नीरज कुमार के ललन सिंह से दूरी बनाने के बयान के बाद संजय झा ने संभाला मोर्चा, ललन सिंह के योगदान और सम्मान का किया जिक्र। लेकिन नीरज कुमार को लेकर सवाल पूछे जाने पर बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए। MLC चुनाव के नतीजों के बाद JDU में सियासी हलचल तेज।
Patna News: बिहार में विधान परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अंदर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच सामने आ रही बयानबाजी और नाराजगी के बीच अब राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह को लेकर कहा कि ललन सिंह पार्टी के वरिष्ठ और सम्मानित नेता हैं। पार्टी को मजबूत बनाने और विस्तार देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में थोड़ी-बहुत बातें चलती रहती हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त हुई, जब मीडिया ने संजय झा से जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार को लेकर सवाल पूछा। इस सवाल पर संजय झा ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और बिना प्रतिक्रिया दिए आगे बढ़ गए। उनके इस अंदाज ने पार्टी के अंदर चल रही सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी है।
ललन सिंह पर संजय झा ने क्या कहा?
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान संजय झा से ललन सिंह को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि ललन सिंह पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल हैं और पार्टी के सभी लोग उनका सम्मान करते हैं।
संजय झा ने कहा कि ललन सिंह पार्टी के विस्तार और संगठन को मजबूत बनाने में हमेशा सहयोग करते रहे हैं। वे पार्टी के सम्मानित नेता हैं और उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
उन्होंने पार्टी के भीतर चल रही बयानबाजी को सामान्य बताते हुए कहा कि थोड़ी-बहुत बातें चलती रहती हैं। उनके इस बयान को जेडीयू के भीतर सामने आ रहे मतभेदों को शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
नीरज कुमार के सवाल पर क्यों चुप रहे संजय झा?
दरअसल, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चौथी बार जीत दर्ज करने वाले जेडीयू नेता नीरज कुमार ने चुनाव परिणाम आने के बाद ललन सिंह को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने साफ कहा था कि ललन सिंह से आशीर्वाद लेने या मिलने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
नीरज कुमार ने चुनाव के दौरान अपने सामने आई परेशानियों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया था कि आखिर उनका कसूर क्या था? उन्हें चुनावी प्रक्रिया में इतनी मुश्किलों का सामना क्यों करना पड़ा?
नीरज कुमार के इस बयान के बाद जेडीयू के अंदर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई थी। इसी बीच जब संजय झा से नीरज कुमार को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया। ललन सिंह की तारीफ करने के बाद नीरज कुमार से जुड़े सवाल पर उनकी चुप्पी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
नीरज कुमार और ललन सिंह के बीच क्यों बढ़ी दूरी?
जेडीयू के अंदर मौजूदा विवाद की एक बड़ी वजह पटना स्नातक एमएलसी चुनाव को माना जा रहा है। इस चुनाव में नीरज कुमार जेडीयू के उम्मीदवार थे। चुनाव के दौरान मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह के साथ उनका राजनीतिक टकराव सामने आया था।
बताया जाता है कि अनंत सिंह ने नीरज कुमार के समर्थन में प्रचार नहीं किया और उनके खिलाफ राजनीतिक रुख अपनाया। इस विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह को भी दी गई थी।
चुनाव के दौरान ललन सिंह की भूमिका और अनंत सिंह के प्रति उनके रुख को लेकर नीरज कुमार नाराज बताए जा रहे हैं। चुनाव में जीत के बाद नीरज कुमार ने ललन सिंह से मिलने और उनका आशीर्वाद लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद पार्टी के अंदर मतभेदों की चर्चा और तेज हो गई।
MLC चुनाव में JDU का प्रदर्शन, 5 नवंबर को होगी समीक्षा
बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद जेडीयू अपने चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा करने की तैयारी में है। संजय झा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पार्टी की पांच नवंबर को समीक्षा बैठक होगी। इसमें चुनाव के दौरान कहां कमी रह गई और पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक क्यों नहीं रहा, इस पर चर्चा की जाएगी।
जेडीयू ने इस चुनाव में चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी को पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में ही जीत मिली। इस सीट से नीरज कुमार ने जीत दर्ज की है। ऐसे में पार्टी के लिए बाकी सीटों पर मिली हार की समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या JDU में सब कुछ ठीक है?
संजय झा का ललन सिंह को सम्मानित और वरिष्ठ नेता बताना पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है। लेकिन दूसरी तरफ नीरज कुमार की नाराजगी और उनके सवालों पर संजय झा की चुप्पी कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रही है।
एक तरफ नीरज कुमार ललन सिंह से मिलने से इनकार कर चुके हैं, तो दूसरी तरफ संजय झा उनके योगदान और सम्मान की बात कर रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस अंदरूनी खींचतान को किस तरह संभालता है।
फिलहाल संजय झा का बयान साफ संकेत देता है कि जेडीयू नेतृत्व इस विवाद को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय पार्टी के अंदर का मामला मानकर आगे बढ़ना चाहता है। लेकिन सवाल यही है कि क्या पार्टी में चल रही यह छोटी-मोटी बात वास्तव में जल्द खत्म हो जाएगी या आने वाले दिनों में जेडीयू की अंदरूनी राजनीति में कोई नया मोड़ देखने को मिलेगा?


