अनंत सिंह के बयान के बाद सामने आए जेडीयू नेता नीरज कुमार, बोले- न तो मैं तीन में हूं और न तेरह में। दुलारचंद यादव के परिवार में भी नीरज कुमार नाम का व्यक्ति है याचिकाकर्ता, सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं। मेरे बच्चे पर टिप्पणी करना गलत, देश में आज भी ईमान जिंदा है।
Patna News: मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगने और उनकी जमानत रद्द होने के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। अनंत सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर जेडीयू के विधान पार्षद (एमएलसी) नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब नीरज कुमार ने भी सामने आकर इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश में आज भी ईमान जिंदा है और न्यायपालिका के अंदर न्याय मिलता है।
नीरज कुमार ने अनंत सिंह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में न तो वह याचिकाकर्ता हैं और न ही उनकी कोई भूमिका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुलारचंद यादव के परिवार में भी नीरज कुमार नाम का व्यक्ति है, जो इस मामले में याचिका दाखिल कर रहा है। केवल नाम समान होने के कारण उन्हें इस पूरे प्रकरण से जोड़ना उचित नहीं है।
‘ना हम तीन में हैं, ना तेरह में’, नीरज कुमार ने दी सफाई
मीडिया से बातचीत के दौरान नीरज कुमार ने कहा कि इस मामले में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, ”ना हम तीन में हैं और ना तेरह में।” उनका कहना था कि दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़े न्यायिक मामले में उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि याचिका दाखिल करने वाला व्यक्ति दुलारचंद यादव के परिवार से जुड़ा है और उसका नाम भी नीरज कुमार है। ऐसे में नाम की समानता के कारण अनंत सिंह की ओर से उन पर लगाए जा रहे आरोप गलत हैं।
‘इस देश में ईमान जिंदा है’, न्यायपालिका पर जताया भरोसा
नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर किसी तरह की टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि देश की न्यायपालिका में उन्हें पूरा विश्वास है। न्यायपालिका के अंदर न्याय मिलता है और अदालत जो फैसला करती है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के फैसले पर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए। उनके इस बयान को अनंत सिंह के आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकार की कोई भूमिका नहीं, बदनाम करने की साजिश का लगाया आरोप
जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने इस पूरे मामले में बिहार सरकार की भूमिका होने से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि सरकार का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार को इस तरह के मामलों में घसीटकर बदनाम करने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग न्यायिक कार्रवाई को राजनीतिक रंग देकर सरकार की छवि खराब करने की कोशिश करते हैं। नीरज कुमार ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आया है और इसे सरकार से जोड़ना उचित नहीं है।
परिवार पर टिप्पणी से नाराज दिखे नीरज कुमार
बातचीत के दौरान नीरज कुमार ने अपने बच्चे पर की गई टिप्पणी को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विवाद अपनी जगह है, लेकिन किसी के परिवार और बच्चों को इसमें घसीटना ठीक नहीं है।
उनका कहना था कि व्यक्तिगत और पारिवारिक टिप्पणियों से बचना चाहिए। राजनीतिक मतभेद के बावजूद परिवार के सदस्यों को निशाना बनाना उचित नहीं है।
अनंत सिंह के बयान के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनंत सिंह की जमानत रद्द किए जाने और उन्हें एक दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिए जाने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे। अनंत सिंह ने दावा किया था कि उन्होंने पार्टी का विरोध नहीं किया, बल्कि नीरज कुमार का विरोध किया था। उन्होंने नीरज कुमार पर उन्हें मुकदमों में फंसाने और दुलारचंद यादव की हत्या से जुड़े गंभीर आरोप भी लगाए थे।
अब नीरज कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। एक तरफ अनंत सिंह अपने खिलाफ हुई कानूनी कार्रवाई को लेकर राजनीतिक आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ नीरज कुमार न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए खुद को इस मामले से अलग बता रहे हैं।
अब बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा?
दुलारचंद यादव हत्याकांड ने पहले ही मोकामा की राजनीति को गरमा दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलें बढ़ी हैं। वहीं, उनके और जेडीयू नेतृत्व के बीच जारी तल्खी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
अब सवाल यह है कि क्या अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा? फिलहाल नीरज कुमार ने अपना पक्ष रखते हुए साफ कर दिया है कि वह न तो इस मामले के याचिकाकर्ता हैं और न ही इसमें सरकार की कोई भूमिका है। उन्होंने न्यायपालिका के फैसले पर भरोसा जताते हुए पूरे मामले को न्यायिक प्रक्रिया के तहत देखने की बात कही है।


