पटना में ‘गंगा जल संधि : बिहार की जल सुरक्षा’ पर आयोजित सेमिनार में मुख्यमंत्री का बड़ा बयान; बोले- नदियां बिहार की कमजोरी नहीं, समृद्धि की सबसे बड़ी ताकत हैं। सोन नदी जल विवाद के समाधान और गाद प्रबंधन नीति को बताया विकास की दिशा में अहम कदम।
Patna News: बिहार की जल सुरक्षा, नदियों के बेहतर प्रबंधन और गंगा जल संधि में राज्य के अधिकारों को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गंगा जल एवं फरक्का समझौते से जुड़े विषयों में बिहार के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। राज्य को पेयजल, किसानों के खेतों की सिंचाई और उद्योगों के संचालन के लिए पर्याप्त पानी के उपयोग का अधिकार मिलना जरूरी है। बिहार की नदियों और जल संसाधनों को राज्य की कमजोरी नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि की सबसे बड़ी ताकत बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को पटना के चाणक्या होटल में जल संसाधन विभाग की ओर से आयोजित एक दिवसीय सेमिनार ‘गंगा जल संधि : बिहार की जल सुरक्षा’ में शामिल हुए। उन्होंने कलश में गंगा जल डालकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान जल सुरक्षा, नदी प्रबंधन, गाद निष्कासन और बिहार के जल अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
बिहार के जल अधिकारों को मिले प्राथमिकता
सेमिनार को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के समग्र विकास, कृषि के विस्तार और औद्योगिक प्रगति के लिए पर्याप्त जल की उपलब्धता बेहद जरूरी है। राज्य की बड़ी आबादी की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के साथ किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना और उद्योगों के विकास के लिए जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि गंगा जल संधि और फरक्का समझौते से जुड़े विषयों पर विचार करते समय बिहार की जरूरतों और हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। राज्य को अपने नागरिकों के लिए पर्याप्त पेयजल, कृषि और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की नदियां और जल संसाधन विकास के रास्ते में बाधा नहीं, बल्कि राज्य की सबसे बड़ी पूंजी हैं। जरूरत इस बात की है कि इनका वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से प्रबंधन किया जाए।
25 साल पुराने सोन नदी जल विवाद का समाधान
मुख्यमंत्री ने बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर लगभग 25 वर्षों से लंबित विवाद के समाधान को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सहयोग से इस विवाद का समाधान हुआ है। इसके तहत बिहार को तीन-चौथाई यानी 3/4 जल प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह समझौता बिहार के जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य की कृषि व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ जल प्रबंधन की योजनाओं को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
गाद प्रबंधन के लिए बनाई गई राज्यस्तरीय नीति
गंगा और बिहार की दूसरी नदियों में लगातार जमा होने वाली गाद यानी सिल्ट की समस्या पर भी मुख्यमंत्री ने विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गाद प्रबंधन को लेकर राज्यस्तरीय नीति बनाई है। अब नदियों से निकलने वाली गाद का वैज्ञानिक तरीके से निष्कासन और उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गंगा की गाद और मिट्टी को आम लोगों के उपयोग के साथ सड़क निर्माण और अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। इसके लिए बिहार सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के बीच समझौता करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि गाद की समस्या केवल बिहार तक सीमित नहीं है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके प्रबंधन के लिए ठोस नीति बनाने की जरूरत है। यदि गाद का उचित तरीके से निष्कासन और उपयोग किया जाए तो इससे नदियों की जलधारण क्षमता और निर्माण कार्यों, दोनों को लाभ पहुंच सकता है।
गंगा के तटबंधों को मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने गंगा के तटबंधों के निर्माण और उनके सुदृढ़ीकरण को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नदी के प्रवाह, जलस्तर और गाद जमाव को वैज्ञानिक तरीके से समझना जरूरी है। इसके आधार पर ही प्रभावी योजनाएं तैयार की जा सकती हैं।
उन्होंने सेमिनार में शामिल जल विशेषज्ञों से गंगा नदी का हवाई सर्वेक्षण कराने की बात कही, ताकि विशेषज्ञ नदी की वास्तविक स्थिति, प्रवाह और विभिन्न स्थानों पर जमा गाद का प्रत्यक्ष आकलन कर सकें। इससे नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और तटबंधों को मजबूत बनाने के लिए बेहतर सुझाव प्राप्त हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों की राय और तकनीकी अध्ययन के आधार पर जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
नदियों से कृषि, उद्योग और रोजगार को मिलेगी नई ताकत
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की नदियों में अपार संभावनाएं हैं। इनके जल और गाद का समुचित प्रबंधन कर कृषि, उद्योग, आधारभूत संरचना और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
उन्होंने राज्य सरकार के एक करोड़ लोगों को रोजगार और नौकरी के अवसर उपलब्ध कराने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प बिहार की नदियों को राज्य की आर्थिक समृद्धि का आधार बनाना है। इसके लिए वैज्ञानिक जल प्रबंधन, विशेषज्ञों के सुझाव और केंद्र सरकार के सहयोग से योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
विजय चौधरी, बिजेन्द्र यादव और संजय झा ने भी रखे विचार
कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव और सांसद संजय कुमार झा ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने बिहार की जल सुरक्षा, नदियों के प्रबंधन और राज्य के विकास में जल संसाधनों की भूमिका पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, विभिन्न क्षेत्रों से आए जल विशेषज्ञ, अभियंता, वरीय अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने मुख्यमंत्री का हरित पौधा, अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न भेंटकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने जल सुरक्षा पर तैयार स्मारिका का विमोचन भी किया। इसके अलावा बाढ़ और जल प्रबंधन पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
बिहार की जल सुरक्षा को लेकर नई रणनीति की तैयारी
पटना में आयोजित इस सेमिनार के जरिए बिहार ने गंगा जल संधि, फरक्का समझौते, सोन नदी जल बंटवारे और नदियों में गाद की समस्या जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं सामने रखीं। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि बिहार को अपनी जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त जल उपलब्ध हो और नदियों का उपयोग विकास के साधन के रूप में किया जाए।
अब चुनौती इन नीतिगत घोषणाओं को जमीन पर उतारने की होगी। यदि गाद प्रबंधन, तटबंधों के सुदृढ़ीकरण और जल संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो इससे बिहार की कृषि, उद्योग और बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।


