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भागलपुर: निजी स्कूलों की ‘लूट’ पर प्रशासन का डंडा, DM ने दो टूक कहा- “शिक्षा के मंदिर को व्यापार न बनाएं”

निजी स्कूलों की 'फीस वसूली' पर ब्रेक: डीएम की दो टूक- नियम तोड़े तो रद्द होगी स्कूल की मान्यता

Bhagalpur News: शहर के निजी स्कूलों द्वारा री-एडमिशन (पुनः नामांकन) और महंगी किताबों के नाम पर अभिभावकों की जेब ढीली करने के खेल पर अब जिला प्रशासन ने पूर्ण विराम लगाने की तैयारी कर ली है। लगातार मिल रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। टाउन हॉल में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जिले के तमाम बड़े निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को तलब किया गया और उन्हें कड़े लहजे में चेतावनी दी गई।

​ शिक्षा का मंदिर है, भेदभाव का केंद्र नहीं: DM

​बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने भावुक और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल ज्ञान के केंद्र होते हैं, यहाँ अमीर और गरीब के आधार पर बच्चों या अभिभावकों के साथ भेदभाव कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​”शिक्षा को व्यापार न समझें। अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह अनैतिक भी है। प्रशासन अब हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा।” — डॉ. नवल किशोर चौधरी, जिलाधिकारी

 

​ इन 3 मुद्दों पर प्रशासन का कड़ा रुख

​बैठक में मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर चर्चा हुई, जिसने स्कूल संचालकों के पसीने छुड़ा दिए:

  1. ​री-एडमिशन फीस पर रोक: हर साल अगली कक्षा में जाने के नाम पर ली जाने वाली मोटी ‘री-एडमिशन फीस’ पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
  2. ​महंगी किताबों का सिंडिकेट: स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से ही महंगी किताबें खरीदने के दबाव को गलत बताया गया। अभिभावकों को छूट होनी चाहिए कि वे कहीं से भी किताबें और यूनिफॉर्म खरीद सकें।
  3. ​सरकारी गाइडलाइन का पालन: डीएम ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा निजी स्कूलों के लिए जो नियमावली बनाई गई है, उसका अक्षरशः पालन करना अनिवार्य होगा।

​ अधिकारियों की मौजूदगी में बनी रणनीति

​इस महत्वपूर्ण बैठक में जिलाधिकारी के साथ उप विकास आयुक्त (DDC) और जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) भी मौजूद रहे। जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे एक निगरानी टीम बनाएं जो नियमित रूप से स्कूलों की फीस संरचना और किताब बिक्री की प्रक्रिया की जांच करे।

​ नियम तोड़ा तो होगी कड़ी कार्रवाई

​जिलाधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई विद्यालय नियमों का उल्लंघन करता पाया गया या किसी अभिभावक ने साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई, तो उस स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की अनुशंसा की जा सकती है।

​अभिभावकों में जगी उम्मीद:

प्रशासन के इस एक्शन मोड से शहर के हजारों अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। नए सत्र की शुरुआत से पहले प्रशासन की यह सख्ती मिडिल क्लास परिवारों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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