Bhagalpur News: बिहार में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और तस्करी के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई और तेज करने का फैसला लिया है। मुख्य सचिव, बिहार सरकार की अध्यक्षता में आयोजित 8वीं NCORD (State Level Narcotics Control Bureau) की उच्चस्तरीय बैठक में नशीले पदार्थों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री और तस्करी पर रोक लगाने पर जोर दिया गया। राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों के चारों ओर 500 मीटर के दायरे को ‘ड्रग-फ्री जोन’ घोषित कर इसे प्रभावी रूप से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
स्कूल-कॉलेजों के आसपास अब सख्ती
सरकार के निर्देश के अनुसार स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास मादक पदार्थों की बिक्री, सप्लाई और तस्करी पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इस संबंध में मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो की ओर से सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेजे जा चुके हैं।
इस कदम का उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों के बढ़ते प्रभाव से बचाना और शैक्षणिक परिसरों के आसपास सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।
सीमावर्ती जिलों में चलेगा विशेष अभियान
मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए राज्य के सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। पुलिस और संबंधित विभागों को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने तथा तस्करी के नेटवर्क को चिन्हित कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।
सरकार का फोकस केवल छोटे स्तर के तस्करों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मादक पदार्थों के संगठित कारोबार से जुड़े बड़े नेटवर्क और अपराधियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे स्टेशन और ट्रेनों पर भी कड़ी निगरानी
नशीले पदार्थों की तस्करी में रेल मार्ग के संभावित इस्तेमाल को देखते हुए रेल परिसर और ट्रेनों में निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। रेलवे पुलिस अधीक्षकों को नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इस दौरान संदिग्ध यात्रियों, सामान और तस्करी के संभावित मार्गों पर विशेष नजर रखने तथा संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया।
पांच वर्षों के NDPS मामलों की हुई समीक्षा
उच्चस्तरीय बैठक में पिछले पांच वर्षों के दौरान NDPS Act के तहत दर्ज मामलों, गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों और जब्त किए गए अवैध मादक पदार्थों की विस्तृत समीक्षा की गई।
समीक्षा के दौरान गांजा, हेरोइन, स्मैक, कोकीन, अफीम, कफ सिरप सहित अन्य नशीले पदार्थों की बरामदगी और इनके खिलाफ की गई कार्रवाई से संबंधित आंकड़ों पर चर्चा हुई।
इसके साथ ही वर्ष 2026 में जुलाई तक NDPS Act के तहत दर्ज मामलों में हुई गिरफ्तारियों और जब्ती की भी समीक्षा की गई।
नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों पर भी जोर
बैठक में केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों के उपचार और पुनर्वास को लेकर भी चर्चा की गई।
मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 के तहत पंजीकृत नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों IRCA और DDAC के संचालन की समीक्षा की गई। संबंधित केंद्रों की प्रभावी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने और नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार एवं पुनर्वास की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
पुलिस अधिकारियों को दिया गया SOP
मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पुलिस अधिकारियों को तलाशी, जब्ती, नमूना संग्रह और अनुसंधान से संबंधित हैंडबुक एवं मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) उपलब्ध करा दी गई है।
सभी जिलों में पुलिस अधिकारियों को इसी SOP के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, ताकि NDPS से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया मजबूत हो और जांच में किसी तरह की कमी न रहे।
खतरनाक तस्करों पर PIT-NDPS Act के तहत कार्रवाई
मादक पदार्थों की संगठित तस्करी में शामिल खतरनाक अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए PIT-NDPS Act के तहत प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजे गए हैं।
इस प्रावधान के जरिए नशीले पदार्थों के संगठित कारोबार में सक्रिय अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
सरकार का साफ संदेश—नशे का कारोबार बर्दाश्त नहीं
बिहार सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री जोन बनाना, सीमावर्ती इलाकों में विशेष अभियान चलाना, रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में निगरानी बढ़ाना तथा संगठित तस्करों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करना सरकार की नशा विरोधी रणनीति का अहम हिस्सा है।
सरकार को उम्मीद है कि इन कदमों से बिहार में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ-साथ युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचाने में भी मदद मिलेगी।


