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बिहार में मत्स्यपालकों के लिए जिला, प्रमंडल और राज्य स्तर पर बनेंगे मत्स्यजीवी सहकारी संघ; मंत्रियों की बैठक में बनी सहमति

बिहार में पहली बार: पंचायत से राज्य स्तर तक गठित होंगे 'मत्स्यजीवी संघ', मछुआरों को मिलेगी सीधी मदद और बड़ा बाजार

Patna News: बिहार में मत्स्य पालन और जलीय कृषि (Aquaculture) को बढ़ावा देने तथा राज्य के मछुआरों व मत्स्यपालकों को सशक्त बनाने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। सहकारिता विभाग तथा डेयरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के बीच जिला एवं प्रमंडल स्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी संघ और राज्यस्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी परिसंघ के गठन पर पूर्ण सहमति बन गई है।

​सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव और डेयरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नन्दकिशोर राम की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मत्स्यपालक समूहों के प्रतिनिधियों के साथ इस त्रिस्तरीय व्यवस्था के गठन पर विस्तार से चर्चा की गई।

​बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, डेयरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक, निदेशक (मत्स्य) तुषार सिंगला तथा विभिन्न मत्स्यजीवी समूहों के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

​ प्रखंड से राज्य स्तर तक का त्रिस्तरीय नेटवर्क

​वर्तमान में बिहार में केवल प्रखंड (Block) स्तर पर ही प्राथमिक मत्स्यजीवी सहकारी समितियां कार्यरत हैं।

  • ​नई व्यवस्था: अब प्रखंड स्तरीय समितियों को सदस्य के रूप में जोड़कर जिला और प्रमंडल स्तर पर ‘मत्स्यजीवी सहकारी संघ’ बनाए जाएंगे।
  • ​शीर्ष संस्था: इन सभी जिला व प्रमंडल स्तरीय संघों को मिलाकर राज्य स्तर पर एक केंद्रीय ‘राज्यस्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी परिसंघ’ का गठन होगा।
  • ​कैबिनेट प्रस्ताव: दोनों विभागों की सहमति के बाद सहकारिता विभाग द्वारा इस योजना का प्रस्ताव तैयार कर राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है।

​ मछुआरों और मत्स्यपालकों को मिलेंगे ये सीधे लाभ

​संघ और परिसंघ के गठन से राज्य में मत्स्य पालन और संबंधित व्यवसायों का प्रभावी प्रबंधन और विकास संभव हो सकेगा:

  • ​गुणवत्तापूर्ण इनपुट: मत्स्यपालकों को समय पर उन्नत किस्म के मत्स्य बीज (Fish Seed), उच्च गुणवत्ता वाला मत्स्य आहार (Fish Feed) और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
  • ​प्रोसेसिंग और मार्केटिंग: मछली पालन के बाद उसकी पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और बड़े बाजारों तक पहुंच (मार्केटिंग) की एक मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था तैयार होगी, जिससे बिचौलियों का प्रभाव खत्म होगा।
  • ​तकनीकी संवर्द्धन: आधुनिक जलीय कृषि तकनीकों का लाभ सीधे प्राथमिक समितियों और उनके सदस्य मछुआरों तक पहुंचेगा।

​ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका होगी मजबूत

​सहकारिता के इस नए मॉडल से बिहार की सहकारी मत्स्यजीवी संरचना को नई दिशा मिलेगी। इससे न केवल राज्य में मछली उत्पादन और अन्य जलीय उत्पादों का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर मत्स्यपालन से जुड़े हजारों परिवारों की आय में बढ़ोतरी होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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