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प्रधानमंत्री करेंगे आंता घाट–सिमरिया 6 लेन पुल का उद्घाटन, विकास को मिलेगी नई गति

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Patna: बिहार के विकास को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक दिन अब नज़दीक है। आंता घाट–सिमरिया गंगा नदी पर बना अत्याधुनिक 6 लेन पुल प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन किया जाएगा। यह पुल न केवल बिहार बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को एक नई मजबूती प्रदान करेगा।

बता दे  कि आंता घाट–सिमरिया रेल–सह–सड़क पुल के पूर्व में यह विशाल सड़क पुल बनाया गया है। इसके अलावा पुल के पश्चिम में एक नया रेल पुल भी निर्माणाधीन है। इस आधुनिक आधारभूत ढांचे के पूरा होने से क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन आएगा।

इस पुल के बन जाने से भारी वाहनों के आवागमन में अत्यधिक सहूलियत होगी। पूर्वोत्तर भारत की ओर आने-जाने वाले ट्रकों को अब अधिक सुगमता मिलेगी। वहीं, दक्षिण बिहार से उत्तर बिहार तक पत्थर और बालू से लदे ट्रकों का परिवहन भी निर्बाध रूप से हो सकेगा। यह पुल माल ढुलाई और औद्योगिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सड़क परिवहन के क्षेत्र में यह परियोजना बेगूसराय सहित सम्पूर्ण क्षेत्र के लिए एक वरदान साबित होगी। पुल के बन जाने से स्थानीय व्यापार, उद्योग और निवेश के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच भी और आसान हो जाएगी।

यह 6 लेन पुल बिहार को आधुनिक भारत के विकास पथ से जोड़ने वाला सेतु है। यह न केवल गंगा के दोनों किनारों को जोड़ेगा बल्कि एक सशक्त, सशक्तिशाली और आत्मनिर्भर बिहार की नींव को और मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री का यह उद्घाटन निश्चित रूप से बिहार की प्रगति यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

स्वतंत्रता दिवस पर युगचेतना फाउंडेशन ने मनाया स्थापना दिवस, अनाथालय में बच्चों संग बांटी खुशियां

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भागलपुर: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर युगचेतना फाउंडेशन, भागलपुर ने नाथनगर स्थित रामानंदी हिंदू अनाथालय में अपना स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर अनाथालय में रह रहे बच्चों के जन्मदिन के रूप में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण भावनात्मक और उत्साहपूर्ण बन गया।

युगचेतना फाउंडेशन एक प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्था (NGO) है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित है। संस्था के संरक्षक प्रख्यात समाजसेवी डॉ. शंभू दयाल खेतान ने कहा कि “युगचेतना फाउंडेशन पूरी निष्ठा और सेवा भाव से समाज के वंचित वर्गों के लिए काम कर रही है। सामाजिक कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी, हम सेवा को ही अपना धर्म मानते हैं।” उन्होंने इस बात पर भी प्रसन्नता जताई कि भारत का स्वतंत्रता दिवस और युगचेतना फाउंडेशन का स्थापना दिवस एक ही दिन आता है।

इस अवसर पर संस्था के निदेशक शिवनंदन खेतान ने कहा कि फाउंडेशन आने वाले समय में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कार्य करेगी। उन्होंने घोषणा की कि अगले तीन वर्षों में एक लाख पेड़ लगाए जाएंगे, जिनका संरक्षण भी संस्था की जिम्मेदारी होगी। वहीं प्रिया अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि संस्था महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देगी। इसके तहत गरीब महिलाओं को शिक्षा, कंप्यूटर साक्षरता और कुटीर उद्योगों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. उग्र मोहन झा ने की। इस अवसर पर प्रख्यात चिकित्सक डॉ. डी.पी. सिंह, समाजसेवी लक्ष्मी नारायण डोकनिया, पूर्व मेयर सीमा साह, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष टुनटुन साह, डॉ. कमल किशोर मंडल, अरुण कुमार और रवि कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की गई।

फाउंडेशन की कोर कमेटी का परिचय डॉ. राहुल कुमार ने कराया और मंच संचालन डॉ. संजय जयसवाल ने किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मणिकांता ने दिया।

इस मौके पर अनाथालय के बच्चों के बीच वस्त्र और शिक्षण सामग्री का वितरण किया गया तथा उनके लिए विशेष भोजन की भी व्यवस्था की गई। युगचेतना फाउंडेशन के कोर कमेटी सदस्यों ने संकल्प लिया कि हर वर्ष वे अपना जन्मदिन अनाथालय के बच्चों के साथ ही मनाएंगे।

वाणिज्य संकाय की भर्ती में दिव्यांग अभ्यर्थी की अनदेखी पर आक्रोश

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भागलपुर: भागलपुर के नेशनल कॉलेज में कार्यरत अतिथि व्याख्याता कुन्दन कुमार दुबे ने विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा वाणिज्य विषय के 112 पदों की भर्ती में दिव्यांग अभ्यर्थियों के साथ हुई अनदेखी पर गंभीर आपत्ति जताई है। इस संबंध में उन्होंने भागलपुर नगर विधायक अजीत शर्मा को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।

कुन्दन कुमार दुबे, जो पिछले सात वर्षों से तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अधीन भागलपुर नेशनल कॉलेज में अतिथि व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं, 90 प्रतिशत शारीरिक विकलांगता से पीड़ित हैं। उन्होंने B.Com, M.Com, NET एवं Ph.D की उपाधि प्राप्त की है। बावजूद इसके, आयोग द्वारा निकाली गई रिक्तियों में दिव्यांग कोटे की तीन सीटें दृष्टिबाधित वर्ग को आवंटित कर दी गईं, जिससे गंभीर शारीरिक विकलांग अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है।

श्री दुबे ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वे स्वतंत्रता सेनानी के नाती हैं और वर्षों से शैक्षणिक क्षेत्र में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा दिव्यांग अभ्यर्थियों में श्रेणीवार संतुलन बनाए बिना सीटों का आवंटन करना न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि विकलांग वर्ग के हक की अनदेखी भी है।

उन्होंने विधायक अजीत शर्मा से आग्रह किया है कि इस मामले में हस्तक्षेप कर दिव्यांग अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने का प्रयास करें। उनका कहना है कि यदि आयोग सही वर्गीकरण करता तो उन्हें भी वाणिज्य विषय में अवसर मिलता।

कुन्दन कुमार दुबे का यह कदम दिव्यांग अभ्यर्थियों की समस्याओं को उजागर करता है और यह मुद्दा अब भागलपुर के शैक्षणिक एवं राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

बिहार में बना देश का पहला डिजिटल कृषि निदेशालय, किसानों को मिलेगा रियल टाइम लाभ

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पटना: बिहार ने एक बार फिर कृषि क्षेत्र में पूरे देश के लिए मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने देश का पहला डिजिटल कृषि निदेशालय गठित किया है। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद शुरू हुई यह ऐतिहासिक पहल राज्य के किसानों के लिए एक नई दिशा तय करेगी।

इस डिजिटल कृषि निदेशालय का मुख्य उद्देश्य है – किसानों को रियल टाइम में योजनाओं का लाभ पहुंचाना, फसल और मौसम आधारित सटीक आंकड़े उपलब्ध कराना, उत्पादन और उत्पादकता का पूर्वानुमान लगाना तथा एकीकृत कृषि डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली विकसित करना। इससे न केवल नीति निर्माण और संसाधन वितरण की प्रक्रिया सुदृढ़ होगी, बल्कि किसानों को समय पर जानकारी और सहायता भी मिल सकेगी।

राज्य सरकार अब डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से प्रत्येक फसल मौसम में सटीक और अद्यतन आंकड़े एकत्र करेगी। इससे किसानों को फसल आधारित अनुदान योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि वर्ष 2018 से बिहार सरकार किसानों को आधार आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से डीज़ल अनुदान, इनपुट अनुदान और आपदा सहायता सीधे बैंक खातों में उपलब्ध करा रही है। वर्तमान में दो करोड़ से अधिक रैयत एवं गैर रैयत किसान इस पोर्टल पर पंजीकृत हैं, जो देश का सबसे बड़ा डिजिटल किसान पंजीकरण है।

डिजिटल कृषि निदेशालय के अंतर्गत किसानों को अब डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड, डिजिटल क्रॉप एस्टीमेशन सर्वे, पौध संरक्षण में ड्रोन तकनीक और कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा किसानों और कृषि पदाधिकारियों की सुविधा के लिए विशेष मोबाइल एप्लिकेशन और ई-गवर्नेंस टूल्स भी विकसित किए जाएंगे।

इस पहल से कृषि उत्पादन में वृद्धि, मौसम आधारित सलाह, बाजार की जानकारी और आपदा प्रबंधन में तेजी आएगी। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के सभी डेटाबेस एकीकृत होने से किसान एक ही प्लेटफॉर्म पर योजनाओं और सूचनाओं का लाभ ले सकेंगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यह कदम बिहार को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएगा तथा राज्य को कृषि डिजिटलीकरण में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान दिलाएगा।

निस्संदेह, यह पहल किसानों की आय में वृद्धि, कृषि के आधुनिकीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने में मील का पत्थर साबित होगी।

“जन्माष्टमी पर भक्ति में डूबा भागलपुर, साईं पालकी यात्रा में उमड़ा जनसैलाब”

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भागलपुर: कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भागलपुर शहर का माहौल भक्तिरस से सराबोर हो गया। धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा तब देखने को मिला जब शहर के घंटाघर स्थित महावीर मंदिर से भव्य साईं पालकी यात्रा निकाली गई।

यह यात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर शहर की मुख्य गलियों और चौक-चौराहों से होती हुई पुनः महावीर मंदिर में संपन्न हुई। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। जगह-जगह भक्तों ने पालकी का स्वागत किया और श्रद्धालुओं की सेवा के लिए प्रसाद वितरण एवं पेयजल के स्टॉल लगाए गए।

भक्ति में डूबा रहा शहर

जन्माष्टमी के अवसर पर निकली इस पालकी यात्रा में सजीव झांकियों और भजन-कीर्तन ने भक्तिमय वातावरण बना दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई इस दिव्य झांकी को देखने और साईं पालकी की एक झलक पाने के लिए उत्सुक नजर आया। ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चारण से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।

सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी

आयोजन को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखा। यात्रा मार्ग पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई और यातायात को भी समय-समय पर नियंत्रित किया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं यात्रा का जायजा लिया और सुरक्षा व्यवस्था पर निगरानी रखी।

श्रद्धा और उत्साह का संगम

इस मौके पर श्रद्धालुओं ने कहा कि जन्माष्टमी का पर्व न केवल भगवान कृष्ण के जन्म का प्रतीक है, बल्कि यह आस्था, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी देता है। साईं पालकी यात्रा ने पूरे शहर को भक्ति और उल्लास के रंग में रंग दिया।

शहरवासियों का कहना है कि इस तरह के आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और आपसी मेल-जोल को भी मजबूत बनाते हैं।

जन्माष्टमी पर निकली इस साईं पालकी यात्रा ने भागलपुर की गलियों को भक्ति और श्रद्धा से सराबोर कर दिया और हर कोई इस दिव्य पल का साक्षी बनकर धन्य महसूस करता रहा।

“गोपाल मंडल के विवादित बयान से जदयू में बवाल, सांसद अजय मंडल और कुमारी अपर्णा ने खोला मोर्चा”

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भागलपुर: भागलपुर की राजनीति इस समय सियासी घमासान से गुजर रही है। जदयू की आंतरिक खींचतान तब खुलकर सामने आ गई जब गोपालपुर के विधायक गोपाल मंडल ने सांसद अजय मंडल और जदयू महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश महासचिव कुमारी अपर्णा को लेकर बेहद आपत्तिजनक बयान दे दिया। विधायक ने आरोप लगाया कि “कुमारी अपर्णा, अजय मंडल की रखैल हैं।”

इस बयान के बाद राजनीति में भूचाल आ गया। सांसद अजय मंडल ने इसे असहनीय करार देते हुए गोपाल मंडल के खिलाफ घोंघा थाना में मामला दर्ज करा दिया। वहीं, विवाद थमने के बजाय और गहराता चला गया जब गोपाल मंडल ने प्रेस वार्ता कर अजय मंडल पर पलटवार करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि “अजय मंडल एचआईवी पॉजिटिव हैं और उन्हें संसद जाने से रोका जाना चाहिए।”

अजय मंडल और कुमारी अपर्णा की प्रेस वार्ता

इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच आज सांसद अजय मंडल और कुमारी अपर्णा ने भागलपुर में संयुक्त प्रेस वार्ता की। प्रेस वार्ता में अजय मंडल ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और अपनी पार्टी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने साफ कहा कि “न्यायालय का जो भी फैसला होगा, मैं उसे मानने को तैयार हूँ। आरोप बेबुनियाद हैं और यह राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।”

वहीं, कुमारी अपर्णा ने गोपाल मंडल के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि “अजय मंडल मेरे मामा हैं। यह बात गोपाल मंडल को भी भलीभांति पता है। इसके बावजूद उन्होंने इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी की, जो बेहद निंदनीय है। क्या इस स्तर तक गिरकर राजनीति की जानी चाहिए?”

उन्होंने आगे कहा कि गोपाल मंडल के बयान की शिकायत उन्होंने पार्टी आलाकमान तक पहुँचा दी है और अब वे आलाकमान के निर्णय को मानने के लिए तैयार हैं।

पार्टी में बढ़ी खींचतान

इस पूरे घटनाक्रम ने जदयू की आंतरिक राजनीति को खुलकर सतह पर ला दिया है। जहां एक ओर सांसद अजय मंडल और उनके समर्थक गोपाल मंडल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गोपाल मंडल का यह दावा कि उन्होंने “सच उजागर” किया है, पार्टी के लिए सिरदर्द बन गया है।

जदयू के अंदरूनी मतभेद अब सार्वजनिक हो चुके हैं, जिससे पार्टी की छवि पर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद ने पार्टी में गुटबाजी की स्थिति को और पुख्ता कर दिया है।

आगे की राह

अब सबकी निगाहें न्यायालय और पार्टी आलाकमान के फैसले पर टिकी हुई हैं। अगर आलाकमान ने इस मामले पर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो जदयू में असंतोष और गहरा सकता है। वहीं, न्यायिक प्रक्रिया के नतीजे भी आने वाले समय में इस विवाद की दिशा तय करेंगे।

फिलहाल भागलपुर की जनता और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब जनप्रतिनिधि ही इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करेंगे, तो आम जनता क्या संदेश लेगी?

भागलपुर में मामूली विवाद बना खौफनाक, कुल्हाड़ी से हमला कर चार लोग घायल

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भागलपुर: भागलपुर जिले के मधुसुदनपुर थाना क्षेत्र के मनोहरपुर गांव में शनिवार को मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। बताया जाता है कि बर्तन (लोहिया) को लेकर शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इस दौरान एक पक्ष के लोगों ने कुल्हाड़ी से हमला कर दिया, जिसमें चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। घायलों में से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें मायागंज अस्पताल रेफर किया गया है, जबकि बाकी दो घायलों का इलाज स्थानीय क्लीनिक में चल रहा है।

पीड़ित परिवार का आरोप

पीड़ित परिवार का कहना है कि पड़ोसी विजय मंडल और सिंटू मंडल शराब के नशे में उनके घर आए और गाली-गलौज करने लगे। जब परिवार के लोगों ने इसका विरोध किया तो उन्होंने अचानक हमला कर दिया। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि आरोपी इससे पहले भी कई बार गाली-गलौज कर चुके हैं और जान से मारने की धमकी दे चुके थे।

पुलिस की कार्रवाई

घटना की लिखित शिकायत मधुसुदनपुर थाना पुलिस को दी गई है। पुलिस ने घायलों को इलाज दिलाने के बाद मामला दर्ज करने की बात कही है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और पूरे मामले की जांच कर रही है।

गांव में दहशत

इस घटना के बाद मनोहरपुर इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटी-सी बात पर इस तरह का हिंसक हमला चिंताजनक है। लोग प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

शादी के दो महीने बाद नवविवाहिता ने लगाई फांसी, पति के अफेयर के शक से थी परेशान

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भागलपुर: भागलपुर जिले के सुलतानगंज थाना क्षेत्र के मोदी टोला गांव में शनिवार को एक दर्दनाक घटना घटी। महज़ दो महीने पहले शादी के बंधन में बंधी नवविवाहिता रिया कुमारी (23) ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। रिया की शादी सरकारी शिक्षक रूपेश कुमार से हुई थी। बताया जा रहा है कि पति के एक्स्ट्रा लव अफेयर के शक को लेकर दोनों के बीच लगातार विवाद चल रहा था।

कैसे हुई घटना?

घटना की जानकारी सबसे पहले मृतका के ससुर नारायण मोदी को हुई। उन्होंने बताया कि रूपेश अपने माता-पिता से अलग घर में रहते हैं। शनिवार को जब वह कमरे में पहुंचे तो देखा कि बहू फंदे से लटक रही है। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही सुलतानगंज थाना अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वहीं डीएसपी नवजीत कुमार ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और एफएसएल टीम से साक्ष्य एकत्रित करवाए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

परिजनों का क्या कहना है?

मृतका के ससुर ने बताया कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर बहू ने आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठाया। वहीं दूसरी ओर स्थानीय सूत्रों के अनुसार रिया को पति के अफेयर की जानकारी मिली थी और इसी कारण से वह मानसिक रूप से काफी आहत थी। शादी के महज़ दो महीने बाद इस तरह की घटना ने परिवार और गांव के लोगों को स्तब्ध कर दिया है।

पुलिस की कार्रवाई

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल जांच आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना आत्महत्या है या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी है। पुलिस ने मृतका के परिजनों के बयान दर्ज कर लिए हैं और मामले की गहन जांच की जा रही है।

माहौल में मातम

घटना के बाद से मृतका के मायके और ससुराल दोनों जगह मातम पसरा हुआ है। गांव के लोग इस हृदयविदारक घटना को लेकर दहल गए हैं। दो महीने पहले हुई शादी की खुशियां अब गम में बदल गईं।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री सहित कई गणमान्य नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

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पटना: पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर आज पूरे राज्य में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया। राजधानी पटना स्थित पाटलिपुत्रा पार्क में उनकी आदमकद प्रतिमा पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय, सांसद  रविशंकर प्रसाद, विधान पार्षद  राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, श्रीमती कुमुद वर्मा, विधायक संजीव चौरसिया, पूर्व विधायक श्रीमती उषा विद्यार्थी सहित कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने वाजपेयी जी के राष्ट्रहित में किए गए योगदान को याद किया और उन्हें महान नेता व प्रेरणास्रोत बताया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, पटना प्रमंडल के आयुक्त डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम., तथा वरीय पुलिस अधीक्षक श्री कार्तिकेय के. शर्मा भी उपस्थित रहे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के कलाकारों द्वारा आरती-पूजन, बिहार गीत और देशभक्ति गीतों का गायन किया गया, जिससे वातावरण देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो गया।

अटल बिहारी वाजपेयी जी को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वे एक ऐसे राजनेता थे जिन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया। उनकी काव्यात्मक शैली, दूरदर्शी नेतृत्व और लोकहितकारी नीतियाँ आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

शुरू हुआ राजस्व महाअभियान, डिजिटल जमाबंदी और पारदर्शिता पर जोर

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पटना: बिहार सरकार ने भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सुगमता लाने के उद्देश्य से पूरे राज्य में राजस्व महाअभियान की शुरुआत कर दी है। यह अभियान 20 सितम्बर तक चलेगा, जिसके तहत गांव-गांव और हर हलका क्षेत्र में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। अब लोगों को जमीन से जुड़े अपने दस्तावेजों के सुधार, दाखिल-खारिज, बंटवारा और ऑनलाइन जमाबंदी जैसी सेवाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

क्या है राजस्व महाअभियान?

राजस्व महाअभियान बिहार सरकार की एक बड़ी पहल है, जिसके अंतर्गत भूमि संबंधी सभी कार्यों को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है। राजस्वकर्मी सीधे गांव-गांव पहुंचकर लोगों को उनकी ऑनलाइन जमाबंदी की प्रति देंगे। इस प्रक्रिया में नागरिकों का मोबाइल नंबर और अन्य आवश्यक जानकारी पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। प्रति प्राप्त करने के समय नागरिकों से रसीद पर हस्ताक्षर भी लिए जाएंगे।

अगर किसी जमाबंदी में त्रुटि या अधूरी जानकारी पाई जाती है, तो मौके पर ही आवेदन देकर उसका सुधार कराया जा सकेगा। जिन संपत्तियों के मालिक का निधन हो चुका है, उनके उत्तराधिकारियों के नाम पर दाखिल-खारिज का फॉर्म भी आसानी से उपलब्ध होगा। वहीं, बंटवारा हो चुकी संपत्तियों के लिए अलग फॉर्म का प्रावधान किया गया है।

शिविर में मिलेंगी ये सुविधाएं

अभियान के दौरान हर हलका क्षेत्र में राजस्व कर्मियों की देखरेख में शिविर आयोजित होंगे। इन शिविरों में कर्मी लैपटॉप और इंटरनेट से लैस रहेंगे ताकि लोगों का आवेदन तुरंत ऑनलाइन दर्ज हो सके।

  • नागरिकों को आवेदन करते समय अपना नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर और पता देना होगा।
  • मोबाइल पर भेजे गए ओटीपी से पंजीकरण की पुष्टि होगी।
  • पंजीकरण के बाद मोबाइल पर आवेदन संख्या प्राप्त होगी, जिससे लोग अपने आवेदन की स्थिति आसानी से ट्रैक कर सकेंगे।
  • यदि आवेदन अधूरा या गलत पाया गया, तो उसे लौटा दिया जाएगा। नागरिक उसमें सुधार कर दोबारा जमा कर सकेंगे।

गांव-गांव में पत्र वितरण की तारीख, शिविर की जगह और टीम के सदस्यों के नाम की जानकारी बिहारभूमि पोर्टल पर उपलब्ध होगी। अगर किसी नागरिक को निर्धारित दिन पर फॉर्म नहीं मिल पाए, तो वह अगले दिन उसी पंचायत में लगने वाले शिविर में इसे जमा कर सकेगा।

पारदर्शिता और समयबद्ध समाधान

इस अभियान का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब आम जनता को दफ्तरों और बिचौलियों के चक्कर नहीं काटने होंगे। हर प्रक्रिया—जमाबंदी सुधार, दाखिल-खारिज या नया पंजीकरण—शिविरों में ही समयबद्ध तरीके से पूरी हो जाएगी। इससे जहां एक ओर लोगों का समय बचेगा, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार और मनमानी पर भी अंकुश लगेगा।

जनता के लिए बड़ी राहत

राजस्व महाअभियान न केवल भूमि विवादों को सुलझाने का एक पारदर्शी माध्यम है बल्कि यह गांव-गांव तक डिजिटल सेवा पहुंचाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। अब ग्रामीण स्तर पर ही दस्तावेजों का सुधार और दाखिल-खारिज जैसे काम निपटाए जाएंगे, जिससे किसानों, भूमिधारकों और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

सरकार का मानना है कि इस पहल से बिहार में भूमि प्रबंधन प्रणाली और अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जनहितकारी बनेगी।