सुल्तानगंज / भागलपुर: सावन के पावन महीने में चारों तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों की गूंज है। देश के कोने-कोने से लाखों शिवभक्त (कांवड़िये) पवित्र जल भरने सुल्तानगंज के नमामि गंगे घाट पहुंच रहे हैं। आस्था और भक्ति के इस समागम के बीच कच्ची कांवड़िया पथ पर एक ऐसा अद्भुत कांवड़ देखने को मिल रहा है, जिसे देखकर हर कोई नतमस्तक हो रहा है।
पटना के मछुआटोली स्थित ‘मल्लाह काँवरिया संघ’ के श्रद्धालु एक अनोखा कांवड़ लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकले हैं। इस कांवड़ की खासियत यह है कि इसमें विशालकाय कछुआ पर महाकाल (भगवान शिव) विराजमान हैं और पूरा कांवड़ तरह-तरह के जीव-जंतुओं के प्रतीकों से सजा हुआ है।
पर्यावरण और जीव-जंतु संरक्षण का अनूठा संदेश
इस अनोखे कांवड़ के जरिए शिवभक्त सिर्फ अपनी आस्था ही व्यक्त नहीं कर रहे, बल्कि समाज को एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील संदेश भी दे रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान भोलेनाथ स्वयं ‘पशुपतिनाथ’ हैं और वे संपूर्ण सृष्टि, प्रकृति व जीव-जंतुओं से समान रूप से प्रेम करते हैं।
“भोलेनाथ सभी से प्यार करते हैं। आज के समय में पर्यावरण को सुरक्षित रखना और बेजुबान जीव-जंतुओं की रक्षा करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। हम बाबा को जल चढ़ाने के साथ-साथ लोगों को प्रकृति और जीवों को बचाने के लिए जागरूक कर रहे हैं।”
— सूरज कुमार सहनी, श्रद्धालु
कांवड़िया पथ पर कौतूहल और श्रद्धा का माहौल
कच्ची कांवड़िया पथ से गुजरते इस कांवड़ को देखने के लिए श्रद्धालुओं और आम लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। जो भी इस कांवड़ को देख रहा है, वह पटना के मल्लाह काँवरिया संघ के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहा है।
“हमारा मकसद यही है कि कांवड़ यात्रा की भक्ति के साथ-साथ लोग पर्यावरण के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी समझें। अगर हमारी प्रकृति और जीव सुरक्षित रहेंगे, तभी मानव जीवन समृद्ध रहेगा।”
— आकाश कुमार सहनी, श्रद्धालु
क्यों खास है यह पहल?
- अद्भुत बनावट: कछुआ पर विराजमान महाकाल का स्वरूप कांवड़िया पथ पर आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
- सामाजिक जागरूकता: धार्मिक यात्रा के जरिए पर्यावरण और बेजुबान जीवों के संरक्षण का गंभीर मुद्दा उठाना।
- सराहनीय प्रयास: सुल्तानगंज से देवघर के रास्ते में हजारों श्रद्धालु इस संदेश से प्रेरित हो रहे हैं।
सावन की इस पावन यात्रा में पटना के इन शिवभक्तों ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि ईश्वर की बनाई इस सुंदर सृष्टि और उसके जीवों की रक्षा करने में भी है।


