स्क्रीन प्रिंटिंग से लेकर मंजूषा चित्रकला और सिक्की कला तक मिलेगा प्रशिक्षण; युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा को मंच देने के साथ स्थानीय कला परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने पर जोर
Bhagalpur News: युवाओं को कला, संस्कृति, लोक परंपरा और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ने की दिशा में भागलपुर में एक नई पहल शुरू की गई है। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार और जिला प्रशासन, भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को भागलपुर संग्रहालय में ‘युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला श्रृंखला’ का विधिवत शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह सहायक संग्रहालय अध्यक्ष अंकित रंजन ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर विभिन्न कला विधाओं के प्रशिक्षक और प्रतिभागी मौजूद रहे।
कला को युवाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अंकित रंजन ने कहा कि कला केवल कोई कौशल सीखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह अपनी कल्पना, संवेदना और विचारों को व्यक्त करने की सशक्त भाषा भी है।
उन्होंने कहा कि युवाओं के भीतर अपार रचनात्मक ऊर्जा मौजूद है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें उचित मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और अपनी प्रतिभा को सामने लाने के लिए उपयुक्त मंच मिले।
उन्होंने प्रशिक्षुओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि कला सीखने के दौरान नए प्रयोग करने से डरना नहीं चाहिए। निरंतर अभ्यास, जिज्ञासा और रचनात्मक सोच ही किसी कलाकार को अपनी अलग पहचान बनाने में मदद करती है।
संग्रहालय को रचनात्मक गतिविधियों का मंच बनाने की पहल
अंकित रंजन ने कहा कि भागलपुर संग्रहालय को केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के केंद्र के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे युवाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए भी सक्रिय मंच के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस कार्यशाला श्रृंखला के माध्यम से युवाओं को विभिन्न कला एवं शिल्प विधाओं की जानकारी देने के साथ उन्हें अपनी रचनात्मक क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा।
25 से 29 सितंबर तक स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला
‘युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला श्रृंखला’ के प्रथम चरण में 25 से 29 सितंबर तक स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
इसमें प्रतिभागियों को स्क्रीन प्रिंटिंग की तकनीक, डिजाइन तैयार करने, रंग संयोजन और प्रिंट तैयार करने की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षक उदय कुमार प्रतिभागियों को स्क्रीन प्रिंटिंग की बारीकियों से अवगत करा रहे हैं।
मंजूषा और सिक्की कला का भी मिलेगा प्रशिक्षण
कार्यशाला श्रृंखला में स्थानीय एवं पारंपरिक कला विधाओं को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत 6 से 10 अक्टूबर तक मंजूषा चित्रकला प्रशिक्षण और 12 से 16 अक्टूबर तक सिक्की कला प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
मंजूषा चित्रकला और सिक्की कला जैसी पारंपरिक विधाओं के प्रशिक्षण के जरिए नई पीढ़ी को स्थानीय कला विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही इन पारंपरिक विधाओं में आधुनिक और रचनात्मक प्रयोग को भी प्रोत्साहित करने का उद्देश्य रखा गया है।
विभिन्न कला विधाओं के प्रशिक्षक मौजूद
कार्यक्रम में आकाश मिश्रा, प्रशिक्षक—शास्त्रीय संगीत; ऋषि मिश्रा, प्रशिक्षक—वादन; राजकुमारी चंद्रकांता यादव, प्रशिक्षक—कथक तथा उदय कुमार, प्रशिक्षक—स्क्रीन प्रिंटिंग मौजूद रहे।
प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को कला के क्षेत्र में नियमित अभ्यास, अनुशासन और सीखने की निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
युवाओं की प्रतिभा को मिलेगा उचित मंच
जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय की ओर से बताया गया कि ‘युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला श्रृंखला’ का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को कला, संस्कृति, लोक परंपरा और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ना है।
इसके साथ ही युवाओं की प्रतिभा को उचित मंच प्रदान करना और पारंपरिक कला विधाओं के संरक्षण के साथ उनके समकालीन प्रयोग को बढ़ावा देना भी इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक कार्यशाला की गतिविधियों में हिस्सा लिया। जिला प्रशासन की इस पहल से युवाओं को विभिन्न कला विधाओं को सीखने और अपनी रचनात्मक प्रतिभा को विकसित करने का अवसर मिलने की उम्मीद है।


