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खेती का ‘बिहार मॉडल’ देख दुनिया हैरान: 190 गांव बने मिसाल, जलवायु परिवर्तन की चुनौती को अवसर में बदला

​3 लाख किसान, 38 जिले और 20 फसल चक्र; बंजर होने से बच रही जमीन और कम लागत में बढ़ रहा मुनाफा

Patna News: ग्लोबल वॉर्मिंग और मौसम के बदलते मिजाज के बीच बिहार ने कृषि जगत में एक नई इबारत लिख दी है। जहाँ दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है, वहीं बिहार का ‘जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम’ अब पूरे देश के लिए रोल मॉडल बन गया है। राज्य के सभी 38 जिलों के करीब 3 लाख किसान इस नई तकनीक को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि भविष्य के लिए खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रहे हैं।

पायलट प्रोजेक्ट से ‘रोल मॉडल’ तक का सफर

​राज्य सरकार ने वर्ष 2019-20 में बेहद छोटे स्तर पर एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत की थी। आज महज 6 साल के भीतर राज्य के 190 गांव पूरी तरह जलवायु अनुकूल खेती की मिसाल पेश कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिकों की देखरेख में 20 अलग-अलग प्रकार के फसल चक्र का प्रदर्शन किसानों के खेतों पर सफलतापूर्वक किया गया है।

आंकड़ों में बिहार की ‘हरित सफलता’:

  • रकबा: वर्ष 2019 से 2025 तक कुल 2.63 लाख एकड़ भूमि में खरीफ, रबी और गरमा फसलें उगाई गईं।
  • लाभार्थी: अब तक 2.78 लाख से अधिक किसान सीधे इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं।
  • प्रशिक्षण: लगभग 6.4 लाख किसानों को एक्सपोजर विजिट और ट्रेनिंग के जरिए नवाचारों से जोड़ा गया।

मोटे अनाजों (Millets) पर विशेष फोकस

​जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बिहार ने 9 तरह के मोटे अनाजों की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया है। करीब 1,910 एकड़ भूमि में ज्वार, बाजरा, रागी, सांवा, कोदो, कुटकी, कंगनी, चीना और ब्राउनटॉप मिलेट उगाए जा रहे हैं। ये फसलें कम पानी और विपरीत मौसम में भी बंपर पैदावार देने में सक्षम हैं।

आधुनिक तकनीक से खेती की लागत में कमी

​खेती को स्मार्ट बनाने के लिए सरकार ने संसाधनों का भी खूब विस्तार किया है:

  1. पानी की बचत: 12,807 एकड़ भूमि में लेजर लैंड लेवलर से समतलीकरण किया गया, जिससे पानी की बर्बादी रुकी।
  2. पराली प्रबंधन: 10,978 एकड़ में वेस्ट डीकम्पोजर और 5,577 टन स्ट्रॉ बैलर के माध्यम से पराली का प्रबंधन किया गया। इससे फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में 17,387 एकड़ तक की कमी आई है।
  3. हैप्पी सीडर: करीब 1,892 एकड़ में इस तकनीक से गेहूं की बुआई की गई, जो मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है।

भविष्य की राह: खाद्य सुरक्षा और खुशहाल किसान

​बिहार सरकार का यह कदम न केवल पर्यावरण को बचा रहा है, बल्कि उत्पादन की लागत को कम कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इसी गति से काम जारी रहा, तो बिहार आने वाले समय में देश का सबसे बड़ा ‘क्लाइमेट स्मार्ट’ कृषि राज्य होगा।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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