Bhagalpur News: गंगा और कोसी नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण भागलपुर जिले के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत, भोजन और सुरक्षित आवासन उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न स्थानों पर बाढ़ राहत शिविर एवं सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई में किसी तरह की अव्यवस्था न हो और बाढ़ प्रभावित लोगों को निर्धारित मानकों के अनुसार सुविधाएं मिलती रहें, इसके लिए जिलाधिकारी, भागलपुर ने पदाधिकारियों को नोडल एवं वरीय पदाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया है।
प्रतिनियुक्त अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित राहत शिविरों एवं सामुदायिक रसोई का नियमित निरीक्षण करने और व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।
राहत शिविरों में इन सुविधाओं की होगी निगरानी
प्रशासन ने राहत शिविरों में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया है। निरीक्षण के दौरान वाटरप्रूफ पंडाल, सीलिंग फैन, चौकी, गद्दा, बेडशीट, मसनद, कुर्सी, ट्यूब लाइट, हैलोजन/मेटल, जनरेटर, पानी की टंकी, चापाकल, बैरिंग, टेप वाटर समेत अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी।
इसके अलावा शिविरों में अस्थायी शौचालय एवं स्नानघर की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।
सामुदायिक रसोई में 500 थाली और 500 ग्लास की व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित लोगों को गुणवत्तापूर्ण और व्यवस्थित तरीके से भोजन उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक रसोई केंद्रों में पर्याप्त संसाधन रखने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासन के निर्देश के अनुसार रसोई केंद्रों में न्यूनतम 100 डेक्स-बेंच अथवा 100 टेबल, 400 कुर्सियां, 500 स्टील की थालियां और 500 स्टील के ग्लास उपलब्ध रखने होंगे।
साथ ही भोजन कराने के तरीके को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किया गया है। पत्तल में भोजन कराने और लोगों को जमीन पर बैठाकर भोजन कराने पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा प्लास्टिक या फोम की थाली और ग्लास के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध रहेगा।
तय समय पर मिलेगा सुबह-शाम भोजन
राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित समय-सारणी का पालन करना अनिवार्य किया गया है।
प्रशासन के निर्देश के अनुसार सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
भोजन में तल-भुना खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता नहीं देने का निर्देश दिया गया है। पूरी, कचौड़ी, पापड़, भुजिया, पकौड़ा, समोसा आदि के स्थान पर सुबह और शाम चावल, दाल एवं हरी पत्तेदार सब्जी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
वहीं, राहत शिविरों में रहने वाले छोटे बच्चों के लिए दूध एवं अन्य उपयुक्त पेय पदार्थ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
लाभुकों की पंजी और रिकॉर्ड का होगा सत्यापन
राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई में साफ-सफाई के साथ-साथ रिकॉर्ड को भी व्यवस्थित रखने का निर्देश दिया गया है।
भोजन प्राप्त करने वाले लाभुकों की पंजी, भोजन वितरण पंजी और अन्य आवश्यक अभिलेखों का विधिवत संधारण करना होगा। संबंधित पदाधिकारियों को इन पंजी का नियमित सत्यापन भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
बाढ़ प्रभावित बच्चों के लिए बनेगा अस्थायी स्कूल
बाढ़ के कारण विस्थापित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।
राहत शिविरों में रहने वाले बच्चों के लिए उनकी दैनिक दिनचर्या और सकारात्मक गतिविधियों को बनाए रखने के उद्देश्य से अस्थायी विद्यालय के लिए अलग-अलग स्थल चिह्नित किए जाएंगे। वहां पंडाल का निर्माण कर बच्चों के लिए पठन-पाठन की व्यवस्था की जाएगी।
बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
राहत शिविरों में रह रहे बच्चों के लिए मानक के अनुरूप आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने का निर्देश दिया गया है।
बाढ़ प्रभावित गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के लिए जरूरत के अनुसार दूध एवं पोषण सामग्री उपलब्ध कराने तथा नियमित स्वास्थ्य जांच कराने पर विशेष जोर दिया गया है।
इसके अलावा शिविरों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम और नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित कराने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि बाढ़ के दौरान बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके।
योग और कौशल विकास के जरिए रोजगार पर भी जोर
जिला प्रशासन ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी पहल की है।
शिविरों में योग शिविर और कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर आयोजित कराने का निर्देश दिया गया है। इसके माध्यम से विस्थापित लोगों को स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित करने की योजना है।
इसके लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी, भागलपुर तथा संबंधित प्रशिक्षण संस्थाओं और बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।
बाढ़ में पशुओं के लिए भी चिकित्सा व्यवस्था
जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ उनके पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी है।
इसके लिए पशु चिकित्सा शिविर संचालित करने, पशु चिकित्सा पदाधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा पशुओं को आवश्यक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
जरूरत के अनुसार नए राहत शिविर और रसोई खोलने का निर्देश
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को अपने-अपने प्रखंड में बाढ़ की स्थिति और प्रभावित परिवारों की संख्या का आकलन करने का निर्देश दिया है।
जरूरत पड़ने पर नए बाढ़ राहत शिविर और सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन निर्धारित SOP और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा।
अधिकारियों को दोनों पालियों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई की व्यवस्थाओं की निगरानी करते हुए निर्धारित प्रपत्र में रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
जिला आपदा प्रबंधन शाखा को भेजी जाएगी पालीवार रिपोर्ट
सभी संबंधित पदाधिकारियों को राहत शिविरों एवं सामुदायिक रसोई के संचालन से संबंधित पालीवार प्रतिवेदन तैयार कर जिला आपदा प्रबंधन शाखा, भागलपुर को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
निर्धारित रिपोर्ट को ई-मेल अथवा WhatsApp समूह के माध्यम से पालीवार समेकन के बाद उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रशासन का फोकस साफ—राहत में कोई लापरवाही नहीं
गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव व्यवस्था को लेकर निगरानी और तेज कर दी है। अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के बाद अब राहत शिविरों में भोजन, आवासन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा, महिलाओं के पोषण और पशु चिकित्सा जैसी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी।
जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि बाढ़ से विस्थापित किसी भी परिवार को राहत शिविरों में मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना न करना पड़े और जरूरत के अनुसार प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सके।


