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बिहार के 715 अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों पर विनियमावली 2011 लागू करने के विरोध में शिक्षकों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन

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Bhagalpur News; बिहार के शिक्षाकर्मियों ने राज्य सरकार द्वारा 715 अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों पर संबद्धता विनियमावली 2011 लागू करने के फैसले के खिलाफ ज़िला मुख्यालयों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह आंदोलन राज्य भर में फैले उन शिक्षण संस्थानों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है, जिन्हें 1970 से 2009 के बीच आम जनता के सहयोग और प्रयासों से स्थापित किया गया था।

क्या है शिक्षकों की आपत्ति?
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि ये 715 विद्यालय बिहार अराजकीय माध्यमिक विद्यालय अधिनियम 1981 की धारा 19 के अंतर्गत विधिवत मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। इस अधिनियम के अनुसार, एक बार राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त हो जाने के बाद किसी अतिरिक्त संबद्धता नियम की आवश्यकता नहीं रह जाती।

शिक्षकों ने आरोप लगाया कि विनियमावली 2011 केवल परीक्षा संचालन की प्रक्रिया के लिए बनाई गई थी, न कि किसी विद्यालय की मान्यता रद्द करने या उनकी स्वायत्तता समाप्त करने के लिए। इस विनियमावली में न तो शिक्षकों को कोई आर्थिक सहायता का प्रावधान है, न छात्रों के लिए किसी सुविधा का उल्लेख।

शिक्षा नीति और नियमावली का हवाला
शिक्षकों ने यह भी बताया कि 2008 तक की शिक्षा नीति के तहत इन स्कूलों को अनुदान देने की अनुमति दी गई थी। छात्रों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा था। इसके अतिरिक्त, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की 1952 की नियमावली भी स्पष्ट करती है कि सरकार से अनुमति प्राप्त स्कूलों पर अतिरिक्त संबद्धता नियम थोपना अनावश्यक और अवैध है।

आंदोलन और सरकार से मांग
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि वह 1981 अधिनियम की धारा 19 के तहत मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर विनियमावली 2011 को लागू करने के निर्णय को तुरंत वापस ले। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।

राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव
यह विवाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते असंतोष की ओर इशारा करता है। यदि समय रहते सरकार ने समाधान नहीं निकाला, तो इससे लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जरूरत है कि राज्य सरकार शिक्षकों की बात सुने और संवाद के ज़रिये समाधान की दिशा में कदम उठाए।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने तैयार की ‘बेदाना लीची’, शाही लीची से भी ज्यादा पल्प, जल्द मिल सकता है जीआई टैग

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Bihar News: बिहार के भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने लीची उत्पादन में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने अब “बेदाना लीची” यानी सीडलेस लीची का सफलतापूर्वक विकास कर लिया है। इस लीची की विशेषता यह है कि इसमें बीज बेहद छोटा होता है और पल्प की मात्रा शाही लीची से भी अधिक होती है।

बिहार: देश की लीची राजधानी
गौरतलब है कि भारत में लीची उत्पादन का 50% हिस्सा बिहार से आता है। शाही लीची को पहले ही भारत सरकार की ओर से जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिल चुका है। अब उसी दिशा में, बीएयू के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने “बेदाना लीची” के लिए भी GI टैग हेतु भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा है।

शाही लीची से भी बड़ी और रसीली
कुलपति डॉ. सिंह ने बताया कि बेदाना लीची का आकार शाही लीची से बड़ा है और इसकी पल्प क्वालिटी भी कहीं बेहतर है। उपभोक्ताओं को यह स्वाद और उपयोगिता दोनों में नई अनुभूति देगा। इसकी विशेषता है कि इसका बीज न के बराबर होता है, जिससे खाने में आसानी और उपयोगिता दोनों बढ़ जाती है।

उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में बीएयू
शुरुआत में बेदाना लीची के केवल 50 मदर प्लांट विश्वविद्यालय में थे, लेकिन अब इसकी संख्या बढ़ाकर 250 से 300 तक ले जाने की तैयारी की जा रही है। बीएयू का फ्रूट रिसर्च विंग इस दिशा में तेज़ी से कार्य कर रहा है।

एक्सपोर्ट की असीम संभावनाएं
शाही लीची पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब यह सीडलेस “बेदाना लीची” बाजार में आएगी, तो इसकी विदेशों में भारी मांग होगी और यह लीची बिहार को वैश्विक फल बाजार में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने तैयार किया सीडलेस आम, आम की 254 से अधिक वेरायटी पर हो रहा काम

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Bihar News: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने आम की खेती में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय ने “सीडलेस मैंगो” यानी बिना गुठली वाला आम विकसित कर लिया है। कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के अनुसार, इस वेरायटी को “सिंधु” नाम दिया गया है, और यह आम के पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखते हुए गुठली से मुक्त होगा।

इतिहास और नवाचार की मिसाल बना बीएयू
बीएयू द्वारा आम पर शोध कोई नई बात नहीं है। 1951 में “महमूद बहार” और “प्रभाशंकर” नाम की दो वेरायटी पहली बार रिलीज की गई थीं। आज, 2025 तक, विश्वविद्यालय के बागानों में करीब 254 किस्मों के आम मौजूद हैं। इनमें से कई किस्में बिहार की जलवायु और मिट्टी के अनुसार अनुकूलित की गई हैं।

जेआई टैग के लिए 12 नई वेरायटी भेजी गईं
भागलपुरी जर्दालु आम को पहले ही भारत सरकार की ओर से जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिल चुका है। अब बीएयू ने 12 और नई आम की किस्मों को जेआई टैग के लिए प्रस्तावित किया है, जो राज्य के आम उद्योग को और नई पहचान दिला सकती हैं।

फलों का मौसम बढ़ाने की दिशा में प्रयास
बीएयू की फ्रूट रिसर्च टीम फिलहाल 30 नई वेरायटी पर काम कर रही है। प्रयास है कि ऐसी किस्में तैयार की जाएं जो दिसंबर तक फल दे सकें। इसके अलावा, साल भर फल देने वाले पेड़ों पर भी रिसर्च चल रही है, जिससे एक पेड़ से सालाना 2000 से अधिक आम मिल सकें।

बिहार बना आम उत्पादन में अग्रणी
बिहार वर्तमान में आम के उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। यहां औसतन 9.5 टन प्रति हेक्टेयर आम का उत्पादन होता है, जबकि राष्ट्रीय औसत 8.8 टन प्रति हेक्टेयर है। इस उपलब्धि में बीएयू की वैज्ञानिक सोच और तकनीकी नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है।

‘आम के आम और गुठली के दाम’ कहावत अब हो रही पुरानी
डॉ. सिंह ने बताया कि सीडलेस आम की वेरायटी के जरिए अब वह कहावत — “आम के आम और गुठली के दाम” — भी पिछड़ती नजर आएगी। यह वेरायटी न सिर्फ उपभोक्ताओं को नई सुविधा देगी, बल्कि किसान और व्यापारियों को बेहतर बाज़ार मूल्य भी दिलाएगी।

कांग्रेस विधायक अजीत शर्मा को कोर्ट से बड़ी राहत, चुनावी मामले में मिली रिहाई

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Bhagalpur News: भागलपुर के कांग्रेस विधायक अजीत शर्मा को अदालत से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने और ईवीएम से छेड़छाड़ के मामले में दर्ज मुकदमे में उन्हें बरी कर दिया गया है।

यह मामला इशाकचक थाना क्षेत्र का है, जहां चुनावी कार्यक्रम के दौरान विधायक अजीत शर्मा और उनके समर्थकों पर दंडाधिकारी की शिकायत पर केस दर्ज किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई।

इस मामले की सुनवाई भागलपुर के एडीजे-3 दीपक कुमार की अदालत में चल रही थी। आज अदालत ने साक्ष्य के अभाव में अजीत शर्मा समेत सभी आरोपियों को रिहा कर दिया।

इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर है। इसे कांग्रेस खेमे के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। अजीत शर्मा वर्तमान में भागलपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और इलाके में एक सशक्त राजनीतिक चेहरा माने जाते हैं।

बिना कारण अलार्म चेन खींचना बना यात्रियों की परेशानी का कारण: पूर्व रेलवे ने जताई चिंता

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Railway News: पूर्व रेलवे ने बिना किसी वैध कारण के ट्रेन में अलार्म चेन खींचने (ACP) की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। यह गैर-जिम्मेदाराना हरकत न केवल ट्रेनों की समयबद्धता को प्रभावित करती है, बल्कि हजारों यात्रियों की यात्रा को भी बाधित करती है।

रेलवे के अनुसार, अप्रैल 2024 से अब तक कुल 2,196 ACP मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 1,882 मामले वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान सामने आए। चालू वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 25 मई 2025) में अब तक 314 नए मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो इस समस्या की निरंतरता को दर्शाता है। इसके अलावा, 1 जनवरी से 10 मार्च 2025 के बीच 872 मामले दर्ज हुए हैं।

पूर्व रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि इस दुरुपयोग की वजह से:

  • 785 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें और 105 पैसेंजर ट्रेनें 2024-25 में देरी से चलीं।
  • 1 अप्रैल से 25 मई 2025 के बीच 114 मेल/एक्सप्रेस और 14 पैसेंजर ट्रेनें प्रभावित हुईं।

यह देरी सिर्फ समय की बर्बादी नहीं है, बल्कि कई यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण अपॉइंटमेंट, नौकरी के इंटरव्यू या प्रतियोगी परीक्षाएं छूटने जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।

रेलवे ने दोहराया कि अलार्म चेन का प्रयोग केवल आपातकालीन स्थितियों — जैसे गंभीर स्वास्थ्य संकट या सुरक्षा खतरे — में किया जाना चाहिए। परंतु कई यात्री निजी या तुच्छ कारणों से इसका दुरुपयोग कर रहे हैं, जैसे किसी रिश्तेदार का इंतजार करना या गैर-निर्धारित स्टेशन पर उतरने की कोशिश करना।

पूर्व रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे जिम्मेदारी से व्यवहार करें और इस सुरक्षा उपकरण का दुरुपयोग न करें। भारतीय रेलवे अधिनियम के तहत ऐसे मामलों को दंडनीय अपराध माना गया है और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ऐसे दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रहा है।

रेलवे ने यह भी अनुरोध किया है कि यात्री दूसरों को भी इस तरह की हरकत करने से रोकें और किसी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें। इस समस्या से निपटने के लिए सामूहिक जागरूकता और जन सहयोग अत्यंत आवश्यक है।

होमगार्ड भर्ती: 259 उम्मीदवार फिट और दैनिक रूप से सफल घोषित

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शारीरिक दक्षता और चिकित्सीय परीक्षण के बाद परिणाम घोषित
Bhagalpur News: गृहरक्षकों के स्वच्छ नामांकन हेतु भागलपुर जिले में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा के अंतर्गत आज दिनांक 26.05.2025 को आयोजित परीक्षण में कुल 259 उम्मीदवारों को फिट और दैनिक रूप से सफल घोषित किया गया।

विज्ञापन संख्या 01/2025 के आलोक में शारीरिक दक्षता की परीक्षा के लिए 1400 उम्मीदवारों को प्रवेश पत्र जारी किए गए थे, जिनमें से 1047 उम्मीदवारों ने परीक्षा में भाग लिया।

  • 1600 मीटर दौड़ परीक्षा में कुल 339 उम्मीदवार सफल हुए।
  • सफल उम्मीदवारों की ऊँचाई और सीना की माप की गई, जिसमें 28 उम्मीदवार निर्धारित मापदंड पूरा नहीं कर सके और असफल घोषित किए गए।
  • इसके उपरांत 311 उम्मीदवारों ने ऊँची कूद, लंबी कूद और गोला फेंक जैसे शारीरिक परीक्षणों में भाग लिया।
  • अंतिम चरण में, 259 उम्मीदवारों को चिकित्सीय परीक्षण में फिट पाकर सफल घोषित किया गया, जबकि 52 उम्मीदवार मेडिकल जांच में असफल हुए।

इसके अतिरिक्त, दिनांक 24.05.2025 के लिए चयनित 62 उम्मीदवारों में से 51 उपस्थित हुए थे।

  • उनमें से 14 उम्मीदवार दौड़ में सफल हुए,
  • 02 उम्मीदवार ऊँचाई और सीना माप में असफल हुए,
  • 08 उम्मीदवार मेडिकल जांच में फिट पाए गए,
  • जबकि 04 उम्मीदवार चिकित्सीय परीक्षा में असफल घोषित किए गए।

यह प्रक्रिया गृहरक्षक भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और दक्षता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विभाग द्वारा चयन प्रक्रिया के सभी चरणों में निष्पक्षता एवं निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है।

भागलपुर में ऋण वसूली के लिए ‘टोनी ट्रेडर्स’ के प्रोपराइटर के विरुद्ध जारी हुआ बॉडी वारंट

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Bhagalpur News:  जिला न्यायालय, भागलपुर के अपर समाहर्त्ता (आपदा प्रबंधन) एवं सह -नीलामपत्र पदाधिकारी कुन्दन कुमार के आदेश पर थाना प्रभारी, बबरगंज को एक बॉडी वारंट (गिरफ्तारी वारंट) जारी किया गया है। यह वारंट टोनी कुमार, प्रोपराइटर – मेरार्स टोनी ट्रेडर्स, के विरुद्ध जारी किया गया है।

यूनियन बैंक की याचिका पर न्यायालय की कार्रवाई

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, मिरजानहाट शाखा, भागलपुर द्वारा दाखिल सर्टिफिकेट केस संख्या 74/2022-23 के तहत  टोनी कुमार पर ₹11,51,495.61/- (ग्यारह लाख इक्यावन हजार चार सौ पचानवे रूपये इकसठ पैसे) की बकाया राशि देय है। बैंक द्वारा इस बकाया राशि की वसूली हेतु बिहार एवं उड़ीसा पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट, 1914 की धारा-5 के अंतर्गत वसूली प्रक्रिया आरंभ की गई है।

प्रो० टोनी कुमार, पिता बासुकी गुप्ता, निवासी – महावीर मार्केट (शिवा इंटरनेशनल होटल के समीप), दर्शन साह लेन, थाना – बबरगंज, जिला – भागलपुर, पिन – 812001 को निर्देशित किया गया है कि वह ₹11,51,593.61/- (जिसमें ₹98/- इजराय खर्च भी शामिल है) की राशि अथवा भुगतान की रसीद न्यायालय में प्रस्तुत करें। ऐसा न करने की स्थिति में उन्हें न्यायालय में हाजिर कराना अनिवार्य किया गया है।

थाना प्रभारी को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे वारंट निष्पादन की प्रक्रिया, दिनांक एवं निष्पादन न होने के कारण को वारंट की पीठ पर स्पष्ट रूप से अंकित करते हुए हस्ताक्षर सहित प्रमाणित करें तथा इसे 30 जून 2025 तक या उससे पूर्व न्यायालय में वापस प्रस्तुत करें।

इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि जिला प्रशासन बकाया सरकारी एवं बैंक ऋणों की वसूली को लेकर कठोर रुख अपनाए हुए है, और निर्धारित कानूनों के तहत कार्रवाई को तत्परता से लागू किया जा रहा है।

नहरों के पानी को अंतिम छोर तक पहुंचाना अभियंताओं की जिम्मेदारी -जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी

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Bihar News: जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार द्वारा आज पटना स्थित विभागीय सभागार में सिंचाई प्रक्षेत्र से संबंधित राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग के माननीय मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी ने की। बैठक का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात वाल्मी शासी पर्षद के परामर्शी अध्यक्ष श्री ईश्वर चंद्र ठाकुर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।

बैठक में विभाग के विभिन्न सिंचाई प्रक्षेत्रों से जुड़ी योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, नहरों की जल आपूर्ति स्थिति, भू-अर्जन से जुड़े लंबित मामलों तथा प्रगति यात्राओं की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।

मंत्री श्री चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभाग का मूल दायित्व राज्य के किसानों को प्रभावी और समयबद्ध सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने सभी अभियंताओं को निर्देशित किया कि नहरों में जल प्रवाह प्रत्येक गांव और खेत तक बिना किसी अवरोध के पहुंचे। उन्होंने आगामी सिंचाई मौसम से पूर्व सभी नहर स्थलों का गंभीर निरीक्षण करने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

उन्होंने कार्यों में कोताही बरतने वाले संवेदकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि हर किसान को समय पर सिंचाई सुविधा मिले और इसके लिए विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

प्रधान सचिव श्री संतोष कुमार मल्ल ने कहा कि विभाग ने अब तक 37 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता सृजित की है, जिसे शत-प्रतिशत क्रियान्वित करना प्राथमिक लक्ष्य है। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में उच्चस्तरीय सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करने और एक सप्ताह के भीतर नहरवार निरीक्षण का रूटमैप तैयार कर समर्पित करने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्होंने चेताया कि यदि किसी क्षेत्र में नहर टूटने या जलप्लावन की स्थिति उत्पन्न होती है तो संबंधित सभी अभियंताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के विभिन्न सत्रों में सिवान, मोतिहारी, दरभंगा, सहरसा, भागलपुर, बिहारशरीफ, गया, औरंगाबाद एवं डिहरी जैसे प्रक्षेत्रों की योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन तकनीकी परामर्शी श्री रविंद्र कुमार शंकर ने किया।

इस अवसर पर विभाग के अपर सचिवगण, अभियंता प्रमुख, मुख्य अभियंता, तकनीकी परामर्शी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट मंत्री जी को प्रस्तुत की और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सुझाव भी दिए।

पूर्व रेलवे ने मवेशी टकराव की घटनाओं की रोकथाम हेतु चलाया जागरूकता अभियान

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Railway News: पूर्व रेलवे ने मवेशी टकराव (Cattle Run Over – CRO) की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं। रेलवे ट्रैक के पास मवेशियों को खुले में चरने देने से न केवल मवेशियों की जान को खतरा होता है, बल्कि ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक (19 मई तक) CRO की 65 घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में दर्ज 61 घटनाओं की तुलना में 6.6% अधिक हैं। इस वृद्धि को देखते हुए पूर्व रेलवे ने अपने विभिन्न मंडलों में विशेष अभियान चलाकर ग्रामीणों को इस विषय में जागरूक किया।

मालदा मंडल में अकबरनगर, सुल्तानगंज, तीनपहाड़, राजमहल, मंदार हिल समेत कई स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त हावड़ा, सियालदह और आसनसोल मंडलों में भी इसी तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

रेलवे अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया कि मवेशियों को ट्रैक के पास छोड़ना रेलवे अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके परिणामस्वरूप ट्रेनों में देरी, यात्रियों को असुविधा और रेलवे संपत्ति को नुकसान होता है।

रेलवे ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सुरक्षित पशुपालन अपनाएँ, मवेशियों को ट्रैक से दूर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी रेलवे को दें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाओं को रोकने में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बेहद जरूरी है।

पूर्व रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और समयबद्ध रेल संचालन के लिए प्रतिबद्ध है।

भागलपुर नगर आयुक्त डॉ. प्रीति का तबादला, जहानाबाद में संभालेंगी डीडीसी का पद

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Bhagalpur News: भागलपुर नगर निगम की नगर आयुक्त डॉ. प्रीति का स्थानांतरण जहानाबाद कर दिया गया है, जहां वे अब उप विकास आयुक्त (डीडीसी) की अहम जिम्मेदारी संभालेंगी। इस अवसर पर नगर निगम कार्यालय में एक भावुक विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने डॉ. प्रीति के योगदान को याद किया ।

सम्मान और सराहना का भावुक पल

समारोह में महापौर डॉ. वसुंधरा लाल ने डॉ. प्रीति को अंग वस्त्र और स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका सम्मान किया। डॉ. प्रीति के कार्यकाल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “भागलपुर नगर निगम को सुशासन, पारदर्शिता और दक्ष प्रबंधन का जो मार्गदर्शन डॉ. प्रीति ने दिया, वह यादगार रहेगा।”

सभी कर्मचारियों ने दी शुभकामनाएं

इस मौके पर नगर निगम के सभी कर्मचारी उपस्थित थे और उन्होंने डॉ. प्रीति के साथ काम करने के अनुभव को प्रेरणादायक बताया। समारोह में वार्ड पार्षद संघ के अध्यक्ष अनिल पासवान, पूर्व उपमहापौर डॉ. प्रीति शेखर, निगम पार्षद पंकज गुप्ता, संजय सिंहा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

सभी वक्ताओं ने डॉ. प्रीति को उनके नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं और भागलपुर में उनके कार्यकाल को ईमानदारी, प्रतिबद्धता और विकासोन्मुख सोच का प्रतीक बताया।