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जमीन विवाद में परिजनों ने युवक को लाठी-डंडे से किया घायल, मायागंज अस्पताल में भर्ती

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के पीरपैंती थाना क्षेत्र में रविवार को जमीन विवाद को लेकर आपसी रंजिश का मामला हिंसक झड़प में बदल गया। इस दौरान पीरपैंती निवासी इंद्रदेव पहाड़िया को उनके ही परिजनों ने लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज) में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

घायल के छोटे भाई रामदेव पहाड़िया ने बताया कि विवादित जमीन उनके परिवार को वर्षों पहले बुजुर्गों द्वारा दान पत्र के माध्यम से दी गई थी। परिवार कई दशकों से उस जमीन पर रह रहा है। लेकिन कुछ रिश्तेदार लंबे समय से इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। रविवार को इसी विवाद को लेकर कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। आरोप है कि परिजनों ने लाठी-डंडों से हमला कर इंद्रदेव पहाड़िया को गंभीर रूप से घायल कर दिया।

रामदेव पहाड़िया का कहना है कि इस हमले में उनके बड़े भाई इंद्रदेव पहाड़िया के साथ उनके बेटे को भी चोटें आई हैं। हमलावर घटना के दौरान गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी भी दे रहे थे। परिजनों और ग्रामीणों की मदद से घायलों को पहले पीरपैंती प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया गया।

पीड़ित पक्ष ने पीरपैंती थाना में इस घटना को लेकर प्राथमिकी दर्ज करवाई है, जिसमें लगभग 10 लोगों के नाम शामिल हैं। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि हमलावरों ने सोची-समझी साजिश के तहत इस घटना को अंजाम दिया, ताकि परिवार को जमीन से बेदखल किया जा सके।

रामदेव पहाड़िया ने कहा, “हम वर्षों से अपने पुश्तैनी जमीन पर रह रहे हैं, जिसे दान पत्र में हमारे बुजुर्गों ने दिया था। अब सुशासन सरकार में हमें उम्मीद है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और हमें न्याय मिलेगा।”

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह विवाद कई वर्षों से चला आ रहा है, लेकिन पहले कभी इतनी गंभीर घटना नहीं हुई थी। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और लोग प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

पीरपैंती थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

बाढ़ के पानी में जलजीवों का खतरा, भागलपुर में मगरमच्छ के हमले से दहशत

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भागलपुर: गंगा के बढ़ते जलस्तर ने इस समय पूरे भागलपुर जिले में भयावह बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। कई मोहल्ले और गांव पानी से पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। घरों के भीतर तक पानी घुस जाने से लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। इस बीच बाढ़ का पानी अब एक नए खतरे को भी अपने साथ लेकर आया है — जलजीवों की बढ़ती मौजूदगी।

ताज़ा घटना में, एक मगरमच्छ ने तीन लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायलों को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चश्मदीदों के अनुसार यह घटना उस समय हुई जब लोग बाढ़ के पानी से होकर अपने घर लौट रहे थे। अचानक पानी में छिपा मगरमच्छ सामने आया और हमला कर दिया।

यह अकेला मामला नहीं है। एक दिन पहले भी जिले के अलग-अलग बाढ़ग्रस्त इलाकों में मगरमच्छ के हमले की कई घटनाएं सामने आईं, जिनमें पांच लोग घायल हुए थे। पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ के पानी में इन खतरनाक जलजीवों की मौजूदगी से अब बाहर निकलना बेहद खतरनाक हो गया है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कई दिनों से मगरमच्छ और अन्य जलजीवों की मौजूदगी की शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल विशेष टीम तैनात करे, ताकि जलजीवों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जा सके और लोगों की जान खतरे से बचाई जा सके।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ के समय नदी से सटे इलाकों में जलजीवों का घुसना स्वाभाविक है, क्योंकि उनका प्राकृतिक आवास भी पानी में डूब जाता है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि विशेष टीमों को सक्रिय किया जा रहा है और बाढ़ग्रस्त इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ के दौरान मगरमच्छ, सांप, कछुए और अन्य जलजीव सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसे में लोगों को बेहद सतर्क रहना चाहिए और अकेले पानी में उतरने से बचना चाहिए।

फिलहाल, भागलपुर के बाढ़ पीड़ित लोग दोहरी मार झेल रहे हैं — एक तरफ बढ़ते जलस्तर का खतरा और दूसरी ओर जलजीवों का आतंक। प्रशासन के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो चुकी है।

बाढ़ के बीच टापू बना तिलकामांझी विश्वविद्यालय, राष्ट्रपति के संभावित दौरे से बढ़ी प्रशासन की चिंता

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भागलपुर:  बिहार के कई जिले इन दिनों गंगा नदी में आए उफान के कारण बाढ़ की चपेट में हैं। बक्सर से लेकर भागलपुर तक गंगा के निचले इलाकों में पानी भर गया है और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। भागलपुर का गौरव कहे जाने वाला तिलकामांझी विश्वविद्यालय भी इस आपदा से अछूता नहीं रहा। चारों ओर पानी से घिर जाने के कारण यह अब टापू की तरह नजर आ रहा है।

विश्वविद्यालय परिसर में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे पठन-पाठन की नियमित गतिविधियों पर असर पड़ा है। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कक्षाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, हालांकि कार्यालयों का कामकाज फिलहाल जारी है। पानी से घिरे होने के कारण छात्र, शिक्षक और कर्मचारी अब नाव के सहारे आ-जा रहे हैं। इस स्थिति में दैनिक गतिविधियों को बनाए रखना भी कठिन हो गया है।

बाढ़ के बीच एक और चुनौती सामने आई है — राष्ट्रपति का संभावित भागलपुर दौरा। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति तिलकामांझी की प्रतिमा का अनावरण करने के लिए विश्वविद्यालय आने वाले हैं। हालांकि कार्यक्रम की आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बाढ़ के इस विकट माहौल में कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित करना विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर कार्यक्रम स्थल तक सुरक्षित पहुंच, अतिथियों के स्वागत और आयोजन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की योजना बना रहे हैं। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में अस्थायी रास्ते, नाव सेवा और पानी निकासी जैसे उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर पिछले एक हफ्ते से लगातार बढ़ रहा है और अगर पानी का स्तर और बढ़ा तो विश्वविद्यालय के भीतर और बाहर दोनों जगह की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। वहीं मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे प्रशासन की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

बाढ़ की मार झेल रहे छात्रों और कर्मचारियों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार शुरू कर दिया है, ताकि शैक्षणिक कार्य पूरी तरह से बाधित न हों। इस बीच, राष्ट्रपति के दौरे को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन बाढ़ के साए में यह कार्यक्रम सभी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने है।

धोरैया में सड़क हादसे में 15 वर्षीय किशोर की मौत, परिवार में मातम

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Banka News: धोरैया प्रखंड में सोमवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में 15 वर्षीय मनीष कुमार की मौत हो गई। मनीष, दिनेश मंडल का पुत्र था और अपनी मां के साथ बाजार जा रहा था।

परिजनों के अनुसार, रास्ते में एक अनियंत्रित चारपहिया वाहन ने मनीष को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही गिर पड़ा। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तुरंत भागलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इस घटना के बाद मृतक के परिवार और पूरे गांव में मातम छा गया। परिजन गोपाल कुमार ने कहा कि यह हादसा बेहद दर्दनाक है और मनीष की कमी हमेशा खलेगी।

भागलपुर में 13 अगस्त को रोजगार मेला, Aamdhanе Pvt Ltd में 50 पदों पर भर्ती

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भागलपुर:  श्रम संसाधन विभाग, अवर प्रादेशिक नियोजनालय भागलपुर की ओर से 13 अगस्त 2025 को एक दिवसीय रोजगार मेला आयोजित किया जा रहा है। यह मेला नियोजनालय परिसर में पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक चलेगा, जिसमें Aamdhanе Pvt Ltd की ओर से 50 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी।

भर्ती विवरण इस प्रकार हैं:

  • पदनाम: सुपरवाइजर, फोरमैन, फिट्टर, मानसून हेल्पर (25 पद)
    योग्यता: 8वीं, 10वीं, आईटीआई एवं उससे ऊपर
    आयु सीमा: 18 से 45 वर्ष
    वेतन: ₹18,000 – ₹30,000
    अन्य लाभ: फ्री लोडिंग पीएफ और ईएसआईसी इंश्योरेंस
  • पदनाम: डाटा ऑपरेटर, सीनियर एसोसिएट, असेंबली ऑपरेटर (25 पद)
    योग्यता: 10वीं, 12वीं, आईटीआई एवं उससे ऊपर
    आयु सीमा: पुरुष – 18 से 35 वर्ष, महिला – 18 से 30 वर्ष
    वेतन: ₹18,000 – ₹25,000
    अन्य लाभ: फ्री फूड, पीएफ और ईएसआईसी

रोजगार मेला में भाग लेने के लिए उम्मीदवारों को नियोजनालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण और भागीदारी पूर्णतः नि:शुल्क होगी। उम्मीदवार अपने सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, 2 पासपोर्ट साइज फोटो एवं पंजीयन प्रमाण पत्र के साथ उपस्थित हों।

अधिकारियों ने जिले के योग्य युवाओं से अपील की है कि इस अवसर का लाभ उठाकर रोजगार प्राप्त करें।

महेशी मोतीचक में गंगा में डूबने से 15 वर्षीय युवक की मौत

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भागलपुर:  सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के महेशी पंचायत के मोतीचक दियारा में गंगा का जलस्तर बढ़ने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। गंगा किनारे खेलते समय पैर फिसलने से 15 वर्षीय मनोरंजन कुमार (पिता – रामबिलास मंडल) की डूबने से मौत हो गई।

घटना के बाद परिजनों ने आनन-फानन में युवक को रेफरल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।

इस हादसे पर जनप्रतिनिधि एवं राजद नेता नट बिहारी मंडल और जिला पार्षद सदस्य आशा जायसवाल ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। स्थानीय लोगों ने गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना शहरी (पश्चिमी क्षेत्र) में 766.73 करोड़ की 6 योजनाओं का किया शिलान्यास

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पटना:  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को पटना शहरी (पश्चिमी क्षेत्र) के लिए 766.73 करोड़ रुपये की 6 सड़क निर्माण योजनाओं का शिलान्यास किया। यह योजनाएं प्रगति यात्रा के दौरान की गई घोषणाओं से संबंधित हैं और इनका उद्देश्य पश्चिमी पटना की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।

मुख्यमंत्री ने एम्स गोलंबर-जानीपुर-पैनापुर नेव (10.5 किमी) पथ के 2 लेन चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य (138.5 करोड़), नौबतपुर-लख में फ्लाईओवर निर्माण (73.06 करोड़), खगौल नेहरु पथ चौड़ीकरण (71.48 करोड़), दीघा-एम्स पाटली पथ से दानापुर कनेक्टिविटी (143.86 करोड़), रुपसपुर नहर से सगुना मोड़ तक नेहरु पथ विकास (318.51 करोड़) और नेहरु पथ से गोला रोड चौड़ीकरण (21.35 करोड़) का शिलान्यास किया।

सीएम ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से फुलवारीशरीफ, एम्स, दानापुर, नौबतपुर, दीघा और खगौल समेत पूरे पश्चिमी पटना में ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी, औद्योगिक एवं सामाजिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और जे.पी. सेतु से एम्स तक की यात्रा आसान होगी।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विधान पार्षद रविंद्र कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त प्रत्यय अमृत सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

गंगा का कहर NH-80 पर – भवनाथपुर के पास सड़कों पर तेज बहाव, प्रशासन की बैरिकेडिंग बेअसर

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भागलपुर:  गंगा का रौद्र रूप अब राष्ट्रीय राजमार्ग-80 (NH-80) पर भी खतरा बनकर सामने आ रहा है। भवनाथपुर के पास गंगा का पानी तेज रफ्तार से सड़क पर बह रहा है, जिससे स्थिति बेहद खतरनाक हो गई है।

जिला प्रशासन ने पानी के तेज बहाव को देखते हुए बैरिकेडिंग कर रास्ता रोकने की कोशिश की है, लेकिन इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर यहां से गुजर रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी भागलपुर से सुल्तानगंज जाने वाले यात्रियों को हो रही है, जिन्हें अब लंबे वैकल्पिक मार्ग से यात्रा करनी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज बहाव में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से इस मार्ग पर न निकलें और सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें।

मुसीबत में भी कमाई का धंधा – NH पर बाइक पार कराने के नाम पर हो रही उगाही

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भागलपुर:  बाढ़ से त्रस्त भागलपुर के लोगों के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब हालात यह हो गए हैं कि आपदा के बीच भी कुछ लोग मुनाफा कमाने का तरीका खोज रहे हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर बाढ़ का पानी भरने से बाहर से आने-जाने वाले यात्री फंस रहे हैं। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए कुछ स्थानीय लोग बाइक पार कराने के नाम पर खुलेआम पैसों की मांग कर रहे हैं। जो यात्री तय रकम चुका देते हैं, उनकी बाइक ट्रैक्टर पर लादकर पानी पार कराई जाती है, जबकि बाकी लोगों को वहीं रोक दिया जाता है।

स्थानीय निवासियों ने इसे “आपदा में अवसर” का गलत और शर्मनाक उदाहरण बताया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिला प्रशासन इस उगाही से अनजान बना हुआ है और NH पर यह अवैध खेल लगातार जारी है।

नाथनगर पहुंचे शाहनवाज हुसैन, बोले – वार्ड 4 में भी लगे राहत कैंप, मवेशियों के चारे की भारी कमी

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नाथनगर (भागलपुर): भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन सोमवार को नाथनगर के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे पर पहुंचे। उन्होंने चंपानगर के मेदनी नगर में बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी और मौके पर स्थिति का जायजा लिया।

शाहनवाज हुसैन ने जिला प्रशासन की ओर से लगाए गए राहत शिविरों की व्यवस्था की सराहना की, लेकिन कहा कि वार्ड संख्या 4 में भी तत्काल राहत कैंप स्थापित किया जाए, क्योंकि वहां के लोग भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से मवेशियों के चारे की भारी कमी और बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में विषैले जीव-जंतुओं के खतरे की ओर प्रशासन का ध्यान दिलाया।

उन्होंने आग्रह किया कि प्रभावित परिवारों के साथ-साथ मवेशियों के भोजन और सुरक्षा की व्यवस्था पर भी प्राथमिकता से काम किया जाए, ताकि आपदा से जूझ रहे लोगों और उनके पशुओं दोनों को राहत मिल सके।