति की अनदेखी कितनी भयावह कीमत वसूल सकती है। सैकड़ों मासूम चूज़ों की मौत ने स्थानीय लोगों को गहरी पीड़ा दी है और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर मंथन की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

71वीं बीपीएससी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा: समय पर पहुंचे परीक्षार्थियों को ही मिला प्रवेश, 11 बजे के बाद बंद हुए गेट

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भागलपुर: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 71वीं संयुक्त (प्रारंभिक) प्रतियोगिता परीक्षा शनिवार को जिले के 44 केंद्रों पर आयोजित की जा रही है। परीक्षा दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक हुई। परीक्षा केंद्र नगर निगम क्षेत्र के अलावा जगदीशपुर में भी बनाए गए थे। सुबह से ही हजारों की संख्या में परीक्षार्थी परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने लगे।

आयोग की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे कि सभी अभ्यर्थियों को सुबह 9:30 बजे से प्रवेश दिया जाएगा और ठीक 11 बजे गेट बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। जो उम्मीदवार समय पर पहुंचे, वे सफलतापूर्वक प्रवेश कर परीक्षा में शामिल हो गए, लेकिन जो कुछ देर से पहुंचे उन्हें बाहर ही रोक दिया गया। कई केंद्रों पर देर से आने वाले अभ्यर्थियों को निराश होकर लौटना पड़ा।

कड़ी सुरक्षा और जांच व्यवस्था

परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई थी। मुख्य द्वार पर अभ्यर्थियों की कड़ी जांच की गई। किसी भी परीक्षार्थी को मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, घड़ी या अन्य प्रतिबंधित सामग्री अंदर ले जाने की अनुमति नहीं थी। सभी प्रतिबंधित सामग्री बाहर ही जमा कराई गई।

IPRD द्वारा जारी बयान में जिला पदाधिकारी (DM) ने बताया कि परीक्षा को शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त कराने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी की है। परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा-144 लागू की गई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए मजिस्ट्रेट तथा पुलिस बल की तैनाती की गई।

परीक्षा का पैटर्न और निगेटिव मार्किंग

71वीं बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा दो घंटे की रही, जिसमें 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए। इस बार भी आयोग ने निगेटिव मार्किंग लागू की है। प्रत्येक गलत उत्तर पर अंक काटे जाएंगे। परीक्षा शुरू होने के बाद किसी भी परीक्षार्थी को बीच में बाहर जाने या पानी पीने की अनुमति नहीं दी गई।

परीक्षा को लेकर उत्साह

सुबह से ही केंद्रों के बाहर परीक्षार्थियों में उत्साह और तनाव दोनों देखा गया। कई केंद्रों पर अभिभावक भी अपने बच्चों को छोड़ने पहुंचे थे। प्रशासन की सतर्कता और परीक्षार्थियों की भीड़ के बीच परीक्षा का आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।

बीपीएससी की यह परीक्षा राज्य की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। सफल होने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

जितिया पर्व के नहाए-खाए पर गंगा घाटों पर उमड़ी महिलाओं की भीड़, प्रशासन सतर्क

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भागलपुर: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला जितिया पर्व इस बार शनिवार को नहाए-खाए के साथ शुरू हुआ। पर्व की शुरुआत होते ही गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह से ही बड़ी संख्या में महिलाएं गंगा स्नान के लिए घाटों पर पहुंचीं और पवित्र डुबकी लगाकर अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि गंगा स्नान के बाद ही महिलाएं नहाए-खाए का भोजन ग्रहण करती हैं।

सुबह से ही शहर के विभिन्न घाटों—बरारी घाट, कचहरी घाट, बाबू घाट, अजगैबीनाथ घाट सहित प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालु महिलाओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। महिलाएं स्नान के बाद पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हुई घर लौटीं और विशेष व्यंजन बनाकर नहाए-खाए की रस्म निभाई।

प्रशासन ने किया विशेष प्रबंध

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पहले से ही अलर्ट था। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए गंगा घाटों पर पुलिस बल और आपदा प्रबंधन की टीम तैनात की गई थी। हर घाट पर बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम किए गए। नगर निगम द्वारा घाटों की साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और पेयजल की सुविधा सुनिश्चित की गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और महिलाओं को बिना किसी असुविधा के स्नान-पूजा करने में मदद की।

पर्व का महत्व

जितिया पर्व का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसे मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। महिलाएं यह व्रत अपने बच्चों की दीर्घायु, स्वस्थ जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना के लिए करती हैं। नहाए-खाए के दिन महिलाएं विशेष भोजन करती हैं और अगले दिन निर्जला उपवास रखकर भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना करती हैं।

श्रद्धा और आस्था का संगम

गंगा घाटों पर श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। रंग-बिरंगे परिधानों में महिलाएं गंगा स्नान कर अपने बच्चों के मंगलमय जीवन की प्रार्थना करती दिखीं। जगह-जगह धार्मिक गीतों और भजन की स्वर लहरियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

नहाए-खाए के साथ शुरू हुआ यह पर्व रविवार को निर्जला उपवास और पूजा-अर्चना के साथ संपन्न होगा।

नेपाल को भारत का 29वाँ राज्य बनने पर विचार करना चाहिए : सुड्डू साई

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भागलपुर: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पूर्व महानगर जिलाध्यक्ष सुड्डू साई ने नेपाल के मौजूदा हालात पर बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सिक्किम राजशाही से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होकर भारत का 22वाँ राज्य बना और आज शांति, स्थिरता तथा समृद्धि का उदाहरण पेश कर रहा है, ठीक उसी तरह नेपाल को भी अपने भविष्य के लिए गंभीरता से विकल्प तलाशना चाहिए।

सुड्डू साई ने कहा कि नेपाल लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, सरकार बदलने की परंपरा और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। पड़ोसी देश भारत के साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्ते प्राचीन काल से जुड़े रहे हैं। सीमा पर बसे लाखों लोग रोज़मर्रा के जीवन में भारत पर ही निर्भर हैं। ऐसे में नेपाल को भारत का 29वाँ राज्य बनने की दिशा में सोचना चाहिए। इससे न केवल नेपाल की जनता को स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्था और आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि भारत-नेपाल संबंध भी और अधिक सशक्त होंगे।

उन्होंने कहा कि भारत के अंतर्गत आने से नेपाल में रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विकास होगा। सिक्किम इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहां आज पर्यटन, कृषि और शिक्षा क्षेत्र ने नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं।

सुड्डू साई का यह बयान क्षेत्र में राजनीतिक हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत सुझाव है, और इसका उद्देश्य नेपाली जनता को स्थिरता व विकास का वैकल्पिक रास्ता सुझाना है।

सुडु की इस टिप्पणी पर नेपाल और भारत दोनों में राजनीतिक बहस छिड़ने की संभावना है। अब देखना यह होगा कि पड़ोसी देश की जनता और वहाँ की राजनीतिक पार्टियाँ इस सुझाव पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं।

वैश्विक क्रॉसवर्ड प्रतियोगिता की उलटी गिनती शुरू, कैनबरा के फिलिप कूट अभ्यास राउंड में शीर्ष पर

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पटना, 12 सितम्बर: इंडियन क्रॉसवर्ड लीग (IXL) 2025 का रोमांचक सफ़र शुरू हो चुका है। कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया) के प्रसिद्ध क्रॉसवर्ड खिलाड़ी फिलिप कूट ने अभ्यास राउंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। इसी के साथ इस वैश्विक प्रतियोगिता के 10 साप्ताहिक स्कोरिंग राउंड की उलटी गिनती भी शुरू हो गई है। पहला स्कोरिंग राउंड 14 सितम्बर से ऑनलाइन आयोजित होगा।

फिलिप कूट के बाद बेंगलुरु के सोहिल भगत और हरीश कामथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। दिलचस्प बात यह है कि टॉप-10 में बेंगलुरु और चेन्नई के तीन-तीन प्रतिभागियों ने जगह बनाई है। वहीं, बहरीन की सौम्या रामकुमार विदेशी खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने शीर्ष 10 में अपनी जगह पक्की की है।

इस बार प्रतियोगिता में कई दिग्गज खिलाड़ी भी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें रामकी कृष्णन, शाश्वत सालगांवकर और नेविल फोगार्टी जैसे नाम शामिल हैं, जो अभ्यास राउंड में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए। हालांकि, जानकारों का मानना है कि 10 हफ्तों तक चलने वाली इस कठिन प्रतियोगिता में उनके पास वापसी कर शीर्ष स्थान पर पहुँचने की पूरी संभावना है।

IXL का प्रारूप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से आयोजित होता है। 14 सितम्बर से हर रविवार सुबह 11 बजे (भारतीय समयानुसार) प्रतियोगिता की वेबसाइट www.crypticsingh.com पर नया क्रॉसवर्ड ग्रिड अपलोड किया जाएगा। प्रतिभागियों को बुधवार रात 11:59 बजे तक समाधान जमा करना होगा। अंक शुद्धता और गति दोनों पर आधारित होंगे।

10 ऑनलाइन राउंड के बाद संचयी स्कोर के आधार पर शीर्ष 30 प्रतिभागियों को बेंगलुरु में होने वाले ग्रैंड फ़िनाले के लिए आमंत्रित किया जाएगा। वहीं, साप्ताहिक राउंड में शीर्ष पर रहने वाला प्रतिभागी स्वतः फिनाले के लिए क्वालीफाई करेगा।

हालाँकि अभ्यास राउंड के अंक अंतिम लीडरबोर्ड में शामिल नहीं होते, लेकिन इससे खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के स्तर को समझने और रणनीति बनाने का अवसर मिलता है। वैश्विक क्रॉसवर्ड जगत के दिग्गज और नए प्रतिभागी एक बार फिर बेंगलुरु की धरती पर राष्ट्रीय खिताब के लिए चुनौती पेश करेंगे।

संस्कृत शिक्षा बोर्ड की योजनाओं के प्रचार-प्रसार में सूचना विभाग देगा सहयोग

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पटना: बिहार में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को गति देने के उद्देश्य से संस्कृत शिक्षा बोर्ड लगातार नए प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक वैभव श्रीवास्तव से मुलाकात की। इस मुलाकात में संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में चल रही योजनाओं और आगामी नवाचारों को जनमानस तक पहुंचाने के लिए प्रभावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान मृत्युंजय कुमार झा ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी परंपरा, संस्कृति और ज्ञान की धरोहर है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए जनसामान्य को जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कृत शिक्षा बोर्ड द्वारा प्रस्तावित योजनाओं की सफलता तभी संभव है जब उनका प्रचार-प्रसार व्यापक स्तर पर किया जाए। इस दिशा में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग का सहयोग मील का पत्थर साबित होगा।

वहीं, निदेशक वैभव श्रीवास्तव ने संस्कृत शिक्षा बोर्ड को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा को लोकप्रिय बनाने के लिए विभाग द्वारा एक लघु वृत्तचित्र तैयार कराया जाएगा, जिससे आम जनता के बीच जागरूकता और रुचि दोनों बढ़ेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में बोर्ड से प्राप्त पत्र पर त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

दोनों अधिकारियों के बीच हुई इस सार्थक बातचीत में यह भी तय हुआ कि भविष्य में संस्कृत शिक्षा बोर्ड के कार्यक्रमों, योजनाओं और पहलों को विभागीय स्तर से अधिक प्रभावी तरीके से प्रसारित किया जाएगा। इसका लाभ विद्यार्थियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी मिलेगा।

संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने आशा जताई कि इस सहयोग के बाद बिहार में संस्कृत भाषा के प्रति नई ऊर्जा और जागरूकता का संचार होगा। विद्यालय परिसरों में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ेगी और समाज के हर वर्ग तक संस्कृत की समृद्ध परंपरा का संदेश पहुंचेगा।

इस मुलाकात के बाद यह उम्मीद और प्रबल हो गई है कि बिहार जल्द ही संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा और इस दिशा में राज्य एक आदर्श उदाहरण बनेगा।