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भागलपुर में हथियार व स्मैक के साथ कुख्यात अपराधी गिरफ्तार, पुलिस की बड़ी कामयाबी

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Bhagalpur: भागलपुर पुलिस को अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार के निर्देश पर सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में की गई छापेमारी के दौरान एक कुख्यात अपराधी को अवैध हथियार, जिंदा कारतूस और मादक पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई से इलाके में सक्रिय अपराधियों के बीच हड़कंप मच गया है।

शनिवार को सिटी एसपी शैलेन्द्र सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को बताया कि गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि हत्या के प्रयास के मामले में फरार अभियुक्त मृत्युंजय यादव अवैध हथियार लेकर कोलगामा क्षेत्र में घूम रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक नगर, भागलपुर एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (विधि-व्यवस्था) के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी टीम का गठन किया गया।

गठित टीम ने कोलगामा बगीचा क्षेत्र में त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियुक्त मृत्युंजय यादव, पिता–आमिर यादव, साकिन–कोलगामा, थाना–सुलतानगंज, जिला–भागलपुर को धर दबोचा। तलाशी के दौरान उसके पास से 01 देशी कट्टा, 05 जिंदा कारतूस, 02 मोबाइल फोन, 14 ग्राम स्मैक तथा ₹2260 नकद बरामद किए गए। पुलिस ने सभी बरामद सामानों को विधिवत जब्त कर लिया है।

गिरफ्तार अभियुक्त का आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा बताया जा रहा है। उसके खिलाफ सुलतानगंज थाना में वर्ष 2012, 2013, 2023 और 2026 सहित कई संगीन मामले दर्ज हैं। पुलिस का मानना है कि यह गिरफ्तारी क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भागलपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध हथियार, मादक पदार्थ, शराब तस्करी और चोरी-छिनतई के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। गिरफ्तार अभियुक्त से पूछताछ की जा रही है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों की तलाश में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
भागलपुर पुलिस ने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए भरोसा दिलाया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सदैव तत्पर है।

समृद्धि यात्रा-2026: नीतीश कुमार ने पश्चिम चंपारण में 178 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन, अधिकारियों को दिए कड़े दिशा-निर्देश

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पटना/पश्चिम चंपारण। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को समृद्धि यात्रा-2026 के तहत पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में रमना मैदान में आयोजित भव्य कार्यक्रम में 153 करोड़ रुपये की 125 योजनाओं का शिलान्यास और 29 करोड़ रुपये की 36 योजनाओं का शिलापट्ट अनावरण कर उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने जिले में चल रही विकासात्मक योजनाओं की समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन एवं तेजी से परिणाम लाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सात निश्चय-3 के तहत राज्य सरकार लगातार उन कार्यक्रमों पर काम कर रही है, जिनसे आम जनता का जीवन आसान बने। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रगति यात्रा और सात निश्चय योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी गंभीरता और समयबद्ध तरीके से किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन योजनाओं को स्वीकृति मिली है, उनका शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी श्री तरणजोत सिंह ने जिले में चल रही योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि प्रत्येक सप्ताह सोमवार और शुक्रवार को सभी सरकारी कार्यालयों में आम लोगों की शिकायतों के निवारण हेतु संबंधित अधिकारी अपने कार्यस्थल/कार्यालय में उपस्थित रहें। इसके तहत नागरिकों की समस्याओं का सम्मानपूर्वक और संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाएगा। कार्यालयों में आगंतुकों के लिए पेयजल, शौचालय जैसी सुविधाएं सुनिश्चित होंगी और शिकायतों का पंजीकरण व सतत् अनुश्रवण किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने किसान मेला और कृषि यंत्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया तथा स्टॉलों और कृषि उत्पादों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह कदम जिले में रोजगार, सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से सभी योजनाओं को पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध तरीके से लागू करने का निर्देश दिया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, सांसद डॉ. संजय कुमार जायसवाल, सांसद सुनील कुमार, विधायक समृद्ध वर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी योजनाओं का लाभ आम नागरिक तक पहुंचे और बिहार को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जाए।

समृद्धि यात्रा-2026 की शुरुआत पश्चिम चंपारण से, कुमारबाग को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया उभरता औद्योगिक हब

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पटना/पश्चिम चंपारण। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को पश्चिम चंपारण जिले से समृद्धि यात्रा-2026 की औपचारिक शुरुआत की। इस क्रम में उन्होंने चनपटिया प्रखंड के कुमारबाग औद्योगिक क्षेत्र का व्यापक भ्रमण कर चल रही और प्रस्तावित औद्योगिक गतिविधियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कुमारबाग स्थित निर्माणाधीन वर्धन सीबीजी (CBG) प्लांट का निरीक्षण किया, जहां अधिकारियों ने उन्हें बताया कि प्लांट जल्द ही संचालन में आ जाएगा। मुख्यमंत्री ने कार्यों की प्रगति पर संतोष जताते हुए समयबद्ध पूर्णता के निर्देश दिए।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), कुमारबाग का निरीक्षण किया और वहां विकसित हो रही विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को देखा। उन्होंने प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर, कुमारबाग का शिलापट्ट अनावरण कर उद्घाटन किया तथा कामकाजी महिला छात्रावास के भवन का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ महिला सशक्तिकरण और सुरक्षित आवास की व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता है।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमियों के स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण, गारमेंट्स, फ्लाई ऐश ब्रिक्स, बाथिंग लग्जरी जैसे उत्पादों की गुणवत्ता, उत्पादन प्रक्रिया और बाजार संभावनाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार निवेशकों और उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए अनुकूल नीतियां चला रही है, ताकि उद्योगों की स्थापना सरल हो और रोजगार के अवसर बढ़ें।

कुमारबाग में कार्यरत विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां का औद्योगिक ढांचा सुदृढ़ हो रहा है और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है। इससे क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास तेज हुआ है और कुमारबाग एक सशक्त औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

मुख्यमंत्री ने जीविका दीदियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी निरीक्षण किया और लाभार्थियों से संवाद किया। जीविका दीदियों ने सरकार की पहलों के लिए आभार जताते हुए कहा कि इन योजनाओं से उनकी आय बढ़ी है और परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री विजय कुमार चौधरी, सांसद डॉ. संजय कुमार जायसवाल, सांसद सुनील कुमार, विधायक समृद्ध वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण लगातार मजबूत किया जाए।

भागलपुर में 18 व 21 जनवरी को होगी सब-इंस्पेक्टर प्रारंभिक परीक्षा, 21 केंद्रों पर कड़ी निगरानी में होंगे 17 हजार से अधिक अभ्यर्थी

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भागलपुर। बिहार पुलिस अवर सेवा चयन आयोग (BPSSC) द्वारा आयोजित पुलिस अवर निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) पद की प्रारंभिक लिखित परीक्षा को लेकर भागलपुर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। 18 जनवरी (रविवार) और 21 जनवरी (बुधवार) 2026 को जिले के 21 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा को शांतिपूर्ण, कदाचारमुक्त और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव की संयुक्त अध्यक्षता में समाहरणालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में परीक्षा केंद्र अधीक्षक, दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए। अधिकारियों को बताया गया कि प्रथम पाली की परीक्षा 10:00 बजे से 12:00 बजे तक और द्वितीय पाली की परीक्षा 2:30 बजे से 4:30 बजे तक होगी। 18 जनवरी को कुल 8832 और 21 जनवरी को 8827 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे।

प्रशासन ने साफ किया है कि अभ्यर्थियों का प्रवेश समय सख्ती से निर्धारित रहेगा। प्रथम पाली के लिए सुबह 8:30 से 9:30 बजे तक और द्वितीय पाली के लिए दोपहर 1:00 से 2:00 बजे तक ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति होगी। तय समय के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं मिलेगा और परीक्षा शुरू होने के बाद किसी को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। परीक्षा के अंतिम 30 मिनट में शौचालय जाने पर भी प्रतिबंध रहेगा।

कदाचार रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जिले में 22 स्टैटिक दंडाधिकारी-सह-प्रेक्षक, 12 गश्ती दल-सह-जोनल दंडाधिकारी और 6 उड़नदस्ता दल-सह-सुपर जोनल दंडाधिकारी तैनात किए गए हैं। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे और जैमर लगाए जाएंगे तथा बायोमेट्रिक प्रणाली से अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी।

परीक्षा केंद्रों पर तैनात दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, केंद्राधीक्षक और वीक्षक किसी भी प्रकार का मोबाइल फोन नहीं रख सकेंगे। केवल विशेष परिस्थिति में केंद्राधीक्षक को कीपैड मोबाइल रखने की अनुमति होगी।

जिला प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे समय से पहले केंद्र पर पहुंचें, नियमों का पालन करें और किसी भी तरह के अफवाह या अवैध गतिविधि से दूर रहें। प्रशासन का दावा है कि कड़ी निगरानी और पुख्ता व्यवस्था के बीच परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई जाएगी।

बॉडीबिल्डिंग एवं पावर लिफ्टिंग में कहलगांव के अमित ने रचा इतिहास, गोल्ड मेडल जीतकर बढ़ाया भागलपुर का मान

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Bhagalpur: भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड से निकलकर एक युवा खिलाड़ी ने अपनी मेहनत और जज्बे के दम पर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है। कहलगांव प्रखंड स्थित भोलसर पंचायत के रहने वाले 18 वर्षीय अमित कुमार ने बॉडीबिल्डिंग एवं पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। अमित की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार बल्कि पूरा इलाका गर्व से झूम उठा है।

बताया जा रहा है कि इंटर बॉडीबिल्डिंग फिटनेस एसोसिएशन के तत्वावधान में पटना के रामदेव महतो सामुदायिक भवन में आयोजित प्रतियोगिता में अमित ने 63 किलोग्राम भार वर्ग के फुल पावर लिफ्टिंग गेम में भाग लिया। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने डेड लिफ्टिंग में 190 किलोग्राम, स्क्वाट लिफ्टिंग में 120 किलोग्राम और बेंच लिफ्टिंग में 90 किलोग्राम भार उठाकर निर्णायकों को चौंका दिया और प्रथम स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।

अमित ने अपनी सफलता के पीछे कठिन संघर्ष की कहानी साझा करते हुए बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे बड़े जिम में अभ्यास नहीं कर सके। उनके पास मात्र 3500 रुपये थे, जिससे वे तीन प्रतियोगिताओं में ही भाग ले पाए। बावजूद इसके उन्होंने घर पर ही जिम तैयार कर नियमित अभ्यास किया और अपने लक्ष्य को हासिल किया। अमित ने कहा कि सच्ची लगन और मेहनत हो तो सीमित संसाधन भी बाधा नहीं बनते।

अपनी सफलता का श्रेय अमित ने अपने पिता सकलदेव सिंह, माता सुनीता देवी, कमांडो जिम के सभी साथियों और अपने प्रशिक्षक रोहित कुमार को दिया। उन्होंने कहा कि इन सभी के सहयोग और मार्गदर्शन के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। अमित की इस जीत से क्षेत्र के युवाओं में खेल के प्रति नया उत्साह देखने को मिल रहा है और वे अब अमित को अपना प्रेरणास्रोत मान रहे हैं।

भागलपुर में डॉ. बी.पी.एस. ग्रुप ऑफ कॉलेज, आगरा का भव्य शैक्षणिक सेमिनार, पारदर्शी नामांकन प्रणाली बनी आकर्षण का केंद्र

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भागलपुर। शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डॉ. बी.पी.एस. ग्रुप ऑफ कॉलेज, आगरा द्वारा भागलपुर के होटल गीतांजलि बैंक्वेट हॉल में एक भव्य एसोसिएट मीटिंग एवं शैक्षणिक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से आए शिक्षा सलाहकारों, शिक्षाविदों और एसोसिएट्स ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य छात्रों और शिक्षा से जुड़े सहयोगियों को कॉलेज की निष्पक्ष, भरोसेमंद और पारदर्शी नामांकन प्रणाली की विस्तृत जानकारी देना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कॉलेज के नेशनल हेड मदन रस्तोगी एवं बिहार हेड रवि कुमार रहे, जबकि संचालन की जिम्मेदारी रिजनल हेड एस. के. गुप्ता ने संभाली। सेमिनार को संबोधित करते हुए नेशनल हेड मदन रस्तोगी ने कहा कि डॉ. बी.पी.एस. ग्रुप ऑफ कॉलेज शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और ईमानदारी के लिए जाना जाता है। उन्होंने बताया कि कॉलेज में बीएड, डीएलएड, डी फार्मेसी, बीएससी एग्रीकल्चर, बीबीए, बीसीए और एलएलबी जैसे कई प्रोफेशनल कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी कोर्सों में नामांकन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है, जिससे छात्रों को किसी भी प्रकार की असमंजस या भ्रामक जानकारी का सामना नहीं करना पड़ता।

बिहार हेड रवि कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि बीएड और डीएलएड जैसे कोर्स कॉलेज में किफायती शुल्क पर कराए जाते हैं और पूरी प्रक्रिया छात्रों के सामने स्पष्ट रूप से रखी जाती है। उन्होंने बताया कि नामांकन से पहले छात्रों को काउंसलिंग के माध्यम से कोर्स की उपयोगिता, फीस स्ट्रक्चर, आवश्यक दस्तावेज, समय-सीमा और भविष्य की संभावनाओं की पूरी जानकारी दी जाती है। कॉलेज की कार्यशैली “नो हिडन चार्ज, नो फॉल्स कमिटमेंट” की नीति पर आधारित है, जिससे अभिभावकों और छात्रों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

सेमिनार में रिजनल हेड मणि कांत सहित कई अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शी फीस भुगतान प्रणाली और आने वाले समय में कॉलेज की शैक्षणिक योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अंत में उपस्थित एसोसिएट्स और शिक्षाविदों ने डॉ. बी.पी.एस. ग्रुप ऑफ कॉलेज की स्पष्ट नीति, छात्र-हितैषी दृष्टिकोण और भरोसेमंद सिस्टम की जमकर सराहना की तथा भविष्य में सहयोग को और मजबूत करने का भरोसा जताया।

भागलपुर में 19 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध मौत, इलाज के दौरान तोड़ा दम; ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना का गंभीर आरोप

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भागलपुर: भागलपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 19 वर्षीय विवाहिता राधिका कुमारी की इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतिका के परिजनों ने पति और ससुराल पक्ष पर लगातार मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।

मृतिका की पहचान राधिका कुमारी के रूप में हुई है, जिसकी शादी वर्ष 2025 में राजा तांती से हुई थी। परिजनों का आरोप है कि शादी के कुछ ही समय बाद से राधिका को पति और ससुराल वालों द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। मृतिका के पिता ने बताया कि उन्होंने बेटी को एक मोबाइल फोन दिया था, ताकि वह मायके से संपर्क में रह सके, लेकिन ससुराल वालों ने मोबाइल छीन लिया और उस पर गलत जगह बात करने का आरोप लगाते हुए प्रताड़ना शुरू कर दी।

पिता का कहना है कि राधिका ने कई बार फोन कर अपनी पीड़ा साझा की थी। इस मामले में गांव के लोगों ने भी ससुराल पक्ष को समझाने का प्रयास किया, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। परेशान होकर मृतिका के पिता बेटी को विदा कराने ससुराल पहुंचे, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटा दिया गया।

बाद में ससुराल पक्ष ने फोन कर राधिका को ले जाने के लिए बुलाया। जब पिता अपनी बेटी को लेकर मायके लौट रहे थे, तभी रास्ते में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। राधिका को तत्काल अमरपुर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए मायागंज अस्पताल, भागलपुर रेफर किया गया। तमाम कोशिशों के बावजूद 15 जनवरी की शाम करीब 4 बजे इलाज के दौरान राधिका की मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि मृतिका का ससुराल दीग्घी बाथ थाना क्षेत्र, भागलपुर में है, जबकि उसका मायका कुसुमखर थाना क्षेत्र, अमरपुर प्रखंड, बांका जिला में स्थित है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि परिजनों के आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है।

समृद्धि यात्रा के पहले दिन बड़ा फैसला: सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर लगेगी रोक, नीतीश कुमार का स्वास्थ्य सेवाओं पर सख्त संदेश

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Bihar News: बिहार में आज से शुरू हुई समृद्धि यात्रा के पहले दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए नई और सख्त नीति लाने जा रही है। इस फैसले को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और आम जनता को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति और मरीजों को समय पर इलाज मिलना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। लंबे समय से यह शिकायत मिलती रही है कि कई सरकारी डॉक्टर ड्यूटी के समय निजी क्लीनिकों में व्यस्त रहते हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों में इलाज प्रभावित होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार अब ऐसी व्यवस्था लाएगी, जिससे सरकारी डॉक्टर पूरी तरह अपने दायित्वों के प्रति जवाबदेह हों।

समृद्धि यात्रा के मंच से मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में नई गाइडलाइन और स्पष्ट नियमावली जारी करेगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि निजी प्रैक्टिस पूरी तरह प्रतिबंधित होगी या सीमित शर्तों के साथ अनुमति दी जाएगी। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान होगा।

इस घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुविधाओं, संसाधनों और कार्यपरिस्थितियों में सुधार के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि उन्हें निजी प्रैक्टिस की आवश्यकता ही न पड़े। सरकारी अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर, दवाइयों की उपलब्धता और आधुनिक उपकरणों को मजबूत किया जा रहा है।

समृद्धि यात्रा के दौरान पश्चिम चंपारण में करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया गया। कृषि, उद्योग, सड़क, पेयजल और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार का यह ऐलान यात्रा का सबसे बड़ा संदेश बनकर उभरा।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस घोषणा को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। जानकारों का मानना है कि यदि यह नीति सख्ती से लागू होती है तो बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

समृद्धि यात्रा के पहले दिन ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह फैसला साफ संकेत देता है कि सरकार सुशासन, जवाबदेही और जनहित के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करने वाली।

समृद्धि यात्रा से संवरेगा पश्चिम चंपारण, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देंगे करोड़ों की विकास योजनाओं की ऐतिहासिक सौगात

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Patna: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी समृद्धि यात्रा के अंतर्गत पश्चिम चंपारण जिले को विकास की बड़ी सौगात मिलने जा रही है। आज से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिले के दौरे पर रहेंगे और इस दौरान वे ₹153 करोड़ की लागत से 125 विकास योजनाओं का शिलान्यास तथा ₹29 करोड़ की लागत से 36 योजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इससे जिले में आधारभूत संरचना, कृषि, उद्योग और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री अपने दौरे के क्रम में जिले में संचालित विकासात्मक एवं कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा भी करेंगे। अधिकारियों को योजनाओं के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचे।

वहीं कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित किसान मेला-सह-कृषि यांत्रिकीकरण प्रदर्शनी का मुख्यमंत्री उद्घाटन करेंगे। इस प्रदर्शनी में आधुनिक कृषि यंत्र, नई तकनीकें और सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों को दी जाएगी, जिससे खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सके।

इसके अलावा मुख्यमंत्री कुमारबाग स्थित औद्योगिक क्षेत्र का भ्रमण एवं निरीक्षण करेंगे। यहां औद्योगिक विकास, निवेश की संभावनाओं और रोजगार सृजन पर विशेष चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान जनसंवाद का आयोजन भी होगा, जिसमें मुख्यमंत्री आम लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनेंगे।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। साथ ही सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य तथा जिले के अन्य सम्मानित जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

अनुशासनात्मक कार्रवाई में पारदर्शिता पर सरकार का जोर

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पटना: बिहार सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, विधिसम्मत और न्यायोचित बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। इसी क्रम में आज पुराना सचिवालय, पटना के सभागार में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर एक उच्चस्तरीय संक्षिप्त प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की, जबकि सह-अध्यक्षता महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने निभाई।

इस प्रशिक्षण सत्र में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, राजस्व परिषद की अध्यक्ष सह सदस्य हरजोत कौर बम्हरा, अपर मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन विभाग) डॉ. बी. राजेंदर, अपर मुख्य सचिव (गृह विभाग) अरविंद कुमार चौधरी सहित राज्य सरकार के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में प्रशासनिक अनुशासन से जुड़े मामलों में अक्सर होने वाली प्रक्रियागत त्रुटियों और उनके समाधान पर गंभीर मंथन किया गया।

सत्र को संबोधित करते हुए महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी सभी परिपत्रों को संकलित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित एक मास्टर सर्कुलर जारी किया गया है। इसके साथ ही संविधान के अनुच्छेद 311, उच्च न्यायालयों एवं सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों को सम्मिलित करते हुए एक विस्तृत पुस्तक का संकलन भी किया गया है, ताकि अधिकारियों को जांच और दंड प्रक्रिया की सम्यक समझ हो सके।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किसी भी अनुशासनात्मक जांच की शुरुआत में सही शब्दावली और विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। अधिकारियों को आगाह किया गया कि बिना आरोप-पत्र गठित किए सीधे लघु दंड देना, प्रतिरक्षा कथन पर अनुशासनिक प्राधिकारी की राय लेना या दंड, निलंबन अवधि और भत्तों से जुड़े आदेश एक ही संकल्प में जारी करना गंभीर प्रक्रियागत त्रुटियां हैं।

यह भी स्पष्ट किया गया कि स्तर-9 एवं उससे ऊपर के पदाधिकारियों के मामलों में दंडादेश जारी करने से पूर्व बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से परामर्श लेना अनिवार्य है। साथ ही, प्रस्तुतिकरण पदाधिकारी की नियुक्ति में होने वाली आम गलतियों पर भी अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया गया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य यह रहा कि राज्य में अनुशासनात्मक कार्रवाई न केवल प्रभावी हो, बल्कि न्याय और पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों के अनुरूप भी हो। सरकार का मानना है कि ऐसी प्रशिक्षण बैठकों से भविष्य में प्रशासनिक त्रुटियों में कमी आएगी और सुशासन को और मजबूती मिलेगी।