पटना के NIT घाट से भागलपुर के बरारी घाट तक जारी गंगा नौकायन अभियान के दौरान कैडेटों ने किया बिहार योग विद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण; नुक्कड़ नाटक के जरिए टीबी मुक्त और नशामुक्त भारत का भी दिया संदेश।
Munger News: गंगा की लहरों पर नौकायन करते हुए साहस, अनुशासन और टीम भावना का परिचय दे रहे एनसीसी कैडेटों ने मुंगेर में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को करीब से समझने का अवसर प्राप्त किया। 1 बिहार नेवल यूनिट, एनसीसी के गंगा नौकायन अभियान में शामिल कैडेटों ने गुरुवार को मुंगेर स्थित प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय का भ्रमण किया। इस दौरान कैडेटों ने योग, ध्यान और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के महत्व की जानकारी प्राप्त की।
इस गंगा नौकायन अभियान में बिहार और झारखंड के सीनियर डिवीजन (SD) तथा सीनियर विंग (SW) के कुल 70 एनसीसी कैडेट हिस्सा ले रहे हैं। अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर प्रीतम कुमार कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में साहस, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करना है।
योग और ध्यान से रूबरू हुए एनसीसी कैडेट
बिहार योग विद्यालय के भ्रमण के दौरान कैडेटों को योग और ध्यान के महत्व से परिचित कराया गया। उन्हें बताया गया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने की एक महत्वपूर्ण भारतीय परंपरा है। नियमित योग और ध्यान से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक एकाग्रता, आत्मनियंत्रण और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा मिलता है।
इस शैक्षणिक भ्रमण ने कैडेटों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का अवसर दिया। नौकायन जैसे चुनौतीपूर्ण अभियान के बीच इस तरह की गतिविधियां युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
राष्ट्रसेवा के साथ व्यक्तित्व निर्माण भी अभियान का उद्देश्य
अभियान का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट कमांडर प्रीतम कुमार ने कहा कि एनसीसी कैडेटों के सर्वांगीण विकास के लिए इस तरह के शैक्षणिक और सांस्कृतिक भ्रमण बेहद महत्वपूर्ण हैं। योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक एकाग्रता और आत्मानुशासन को भी बढ़ावा देता है।
उन्होंने कहा कि गंगा नौकायन अभियान कैडेटों को साहस, अनुशासन और टीम भावना सीखने का अवसर देता है। इसके साथ ही उन्हें देश की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक जीवन और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को करीब से समझने का मौका भी मिलता है।
नुक्कड़ नाटक से दिया टीबी मुक्त और नशामुक्त भारत का संदेश
गंगा नौकायन अभियान केवल नौकायन कौशल तक सीमित नहीं है। इसमें शामिल कैडेट सामाजिक जागरूकता की गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। मुंगेर में कैडेटों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को ‘टीबी मुक्त भारत’ और ‘नशामुक्त भारत’ का संदेश दिया।
नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को टीबी के लक्षणों की समय पर पहचान, जांच और उचित उपचार के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। वहीं, नशे के दुष्परिणामों को बताते हुए युवाओं और आम लोगों से नशे से दूर रहने की अपील की गई।
कैडेटों की इस पहल का उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
भारतीय नौसेना के प्रशिक्षक दे रहे तकनीकी मार्गदर्शन
इस अभियान में भारतीय नौसेना के कुशल प्रशिक्षक कैडेटों को नौकायन से संबंधित तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। गंगा की धारा में नौकायन के दौरान कैडेटों को टीम के साथ समन्वय, अनुशासन, धैर्य और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की सीख मिल रही है।
पटना के NIT घाट से भागलपुर के बरारी घाट तक गंगा नदी के रास्ते की दूरी लगभग 220 से 250 किलोमीटर बताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक नौकायन दूरी नदी के चुने गए मार्ग और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इस यात्रा के दौरान कैडेटों को गंगा नदी, उसके आसपास के क्षेत्रों और बिहार की सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है।
नौकायन के साथ सामाजिक बदलाव की पहल
एनसीसी का यह गंगा नौकायन अभियान युवाओं के लिए साहसिक अनुभव के साथ सीखने का भी एक महत्वपूर्ण मंच बन रहा है। इसके माध्यम से कैडेट नौकायन कौशल विकसित करने के साथ योग, स्वास्थ्य जागरूकता, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों से भी जुड़ रहे हैं।


