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शिक्षा की नई इबारत: गया का कुरमावां बना रोल मॉडल, अब बेटियों के हौसलों से उड़ रहा है पूरा पंचायत

​"गया के कुरमावां में शिक्षा की क्रांति; 100% बेटियां जा रही हैं स्कूल, सरकारी नौकरियों और वकालत में लहरा रही हैं परचम।"

Patna News: “बदलेगा बिहार, पढ़ेगी बेटी”—यह नारा गया जिले के कोंच प्रखंड अंतर्गत कुरमावां पंचायत में पूरी तरह सच साबित हो रहा है। कभी विकास की दौड़ में पीछे छूट जाने वाला यह इलाका आज अपनी बेटियों की शिक्षा और शत-प्रतिशत स्कूल उपस्थिति के कारण पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बन गया है। सरकारी योजनाओं और स्थानीय नेतृत्व के सटीक तालमेल ने इस पंचायत की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी है।

 बेटियों के कदमों में सफलता: 100% लड़कियां जा रही हैं स्कूल

​कुरमावां पंचायत में आज शिक्षा की एक नई लहर है। स्थिति यह है कि यहाँ की 100 प्रतिशत लड़कियां नियमित रूप से स्कूल जा रही हैं। शिक्षा के प्रति यह जुनून केवल साक्षरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ की बेटियां अब लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।

  • सफलता की गूंज: पंचायत की दर्जनों लड़कियां आज सरकारी नौकरियों में अपनी सेवा दे रही हैं।
  • विविध क्षेत्र: यहाँ की बेटियां अब वकील बनकर न्याय दिला रही हैं, तो कई अन्य राज्यों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर बड़े कॉरपोरेट घरानों में अपनी पहचान बना रही हैं।

 सरकारी योजनाओं ने भरे हौसलों के रंग

​इस बदलाव के पीछे बिहार सरकार की दूरदर्शी योजनाओं का बड़ा हाथ है। मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, स्कूलों में मुफ्त यूनिफॉर्म, साइकिल योजना और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों ने ग्रामीण अभिभावकों की सोच को बदला है। अब बेटियां बोझ नहीं, बल्कि घर का गर्व मानी जा रही हैं।

 मुखिया उमेश कुमार का विजन: जर्जर गलियों से स्मार्ट क्लासरूम तक

​पंचायत के मुखिया उमेश कुमार के अनुसार, कुछ साल पहले तक यहाँ की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी। बुनियादी ढांचा जर्जर था और लड़कियों को स्कूल भेजना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन सरकार के सहयोग से हुए कार्यों ने सब बदल दिया:

  1. आधुनिक बुनियादी ढांचा: स्कूल भवनों का निर्माण और स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना ने बच्चों को शिक्षा के प्रति आकर्षित किया।
  2. जन संवाद: लगातार अभिभावकों के साथ बैठकें और जागरूकता अभियानों के जरिए शिक्षा के महत्व को घर-घर पहुँचाया गया।
  3. सुविधाएं: बेहतर सड़कों और बिजली की उपलब्धता ने सुरक्षित वातावरण तैयार किया।

 रोजगार और भविष्य की राह

​पंचायत अब केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर भी बढ़ रही है। मुखिया ने बताया कि पंचायत में पॉवर सब-स्टेशन का निर्माण कार्य तेजी पर है। इससे न केवल बिजली की समस्या का स्थायी समाधान होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

​ कुरमावां पंचायत की यह कहानी साबित करती है कि अगर नेतृत्व में इच्छाशक्ति हो और योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से किया जाए, तो सबसे पिछड़ा इलाका भी रोल मॉडल बन सकता है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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