Bhagalpur News: बिहार के मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश के आलोक में भागलपुर जिले में बाढ़ राहत व्यवस्था को लेकर प्रशासन की निगरानी और तेज हो गई है। जिले के प्रभारी सचिव दीपक आनंद ने मंगलवार को देर रात तक विभिन्न बाढ़ राहत शिविरों और पशु शिविरों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शिविरों में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया और संबंधित पदाधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
प्रभारी सचिव ने राहत शिविरों में पहुंचकर वहां रह रहे बाढ़ प्रभावित लोगों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं जरूरतों की जानकारी ली। उन्होंने भोजन, आवासन, पेयजल, शौचालय, बिजली, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की भी विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
ग्रामीणों से सीधे संवाद, समस्याओं का लिया फीडबैक
निरीक्षण के दौरान प्रभारी सचिव ने राहत शिविरों में रह रहे ग्रामीणों से बातचीत कर यह जानने का प्रयास किया कि उन्हें प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं में किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं हो रही है।
ग्रामीणों द्वारा बताई गई आवश्यकताओं और निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई कर कमियों को रातों-रात दूर करने का निर्देश दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को किसी भी आवश्यक सुविधा के लिए परेशानी नहीं होनी चाहिए।
साफ-सफाई और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव पर जोर
बाढ़ के बाद संक्रमण और जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए राहत शिविरों में स्वच्छता व्यवस्था को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।
प्रभारी सचिव ने शिविर परिसर एवं आसपास नियमित रूप से ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने को कहा। साथ ही शिविरों में मच्छरों से बचाव के लिए नियमित फॉगिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों को शिविरों की साफ-सफाई पर लगातार नजर रखने और कहीं भी गंदगी जमा नहीं होने देने को कहा गया है।
बच्चों को नियमित दूध देने का निर्देश
बाढ़ राहत शिविरों में रह रहे बच्चों की जरूरतों को लेकर भी प्रभारी सचिव ने विशेष निर्देश दिए।
उन्होंने बच्चों के बीच नियमित रूप से दूध का वितरण सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही बच्चों और अन्य बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य की आवश्यकता के अनुसार निगरानी करने का निर्देश दिया।
प्रशासन का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ के कारण विस्थापित परिवारों के बच्चों को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
मेडिकल टीम और दवाओं की उपलब्धता रहे सुनिश्चित
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों के संभावित खतरे को देखते हुए राहत शिविरों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी प्रभारी सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए।
उन्होंने शिविरों में पर्याप्त मात्रा में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा मेडिकल टीम की सक्रिय मौजूदगी बनाए रखने को कहा।
उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर समय पर जांच और आवश्यक उपचार मिल सके। स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी सामने आने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया।
पशु शिविरों का भी किया निरीक्षण
प्रभारी सचिव ने केवल मानव राहत शिविरों तक ही निरीक्षण सीमित नहीं रखा, बल्कि पशु शिविरों का भी जायजा लिया।
उन्होंने बाढ़ प्रभावित पशुओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को पशुओं के लिए आवश्यक चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
बाढ़ के दौरान पशुओं के चारा, स्वास्थ्य और उपचार को लेकर भी प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है।
राहत कार्यों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई जरूरी
निरीक्षण के दौरान प्रभारी सचिव दीपक आनंद ने कहा कि बाढ़ राहत कार्यों में मानवीय संवेदनशीलता, त्वरित कार्रवाई और बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।
उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में रह रहे प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए और उपलब्ध सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाए।
उन्होंने अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों और मांगों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने को कहा, ताकि बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
देर रात तक चला निरीक्षण, प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने का संदेश
मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश के बाद प्रभारी सचिव का देर रात तक राहत एवं पशु शिविरों का निरीक्षण यह दर्शाता है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि साफ-सफाई, फॉगिंग, ब्लीचिंग पाउडर, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, दवाएं और बच्चों के पोषण जैसी मूलभूत सुविधाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और जरूरत के अनुसार तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।


