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​सावधान! थाली में परोसा जा रहा है ‘धीमा जहर’, कृषि मंत्री ने रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर जताई चिंता

​"कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग बन सकता है कैंसर का कारण; कृषि मंत्री ने किसानों को दी जैविक विकल्प और 'ग्रीन लेबल' अपनाने की सलाह।"

Patna News: फसलों में रासायनिक कीटनाशकों का बढ़ता और अनियंत्रित उपयोग न केवल हमारी सेहत के लिए बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है। शनिवार को बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने किसानों और आम जनता को आगाह करते हुए कहा कि कीटनाशी अवशेष युक्त खाद्य पदार्थ कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण बन रहे हैं।

 ‘लाल और पीले’ लेबल वाले कीटनाशकों से बचें किसान

​कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे बाजार में मिलने वाले अत्यधिक विषैले लाल, पीले और नीले लेबल वाले कीटनाशकों के बजाय हरे त्रिकोण लेबल वाले सुरक्षित विकल्पों का चुनाव करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  • अंतिम विकल्प: रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग केवल तभी करें जब फसल बचाने का कोई और रास्ता न बचा हो।
  • अनुशंसित मात्रा: कीटनाशकों का उपयोग केवल कृषि विशेषज्ञों द्वारा तय की गई मात्रा में ही करें। अधिक उपयोग से फसलों की गुणवत्ता गिरती है और जहर की मात्रा बढ़ जाती है।

 जैविक खेती और प्राकृतिक विकल्पों पर जोर

​मंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे रासायनिक जहर के बदले प्रकृति के करीब आएं। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और जैविक उपाय सुझाए:

  1. जैविक कीटनाशी: नीम का तेल, फफूंदनाशी और जीवाणुनाशी का प्रयोग करें।
  2. वैज्ञानिक तकनीक: खेतों में फेरोमोन ट्रैप, लाइट ट्रैप और अवरोधक फसलों (Trap Crops) का इस्तेमाल करें।
  3. प्राकृतिक मित्र: खेतों में कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं (परभक्षी एवं परजीवी) का संरक्षण करें, जो बिना किसी रसायन के हानिकारक कीटों को खत्म कर देते हैं।

 सिर्फ सब्जी ही नहीं, दूध-दही भी हो रहे जहरीले

​कृषि मंत्री ने एक चौंकाने वाला तथ्य साझा करते हुए बताया कि कीटनाशकों का प्रभाव केवल अनाज या सब्जियों तक सीमित नहीं है। चारे के माध्यम से यह जहर पशुओं के शरीर में पहुँच रहा है, जिससे दूध, दही और मांस जैसे उत्पादों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। यह मानव जीवन के लिए एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम कर रहा है।

 टिकाऊ खेती से बनेगा स्वस्थ समाज

​उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाएं और ऐसी किस्मों का चयन करें जिनमें बीमारियां कम लगती हों। उन्होंने कहा:

​”सुरक्षित, संतुलित और टिकाऊ खेती अपनाकर किसान न केवल अपनी उपज की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ समाज भी दे सकते हैं।”

 

सरकार अब एकीकृत कीट-व्याधि प्रबंधन (IPM) को बढ़ावा देने पर फोकस कर रही है ताकि बिहार के खेतों से निकलने वाला अनाज पूरी तरह सुरक्षित और पौष्टिक हो।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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