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भागलपुर में झमाझम बारिश से गर्मी और उमस से मिली राहत

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Bhagalpur News:  भीषण गर्मी और उमस से परेशान भागलपुरवासियों को गुरुवार की दोपहर बड़ी राहत मिली, जब मौसम ने अचानक करवट ली और झमाझम बारिश ने पूरे शहर को भिगो दिया। सुबह से ही शहर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा था। चिलचिलाती धूप और बढ़ती उमस के कारण लोग बेहाल नजर आ रहे थे।

दोपहर बाद अचानक मौसम में बदलाव आया। तेज़ हवाओं के साथ आसमान में काले बादल छा गए और कुछ ही देर में तेज़ बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ ठंडी हवाओं ने शहर को गर्मी से राहत दिलाई और तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई।

इस अप्रत्याशित बारिश से जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं सड़कों पर भी रौनक लौट आई। बाजारों और गलियों में लोगों की चहल-पहल बढ़ गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने मौसम के इस खुशनुमा बदलाव का आनंद लिया।

मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक आसमान में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। अचानक बदले इस मौसम ने लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन किसानों के लिए यह बारिश फसलों के लिहाज़ से भी लाभकारी साबित हो सकती है।

भागलपुर में आत्मा योजना की समीक्षा बैठक आयोजित, उप विकास आयुक्त ने दिए दिशा-निर्देश

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Bhagalpur News:  भागलपुर जिले में आत्मनिर्भर कृषि योजना (आत्मा योजना) के तहत आज एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन उप विकास आयुक्त कार्यालय में किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त श्री प्रदीप कुमार सिंह ने की। बैठक में जिला पशुपालन पदाधिकारी, मत्स्य पदाधिकारी समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान पूरे वर्षभर के तहत किए गए कार्यों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। साथ ही आने वाले समय में योजना के तहत लागू की जाने वाली गतिविधियों पर भी चर्चा की गई। उप विकास आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध और प्रभावी ढंग से किया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ सही समय पर किसानों तक पहुंच सके।

उन्होंने यह भी कहा कि आत्मा योजना के माध्यम से पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है। इसके लिए विभागों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से फील्ड स्तर पर निगरानी बढ़ाने और किसानों को अधिक से अधिक योजनाओं से जोड़ने पर बल दिया।

बैठक के अंत में सभी विभागों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि किसानों को योजना की जानकारी और लाभ दोनों आसानी से प्राप्त हों। आत्मा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के कृषक वर्ग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

शिक्षा विभाग का गजब कारनामा: मृत शिक्षक को पदोन्नति के लिए बुलाया प्रमाण पत्र जांच में

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Bhagalpur News: बिहार का शिक्षा विभाग एक बार फिर अपने अनोखे कामकाज के चलते सुर्खियों में आ गया है। इस बार मामला भागलपुर जिले से सामने आया है, जहाँ जिला शिक्षा विभाग ने मृत शिक्षक को पदोन्नति प्रमाण पत्र जांच के लिए कार्यालय में स्वयं उपस्थित होने का फरमान जारी कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

भागलपुर जिला शिक्षा विभाग के स्थापना शाखा ने बुधवार देर शाम स्नातक परीक्षित वेतनमान में पदोन्नति के लिए 20 शिक्षकों की सूची जारी की। इस सूची में सभी शिक्षकों को कहा गया कि वे अपने मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, सेवा पुस्तिका, प्रवेश पत्र, अंक पत्र और विभागीय अनुमति पत्र के साथ कार्यालय में उपस्थित हों।

इस सूची के चौथे स्थान पर मनोज कुमार झा, शिक्षक, मध्य विद्यालय शिवशंकरपुर, शाहकुंड का नाम है। लेकिन मनोज कुमार झा का निधन 22 मार्च 2025 को पटना में इलाज के दौरान हो गया था। वे कैंसर से पीड़ित थे। उनकी मृत्यु की सूचना और मृत्यु प्रमाण पत्र विद्यालय की प्रधानाध्यापक द्वारा संबंधित प्रखंड कार्यालय को पहले ही सौंप दिया गया था।

शोकाकुल परिवार और शर्मसार विभाग

शिक्षक के परिवार को इस आदेश से गहरा दुख पहुँचा है। मृतक के नाम पर जारी इस नोटिस से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे पहले भी शिक्षा विभाग कई बार मृत या सेवा निवृत्त शिक्षकों को स्पष्टीकरण नोटिस भेजने के लिए आलोचना झेल चुका है।

विद्यालय की प्रधानाध्यापक की प्रतिक्रिया

स्मृति कुमारी, प्रधानाध्यापक, मध्य विद्यालय शिवशंकरपुर ने कहा:

“22 मार्च को ही मनोज कुमार झा जी का निधन हो गया था, जिसका प्रमाण पत्र प्रखंड कार्यालय में जमा कर दिया गया है। फिर भी विभाग द्वारा उनका नाम सूची में शामिल किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

स्थापना पदाधिकारी ने दी सफाई

इस विषय पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), देवनारायण पंडित ने सफाई देते हुए कहा:

“यह केवल प्रमाण पत्र जांच की प्रक्रिया है, पदोन्नति अभी नहीं दी गई है। सूची में यदि कोई मृत शिक्षक शामिल हैं, तो उनका नाम हटा दिया जाएगा।”

पहले भी हुई है किरकिरी

यह कोई पहला मामला नहीं है।

  • मार्च 2025 में अटेंडेंस न देने वाले 1388 शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिनमें कई मृत और सेवानिवृत्त शिक्षक भी शामिल थे।
  • 8 मई 2025 को कहलगांव प्रखंड की शिक्षिका उषा कुमारी, जिनका निधन 5 फरवरी को हो चुका था, उनसे भी देरी से स्कूल आने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।

दस्तावेज़ में छेड़छाड़ का मामला: सीओ रवि कुमार ने सुल्तानगंज थाना में दर्ज कराई प्राथमिकी

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड में भूमि दस्तावेज़ में कथित छेड़छाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। अंचल पदाधिकारी (सीओ) रवि कुमार ने इस संबंध में सुल्तानगंज थाना में लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रमिला देवी, पति रमेश मंडल उर्फ रमेश साह, निवासी पिलदौरी एवं वर्तमान साकिन राजेन्द्र प्रिंटिंग प्रेस गली, जो कि कृष्णगढ़ मोड़ स्थित AMT ईंट भट्ठा की संचालिका हैं, पर आरोप है कि उन्होंने दाखिल-खारिज हेतु नामांतरण (दाखिला संख्या 41/2024-25) के लिए फर्जी दस्तावेज़ प्रस्तुत किए।

आवेदन के मुताबिक, प्रमिला देवी ने नगर परिषद वार्ड संख्या-1, मौजा में खाता संख्या 213, खेसरा संख्या 3 में 1 एकड़ 84.25 डिसमिल भूमि के लिए आवेदन दिया था। साथ ही, दस्तावेज़ में नया और पुराना खेसरा मिलान हेतु अंचल अमीन की रिपोर्ट संलग्न की गई थी, जिसमें इतने बड़े रकवे पर उनका दखल-कब्जा बताया गया।

लेकिन जांच में पता चला कि प्रमिला देवी का वास्तविक कब्जा मात्र 1 एकड़ 10.50 डिसमिल भूमि पर है। इस गड़बड़ी के संबंध में अंचल अमीन रश्मि कुमारी से जब स्पष्टीकरण माँगा गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उनके द्वारा प्रस्तुत अमीन प्रतिवेदन में छेड़छाड़ की गई थी। जमीन का वास्तविक रकवा 1.10.50 डिसमिल होते हुए भी उसे गलत तरीके से 1.84.25 डिसमिल दिखाया गया।

सीओ रवि कुमार ने इसे गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की और प्रमिला देवी के विरुद्ध संबंधित धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज करवाई है।

भूमि का स्वामित्व
उक्त भूमि शिबम चौधरी की माता एवं बड़ी माता के नाम खतियान में दर्ज है। इसके बावजूद प्रमिला देवी द्वारा गलत नियत से अधिक भूमि को अपने नाम चढ़ाने का प्रयास किया गया, जिसे अंचल पदाधिकारी ने समय रहते पकड़ लिया।प्रशासन द्वारा आगे की जांच जारी है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जेपी गंगापथ, गायघाट डाउन रैंप और कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6 लेन पुल निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

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Patna News:  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज पटना के जेपी गंगापथ (गंगा ड्राइव वे) पर चल रहे लैंडस्केपिंग, पौधारोपण और सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जेपी गंगापथ जैसी अद्भुत परियोजना का सौंदर्यीकरण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। उन्होंने इस पथ पर लोगों के लिए सड़क सुरक्षा और निर्बाध आवागमन को प्राथमिकता देने की बात कही।

गायघाट में डाउन रैंप निर्माण कार्य का निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री गायघाट पहुंचे, जहां जेपी गंगापथ से सटे नदी की ओर बनाए जा रहे डाउन रैंप का कार्य प्रगति पर है। फिलहाल यहां वाहनों को यू-टर्न लेकर नीचे उतरना पड़ता है, लेकिन डाउन रैंप के पूरा होते ही सीधा और सुरक्षित संपर्क संभव हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि:

  • कार्य में तेजी लाई जाए,
  • डाउन रैंप को महात्मा गांधी सेतु और प्रस्तावित फोरलेन पुल से भी जोड़ा जाए,
  • इससे जेपी गंगापथ की संपर्कता में अभूतपूर्व सुधार आएगा।

कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6 लेन पुल का भी किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने इसके बाद निर्माणाधीन कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6 लेन पुल का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्य शीघ्र पूर्ण किया जाए ताकि:

  • उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बहाल हो,
  • पटना शहर के यातायात दबाव में कमी आए,
  • और जेपी गंगापथ से इस पुल के जरिये सीधी संपर्कता संभव हो सके।

उन्होंने यह भी बताया कि जेपी गंगापथ परियोजना को दीदारगंज तक पूरा किया जा चुका है, और इस पुल के पूरा होने से पटना के पूर्वी क्षेत्र के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा।

निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे वरीय अधिकारी

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ कई वरीय अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:

  • मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार
  • विकास आयुक्त श्री प्रत्यय अमृत
  • पथ निर्माण विभाग के सचिव श्री संदीप पुदुकल कट्टी
  • मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार
  • मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह
  • पटना के जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह
  • अन्य वरीय अधिकारी एवं अभियंता गण

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करना और लोगों को सुलभ, सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराना है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को समयसीमा का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया।

विक्रमशिला सेतु के पास खाई से युवक का शव बरामद, गले में बंधा मिला पीले रंग का कपड़ा; हत्या की आशंका से सनसनी

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Bhagalpur News: जिले के इस्माइलपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत जहानवी चौक के समीप स्थित विक्रमशिला सेतु पुल के बगल की खाई में एक युवक का संदिग्ध अवस्था में शव बरामद हुआ है। शव मिलने के बाद क्षेत्र में आतंक और अफरा-तफरी का माहौल बन गया है, जबकि प्रथम दृष्टया इसे हत्या का मामला माना जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने सबसे पहले देखा शव

घटना सुबह की बताई जा रही है जब पास के स्थानीय निवासियों ने खाई में शव देखा और शोर मचाया। यह स्थान सब्जी बाजार के लिए जाना जाता है और घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर प्रतिदिन सब्जी मंडी भी लगती है।

शव के पास मिला संदिग्ध फंदा, गले में बंधा पीला कपड़ा

मौके पर मौजूद लोगों और पुलिस के अनुसार, शव के गले में पीले रंग का कपड़ा बंधा हुआ था, और वही कपड़ा पास के एक पेड़ से भी लटका हुआ मिला। इससे यह आशंका प्रबल हो रही है कि युवक की हत्या कर शव को खाई में फेंका गया, या फिर पेड़ से लटका कर आत्महत्या को दिखाने की कोशिश की गई।

पुलिस और फॉरेंसिक टीम पहुंची मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही सबसे पहले ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद इस्माइलपुर थाना पुलिस, 112 नंबर की आपातकालीन सेवा, और एफएसएल (Forensic Science Lab) की टीम ने मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू कर दी है।

अब तक शव की पहचान नहीं

पुलिस ने बताया कि अब तक शव की पहचान नहीं हो सकी है। युवक की उम्र लगभग 25-30 वर्ष के बीच मानी जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और सीसीटीवी फुटेज खंगालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

इलाके के निवासी इस घटना से काफी आक्रोशित और डरे हुए हैं। स्थानीय नागरिक संजीव कुमार उर्फ झाबो ने कहा:

“नवगछिया क्षेत्र में अपराध लगातार बढ़ रहा है। पुलिस को और सतर्क होने की जरूरत है। यह हत्या प्रतीत होती है, और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।“

वहीं मौके पर मौजूद ट्रैफिक सिपाही ने बताया:

“हमें सूचना मिली कि एक शव गड्ढे में पड़ा हुआ है। जब मौके पर पहुंचे, तो युवक के गले में पीले कपड़े से फंदा बंधा था और वही कपड़ा पास के पेड़ से भी लटका मिला। मामला संदिग्ध है, जांच जारी है।“

हैम रेडियो ने मिलाया पिता-पुत्र को: कुंभ मेले में बिछड़े 83 वर्षीय वकील मंडल दो महीने बाद अपने परिवार से फिर जुड़े

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Bhagalpur News: मानवता, तकनीक और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला जब 83 वर्षीय वकील मंडल, जो दो महीने पहले कुंभ मेले की भीड़ में अपने परिवार से बिछड़ गए थे, हैम रेडियो क्लब की मदद से अपने बेटों से फिर से मिल गए।

वकील मंडल बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव थाना क्षेत्र के कुलकुलिया सैदपुरा के निवासी हैं। मार्च के अंतिम सप्ताह में वह गांव के अन्य लोगों के साथ कुंभ स्नान के लिए निकले थे। लेकिन भीड़-भाड़ और भगदड़ के बीच वे अपने साथियों से बिछड़ गए और गलती से हुगली (पश्चिम बंगाल) की ओर जाने वाली ट्रेन में चढ़ गए।

भटकते हुए पहुंचे श्रीरामपुर, हालत बेहद खराब

हुगली जिले के श्रीरामपुर क्षेत्र में सड़कों पर कई दिनों तक भटकने और भोजन के अभाव में वकील मंडल की हालत बेहद कमजोर हो गई थी। वे बोलने की स्थिति में भी नहीं थे। स्थानीय लोगों ने जब उन्हें लाचार हालत में देखा, तो श्रीरामपुर पुलिस स्टेशन को सूचना दी। पुलिस ने उन्हें श्रीरामपुर वाल्श अस्पताल में भर्ती कराया।

हैम रेडियो बना सहारा

लगभग दो महीने तक चले इलाज के बाद जब वकील मंडल कुछ बोलने और चलने-फिरने योग्य हुए, तब अस्पताल प्रशासन ने मदद के लिए पश्चिम बंगाल हैम रेडियो क्लब से संपर्क किया। क्लब के सचिव अंबरीश नाग विश्वास ने बताया:

“25 मार्च को वकील मंडल श्रीरामपुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में मिले थे। उनकी हालत बेहद नाजुक थी। ठीक होने के बाद हमने उनकी फोटो खींचकर देशभर के हैम रेडियो नेटवर्क में भेजी और पहचान की प्रक्रिया शुरू की।“

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने निभाई अहम भूमिका

हैम रेडियो क्लब ने जब तस्वीर और विवरण भोलसर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि नीरज मंडल और पंचायत समिति सदस्य मनोज मंडल तक पहुंचाया, तो पहचान की पुष्टि हुई। फिर परिजनों से संपर्क कर उनके बेटे को कोलकाता बुलाया गया, और वकील मंडल को सौंप दिया गया।

परिवार के लिए चमत्कार से कम नहीं

वकील मंडल के पांच बेटे हैं — इंद्र ऋषि, कमलेश्वरी, प्रमोद, सुबोध और महेंद्र। कुंभ मेले से वापस लौटे साथियों ने घर आकर कह दिया था कि शायद वकील मंडल की मृत्यु हो चुकी है, जिससे परिवार ने भी मान लिया था कि वे अब नहीं रहे।

लेकिन दो महीने बाद जब खबर मिली कि वकील मंडल जीवित हैं और कोलकाता के एक अस्पताल में हैं, तो यह पूरे परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।

200 करोड़ की लागत से बना सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल अब भी अधूरा, जनता इंतजार में

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Bhagalpur News: पूर्वी बिहार के लोगों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 200 करोड़ रुपये की लागत से बना सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल अब भी पूरी तरह से चालू नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार द्वारा 2018 में स्वीकृत इस परियोजना का उद्घाटन उस समय के केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे द्वारा किया गया था।

हालांकि भवन और ढांचा पूरी तरह बनकर तैयार है, लेकिन अब तक बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं इस अस्पताल में शुरू नहीं हो सकी हैं। जिससे शहरवासियों में निराशा है और सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कई वर्षों की प्रतीक्षा, लेकिन सेवा अधूरी

मायागंज अस्पताल की लचर व्यवस्था के बाद भागलपुरवासियों के लिए सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एक उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी इसमें स्वास्थ्य सेवा प्रारंभ नहीं हो पाई है।

इस दौरान केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर निर्माण पूरा करने के लिए अल्टीमेटम जारी किया गया। निर्माण में विलंब को लेकर कार्रवाई भी हुई, लेकिन सेवा शुरू होने में अब तक टालमटोल की स्थिति बनी हुई है।

सांसद और अधिकारी कर चुके हैं पहल

भागलपुर के सांसद अजय मंडल ने कई बार इस अस्पताल को चालू करने की मांग उठाई, लेकिन धरातल पर कोई ठोस बदलाव नहीं हो पाया।

हाल ही में अस्पताल अधीक्षक डॉ. अभिलेश कुमार ने सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का निरीक्षण किया और जल्द सेवा शुरू करने का आश्वासन दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा:

“यह अस्पताल भागलपुर और आसपास के लोगों के लिए वरदान साबित होगा। आधुनिक उपकरणों की कमी के कारण इसमें थोड़ी देर हुई है, लेकिन जून महीने से इसे सुचारू रूप से शुरू कर दिया जाएगा।“

डॉक्टरों की भारी कमी

अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि:

“2018 में अस्पताल को स्वीकृति मिली थी, लेकिन 2020 में कोविड महामारी के कारण कार्य में देर हुई। अधिकांश उपकरणों की इंस्टॉलेशन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, कुछ शेष उपकरण जल्द मंगवाए जा रहे हैं।“

उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल में 353 डॉक्टरों की आवश्यकता थी, लेकिन अब तक सिर्फ 10 डॉक्टर ही नियुक्त हो पाए हैं। फिर भी मौजूदा संसाधनों के आधार पर इनडोर और न्यूरोलॉजी विभाग की सेवाएं जून से प्रारंभ करने की तैयारी है।

राजस्व कर्मियों के लिए अंतिम अवसर: 30 मई तक हड़ताल समाप्त करने पर मिलेगा उपार्जित अवकाश और सेवा नियमितीकरण का लाभ

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Bihar News: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के हड़ताली राजस्व कर्मियों के लिए एक “अंतिम अवसर” की घोषणा की है। विभाग के सचिव श्री जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि जो भी राजस्व कर्मचारी 30 मई 2025, शुक्रवार शाम 5:00 बजे तक हड़ताल समाप्त कर अपने पदस्थापन स्थल पर योगदान देंगे, उन्हें हड़ताल अवधि के लिए उपार्जित अवकाश का लाभ प्रदान किया जाएगा और उनकी सेवा अवधि नियमित मानी जाएगी।

इस तिथि के बाद योगदान करने वाले कर्मचारियों के लिए स्पष्ट निर्देश है कि उनके वेतन की गणना “नो वर्क, नो पे” के आधार पर की जाएगी तथा उनकी सेवा के नियमितीकरण पर निर्णय विभाग द्वारा भविष्य में लिया जाएगा।

पूर्व सूचना का अनुस्मरण

ज्ञात हो कि विभाग द्वारा 21 मई 2025 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से यह जानकारी पहले ही दी जा चुकी थी कि सभी हड़ताली कर्मचारी तीन दिनों के भीतर अपने कार्य पर लौटें। इसके बाद कई जिलों से जानकारी प्राप्त हुई है कि अनेक कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर योगदान दे दिया है।

सरकार का स्पष्ट निर्देश:

  • 30 मई 2025 शाम 5:00 बजे तक योगदान करने वालों को हड़ताल अवधि के लिए उपार्जित अवकाश की स्वीकृति और सेवा नियमितीकरण का लाभ मिलेगा।
  • निर्धारित समयसीमा के बाद लौटने वाले कर्मचारियों के वेतन का भुगतान “नो वर्क, नो पे” नीति के अनुसार किया जाएगा।
  • ऐसे कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही भी की जाएगी।
  • विभाग द्वारा प्रदत्त लैपटॉप को समय सीमा तक कार्यालय में वापस नहीं करने पर PDR अधिनियम के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।

सचिव जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों से यह भी कहा है कि वे ऐसे कर्मचारियों के विरुद्ध की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन शीघ्र विभाग को उपलब्ध कराएं।

भागलपुर के आहुति गांव में 70 साल से नहीं बनी सड़क, इलाज और पानी को तरसते ग्रामीण

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आज़ादी के 70 वर्षों के बाद भी भागलपुर जिले के बिहपुर विधानसभा क्षेत्र के हरियो पंचायत स्थित आहुति गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं की राह देख रहा है। सड़क, स्वास्थ्य सेवा और स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित इस गांव के ग्रामीणों ने बुधवार को उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह से मिलकर अपनी पीड़ा साझा की और गांव की दयनीय स्थिति पर कार्रवाई की माँग की।

ना सड़क, ना अस्पताल, ना साफ़ पानी

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने आज तक गांव में एक भी पक्की सड़क नहीं देखी। गांव की गलियों में कच्चे रास्ते और कीचड़ ही आम जीवन का हिस्सा हैं। बीमार व्यक्तियों को अस्पताल ले जाना एक दुःस्वप्न से कम नहीं होता।

एक ग्रामीण ने कहा,

“जब से होश संभाला है, तब से यही हाल देख रहे हैं। सड़क नहीं है, अस्पताल नहीं है, आंगनबाड़ी महीनों बंद रहती है। बीमार को चारपाई पर उठाकर ले जाना पड़ता है।”

गांव में नल-जल योजना का लाभ भी नहीं पहुंच पाया है। लोग आज भी गंदे पानी पर निर्भर हैं, जिससे गांव में बीमारियां और स्वास्थ्य समस्याएं आम हो गई हैं।

प्रशासन से लगाई गुहार

गांव के आक्रोशित ग्रामीणों ने भागलपुर के उप विकास आयुक्त को आवेदन सौंपा और जल्द से जल्द गांव की स्थिति सुधारने की अपील की।
उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि,

“हमने पांच सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है। टीम जल्द ही गांव का दौरा कर रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

अब निगाहें प्रशासन पर

गांव के लोगों को अब उम्मीद है कि यह कार्यवाही सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि ज़मीनी स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं।
सवाल यह है: क्या आज़ादी के 75 साल बाद भी देश के कोनों में बसे गांव ऐसे ही उपेक्षित रहेंगे? क्या लोकतंत्र की रोशनी इन अंधेरे गांवों तक कभी पहुंचेगी?