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बिहार में ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन-आंदोलन बनाने की तैयारी, पटना से कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भरी हुंकार

30 नवंबर तक चलेगा अभियान, 534 प्रखंडों की पंचायतों में लगेंगे किसान जागरूकता शिविर; 15 से 16 लाख किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य, 38 जिलों के 629 स्कूलों में स्थापित होंगी मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं।

Patna News:  बिहार में खेतों की उर्वरता, मिट्टी की सेहत और किसानों की समृद्धि को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ को अब जन-आंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी तेज हो गई है। इसी संकल्प के साथ शुक्रवार को पटना के ज्ञान भवन में भव्य ‘खेत बचाओ अभियान-सह-कृषि जन कल्याण संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किसानों से सीधा संवाद करते हुए खेतों और मिट्टी के संरक्षण को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बताया।

कार्यक्रम में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार तथा लघु जल संसाधन विभाग के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने की। इस दौरान कृषि मंत्री ने किसानों की समस्याओं, सुझावों और कृषि क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों को गंभीरता से सुना। साथ ही विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से किसानों तक पहुंचाने का निर्देश दिया।

‘खेत बचेंगे, तभी जीवन बचेगा’, मिट्टी की सेहत पर कृषि मंत्री का जोर

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि खेत बचेंगे, तभी जीवन बचेगा और मिट्टी सुरक्षित रहेगी, तभी किसान समृद्ध होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के अनुरूप ‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य उद्देश्य खेतों की उर्वरता और मिट्टी के प्राकृतिक स्वास्थ्य को संरक्षित करना है। इसके जरिए कृषि को टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करना समय की आवश्यकता है। किसानों को जागरूक कर ऐसी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे खेती की लागत कम हो, उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर बने और किसानों की आमदनी में वृद्धि हो सके।

कृषि मंत्री ने कहा कि खेत और मिट्टी केवल खेती का आधार नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से भी जुड़े हुए हैं। इसलिए खेतों का संरक्षण किसी एक विभाग या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि किसानों और आम नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बीज की गुणवत्ता से समझौता नहीं, गड़बड़ी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि बीजों की गुणवत्ता और आपूर्ति व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बीज वितरण में लापरवाही, गड़बड़ी या किसानों को घटिया गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराने की शिकायत मिलने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय की जाएगी।

खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर सरकार सख्त

कृषि मंत्री ने उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसानों को निर्धारित और उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना तथा इसकी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी, निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने और वितरण में अनियमितता को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के आर्थिक हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुजफ्फरपुर से हुई शुरुआत, 30 नवंबर तक चलेगा अभियान

कृषि मंत्री ने बताया कि बिहार में ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत मुजफ्फरपुर से की गई थी। इसके माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों में किसानों को खेतों के संरक्षण, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार के आह्वान पर 22 अक्टूबर से देशव्यापी स्तर पर इस अभियान की शुरुआत हुई है। बिहार में भी इसे गांव-गांव तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पटना के ज्ञान भवन से इस अभियान को और गति देने का संकल्प लिया गया है। यह अभियान 30 नवंबर 2026 तक संचालित होगा।

38 जिलों के 629 स्कूलों में बनेंगी मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं

मिट्टी के संरक्षण को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। कृषि मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य के सभी 38 जिलों के 629 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी।

इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से विद्यार्थी मिट्टी की गुणवत्ता, उसकी उर्वरता और वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी की जांच करने की प्रक्रिया को समझ सकेंगे। इससे बच्चों में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।

उन्होंने बताया कि इस दिशा में पहले ही 160 पीएम श्री उच्च विद्यालयों में मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। अब इस पहल का विस्तार कर राज्य के अधिक से अधिक विद्यालयों तक पहुंचाने की योजना है।

7,275 किसान बैठकों में 6.19 लाख से अधिक किसानों ने लिया हिस्सा

अभियान के प्रति किसानों की भागीदारी का आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि शारदीय यानी खरीफ मौसम के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 7,275 किसान बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में 6,19,436 किसानों ने भाग लिया।

खास बात यह रही कि इसमें 2,12,610 महिला किसान भी शामिल हुईं। महिला किसानों की इतनी बड़ी भागीदारी को उन्होंने कृषि और मिट्टी संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता का सकारात्मक संकेत बताया।

कृषि मंत्री ने कहा कि खेती-किसानी में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। खेतों की उर्वरता और कृषि की बेहतरी के लिए महिलाओं, युवाओं और किसानों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।

534 प्रखंडों में किसान जागरूकता शिविर, 16 लाख किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आगामी रबी मौसम 2026-27 के लिए अभियान का विस्तृत लक्ष्य भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि इस अभियान को बिहार के सभी 534 प्रखंडों तक पहुंचाया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक प्रखंड की कम से कम दो पंचायतों में विशेष किसान जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे।

सरकार का लक्ष्य इस अभियान के माध्यम से लगभग 15 से 16 लाख किसानों तक सीधे पहुंचना है। इन शिविरों में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य, खेतों की उर्वरता, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि किसानों की सोच और खेती के तौर-तरीकों में सकारात्मक बदलाव लाना है। जब किसान मिट्टी की जरूरत और उसकी गुणवत्ता को समझेंगे, तभी खेती को लंबे समय तक लाभकारी बनाया जा सकेगा।

किसान समृद्धि, महिला उद्यमी और युवा रोजगार पर भी जोर

कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने किसान समृद्धि के साथ महिला उद्यमिता, युवा रोजगार और श्रमिक उत्थान को भी विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि बिहार की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त करना, महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और श्रमिकों के उत्थान की दिशा में निरंतर प्रयास करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल मिट्टी बचाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह बिहार की कृषि व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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